अयोध्या श्रीराम मंदिर में चढ़ावे में हुई हेर-फेर की जांच अब आखिरी मोड़ पर पहुंच गई है। विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी शुरुआती जांच पूरी कर ली है। SIT चीफ विजय विश्वास पंत की अगुआई में रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है। चूंकि यह मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है, इसलिए इस रिपोर्ट को पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) भेजा जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी खुद इस मामले पर नजर रख रहे हैं। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद ही कोई कानूनी कार्रवाई शुरू होगी। इस बीच, अयोध्या के DM शशांक त्रिपाठी ने मंदिर प्रबंधन के कामकाज देखना शुरू कर दिया है। वह ट्रस्ट में पदेन सदस्य भी हैं। मंदिर के अंदर हुए 3 बड़े बदलाव जांच शुरू होने के बाद मंदिर के अंदर की व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया गया है। मंदिर में काम करने वाले 1600 कर्मचारियों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। चंपत राय मंदिर से बाहर नहीं आए, डॉ. अनिल घर से आ-जा रहे चंपत राय पहले कारसेवकपुरम में रहते थे। लेकिन, चढ़ावे में हेर-फेर सामने आने के बाद से वह राम मंदिर परिसर में ही रहने लगे हैं। वह मंदिर परिसर के बाहर नहीं जाते। दूसरी तरफ, डॉ. अनिल मिश्रा रोज राम मंदिर परिसर पहुंच रहे हैं। उसके बाद वह मंदिर से 4 किमी दूर लक्ष्मणपुरी कॉलोनी में अपने घर चले जाते हैं। गोपाल राव मंदिर से बिल्कुल सटे तीर्थ क्षेत्रपुरम में रहते हैं। वह हर रोज मंदिर आते हैं। बाकी जिन कर्मचारियों के घर से रुपए बरामद हुए, उन्हें मंदिर परिसर के अंदर बेसमेंट में रखा गया है। अधिकारी और पुलिस यहीं पर उनसे पूछताछ करते हैं। उन्हें मंदिर परिसर के बाहर नहीं जाने दिया जा रहा। 3 हिस्सों में तैयार हुई है SIT रिपोर्ट SIT ने इस पूरे मामले की जांच को 3 भागों में बांटा है, जिससे मौजूदा लापरवाही सामने लाई जा सके। साथ ही यह भी तय हो जाए कि भविष्य में चढ़ावा और मंदिर संपत्ति में हेर-फेर न हो सके। पहला : आपराधिक जांच – SIT ने जांच में देखा कि किस कर्मचारी या ट्रस्टी की लापरवाही से चढ़ावे का पैसा, जेवरात या मंदिर की संपत्ति गायब हुई। दूसरा : फाइनेंशियल ऑडिट – मंदिर में अब तक आए कुल दान, बैंक खातों के लेन-देन, टेंडर प्रक्रिया और जमीनों की खरीद-फरोख्त की जांच शामिल है। तीसरा : सुझाव – SIT ट्रस्ट में बदलाव या सुधार के लिए नए नियम-कानून, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारी तय करने के सुझाव देगी। संघ और सरकार के बीच सहमति, ट्रस्टी हटना तय ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को SIT रिपोर्ट में क्लीन चिट मिलना मुश्किल है। भले ही इन पर सीधे तौर पर चोरी के आरोप न लगे हों, लेकिन लापरवाही और अनदेखी करने का दोषी माना जाना तय है। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और सरकार के बीच यह सहमति बन चुकी है कि आने वाले दिनों में इन तीनों को धीरे-धीरे ट्रस्ट की जिम्मेदारियों से हटा दिया जाएगा। ये संकेत ट्रस्टियों को दिया भी जा चुका है। जांच की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद होगी FIR, अरेस्टिंग राम मंदिर में चढ़ावे की हेर-फेर को लेकर जनता और विपक्ष में भारी नाराजगी है। ऐसे में सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेश देना चाहती है। 7 दिन पर प्रारंभिक रिपोर्ट आ चुकी है। 15 दिन पर फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही दोषी कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई जाएगी। यह मुकदमा खुद राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से दर्ज कराया जा सकता है। इनकी अरेस्टिंग हो सकती है- इसके अलावा 5 और सदस्य परिसर में रखे गए हैं। इनमें मंदिर कर्मचारी मनीष यादव, लवकुश मिश्रा और राजेश पाठक शामिल हैं। इनके घरों से रुपए बरामद हुए हैं। वहीं, TCS का अनुबंध कर्मचारी रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप सिंह पर गणना के दौरान रुपए की हेरा-फेरी के आरोप हैं। ————————– ये खबर भी पढ़ें… राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के 3 जिम्मेदार, चंपत राय ने ट्रस्ट के सदस्यों से चोरी छिपाई; गोपाल राव ने CCTV चेक नहीं किए अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी में सवाल उठ रहे हैं कि दानपेटियों में आने वाले चढ़ावे की चोरी को रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी? इसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और परिसर व्यवस्थापक गोपाल राव के नाम सबसे ज्यादा लिए जा रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…