“आप लोग यहां आने से पहले मूर्ति पूजा बहुत कर चुके, फायदा क्या हुआ? आपको अब ये सब नहीं करना है। मंदिर जाना हो तो प्रसाद नहीं खाना है। ये यीशु का पवित्र लहू (लाल रंग का जूस) है, इससे शरीर में चंगाई (बीमारी खत्म) आएगी, दिक्कतों से छुटकारा मिलेगा।” यह कहते हुए नेपाल से आए पास्टर ने मजदूर के गेटअप में सामने खड़े दैनिक भास्कर रिपोर्टर को ईसाई धर्म ग्रहण करा दिया। यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के एक गांव के सीक्रेट चर्च में हुई मीटिंग में ऐसे ही हर रविवार धर्मांतरण किया जाता है। पुलिस को चकमा देने के लिए ये केवल धर्म बदलते हैं, नाम-जाति नहीं। इन्वेस्टिगेशन में कल आपने पढ़ा कि जब भास्कर रिपोर्टर मजदूर बनकर गांव पहुंचा तो उसे बुलाकर ब्रेनवॉश किया। फिर कलावा काटा, पूजा न करने की हिदायत दी। अब पढ़िए प्रलोभन, धर्मांतरण, निगरानी और पूर्ण धर्मांतरण का खुलासा… हमें लखीमपुर खीरी जिले के दलराजपुर गांव में पास्टर विजय के घर बुलाया। यहां फिर 3 लोग रिपोर्टर को घेरकर बैठ गए और लालच देने लगे… शिवप्रसाद की पत्नी: ये (धर्म) ग्रहण कर ले तो बहुत जल्दी चंगाई (बीमारी खत्म) होगा। पास्टर विजय: (महिला की बात को बढ़ाते हुए) आज इनका ऐसा चेहरा है। हमें 10-15 दिन के बाद बताइएगा। शिवप्रसाद की पत्नी: अरे 15 दिन क्या, ये तो अभी हो जाएगा। बस ग्रहण कर लें। हम लोग प्रार्थना करेंगे। इनके नाम से। हम लोग तो तुरंत कर लिए थे। हम कहे- भैया इससे मुक्ति दिलाओ। हम बहुत परेशान हो गए हैं। रिपोर्टर: हमको भी ग्रहण करना है। शिवप्रसाद की पत्नी: (हंसते हुए) आपके दुख को हम लोग समझ रहे हैं भैया, लेकिन समय लगता है। बाबा नेपाल से निकल लिए हैं। ईसाई धर्म ग्रहण की हामी के बाद हम वहां से निकल आए। उन्होंने दोपहर 1 बजे कॉल करने को कहा। जब हमने कॉल किया तो पास्टर विजय बोला- आप आ जाओ, नेपाल से गुरुजी आ गए हैं। हम आधे घंटे में मौके पर पहुंच गए। इसके बाद धर्म बदलने का खेल शुरू हुआ। पास्टर विजय: हम आपको बहुत जल्दी ग्रहण (धर्मांतरण) करवाएंगे, आपको अपना जीवन समर्पित करना होगा, जीवन प्रभु को जल्दी देना होगा। रिपोर्टर: आप जो भी कहोगे, हम करेंगे। नेपाली पास्टर जीवन: ग्रहण करना चाहते हैं तो अभी कर सकते हैं। रिपोर्टर: अगर हम ग्रहण करेंगे तो जीवन का रूटीन कुछ बदलेगा क्या? क्या कुछ करना पड़ेगा? नेपाली पास्टर जीवन: क्या है कि अभी आप पाप के दास हैं, जो वह कराना चाहता है, वह आप करते हैं। जब आप यीशु को ग्रहण करते हैं तो उस पाप से निकल जाते हैं। (इसके बाद पास्टर विजय ने मोबाइल पर हमें बाइबिल की पंक्तियां दिखाईं) पास्टर विजय: तो आप अपना जीवन प्रभु को देने के लिए तैयार हैं? रिपोर्टर: हां। नेपाली पास्टर जीवन: ये धर्म परिवर्तन नहीं, हमारा जीवन परिवर्तन है। आज आपका नशे वाला जीवन है, कल आप ठीक हुए तो वह धर्म तो है नहीं, वह जीवन परिवर्तन है। आपका जीवन हम चेंज करना चाहते हैं। पास्टर विजय: हमारी जाति तो बदली