प्रयागराज में करोड़पति परिवार के 4 सदस्यों की हत्या का पुलिस ने बुधवार को खुलासा कर दिया। मां-बाप और बहन की हत्या बेटे ने ही अपने दोस्त के साथ मिलकर की थी। हत्या के बाद दोनों ने घर से डेढ़ करोड़ रुपए के गहने लूटे। फिर गहनों के बंटवारे को लेकर उनके बीच आपस में झगड़ा हो गया। इसके बाद दोस्त ने बेटे की हत्या कर दी। वारदात के बाद उसने दुकान में बाहर से ताला लगाया और गहने लेकर भाग गया। पुलिस ने आरोपी दोस्त सनी गुप्ता को हिरासत में लिया है। वह चाय की दुकान लगाता है। उसके पास से लूटे हुए गहने भी बरामद हुए हैं। जांच में सामने आया है कि कारोबारी ने साल-2022 में बेटे को प्रॉपर्टी से बेदखल कर दिया था। इससे वह नाराज था। इसके बाद उसने वारदात को अंजाम दिया। आरोपी सनी गुप्ता ने मीडियाकर्मियों से कहा- हमें लगा कि जो अपने मां-बाप का नहीं हुआ, वह मेरा क्या होगा। हमने कोई अपराध नहीं किया था। उसी ने मुझे उकसाया और बुलाया। उसने अपने मां-बाप का कत्ल किया। हम दोनों सोना-चांदी लेकर नीचे आए। उसने कहा था कि मुझे भी हिस्सा देगा, लेकिन नहीं दिया। इसी वजह से मैंने उसकी हत्या कर दी। मंगलवार को कारोबारी वीरेंद्र कुमार वैश्य (70), उनकी पत्नी अनीता (65) और बेटी मीनाक्षी (45) के शव घर के अंदर मिले थे। घर में बाहर से ताला बंद था, जबकि बेटे अभिषेक का कुछ पता नहीं चल पाया था। ऐसे में शक अभिषेक पर गया। हालांकि, करीब 2 घंटे बाद अभिषेक (40) का शव मकान के नीचे की दुकान में मिला। दुकान का ताला भी बाहर से बंद था। ऐसे में पुलिस मान रही थी कि किसी ने पूरे परिवार की हत्या कर दी है। घटना से जुड़ी 3 तस्वीरें… गत्ते पर लिखा मिला- बंटी, बबली और बहू ने मारा जांच में पुलिस को कारोबारी पति-पत्नी के शव से एक मीटर दूर एक गत्ता पड़ा मिला। इस पर लाल कलर के पेन से लिखा था- “बंटी, बबली और बहू ने मारा।” सूत्रों के मुताबिक, बेटे ने ही पुलिस को गुमराह करने के लिए ऐसा लिखा था। जिससे पुलिस का शक जेल से बाहर आई छोटे भाई की पत्नी पर जाए। वारदात साउथ मलाका इलाके में हीवेट रोड चौराहे की है। बेटे ने हत्या क्यों की, पढ़िए वीरेंद्र कुमार वैश्य का गिफ्ट का कारोबार था। उनका हीवेट रोड चौराहे पर दो मंजिला मकान है। मकान 8,000 वर्गफीट में बना है, जिसकी कीमत 10 से 15 करोड़ रुपए बताई जा रही है। निचले हिस्से में 14 दुकानें हैं, जिनमें से 13 किराए पर हैं। ऊपरी हिस्से में वीरेंद्र परिवार के साथ रहते थे। एक दुकान बेटी मीनाक्षी चलाती थी। वह गिफ्ट से जुड़े सामान बेचती थी। उसी दुकान पर वीरेंद्र वैश्य भी बैठा करते थे। बड़ा बेटा अभिषेक पेस्टीसाइड और फ्लोर क्लीनिंग सॉल्यूशन का व्यापार करता था। अभिषेक और मीनाक्षी की शादी नहीं हुई थी। छोटा बेटा कौशांबी जेल में बंद है। उसकी पत्नी रितु जमानत पर जेल से बाहर है। बेटे की पिता से खटपट रहती थी पुलिस जांच में पता चला है कि बड़े बेटे अभिषेक की भी पिता से नहीं जमती थी। पड़ोसियों और रिश्तेदारों के अनुसार, अभिषेक की संगत को लेकर परिवार में अक्सर झगड़ा होता रहता था। एक बार अभिषेक ने किसी