यूपी बोर्ड ऑफिस में फेल स्टूडेंट को बना रहे टॉपर:20 हजार में 95% मार्क्स, वॉट्सएप पर भेजी मार्कशीट; कॉपियां निकालकर बढ़ा रहे नंबर

‘हेलो, बोर्ड ऑफिस से बोल रहे हैं। आपने स्क्रूटनी का फॉर्म भरा था? लास्ट चांस दे रहे हैं। 8 हजार रुपए दीजिए, 2 विषय के नंबर बढ़ा देंगे।’ खुद को यूपी बोर्ड ऑफिस का डेटा एंट्री ऑपरेटर बताने वाले व्यक्ति ने 12वीं की मार्कशीट में मार्क्स बढ़ाने के ये रेट बताए। डेटा एंट्री ऑपरेटर ने कॉपियों की स्क्रूटनी कराने वाली छात्रा को फोन किया और रुपए मांगे। नंबर बढ़ाने के इस गिरोह को एक्सपोज करने के लिए दैनिक भास्कर की महिला रिपोर्टर छात्रा की मौसी बनी। नंबर बढ़ाने वालों से बात कर इस खेल की तह तक गए। प्रयागराज बोर्ड ऑफिस और गोरखपुर रीजनल ऑफिस के दलालों और कर्मचारियों से मिलकर डील की। पढ़िए, पूरा इन्वेस्टिगेशन… हमारे पास 12वीं की एक छात्रा का कॉल आया। उसने बताया कि कुछ लोग फोन पर नंबर बढ़ाने के लिए रुपए की डिमांड कर रहे हैं। हमने इन्हें एक्सपोज करने के लिए प्लान बनाया। सभी कड़ियों को जोड़ा, तो गिरोह का पूरा सिस्टम सामने आ गया। यह ऐसे काम करता है – अब एक-एक कर बताते हैं कि हमने इसे कैसे एक्सपोज किया 1. स्क्रूटनी : 10वीं-12वीं का रिजल्ट 23 अप्रैल, 2026 को घोषित किया गया था। इसके बाद स्क्रूटनी के ऑनलाइन फार्म 15 मई से भरना शुरू हुए। इन छात्रों का डेटा यूपी बोर्ड ऑफिस के कर्मचारी, डेटा एंट्री ऑपरेटर और दलालों के पास पहुंच गया। फिर ये लोग नंबर बढ़ाने के लिए इन छात्रों से संपर्क करने के लिए एक्टिव हो गए। 2. कॉन्टैक्ट : नंबर माफिया से जुड़े लोग उन छात्र-छात्राओं को कॉल कर पैसों की डिमांड करते हैं, जिन्होंने स्क्रूटनी का फार्म भरा है। ऐसे ही एक छात्रा के पास कॉल आया, जिसने दैनिक भास्कर को बताया। महिला रिपोर्टर छात्रा की मौसी बनी और डेटा एंट्री ऑपरेटर से बात की-
डेटा एंट्री ऑपरेटर: आपने स्क्रूटनी के लिए जो फॉर्म भरे थे, 2 विषय के लिए। इनकी मार्कशीट मेरे पास आई है। लास्ट चांस दे रहे हैं, क्योंकि सरकार का नोटिफिकेशन आ चुका है। 2 दिन बाद रिजल्ट अपलोड हो जाएगा। रिपोर्टर: मुझे कैसे विश्वास होगा कि नंबर बढ़ाए हैं? डेटा एंट्री ऑपरेटर: नंबर बढ़ाएंगे तो मार्कशीट की फोटो आपके वॉट्सएप पर भेज देंगे, देख लीजिएगा। रिपोर्टर: क्या फीस बताई थी? डेटा एंट्री ऑपरेटर: 8 हजार रुपए बोले थे। एक सब्जेक्ट का 4 हजार रुपए लेते हैं। हम चेक करना चाहते थे कि क्या ये वाकई बोर्ड ऑफिस से जुड़ा कर्मचारी है? यह जानने के लिए हमने छात्रा का रोल नंबर पूछा। ऑपरेटर ने रोल नंबर सही बता दिया। इसके बाद आगे बात की… रिपोर्टर: पैसे ऑनलाइन देने होंगे या ऑफलाइन? डेटा एंट्री ऑपरेटर: देखिए, मैं आपको QR कोड भेज दूंगा। इसी पर ट्रांसफर करना होगा। रिपोर्टर: हम आपको ऑफलाइन पेमेंट कर दें, बोर्ड ऑफिस आकर तो…? डेटा एंट्री ऑपरेटर: हम आपसे नहीं मिल सकते। सिर्फ आपकी बच्ची थोड़ी है, और भी बच्चे हैं, वो सब भी दे रहे हैं। रिपोर्टर: ठीक है, QR कोड भेज दीजिए। वैसे कितना नंबर बढ़ाएंगे आप? डेटा एंट्री ऑपरेटर: देखिए, अभी 396 नंबर है। 