प्रयागराज-कौशांबी बार्डर पर पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट में 14 लोगों की मौत मामले में कार्रवाई में जुटे कौशांबी के सीओ सत्येंद्र तिवारी की गिरफ्तारी का आदेश कोर्ट ने जारी किया है। सिराथू सर्किल के सीओ सत्येंद्र तिवारी विस्फोट में मरने वालों के परिजनों से गले लगकर रोते नजर आए थे। उनका वीडियो भी खूब वायरल हुआ था। अब उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का आदेश भी सोशल मीडिया पर खूब चल रहा है। असल में एससी/एसटी एक्ट से जुड़े वर्ष 2018 के एक मुकदमे में गवाही के लिए बार-बार बुलाए जाने के बावजूद न्यायालय में उपस्थित नहीं होने पर तत्कालीन विवेचक व वर्तमान (सीओ कौशांबी) सत्येंद्र तिवारी के खिलाफ विशेष न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है।
विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) वाराणसी सुधाकर राय की अदालत ने तत्कालीन विवेचक सत्येंद्र प्रसाद तिवारी वर्तमान में सीओ कौशांबी को गिरफ्तार कर 10 सितंबर 2026 को न्यायालय के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है। विवेचक सत्येंद्र तिवारी की गवाही होनी है मामला सत्र परीक्षण संख्या-401/2018, राज्य बनाम तौफीक आलम अंसारी से संबंधित है। न्यायालय के आदेश के अनुसार मामले की पत्रावली में विवेचक सत्येंद्र प्रसाद तिवारी और चिकित्सक साक्षी की गवाही होनी थी।
विवेचक को पूर्व में 13 अगस्त 2026 को जरिये वीसी तलब किया गया था, लेकिन वह तिरंगा यात्रा के कारण उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद उन्हें 24 अगस्त 2026 को वीसी के माध्यम से साक्ष्य के लिए बुलाया गया, लेकिन उस दिन भी वह उपस्थित नहीं हुए। अदालत ने आदेश में कहा कि इसके बाद साक्ष्य के लिए एक सितंबर 2026 की तिथि निर्धारित की गई थी, लेकिन विवेचक इसके बावजूद न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। न्यायालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि साक्षी जानबूझकर साक्ष्य देने के लिए उपस्थित नहीं हो रहा है। कोर्ट का आदेश- 10 सितंबर तक विवेचक को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए कोर्ट ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि विवेचक सत्येंद्र प्रसाद तिवारी को गिरफ्तार कर 10 सितंबर 2026 को न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए। साथ ही उनके वेतन पर भी रोक लगाने का आदेश दिया गया है। आदेश की प्रति अनुपालन के लिए पुलिस अधिकारियों एवं संबंधित इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजने के निर्देश दिए गए हैं। न्यायालय ने चीफ ट्रेजरी ऑफिसर को भी निर्देशित किया है कि अग्रिम आदेश तक विवेचक सत्येंद्र प्रसाद तिवारी के वेतन का आहरण रोक दिया जाए। आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट भी न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा गया है। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अभिषेक कुमार दुबे रहे। मामले में गवाह की लगातार गैरहाजिरी के कारण न्यायालय ने सख्ती बरतते हुए यह आदेश पारित किया है।
अदालत के इस आदेश के बाद अब विवेचक को आगामी 10 सितंबर को साक्ष्य के लिए न्यायालय के समक्ष पेश किया जाना है।
विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) वाराणसी सुधाकर राय की अदालत ने तत्कालीन विवेचक सत्येंद्र प्रसाद तिवारी वर्तमान में सीओ कौशांबी को गिरफ्तार कर 10 सितंबर 2026 को न्यायालय के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है। विवेचक सत्येंद्र तिवारी की गवाही होनी है मामला सत्र परीक्षण संख्या-401/2018, राज्य बनाम तौफीक आलम अंसारी से संबंधित है। न्यायालय के आदेश के अनुसार मामले की पत्रावली में विवेचक सत्येंद्र प्रसाद तिवारी और चिकित्सक साक्षी की गवाही होनी थी।
विवेचक को पूर्व में 13 अगस्त 2026 को जरिये वीसी तलब किया गया था, लेकिन वह तिरंगा यात्रा के कारण उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद उन्हें 24 अगस्त 2026 को वीसी के माध्यम से साक्ष्य के लिए बुलाया गया, लेकिन उस दिन भी वह उपस्थित नहीं हुए। अदालत ने आदेश में कहा कि इसके बाद साक्ष्य के लिए एक सितंबर 2026 की तिथि निर्धारित की गई थी, लेकिन विवेचक इसके बावजूद न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। न्यायालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि साक्षी जानबूझकर साक्ष्य देने के लिए उपस्थित नहीं हो रहा है। कोर्ट का आदेश- 10 सितंबर तक विवेचक को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए कोर्ट ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि विवेचक सत्येंद्र प्रसाद तिवारी को गिरफ्तार कर 10 सितंबर 2026 को न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए। साथ ही उनके वेतन पर भी रोक लगाने का आदेश दिया गया है। आदेश की प्रति अनुपालन के लिए पुलिस अधिकारियों एवं संबंधित इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजने के निर्देश दिए गए हैं। न्यायालय ने चीफ ट्रेजरी ऑफिसर को भी निर्देशित किया है कि अग्रिम आदेश तक विवेचक सत्येंद्र प्रसाद तिवारी के वेतन का आहरण रोक दिया जाए। आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट भी न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा गया है। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अभिषेक कुमार दुबे रहे। मामले में गवाह की लगातार गैरहाजिरी के कारण न्यायालय ने सख्ती बरतते हुए यह आदेश पारित किया है।
अदालत के इस आदेश के बाद अब विवेचक को आगामी 10 सितंबर को साक्ष्य के लिए न्यायालय के समक्ष पेश किया जाना है।