नहीं। भाषा नहीं बदला। जो कुछ भी हमारे आधार कार्ड पर लिखा है, वह वैसा ही रहना है। रिपोर्टर: जैसे कलावा काटा था, उस तरह की पूजा की कई चीजें तो घर में रखी हुई हैं। फिर उसका क्या करेंगे? पास्टर विजय: आपके घर हम लोग पहुंचेंगे। धीरे-धीरे आपके मन से वह हटता ही जाएगा। इसके बाद ग्रहण की प्रक्रिया शुरू करते हुए पास्टर विजय ने प्रार्थना शुरू की और रिपोर्टर से दोहराने के लिए कहा। पास्टर विजय: प्रभु, मैं एक पापी मनुष्य हूं। मैं अपने सभी पापों को और अधर्माें को स्वीकार करता हूं। प्रभु, आप मेरे लिए स्वर्ग को छोड़कर इस जगत में आए। मेरे पापों को अपने ऊपर लेकर अपना प्राण दिया। और मैं विश्वास करता हूं। परमेश्वर ने आपको तीसरे दिन जीवित किया। आज से मैं आपको अपना मुक्तिदाता प्रभु कहकर अपने जीवन में आपको ग्रहण करता हूं। आज से आपको मैं अपना स्वामी कहकर मुक्तिदाता कहकर स्वीकार करता हूं। आज से मैं अपना जीवन आपके हाथ में समर्पित करता हूं। आज से मेरे जीवन में आप हस्तांतरित करें। प्रभु यीशु आपके जीवित नाम हैं। आमीन। नेपाली पास्टर जीवन: अभी ये आपने यीशु को ग्रहण किया तो आप यीशु की संतान हो गए। अब जो गंदी आदत है, उसे छोड़ने के लिए पास्टर जी आपके साथ संगति करेंगे। जैसे-जैसे आप संगति में आएंगे तो बुरी आदत छूट जाएगी। रिपोर्टर: जैसे हम ग्रहण वाली प्रार्थना कर लिए, अब हमारे जीवन में क्या बदलाव आएगा? नेपाली पास्टर जीवन: अब घर जाकर आप पूजा वगैरह नहीं करिएगा। पास्टर विजय: देखिए आप नए हैं, सुबह उठकर आप फोन लगा लीजिएगा। जागते, सोते समय हम प्रार्थना कर देंगे। रिपोर्टर: सुबह हम जो पूजा और अगरबत्ती वगैरह जलाते हैं, वह करना है या नहीं? पास्टर विजय: (सिर हिलाकर इनकार करते हुए) पूजा नहीं करना है। नेपाली पास्टर जीवन: मूर्ति पूजा से फर्क पड़ जाता है, क्योंकि हम मूर्ति पूजा नहीं करते हैं। आप लोग यहां आने से पहले मूर्ति पूजा बहुत कर चुके हैं न, तो फायदा क्या हुआ? आपको वह सब कुछ नहीं करना है। पास्टर जी, जो बोलें वैसे करना है। रिपोर्टर: हमें किसी को अभी बताना है या नहीं, परिवार में, मित्रों में? पास्टर विजय: अभी किसी को मत बताइए। परिवार में बताएगा, लेकिन बाद में। नेपाली पास्टर जीवन: अभी आप सिर्फ यही कहो- यीशु मुझे चंगाई दो। इसके बाद नेपाली पास्टर जीवन ने रिपोर्टर के लिए अंतिम प्रार्थना की। धर्मांतरण के बाद रिपोर्टर को सलाह दी कि पास्टर विजय को सुबह-शाम कॉल करें। हमने एक सप्ताह तक विजय को रोज दो बार कॉल किया। वो बार-बार घर आने को कहता। साथ में याद दिलाता कि तुम यीशु के हो और जल्द बीमारी खत्म करने का प्रलोभन भी देता। रिपोर्टर: गुरुजी, एक बात पूछनी है कि हम घर जा रहे हैं तो पत्नी हमारी बहुत धार्मिक हैं। उन्हें पूजापाठ करना होगा तो उन्हें रोकना है या क्या करना होगा? पास्टर विजय: अच्छा आप अभी बहुत ज्यादा हमसे सीख भी नहीं पाए हैं, लेकिन जब पूरी फैमिली एक लाइन में हो जाएगी तो बढ़िया हो जाएगा। जैसे आपने उस दिन