450 प्लस नंबर मिल जाएंगे बच्ची को। पेमेंट करवाइए। ये बात ज्यादा लोगों को शेयर मत कीजिएगा कि बोर्ड ऑफिस से बच्ची का नंबर बढ़वा रहा हूं। क्योंकि, हम लोग यह काम अपनी रिस्क पर कर रहे हैं। 3. सबूत : डेटा एंट्री ऑपरेटर ने वॉट्सएप पर एक छात्र की मार्कशीट भेजी। जब हमने पुराना रिजल्ट पता किया, तो ये छात्र फेल था। अब मैथ्स में 17 की जगह 85 नंबर और फिजिक्स में 48 की जगह 95 नंबर थे। ये तो साफ था कि छात्र के नंबर बढ़ा दिए हैं। लेकिन, अभी स्क्रूटनी का रिजल्ट नहीं आया है। इसलिए रुपए ठगने के लिए ये फ्राड भी हो सकता है। रिपोर्टर: आपने नंबर बढ़ाने के लिए कॉल किया था। आपने अपना नाम नितिन बताया था, लेकिन जो QR कोड भेजा, उसमें किसी और का नाम दिख रहा है। डेटा एंट्री ऑपरेटर: वो मेरा नहीं, हमारे ऑफिस के सर का QR है। आप उसी पर पेमेंट कर दीजिए। रिपोर्टर: मुझे कैसे भरोसा हो कि पैसे आपको ही मिलेंगे? अगर पेमेंट करने के बाद आपका फोन बंद हो गया तो? डेटा एंट्री ऑपरेटर: ऐसा कुछ नहीं होगा। अगर भरोसा नहीं है तो पहले 4 हजार दे दीजिए। हम आपकी भांजी के नंबर बढ़ाकर वॉट्सएप पर प्रूफ भेज देंगे, फिर बाकी 4 हजार रुपए दे देना। रिपोर्टर: आपने पहले किसी का नंबर बढ़ाया हो तो उसका प्रूफ भेजिए। डेटा एंट्री ऑपरेटर: ठीक है, वॉट्सएप पर एक बच्चे का प्रूफ भेज रहा हूं। आपने जो नंबर दिया है, उसी पर भेज रहा हूं। 4. मोलभाव : हम जानना चाहते थे कि क्या टॉपर भी बनाया जाता है? अब हमने डेटा एंट्री ऑपरेटर को ऑफर दिया कि 75% से नंबर बढ़ाकर 95% हो जाए, इसके लिए भी वह तैयार हो गया – रिपोर्टर: मेरी भांजी के अभी 75% नंबर बन रहे हैं। अगर मैं एक्स्ट्रा पैसे दूं तो क्या उसके 95% तक नंबर हो सकते हैं? डेटा एंट्री ऑपरेटर: बिल्कुल हो जाएंगे। 95% तक नंबर दिख जाएंगे और स्कॉलरशिप भी मिल जाएगी। रिपोर्टर: अगर ऐसा है तो मैं 20-30 हजार रुपए तक देने को तैयार हूं, लेकिन आपसे मिलकर पेमेंट करना चाहती हूं। डेटा एंट्री ऑपरेटर: हम किसी से नहीं मिलते। हमारा काम अंदर से होता है। जब तक पूरा काम नहीं हो जाता, हम किसी से फेस-टू-फेस नहीं मिल सकते। आप ज्यादा मत पूछिए। काम लीगल तरीके से नहीं हो रहा है, अंदर से हो रहा है। इसलिए सब जानकारी नहीं दी जा सकती। आपको सिर्फ रिजल्ट से मतलब होना चाहिए। 5. फाइनल डील : अब हम यह जानने निकले कि क्या यूपी बोर्ड के मुख्य और रीजनल ऑफिस में भी नंबर माफिया एक्टिव है? हम सबसे पहले गोरखपुर रीजनल ऑफिस पहुंचे। यहां पता चला कि लैया-चना बेचने वाला एक व्यक्ति नंबर बढ़वाने की सेटिंग कर्मचारियों से कराता है। उसने ऑफिस के अंदर चपरासी से मिलवाया। चपरासी कर्मचारी चंद्रिका मिश्रा के पास ले गया। चंद्रिका ने हमसे नंबर बढ़ाने के लिए लेन-देन की बात की- बाबू