व्यक्ति से कई लाख रुपए उधार ले लिए थे। समय पर रकम न लौटाने पर कर्ज देने वाले अभिषेक की पिटाई कर उसे उठा ले गए थे। धमकी दी थी कि पैसे नहीं मिले तो पूरे परिवार को खत्म कर दिया जाएगा। बाद में बहन मीनाक्षी ने पैसे देकर अभिषेक को छुड़ाया था। इस बात को लेकर वीरेंद्र का अभिषेक से झगड़ा हो गया था। माता-पिता और बहन की हत्या कर कंबल-रजाई से ढका पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बेटे ने दोस्त के साथ मिलकर परिवार की हत्या का प्लान बनाया। दोनों ने मिलकर पहले वीरेंद्र वैश्य की हत्या की, फिर उनकी पत्नी और बेटी को मार डाला। इसके बाद घर में रखे सारे गहने लूट लिए। फिर शवों को रजाई और कंबल से ढक दिया था, जिससे दुर्गंध बाहर न फैले और वारदात का खुलासा देर से हो। वारदात के बाद फर्श पर पड़े खून के धब्बों को साफ करने की कोशिश की गई। इसके लिए पहले पानी और फ्लोर क्लीनर का इस्तेमाल किया गया, फिर फर्श पर तेल भी डाला गया, जिससे खून के निशान पूरी तरह मिट जाएं। वारदात के बाद दोनों अभिषेक की दुकान में पहुंचे। यहां गहनों के बंटवारे को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। इसके बाद दोस्त ने अभिषेक को मार दिया। अब पढ़िए पुलिस कमिश्नर ने जो कुछ बताया इस पूरी वारदात का खुलासा बुधवार को पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने किया। उन्होंने वारदात कैसे हुई, यह सिलसिलेवार बताया। पढ़िए… 6 सवाल, जिनके खुलासे के बाद भी नहीं मिले जवाब 1- व्यापारी के घर से ‘बंटी-बबली और बहू ने मारा’ लिखे गत्ते की बरामदगी तब हुई, जब बेटे अभिषेक का शव मिला। यह बरामदगी उसी कमरे से हुई, जहां व्यापारी दंपती का शव मिला। सवाल है कि जब पुलिस ने व्यापारी दंपती और उनकी बेटी का शव बरामद किया, तब यह नजर में क्यों नहीं आया? जबकि मौके पर स्थानीय पुलिस के साथ ही अफसरों, डॉग स्क्वॉयड और फील्ड यूनिट ने घर का चप्पा-चप्पा खंगाला था। 2- पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी सनी ने घटना के बाद खून के धब्बों को फ्लोर क्लीनर, हार्पिक और डिटर्जेंट से धुला। सामान्यत: खून के धब्बे या अन्य सबूत अपराधी तब मिटाने की कोशिश करते हैं, जब उन्होंने लाश ठिकाने लगा दी हो। यहां तो घर में ही तीनों लाशें पड़ी थीं। ऐसे में उसने धब्बे क्यों साफ किए? 3- आरोपी सनी हत्याकांड के बाद भी रात भर घर में ही रहा। यह मान भी लें कि अभिषेक को मारने के बाद उसने दुकान में बाहर से ताला लगा दिया। लेकिन, घर में रहने के दौरान उसे यह क्यों नहीं लगा कि अगर कोई आ गया तो वह पकड़ा जाएगा। वह इतना कॉन्फिडेंट कैसे था कि घर में कोई नहीं आएगा और वह आराम से भीतर छिपा रह सकेगा। 4- एक सवाल यह है कि 10-15 करोड़ की संपत्ति का वारिस महज एक करोड़ के गहनों के लिए पूरे परिवार के मर्डर क्यों करेगा? कानून के जानकारों का कहना है कि भले ही व्यापारी पिता ने उसे बेदखल कर दिया था, लेकिन पैतृक संपत्ति में महज बेदखली से किसी वैध वारिस का उत्तराधिकार खत्म नहीं हो जाता। प्रॉपर्टी अगर भाइयों और बहन में बंटती, तो भी कम से कम 5 करोड़ की संपत्ति उसके हाथ आती। ऐसे में पूरे परिवार का मर्डर करने की बात आसानी से पचती नहीं। 