संविधान दिवस पर यूपी की राजनीति में नए गठबंधन का ऐलान हो सकता है। लखनऊ के रमाबाई मैदान में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद गठबंधन की घोषणा कर सकते हैं। ओवैसी इस गठबंधन से यूपी में 40 से 45 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। अन्य सीटों पर चंद्रशेखर की पार्टी चुनाव लड़ेगी। दोनों दलों की नजर यूपी में दलित-मुस्लिम समीकरण तैयार करना है। यूपी में दलित आबादी लगभग 21% और मुस्लिम आबादी करीब 19% है। दोनों का गठबंधन हुआ तो ये 40% आबादी को कवर करेंगे। चंद्रशेखर और ओवैसी की जोड़ी दलित-मुस्लिमों को कितना साध पाएगी? यूपी की कितनी सीटों पर ये गठबंधन असर डाल सकता है? इससे किसका नुकसान-किसे फायदा होगा? रिपोर्ट में पढ़िए… लखनऊ के रमाबाई आंबेडकर मैदान में 26 नवंबर को आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी शक्ति प्रदर्शन दिखाने की तैयारी में है। चंद्रशेखर आजाद ने इसे ‘संविधान बचाओ विशाल जनसभा’ का नाम दिया है। चंद्रशेखर ने इस मैदान को तीन दिन के लिए बुक कराया है। इस मैदान की क्षमता लगभग 5 लाख की है। अभी तक इस मैदान को सिर्फ मायावती ही अपनी जनसभा में भर पाई हैं। इस बार चंद्रशेखर इस रिकॉर्ड को छूना चाहते हैं। इसके जरिए वह दलितों में ये संदेश पहुंचाना चाहते हैं कि अब उनकी आजाद समाज पार्टी भी बसपा के विकल्प में तैयार है। इसके लिए पूरे प्रदेश से समर्थकों को बुलाने की तैयारी है। पार्टी की ओर से घोषित विधानसभा प्रभारियों को भी भीड़ लाने का टारगेट सौंपा है। चंद्रशेखर ने हर विधानसभा से 1 हजार से 1500 की भीड़ लाने की जिम्मेदारी दी है। चंद्रशेखर अब तक दो सूची के जरिए 87 विधानसभा प्रभारियों के नाम घोषित कर चुके हैं। बसपा की तर्ज पर चंद्रशेखर ने विधानसभा प्रभारी बनाए हैं। चुनाव में इन प्रभारियों को ही प्रत्याशी घोषित किया जाता है। चंद्रशेखर पिछले तीन महीने में यूपी में 12 से ज्यादा सभाएं और रैली कर चुके हैं। उनके भाषण में सीएम योगी आदित्यनाथ सबसे अधिक टारगेट पर रहते हैं। ओवैसी से गठबंधन के लिए 4 राउंड की हो चुकी है बात AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने चंद्रशेखर की पार्टी के साथ गठबंधन के सवाल पर कहा- हमारी तैयारी प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं पर है। किस दल से गठबंधन होगा और AIMIM कितनी सीटों पर चुनाव में उतरेगी? इस पर आखिरी फैसला हमारी पार्टी के नेता असदुद्दीन ओवैसी करेंगे। हालांकि उन्होंने चंद्रशेखर की पार्टी से गठबंधन की खबरों से इनकार भी नहीं किया। पार्टी से जुड़े सूत्रों का दावा है कि शौकत अली और चंद्रशेखर के बीच गठबंधन को लेकर 4 दौर की बात हो चुकी है। चंद्रशेखर की ओवैसी से भी इस मसले पर बात हो चुकी है। दोनों दलों के बीच मुस्लिम बहुल सीटों को लेकर पेंच फंसा हुआ है। दोनों दलों का दावा मुस्लिम बहुल सीटों पर ज्यादा है। ओवैसी की पार्टी यूपी की मुस्लिम बहुल 40 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। खुद ओवैसी ने अब तक यूपी में, जो 8 सभाएं की हैं, वो मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में ही हुई हैं। इसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम खासकर युवा शामिल हो रहे हैं। ओवैसी के भाषण में सबसे ज्यादा हमले सपा और कांग्रेस पर होते रहे हैं। वह कहते हैं कि मुस्लिम नौजवानों में काबिलियत की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें राजनीति में आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया जाता। चंद्रशेखर की कोशिश है कि 25 नवंबर से पहले वह गठबंधन की गांठें सुलझा लें। लखनऊ के रमाबाई मैदान में आयोजित सभा में चंद्रशेखर इस गठबंधन का ऐलान करना चाहते हैं। पार्टी से जुड़े एक नेता का दावा है कि ओवैसी को भी इस रैली में बुलाने की तैयारी है। हालांकि AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली का दावा है कि अभी अधिकृत तौर पर ऐसा आमंत्रण आजाद समाज पार्टी की ओर से नहीं मिला है। मुस्लिम की बड़ी आबादी उसको वोट देगी, जो भाजपा को हरा सके पश्चिमी यूपी की राजनीति पर नजर रखने वाले विश्लेषक जैगम मुर्तजा कहते हैं कि चंद्रशेखर का असर खासकर 40 साल से कम उम्र के दलित युवाओं में दिखता है। इसी तरह ओवैसी मुस्लिम युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने 95 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन उसे 0.50% वोट भी नहीं मिले थे। मुर्तजा के मुताबिक, ओवैसी की सभाओं में भीड़ तो जुटती है, लेकिन वह वोटों में नहीं बदल पाती। मुस्लिम मतदाता ओवैसी या चंद्रशेखर की पार्टी को तभी