श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। कान्हा के 5253वें जन्मोत्सव को खास बनाने के लिए मथुरा-वृंदावन के बाजार सजकर तैयार हैं। जन्माष्टमी से पहले लड्डू गोपाल की पोशाक, मुकुट और अन्य श्रृंगार सामग्री की खरीदारी के लिए बाजारों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। ब्रज में तैयार होने वाले कान्हा के श्रृंगार की मांग सिर्फ देश तक सीमित नहीं है। अमेरिका, फ्रांस, इंग्लैंड, जापान, जर्मनी, रूस, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में भी यहां तैयार होने वाली पोशाक और श्रृंगार सामग्री भेजी जाती है। इस बार जन्माष्टमी के आसपास इससे करीब 1,500 करोड़ रुपए के कारोबार का अनुमान है। कान्हा के श्रृंगार को तैयार करने में ब्रज के करीब 3 हजार हिंदू-मुस्लिम कारीगर दिन-रात जुटे हैं। कारीगर लड्डू गोपाल की अलग-अलग डिजाइन और आकार की पोशाक, मुकुट और अन्य श्रृंगार सामग्री तैयार कर रहे हैं। इनकी कीमत 10 रुपए से लेकर 20 हजार रुपए तक है। 3 तस्वीरें देखिए- छोटी जरी की पोशाक बनाने में 8 घंटे तक लग रहे पोशाक व्यापारी शुभम गुप्ता ने बताया कि मथुरा-वृंदावन की गलियों में पोशाक, मुकुट और ठाकुरजी के श्रृंगार का कारोबार लंबे समय से चल रहा है। यहां छोटे-बड़े करीब 300 कारखाने हैं। इनमें 3 हजार से ज्यादा कारीगर दिन-रात पोशाक और श्रृंगार का सामान तैयार कर रहे हैं। कारीगरों के मुताबिक, छोटी जरी की पोशाक तैयार करने में भी करीब 8 घंटे लग जाते हैं। इसमें ज्यादातर बारीक काम हाथ से किया जाता है। जन्माष्टमी नजदीक आते ही पोशाक और श्रृंगार के सामान की मांग बढ़ जाती है। कारोबारियों को करीब दो महीने पहले से ही ऑर्डर मिलने शुरू हो जाते हैं। पोशाक के साथ ठाकुरजी के मुकुट, गले के हार, पायजेब, बगलबंदी, चूड़ियां और कानों के कुंडल भी तैयार किए जा रहे हैं। अलग-अलग साइज और डिजाइन में उपलब्ध इन सामानों की भक्त जमकर खरीदारी कर रहे हैं। इंग्लैंड, जापान और जर्मनी से भी पोशाक के ऑर्डर आए ब्रज की खासियत यह भी है कि ठाकुरजी की पोशाक तैयार करने में हिंदू और मुस्लिम कारीगर साथ मिलकर काम करते हैं। दोनों समुदायों के कारीगर महीन कढ़ाई और जरी का काम करते हैं। जन्माष्टमी से पहले यह काम आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करता है। कारीगर कान्हा के लिए अलग-अलग डिजाइन और रंगों में आकर्षक पोशाक तैयार कर रहे हैं। इस बार अमेरिका, फ्रांस, इंग्लैंड, जापान, जर्मनी, रूस, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों से पोशाक के ऑर्डर मिले हैं। ‘राधा’ नाम वाली पोशाक सबसे ज्यादा पसंद बाजार में लड्डू गोपाल के लिए कई डिजाइन और रंगों की पोशाक हैं। इस बार ‘राधा’ नाम लिखी पोशाक की सबसे ज्यादा डिमांड है। अलग-अलग साइज में इन पोशाकों पर राधा नाम के साथ राधा-कृष्ण के छोटे-छोटे चित्र भी लगाए गए हैं। इसके अलावा श्रीनाथजी की छवि वाली पोशाक भी भक्तों को पसंद आ रही है। जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल को आमतौर पर पीले रंग की पोशाक पहनाने की परंपरा है, जबकि राधारानी के लिए मोरपंखी रंग की पोशाक पसंद की जा रही है। 10 रुपए से शुरू, 20 हजार तक कीमत पहुंची पोशाक व्यापारी शुभम गुप्ता ने बताया- इस बार पोशाक की मांग पिछले वर्षों की तुलना में अच्छी है। बाजार में 10 रुपए से लेकर 20 हजार रुपए तक की पोशाक हैं। पोशाक का साइज, डिजाइन और उस पर किए गए काम के हिसाब से कीमत तय होती है। मशीन से तैयार पोशाक कुछ सस्ती हैं, जबकि हाथ से जरी और कढ़ाई वाली पोशाक की कीमत ज्यादा है। भक्त अपनी पसंद और बजट के हिसाब से लड्डू गोपाल के लिए पोशाक खरीद रहे हैं। पालने में झूलेंगे लाला, 100 से 5 हजार तक कीमत जन्माष्टमी पर कान्हा के जन्म के बाद उन्हें पालने में झुलाने की परंपरा है। यही वजह है कि बाजार में इस बार अलग-अलग डिजाइन के पालने भी खूब बिक रहे हैं। खस, कपड़े और फूलों से तैयार पालनों के साथ गोल और चौकोर डिजाइन के पालने भी हैं। इनकी कीमत 100 रुपए से लेकर 5 हजार रुपए तक है। इसके अलावा लकड़ी के खिलौने और भगवान को माखन-मिश्री का भोग लगाने के लिए खास तरह की हांडियां भी बाजार में हैं। इससे जन्माष्टमी से पहले मथुरा के बाजारों में कान्हा के श्रृंगार और जन्मोत्सव की तैयारियों को लेकर रौनक बढ़ गई है। ————————— ये खबर भी पढ़िए- लखनऊ में तेज बारिश, सड़कें डूबीं: चित्रकूट में मंदाकिनी फिर उफनाई, SP अनाउंस कर रहे- घर-दुकान बंद करके जाइए यूपी में मानसूनी बारिश का सिलसिला जारी है। मंगलवार सुबह से लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर समेत 35 जिलों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है। लखनऊ में दोपहर 2 बजे अचानक अंधेरा छा गया। फिर तेज बारिश शुरू हो गई। कई जगह सड़कों पर पानी भर गया। पढ़ें पूरी खबर…