बोला- 2 सब्जेक्ट के नंबर बढ़ाने के 10 हजार, कॉपी निकालने के 1200 रुपए… रिपोर्टर : हमें 2 बच्चियों के नंबर बढ़वाने हैं। चंद्रिका : ठीक है, रोल नंबर दे दीजिए। हम काॅपी निकलवा देते हैं। रिपोर्टर : क्या देना होगा, ये बता दीजिए? चंद्रिका : वो तो बाद की बात है। अभी लेबर खर्च दे दीजिए। रिपोर्टर : कितना लगेगा? चंद्रिका : दो विषय का 1000-1200 रुपए लगेंगे। हिंदी और अंग्रेजी विषय है तो दोनों की कॉपियां अलग-अलग जंचती हैं। बंडल खुलवाकर कॉपी निकलवानी पड़ेगी। रिपोर्टर : अच्छा तो नंबर बढ़वाने की सेटिंग बैठ गई, तब? चंद्रिका : तब हम आपको बताएंगे। रिपोर्टर : अच्छा, पहले किसी का काम करवाया है कि नहीं। अंदाजा तो होगा ही कि कितना लगेगा? चंद्रिका : अरे भाई, देने को तो लोग 6-6 हजार रुपए दे दिए हैं। रिपोर्टर : एक विषय का। कितने नंबर बढ़ाने का? चंद्रिका : वो जो बढ़ जाए। 1 नंबर, 2 नंबर, 3 नंबर। रिपोर्टर : यानी 1 विषय के 6 हजार रुपए तो 2 विषय के 10 हजार रुपए हुए, यही न। चंद्रिका : हां, बस। रिपोर्टर : कितना? चंद्रिका : 10 हजार रुपए, लेकिन अभी नहीं चाहिए। जब कॉपी दिखवा लेंगे, तब आपको बताएंगे। इसके बाद हम प्रयागराज बोर्ड ऑफिस पहुंचे। यहां हमें पता चला कि बोर्ड ऑफिस के बाहर जूस बेचने वाला और उसका बेटा कर्मचारियों से सेटिंग करा रहा है। उसने बताया कि ज्ञान बाबू पैसा लेकर नंबर बढ़ा देंगे। हम कार्यालय पहुंचे तो बाबू पवन सोनकर मिला। पवन ने कहा- आप बहुत देर से आए हैं, कॉपियां यहां से जा चुकी हैं। अगर कुछ दिन पहले आते तो मदद हो सकती थी। पवन ने अपना मोबाइल नंबर देकर आगे संपर्क बनाने को कहा। अब जानिए, ये खेल कितना बड़ा है? इस बार 10वीं की परीक्षा में 27 लाख 61 हजार 696 और 12वीं की परीक्षा में 25 लाख 76 हजार 82 विद्यार्थी बैठे थे। इनमें से 25 हजार 620 ने रि-चेकिंग के लिए अप्लाई किया। अगर 20% यानी 10 हजार विद्यार्थियों से भी पैसों की डिमांड की जा रही है, तो 10 हजार रुपए प्रति स्टूडेंट के रेट से 10 करोड़ रुपए होते हैं। हमारी इन्वेस्टिगेशन में यह निकला – इस खेल में बड़े अफसर भी शामिल हैं या फिर कर्मचारी खुद अपने स्तर पर ये गिरोह चला रहे हैं? इसमें दोनों तरह की बातें सामने आईं- जो भी जिम्मेदार सामने आएंगे, कार्रवाई करेंगे ——————————- यह इन्वेस्टिगेशन भी पढ़ें – आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य के खिलाफ रची थी साजिश, बटुक को स्कूल से उठवाया, पिता को बंधक बनाया; खुफिया कैमरे पर षड्यंत्र का खुलासा ‘ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने दो बटुकों का यौन शोषण किया…।’ 5 महीने पहले इस खबर ने देशभर में सनसनी मचा दी। शंकराचार्य के खिलाफ FIR हुई और गिरफ्तारी के लिए पुलिस काशी तक पहुंच गई। हर हिंदू के दिमाग में सवाल उठा कि क्या सच में शंकराचार्य ने यौन शोषण किया है? मामला कोर्ट पहुंचा। पुलिस जांच हुई, लेकिन सच सामने नहीं आया। पढ़िए पूरी खबर…