यीशु को ग्रहण किया। आप उनके बेटे बन गए, दास बन गए तो उसी तरह से आपकी पत्नी को भी ग्रहण कराएंगे। प्रभु ने कहा है कि एक व्यक्ति मेरे ऊपर भरोसा करेगा तो मैं उसके पूरे घराने को बचाऊंगा। प्रभु जरूर सहायता करेंगे, उनके (पत्नी के) मन को बदलेंगे। वह भी विश्वास करेंगे। रिपोर्टर: फिर अभी हमें कुछ नहीं करना है न, पत्नी पूजापाठ करती है तो करने देना है न? पास्टर विजय: हां अभी करने दीजिएगा। जब आपके मन में पूर्ण शांति आ जाएगी तो हम सब मिलकर उनको समझाएंगे। रिपोर्टर: हम अगरबत्ती भी नहीं जला सकते हैं न? पास्टर विजय: नहीं जला सकते। बातचीत में पास्टर विजय ने बताया कि उनका नेटवर्क नेपाल से जुड़ा है। पास्टर विजय: वे (बड़े धर्मगुरु) काठमांडू की तरफ रहते हैं। उन तक आपकी बात पहुंचा दी है। वह भी अब आपके लिए दुआएं कर रहे हैं। रिपोर्टर: अच्छा, उनसे मुलाकात हो सकती है क्या? पास्टर विजय: उनसे तो बड़ी किस्मत से मुलाकात होती है। धर्मांतरण गिरोह के हर स्टेप में हम सफल हुए। जब उन्हें पूरा विश्वास हो गया तो एक सप्ताह बाद पूर्ण धर्मांतरण के लिए हमें बुलाया। इस बार हम गिरोह के पूरे रैकेट को एक्सपोज करना चाहते थे। इसलिए हमने दो साथी रिपोर्टर्स को शामिल किया। पास्टर विजय को हमने बताया कि पहचान के दो लोग हैं। एक सिख और दूसरा मुस्लिम। ये दोनों भी परेशानियों में घिरे हैं, क्या हमारी तरह इनकी भी समस्याएं खत्म हो जाएगी? पास्टर ने तत्काल इन्हें रविवार को सीक्रेट चर्च में लाने को कहा। हम रविवार सुबह 8 बजे चंगाई सभा में पहुंचे। यहां हाॅल में 50 महिला-पुरुष थे। उनके सामने पास्टर विजय था। टेबल पर क्रॉस रखा था। विजय यीशु के उपदेश सुना रहा था। हम यहां लगी कुर्सियों पर बैठ गए। जहां पहले रिपोर्टर का पूर्ण धर्मांतरण और साथ गए दो रिपोर्टर्स के धर्मांतरण की प्रोसेस शुरू करने का खेल हुआ। पास्टर विजय: आज जो व्यवस्था की है, इसमें आप शामिल (पूर्ण धर्मांतरण) हो जाएगे। रिपोर्टर: ठीक है। शिवप्रसाद गौतम: जो नए लोग हैं, वह लोग नहीं शामिल होंगे। सिर्फ आप ही इस व्यवस्था में शामिल होंगे। इसके बाद प्रार्थना हुई और वहां मौजूद लोगों को बारी-बारी से लाल रंग का जूस पिलाया। इसे यीशु का पवित्र लहू का नाम दिया। रिपोर्टर: ये शरबत होता है क्या? शिवप्रसाद गौतम: नहीं, ये पवित्र लहू होता है। इससे आपके शरीर में चंगाई आएगी। दिक्कतों से छुटकारा मिल जाएगा। पास्टर ने रिपोर्टर को खड़ा करके सबसे मिलवाया और फिर रिपोर्टर के लिए प्रार्थना की। इसका मतलब था कि अब रिपोर्टर का पूर्ण धर्मांतरण हो गया। रिपोर्टर: जो काठमांडू वाले गुरुजी हैं। उन तक कैसे पहुंच सकते हैं? पास्टर विजय: अब उनको बुलाने पर ही मिलेंगे। सब लोग कहेंगे तो उनको बुला लेंगे। आ तो जाएंगे वो। वे अभी 60 साल के हैं, लेकिन आज भी उनके चेहरे पर आपसे ज्यादा चमक है। रिपोर्टर: उनका क्या नाम है? पास्टर विजय: रवि शर्मा नाम है। पुलिस, शिवसेना और बजरंग दल के डर से सीक्रेट चर्च चलाता है