यूपी चुनाव में 200 सीट मांगने वाली कांग्रेस का सरेंडर:MLC की 11 सीटों में एक पर भी नहीं उतारा प्रत्याशी, दावेदार करते रहे इंतजार

यूपी चुनाव में सपा से गठबंधन के लिए बराबर की सीट मांग रही कांग्रेस ने MLC चुनाव में सरेंडर कर दिया। MLC की 11 सीटों में से एक पर भी पार्टी ने प्रत्याशी नहीं उतारा। दावेदार नामांकन के आखिरी दिन तक इंतजार करते रह गए। दैनिक भास्कर ने बीते 10 महीनों से कांग्रेस का झंडा लेकर प्रचार कर रहे 8 प्रत्याशियों से बात की। उनका कहना है कि पार्टी ने उनके साथ धोखा किया। अब उनके सामने अपना सम्मान बचाने की चुनौती है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… कांग्रेस ने 5 स्नातक, 3 शिक्षक MLC प्रत्याशी घोषित किए थे कांग्रेस ने MLC चुनाव के लिए पिछले साल 5 प्रत्याशी घोषित किए थे। इनमें मेरठ-सहारनपुर स्नातक सीट से विक्रांत वशिष्ठ, आगरा स्नातक सीट से रघुराज सिंह पाल, लखनऊ स्नातक सीट से डॉ. देवमणि तिवारी, वाराणसी शिक्षक सीट से संजय राय प्रियदर्शी और वाराणसी स्नातक सीट से अरविंद सिंह पटेल शामिल थे। बाद में लखनऊ स्नातक सीट से डॉ. देवमणि तिवारी का नाम वापस लेने पर उनकी जगह पार्टी ने सरिता मिश्रा को प्रत्याशी बनाया। इसके अलावा गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से देव भास्कर तिवारी, प्रयागराज-झांसी स्नातक सीट से अजय कुमार सिंह और आगरा वित्तविहीन शिक्षक सीट से आकाश अग्रवाल के नाम घोषित किए गए। कांग्रेस ने इन प्रत्याशियों को ज्यादा से ज्यादा वोटर बनाने का टारगेट दिया था। इसके लिए अभियान भी चलाया था। बाद में 8 लाख से ज्यादा वोटर बनाने का दावा भी किया था। ‘नामांकन के 3 दिन पहले तक प्रभारी भरोसा देते रहे’ आगरा स्नातक MLC सीट से कांग्रेस के घोषित प्रत्याशी रघुराज सिंह पाल धनगर समाज से आते हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा- सब कुछ ठीक चल रहा था। हमने एक साल तक घूम-घूमकर वोटर बनाए। कांग्रेस का झंडा बुलंद किया। जिस MLC चुनाव में कांग्रेस का कोई नाम नहीं लेता था, वहां हमने पार्टी को मजबूती से खड़ा कर दिया था। 2 अक्टूबर को आराधना मिश्रा ‘मोना’ को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। फिर 3 अक्टूबर को बताया गया कि पार्टी MLC चुनाव नहीं लड़ेगी। ‘प्रदेश अध्यक्ष को फोन किया तो बोलीं- इतनी सुबह किससे बात करूं’ वाराणसी स्नातक सीट से प्रत्याशी घोषित अरविंद सिंह पटेल का कहना है- पार्टी अगर खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहती, तो कम से कम हमारा समर्थन कर दे। इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी के बड़े नेताओं से बात करने का भरोसा दिया था। अरविंद सिंह पटेल ने बताया- मैंने 6 अक्टूबर को नामांकन के आखिरी दिन सुबह 9 बजे भी प्रदेश अध्यक्ष को कॉल किया। उन्होंने कहा कि इतनी सुबह मैं किससे बात करूं? जबकि एक दिन पहले ही दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान से उनकी मुलाकात हुई थी। ‘कांग्रेस ने आखिरी समय में धोखा दिया, अब कोई लेना-देना नहीं’ आगरा की वित्तविहीन शिक्षक सीट से निर्दलीय MLC रहे आकाश अग्रवाल इन प्रत्याशियों में सबसे अलग रहे। कांग्रेस की वादाखिलाफी के बाद उन्होंने सपा प्रमुख से संपर्क किया। सपा की ओर से प्रत्याशी घोषित हो गए थे। बाकी सभी प्रत्याशी अब निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। वाराणसी शिक्षक सीट से अब निर्दलीय चुनाव लड़ रहे संजय राय प्रियदर्शी कहते हैं- मैंने तो शुरू से सपा से राजनीति की थी। सपा ने इस सीट पर लाल बिहारी यादव को प्रत्याशी बनाया है। सपा से टिकट मिलना मुश्किल था। इसीलिए कांग्रेस में शामिल हुआ था। एक साल से मैंने वाराणसी सीट के तहत आने वाले 8 जिलों में घूम-घूमकर वोटर तैयार किए। मेरे सोशल ग्रुप में 16 हजार वोटर सीधे जुड़े हैं। लेकिन, कांग्रेस ने आखिरी समय में धोखा दे दिया। आगरा स्नातक सीट से रघुराज सिंह पाल ने भी निर्दलीय नामांकन किया है। इसी तरह गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से मऊ डीएवी कॉलेज के प्रधानाचार्य देव भास्कर तिवारी ने भी निर्दलीय पर्चा दाखिल किया है। यूपी चुनाव से पहले लिटमस टेस्ट माना जा रहा MLC चुनाव यूपी विधानसभा चुनाव से पहले MLC की 11 सीटों पर हो रहे चुनाव को लिटमस टेस्ट माना जा रहा है। इन 11 सीटों के नतीजों से 2027 विधानसभा चुनाव के लिए जनता का मिजाज पता चल सकता है। सपा-भाजपा ने अपने-अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। जबकि, कांग्रेस ने MLC चुनाव लड़ने से ही इनकार कर दिया है। MLC चुनाव में 5 स्नातक और 6 शिक्षक कोटे की सीटें हैं। इसमें ग्रेजुएट और शिक्षक ही वोटर होंगे। इसमें बढ़त लेने वाले दल को विधानसभा चुनाव से पहले अपना मनोबल बढ़ाने का मौका मिल सकता है। इससे यह भी पता चल सकता है कि प्रदेश की सियासी हवा किस ओर है? ————————— यह खबर भी पढ़ें- ‘गद्दार कहलाना मंजूर, सनातन से समझौता नहीं’, अखिलेश के ‘भगोड़े को जीतने नहीं देंगे’ बयान पर मनोज पांडे बोले- ये सिर्फ अहंकार अखिलेश यादव की ‘PDA रथ यात्रा’ और उनके ‘भगोड़े को जीतने नहीं देंगे’ वाले बयान पर योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री मनोज पांडे कहते हैं- ये लोकतंत्र का मजाक है। चुनाव विक्रमादित्य मार्ग से नहीं, बल्कि ऊंचाहार की जमीन पर लड़ा जाएगा। वहां की जनता 2027 में करारा जवाब देगी। दैनिक भास्कर की खास बातचीत पढ़िए…