यूपी में भाजपा फुल चुनावी मूड में आ चुकी है। शनिवार को सभी 98 संगठनात्मक जिलों के प्रभारी तय कर दिए गए। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की तरफ से जारी लिस्ट में कई MLC और पूर्व पदाधिकारी शामिल हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष और महामंत्री विनोद तावड़े ने बीते दिनों लखनऊ प्रवास के दौरान पुराने कार्यकर्ताओं और पूर्व पदाधिकारियों को सक्रिय करने का मंत्र दिया था। उन्होंने कहा था कि चुनाव में पुराने अनुभवी कार्यकर्ताओं को सक्रिय नहीं किया तो वे घर बैठे रहेंगे। इससे पार्टी को नुकसान होगा। जिला प्रभारियों की सूची में बीएल संतोष और तावड़े की बात का असर दिखा है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अपनी टीम में शामिल होने से वंचित रहे अधिकांश पूर्व प्रदेश पदाधिकारियों को जिलों में प्रभारी बनाया है। पूर्व प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला और सुभाष यदुवंश इसके सटीक उदाहरण हैं। गोविंद को प्रदेश मुख्यालय प्रभारी तो सुभाष को सोशल मीडिया प्रभारी बनाया। पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष विजय बहादुर पाठक और मानवेंद्र सिंह को जिलों का प्रभार मिला 9 MLC को बनाया जिला प्रभारी भाजपा ने विधान परिष सदस्य यानी MLC अशोक कटारिया, अनूप गुप्ता, मानवेंद्र प्रताप सिंह, रजनीकांत माहेश्वरी, संतोष सिंह, प्रांशु दत्त द्विवेदी, विजय बहादुर पाठक, अरुण पाठक और धर्मेंद्र सिंह को जिलों में प्रभारी बनाया है। सीडी कांड से सुर्खियों में आए रावत को जिला भी नहीं मिला 2024 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बाराबंकी के सांसद रहे उपेंद्र रावत का विदेशी महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में वीडियो सामने आया था। इसके बाद भाजपा ने रावत का टिकट काट दिया था। लेकिन, जून में जारी भाजपा प्रदेश पदाधिकारियों की सूची में उपेंद्र रावत को प्रदेश महामंत्री बनाया गया। जानकारों का मानना है, केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन बीएल संतोष की इच्छा के विपरीत उपेंद्र रावत को प्रदेश महामंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद दिया था। लेकिन चौधरी और धर्मपाल ने उसके बाद उपेंद्र रावत को संगठन में महत्व नहीं दिया है। अधिकांश प्रदेश महामंत्री को एक क्षेत्र में प्रभारी बनाया है, लेकिन उपेंद्र रावत को किसी क्षेत्र का प्रभारी नहीं बनाया। उपेंद्र को किसी मोर्चा का प्रभारी भी नहीं बनाया है। इतना ही नहीं शनिवार को जारी जिला प्रभारियों की सूची में उपेंद्र रावत को किसी जिले का प्रभारी तक नहीं बनाया गया। पूजा पाल को भी नहीं मिला जिले का प्रभार चार महीने करना होगा जिलों में प्रवास भाजपा सूत्रों के मुताबिक, आगामी दिनों में पार्टी के जिलाध्यक्ष और जिला प्रभारियों की संयुक्त बैठक रखी जाएगी। बैठक में उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। विधानसभा चुनाव में समय कम बचा है, इसलिए जिला प्रभारियों को अब लगातार चार महीने जिलों में प्रवास करना होगा। उन्हें महीने में कम से कम तीन से चार बार जिले में रात्रि विश्राम भी करना होगा, ताकि जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों के राजनीतिक धरातल की जानकारी जुटा सकें। अब क्षेत्रवार संगठनात्मक जिले और प्रभारियों की लिस्ट देखिए… नीरज सिंह पर रायबरेली में खींचतान कम कराने की जिम्मेदारी संगठनात्मक क्षेत्र में ही रखा प्रभार पार्टी ने जिला प्रभारियों की नियुक्ति में अधिकांश नेताओं को उनके संगठनात्मक क्षेत्र के ही जिलों की जिम्मेदारी दी है। इससे उन्हें जिलों में आसानी से प्रवास करने के साथ ही वहां की जमीनी स्थिति की बेहतर जानकारी होने का फायदा मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी जिला और महानगर का प्रभारी अरुण पाठक को बनाया गया है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले के गोरखपुर महानगर की जिम्मेदारी महेश शुक्ला और गोरखपुर जिला की जिम्मेदारी अजय सिंह गौतम को दी गई है। प्रयागराज महानगर का प्रभारी राकेश त्रिवेदी को नियुक्त किया गया है। जिला प्रभारी सीधे पंकज चौधरी और धर्मपाल को करेंगे रिपोर्ट सभी नवनियुक्त जिला प्रभारी जिलों में प्रवास कर संगठनात्मक गतिविधियों, अभियान और चुनावी मुद्दे की रिपोर्ट सीधे प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह को करेंगे। लिहाजा उनका जिले में जिलाध्यक्ष से अधिक बड़ा राजनीतिक कद होगा। बुलंदशहर में प्रभारी और जिलाध्यक्ष सजातीय बुलंदशहर में जिलाध्यक्ष और जिला प्रभारी सजातीय होने से जिले में पार्टी के कार्यकर्ताओं में अंदरखाने विरोध शुरू हो गया है। जिलाध्यक्ष विकास सिंह चौहान और जिला प्रभारी सुरेश राणा ठाकुर बिरादरी से है। पंकज चौधरी और धर्मपाल की बराबर चली जिला प्रभारियों की सूची में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह की 50-50 चली है। दोनों के करीबी माने जाने वाले कार्यकर्ताओं को जिला प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले प्रदेश पदाधिकारियों की सूची में भी महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह की पसंद को शीर्ष नेतृत्व ने महत्व दिया था। उनके करीबी माने जाने वाले कई कार्यकर्ताओं को प्रदेश पदाधिकारी बनाया गया था। वहीं, क्षेत्रीय टीमों के गठन में भी धर्मपाल सिंह की भूमिका प्रमुख रही थी। ————————- यह खबर भी पढ़ें… योगी बोले- मैं नौकरी देता जाऊंगा, वह गिनते जाएं, पहले चाचा-भतीजे नौकरियों पर डकैती डालते थे, आज उपदेश दे रहे सीएम योगी ने शनिवार को लखनऊ में अखिलेश और शिवपाल यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा- पहले नौकरियों में डकैती डालने के लिए चाचा-भतीजे की जोड़ी बेखौफ निकल पड़ती थी। आज उपदेश देने की भूमिका में हैं। 2027 के बाद ये लोग उपदेश भी नहीं दे पाएंगे। वे नोट कर लें कि अगले 6 महीने में एक लाख से अधिक नौजवानों को सरकारी नौकरी देने जा रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…