उत्तर प्रदेश के 38 जिलों में मौसम विभाग ने बारिश का अलर्ट जारी किया है। वही, सोमवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज धूप खिली। धूप निकलने से लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ा। दिन के तापमान में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कई शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। 40-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी हवा
हालांकि मौसम विभाग ने एक बार फिर मौसम में बदलाव के संकेत दिए हैं। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण मंगलवार से प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाओं और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली से सटे जिलों तथा तराई क्षेत्र के कुल 38 जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ गरज-चमक और कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी भी हो सकती है। तस्वीरें देखिए- तराई क्षेत्र में होगी बारिश
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार से अगले तीन-चार दिनों तक प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों संभागों में बादलों की सक्रियता बनी रहेगी। विशेष रूप से तराई क्षेत्रों में मौसम का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है। इस दौरान रुक-रुक कर हल्की बारिश होने के आसार हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बादलों और बारिश की गतिविधियों के बावजूद तापमान में बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है। उल्टा आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। इससे गर्मी और उमस दोनों बढ़ सकती हैं। यहां है तेज हवा और गरज चमक की चेतावनी
श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल, बदायूं, जालौन, झांसी, ललितपुर व आस पास के क्षेत्र। मौसम में उतार-चढ़ाव क्यों हो रहा?
मौसम विभाग का कहना है कि उत्तराखंड के पहाड़ों पर मौसम लगातार बदल रहा है। कहीं बर्फबारी तो कहीं बारिश हो रही है। किसी-किसी दिन धूप के साथ मौसम साफ हो जा रहा है। अगले कुछ दिन ऐसे ही उतार-चढ़ाव के आसार हैं। इसका असर यूपी में दिख रहा है। पहाड़ों से आने वाली हवाएं मौसम को ठंडा बनाए हैं। बारिश के अनुकूल सिस्टम तैयार कर रही हैं। अगले 3 दिन कैसा रहेगा मौसम? इस साल मानसून में कम बारिश का अनुमान
निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर ने इस साल के मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार, मानसून में बारिश सामान्य से 6% कम रह सकती है। जून से सितंबर तक मानसून के 4 महीनों में देश में बारिश का सामान्य औसत 868.6 मिमी. है। सामान्य से कम मानसून का मतलब है कि बारिश 90% से 95% के बीच रहेगी। एजेंसी ने 94% बारिश का अनुमान दिया है। जून में सामान्य बारिश होगी, लेकिन जुलाई से गिरावट शुरू होकर अगस्त और सितंबर में मानसून कमजोर पड़ेगा। खासकर अगस्त-सितंबर में बारिश की कमी ज्यादा रहने के संकेत हैं। सवाल- लू लगने से बचने के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- गर्मी में सिर्फ धूप से बचना ही काफी नहीं है, बल्कि सही आदतें अपनाना भी उतना ही जरूरी है। थोड़ी-सी सावधानी लू जैसी गंभीर समस्या से बचा सकती है। गर्मी से कैसे बचें, ग्राफिक से समझिए यूपी में भी मानसून में कम बारिश होगी, वजह जानिए
जून से सितंबर के बीच उत्तर प्रदेश में भी सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने बताया कि इस साल प्रशांत महासागर में ला नीना जैसी स्थितियां खत्म होकर अल नीनो की ओर बढ़ने के संकेत हैं। जो कम वर्षा का कारण बनेगी। यानी इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कमजोर रहने के संकेत हैं। साथ ही इस साल जनवरी-मार्च में उत्तरी गोलार्ध में बनी कम बर्फ भी मानसून को प्रभावित कर सकती है। अल-नीनो और ला-नीना के बारे में जानिए ————————
हालांकि मौसम विभाग ने एक बार फिर मौसम में बदलाव के संकेत दिए हैं। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण मंगलवार से प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाओं और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली से सटे जिलों तथा तराई क्षेत्र के कुल 38 जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ गरज-चमक और कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी भी हो सकती है। तस्वीरें देखिए- तराई क्षेत्र में होगी बारिश
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार से अगले तीन-चार दिनों तक प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों संभागों में बादलों की सक्रियता बनी रहेगी। विशेष रूप से तराई क्षेत्रों में मौसम का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है। इस दौरान रुक-रुक कर हल्की बारिश होने के आसार हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बादलों और बारिश की गतिविधियों के बावजूद तापमान में बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है। उल्टा आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। इससे गर्मी और उमस दोनों बढ़ सकती हैं। यहां है तेज हवा और गरज चमक की चेतावनी
श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल, बदायूं, जालौन, झांसी, ललितपुर व आस पास के क्षेत्र। मौसम में उतार-चढ़ाव क्यों हो रहा?
मौसम विभाग का कहना है कि उत्तराखंड के पहाड़ों पर मौसम लगातार बदल रहा है। कहीं बर्फबारी तो कहीं बारिश हो रही है। किसी-किसी दिन धूप के साथ मौसम साफ हो जा रहा है। अगले कुछ दिन ऐसे ही उतार-चढ़ाव के आसार हैं। इसका असर यूपी में दिख रहा है। पहाड़ों से आने वाली हवाएं मौसम को ठंडा बनाए हैं। बारिश के अनुकूल सिस्टम तैयार कर रही हैं। अगले 3 दिन कैसा रहेगा मौसम? इस साल मानसून में कम बारिश का अनुमान
निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर ने इस साल के मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार, मानसून में बारिश सामान्य से 6% कम रह सकती है। जून से सितंबर तक मानसून के 4 महीनों में देश में बारिश का सामान्य औसत 868.6 मिमी. है। सामान्य से कम मानसून का मतलब है कि बारिश 90% से 95% के बीच रहेगी। एजेंसी ने 94% बारिश का अनुमान दिया है। जून में सामान्य बारिश होगी, लेकिन जुलाई से गिरावट शुरू होकर अगस्त और सितंबर में मानसून कमजोर पड़ेगा। खासकर अगस्त-सितंबर में बारिश की कमी ज्यादा रहने के संकेत हैं। सवाल- लू लगने से बचने के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- गर्मी में सिर्फ धूप से बचना ही काफी नहीं है, बल्कि सही आदतें अपनाना भी उतना ही जरूरी है। थोड़ी-सी सावधानी लू जैसी गंभीर समस्या से बचा सकती है। गर्मी से कैसे बचें, ग्राफिक से समझिए यूपी में भी मानसून में कम बारिश होगी, वजह जानिए
जून से सितंबर के बीच उत्तर प्रदेश में भी सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने बताया कि इस साल प्रशांत महासागर में ला नीना जैसी स्थितियां खत्म होकर अल नीनो की ओर बढ़ने के संकेत हैं। जो कम वर्षा का कारण बनेगी। यानी इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कमजोर रहने के संकेत हैं। साथ ही इस साल जनवरी-मार्च में उत्तरी गोलार्ध में बनी कम बर्फ भी मानसून को प्रभावित कर सकती है। अल-नीनो और ला-नीना के बारे में जानिए ————————