5- पुलिस के मुताबिक, व्यापारी के बेटे अभिषेक पर 50 हजार रुपए का कर्ज था। इसे चुकाने के लिए वह पिता से रुपए मांग रहा था और वह इसके लिए तैयार नहीं थे। इसी बात को लेकर वह पिता से नाराज रहता था और हत्या का एक बड़ा कारण यह बना। सवाल यह है कि करोड़ों की प्रॉपर्टी का वारिस होने के बाद भी 50 हजार रुपए का इंतजाम करना क्या उसके लिए इतना बड़ा काम था कि उसने पूरे परिवार का सफाया कर दिया। 6- पुलिस के मुताबिक, आरोपी सनी के हाथों में वारदात को अंजाम देते वक्त चोट लगी। जबकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में लाए जाने के दौरान उसके बाएं हाथ में प्लास्टर बंधा नजर आया। यह भी बड़ा सवाल है कि चोट लगने पर उसने प्लास्टर क्यों बंधवाया? प्लास्टर तो फ्रैक्चर की कंडीशन में बांधा जाता है। एक सवाल यह भी है कि महज 2 दिनों में उसने यह प्लास्टर कहां से बंधवा लिया? शवों से बदबू आने पर हत्या का पता चला मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे घर से तेज बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि निचली मंजिल से ऊपर जाने का रास्ता खुला था, लेकिन ऊपरी मंजिल का गेट बाहर से बंद था। इसके बाद पुलिस ने ताला तोड़कर घर के अंदर प्रवेश किया। एक कमरे में वीरेंद्र कुमार और उनकी पत्नी के शव पड़े मिले, जबकि दूसरे कमरे में बेटी मीनाक्षी का शव मिला। इसके बाद फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड को मौके पर बुलाया गया। जांच के बाद पुलिस ने पूरे मकान की तलाशी शुरू की। तलाशी के दौरान टीम ग्राउंड फ्लोर पर बनी दुकानों तक पहुंची। वहां एक दुकान बाहर से बंद मिली। पुलिस ने जब उस दुकान का ताला तोड़ा, तो अंदर एक और शव मिला, जिसकी पहचान बेटे अभिषेक के रूप में हुई। शव काफी फूल चुका था। कारोबारी ने छोटे बेटे को भी प्रॉपर्टी से बेदखल कर दिया था छोटे बेटे अश्विनी ने कीडगंज की रहने वाली रितु से लव मैरिज की थी। दोनों मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर फर्जी आईडी बनाकर लोगों को फंसाते और ठगी करते थे। अश्विनी ने हैदराबाद के जज का बेटा बनकर एक युवती को जाल में फंसाया था और उससे 9 लाख रुपए ठगे थे। इस केस में 2023 में दोनों जेल गए थे। 2024 में रितु को जमानत मिल गई थी, तब से वह बाहर है, जबकि अश्विनी कौशांबी जेल में बंद है। पड़ोसियों के मुताबिक, अश्विनी की हरकतों से कारोबारी नाराज रहते थे, इसलिए उन्होंने उसे अपनी प्रॉपर्टी से बेदखल कर दिया था और उससे सभी रिश्ते तोड़ लिए थे। ————————– यह खबर भी पढ़ें- मेरठ में पिता ने बेटे की गोली मारकर हत्या की, शक था कि बेटा उसे मार देगा; बहू को फोन करके कहा था- डेड बॉडी ले जाओ मेरठ में 23 साल के प्रॉपर्टी डीलर तुषार त्यागी की गोली मारकर हत्या उसके पिता सुंदर त्यागी ने की थी। दोस्त के साथ पहले आरोपी पिता ने जमकर बीयर पी। फिर बेटे को बहाने से बुलाकर उसके माथे और गले पर गोली मार दी। यहां पढ़ें पूरी खबर