वोट देंगे, जब उन्हें लगेगा कि उनके उम्मीदवार भाजपा को हरा सकते हैं। चंद्रशेखर की पार्टी को दलित युवाओं का समर्थन मिल सकता है, जिससे उसका वोट प्रतिशत बढ़ सकता है। उनका कहना है कि गठबंधन से कुछ सीटों पर दलित और मुस्लिम वोट एक साथ आ सकते हैं। इसके लिए दोनों दलों को मजबूत उम्मीदवार उतारने होंगे। ऐसा नहीं हुआ तो मुस्लिम आबादी के एक बड़े हिस्से का समर्थन मिलना मुश्किल होगा। उनके मुताबिक, गठबंधन को कुल मुस्लिम आबादी के 20% से ज्यादा का समर्थन मिलने की संभावना कम है। वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र प्रताप राणा भी इस बात से सहमत हैं। उनका कहना है कि मुस्लिम युवाओं के बीच ओवैसी लोकप्रिय हैं और वे उन्हें वोट भी दे सकते हैं। लेकिन मुस्लिम आबादी के बड़े हिस्से को लगता है कि यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन ही भाजपा सरकार को हरा सकता है। ऐसे में इस नए गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुस्लिम मतदाताओं का भरोसा जीतना होगी। चंद्रशेखर और ओवैसी के गठबंधन से तीन समीकरण बदलेंगे गठबंधन से सपा-बसपा को नुकसान यूपी में 41 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिम और दलित मतदाताओं की कुल आबादी 50% से ज्यादा है। इन सीटों पर दोनों समुदायों के वोट चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, 62 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की आबादी 25 से 70% के बीच है, जबकि 39 सीटों पर दलित मतदाता 30 से 42% तक हैं। वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र प्रताप राणा के मुताबिक, चंद्रशेखर और ओवैसी के साथ आने से सपा और बसपा के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है। चंद्रशेखर दलित वोटों में सेंध लगा सकते हैं, जिन्हें बसपा का पारंपरिक वोट बैंक माना जाता है। वहीं, ओवैसी की पार्टी मुस्लिम मतदाताओं के बीच सपा के समर्थन को प्रभावित कर सकती है। सपा के मुस्लिम-यादव (एम-वाई) समीकरण में मुस्लिम मतदाताओं की अहम भूमिका है। वरिष्ठ पत्रकार जैगम मुर्तजा कहते हैं- इस गठबंधन के चुनाव लड़ने से दलित और मुस्लिम बहुल सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। ऐसी स्थिति में वोटों का बंटवारा चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है। उनके मुताबिक, अगर दलित और मुस्लिम वोट अलग-अलग दलों में बंटते हैं, तो भाजपा को इन सीटों पर फायदा मिल सकता है। आरक्षित सीटों पर मुस्लिम वोटर्स का रोल यूपी की 84 आरक्षित सीटों में से कई सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। नगीना, पुरकाजी, धनौरा और नहटौर जैसी आरक्षित सीटों पर प्रत्याशी भले ही दलित समुदाय का होता है, लेकिन जीत-हार का फैसला 35-40% मुस्लिम मतदाताओं के रुख पर टिका रहता है। चंद्रशेखर भी मायावती की तरह जाटव समाज से आते हैं। बिहार का प्रयोग और यूपी में नफा-नुकसान यूपी से पहले यह गठबंधन 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में साथ आया था। बिहार की 243 सीटों में से गठबंधन ने 64 पर उम्मीदवार उतारे थे। इनमें एआईएमआईएम ने 35, चंद्रशेखर की पार्टी ने 25 और स्वामी प्रसाद मौर्य की जनता पार्टी ने 4 सीटों पर चुनाव लड़ा था। एआईएमआईएम के 5 उम्मीदवार सीमांचल क्षेत्र से चुनाव जीतने में सफल रहे। यानी गठबंधन को कुल 5 सीटों पर जीत मिली। वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र प्रताप राणा के मुताबिक, यूपी में यह गठबंधन बिहार के मुकाबले ज्यादा असर डाल सकता है। इसकी वजह है कि चंद्रशेखर यहां अपना मजबूत राजनीतिक आधार बना चुके हैं। वे पश्चिमी यूपी से आते हैं और नगीना से सांसद हैं। इस क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी-खासी आबादी है। पश्चिमी यूपी में मुस्लिम बहुल सीटें भी बड़ी संख्या में हैं। राणा के मुताबिक, अगर चंद्रशेखर और ओवैसी का गठबंधन यूपी में 5 से 6% वोट भी हासिल कर लेता है, तो यह उसके लिए बड़ी उपलब्धि होगी। —————- ये भी पढ़ें- आजमगढ़- एक घर में 14 ‘विकास यादव’, इनमें 7 महिलाएं:गोरखपुर में 6 ‘अनुराग’; सॉफ्टवेयर नहीं पकड़ पाया, SIR के बाद भी खामियां सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 15 अक्टूबर को ‘समाजवादी ECI ऑडिट-1’ नाम से एक रिपोर्ट जारी की। दावा किया- एक विधानसभा सीट पर एक ही व्यक्ति का नाम 10 बार है। सबूत के तौर पर आजमगढ़, लखनऊ और गोरखपुर के उदाहरण दिए। इस पर चुनाव आयोग ने कहा- जांच कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने इस दावे का सच जानने के लिए पड़ताल की।पढ़िए पूरी रिपोर्ट…