2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का ‘घुसपैठिया’ वाला बयान उत्तराखंड में कांग्रेस का सिरदर्द बन गया है। भाजपा को बैठे-बिठाए एक मुद्दा मिल गया है। सपा पहले भी उत्तराखंड राज्य आंदोलन और रामपुर तिराहा गोलीकांड को लेकर निशाने पर रही है। 1993 से 1995 तक उत्तर प्रदेश की सत्ता में रहे सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में अलग राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर पुलिस ने गोलीबारी की थी। अब उत्तर प्रदेश में सपा-कांग्रेस गठबंधन के चलते इस बयान की आंच उत्तराखंड कांग्रेस तक पहुंच रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे देवभूमि के स्वाभिमान और राज्य आंदोलन के संघर्ष से जोड़ते हुए अखिलेश से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है। वहीं, भारतीय जनता युवा मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नेहा जोशी ने अखिलेश की पत्नी और सांसद डिंपल यादव का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब उनकी पत्नी खुद उत्तराखंड मूल की हैं, तो वे यहां के लोगों को घुसपैठिया कैसे कह सकते हैं? नेहा ने अखिलेश से उत्तराखंडियों और अपनी पत्नी से माफी मांगने को कहा है। कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। अखिलेश यादव 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन जारी रखने की बात कह चुके हैं। ऐसे में सहयोगी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बयान ने उत्तराखंड कांग्रेस के सामने असहज स्थिति पैदा कर दी है। योगी पर निशाना साधते हुए दिया था बयान अखिलेश यादव ने 23 अक्टूबर को लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि उत्तर प्रदेश में सबसे बड़े घुसपैठिये उत्तराखंड के हैं। यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश में घुसपैठ के मुद्दे पर भाजपा को निशाना बनाते हुए की गई थी। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचुर गांव में जन्मे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संदर्भ में इस बयान को देखा गया। इसके बाद भाजपा ने इसे उत्तराखंड के लोगों का अपमान बताया। समाजवादी पार्टी की ओर से सफाई दी गई कि अखिलेश की टिप्पणी पूरे उत्तराखंड के लोगों के लिए नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के संदर्भ में थी। रामपुर तिराहा गोलीकांड की याद दिलाकर घेरा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अखिलेश यादव के बयान को उत्तराखंड के स्वाभिमान और राज्य आंदोलन के इतिहास से जोड़ा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि भी है और वीरभूमि भी। इस धरती ने देश को संत, सैनिक और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित अनेक व्यक्तित्व दिए हैं। ऐसे में यहां के लोगों को घुसपैठिया कहना उनके संघर्ष और बलिदान का अपमान है। धामी ने अखिलेश के पिता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में हुए रामपुर तिराहा गोलीकांड का भी जिक्र किया। 1994 में अलग उत्तराखंड राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में पुलिस ने गोलीबारी की थी। मुख्यमंत्री ने अखिलेश से उत्तराखंड की जनता से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की। इस तरह भाजपा ने मौजूदा बयान को राज्य आंदोलन की ऐतिहासिक स्मृतियों से जोड़कर राजनीतिक बहस का केंद्र बना दिया है। कांग्रेस से धामी के सवाल धामी ने कांग्रेस से पूछा कि क्या वह अपने राजनीतिक सहयोगी अखिलेश यादव के बयान का समर्थन करती है? क्या उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहना कांग्रेस को स्वीकार है? उन्होंने कांग्रेस से देवभूमि की जनता के सामने अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। भाजपा के लिए यह सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि उत्तराखंड में कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है, जबकि उत्तर प्रदेश में वह सपा के साथ गठबंधन में है। भाजपा इसी राजनीतिक रिश्ते के आधार पर कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के सामने दो राज्यों की चुनौती उत्तराखंड में कांग्रेस को भाजपा के खिलाफ अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाए रखनी है। वहीं, उत्तर प्रदेश में सपा के साथ गठबंधन जारी रखने की उसकी रणनीति है। अखिलेश के बयान पर प्रतिक्रिया देते समय कांग्रेस को इन दोनों राजनीतिक परिस्थितियों के बीच संतुलन साधना होगा। अगर कांग्रेस उत्तराखंड के लोगों के सम्मान के पक्ष में स्पष्ट रुख अपनाती है, तो वह राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। दूसरी ओर, प्रतिक्रिया में अस्पष्टता रहने पर भाजपा उसे घेरने का मौका तलाश सकती है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह विवाद 2027 के विधानसभा चुनाव में निर्णायक मुद्दा बनेगा। इसका असर भाजपा की रणनीति, सपा की सफाई और कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। अखिलेश के बयान पर क्या बोले नेता और एक्सपर्ट… ———————
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