गिरोह हमने चंगाई सभा में आए उन लोगों से बात की, जो हिंदू से ईसाई बन चुके हैं। इन्होंने सीक्रेट चर्च और चंगाई सभा से जुड़े कई राज खोले… रिपोर्टर: आपको क्या दिक्कत थी? अनुयायी: शैतान रहा, परिवार में सभी बीमार रहते थे। रिपोर्टर: ग्रहण करने से क्या मतलब होता है? अनुयायी: हम प्रभु यीशु को मानने लगते हैं। रिपोर्टर: तो फिर कुछ पूजा वगैरह नहीं करना होता है क्या? पहले आप पूजा करते थे कि नहीं? अनुयायी: हां, पूजा नहीं करनी होती है। पहले बहुत पूजा करते थे। हम तो काशी तक गए हैं। कांवड़ लेकर जाते थे। रिपोर्टर: अब पूजा करते हो क्या? अनुयायी: अब पूजा नहीं करते हैं। रिपोर्टर: नाम वगैरह नहीं बदलना पड़ता है क्या? अनुयायी: नहीं, कुछ नाम वगैरह नहीं बदलना पड़ता है। रिपोर्टर: क्या मंदिर या मजार पर जाकर प्रसाद वगैरह खा सकते हैं। अनुयायी: मंदिर जाना भी हो तो प्रसाद नहीं खाना होता है। चाहे मंदिर हो या मजार हो। उसे खाना भी है तो यीशु का प्रसाद मानकर खाओ। रिपोर्टर: घर के लोग भी ग्रहण किए हुए है? कैसे मनाया सबको? अनुयायी: सब ठीक होने लगा तो सब मान गए। बाबा जी भी घर आए। समझाए थे। रिपोर्टर: अपनी तरफ के तो कई लोग जुड़े होंगे फिर तो। सब लोग चर्च भी जाते होगे? अनुयायी: कुछ लोग निघासन चर्च में जाते हैं। रिपोर्टर: आप भी चर्च में जाते हो क्या? अनुयायी: ये भी तो चर्च है, जहां गए थे। रिपोर्टर: ये तो घर है? अनुयायी: नहीं चर्च है। रिपोर्टर: डरते हैं क्या, यहां तो फोटो भी नहीं लगा हुआ है? छुपाते क्यों हैं? अनुयायी: शिवसेना और बजरंग दल वाले बहुत तंग करते हैं। इसलिए छुपाते हैं। जान जाएंगे तो सब तहस-नहस कर देंगे। अब जानिए, हमारे इन्वेस्टिगेशन में क्या निकला? धर्मांतरण का कोई भी तथ्य प्रकाश में आया तो कार्रवाई करेंगे
————————————— धर्मांतरण पार्ट- 1 हाथ का कलावा काटकर फेंका, पूजा से रोका:यूपी में धर्मांतरण गिरोह के पर्दाफाश के लिए मजदूर बना रिपोर्टर, देखिए कैमरे पर ब्रेनवॉश हमें लीड मिली कि यूपी के लखीमपुर जिले में सीक्रेट चर्च हैं। यहां न बोर्ड लगे हैं और न ही यीशु की तस्वीरें। पुलिस को चकमा देने के लिए इसे अब धर्मांतरण की जगह ‘ग्रहण’ बोला जाता है। यूपी-नेपाल बॉर्डर पर बड़े पैमाने पर चल रहे इस ग्रहण को एक्सपोज करने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने अपना हुलिया बदला। पूरी खबर पढ़ें…
————————————— धर्मांतरण पार्ट- 1 हाथ का कलावा काटकर फेंका, पूजा से रोका:यूपी में धर्मांतरण गिरोह के पर्दाफाश के लिए मजदूर बना रिपोर्टर, देखिए कैमरे पर ब्रेनवॉश हमें लीड मिली कि यूपी के लखीमपुर जिले में सीक्रेट चर्च हैं। यहां न बोर्ड लगे हैं और न ही यीशु की तस्वीरें। पुलिस को चकमा देने के लिए इसे अब धर्मांतरण की जगह ‘ग्रहण’ बोला जाता है। यूपी-नेपाल बॉर्डर पर बड़े पैमाने पर चल रहे इस ग्रहण को एक्सपोज करने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने अपना हुलिया बदला। पूरी खबर पढ़ें…