काशी में सीएम योगी ने सोमवार को कहा- जिन्होंने सनातन को मिटाने का प्रयास किया, आज वे खुद मिट्टी में मिल चुके हैं। मुहम्मद गौरी और औरंगजेब जैसे आक्रांताओं का अब कोई नाम लेने वाला नहीं है। सोमनाथ और काशी दोनों हमें इतिहास से संदेश देते हैं कि सनातन संस्कृति पर आक्रमण हो सकते हैं, लेकिन उसे पराजित नहीं किया जा सकता। विनाश क्षणिक होता है, जबकि सृजन शाश्वत होता है। इससे पहले राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम ने श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन किया। मंदिर परिसर में ‘ॐ’ का जाप किया। यहां सीएम ने राज्यपाल को पटका और रुद्राक्ष की माला पहनाई। सीएम और राज्यपाल ने पीएम मोदी को गुजरात के सोमनाथ मंदिर में जलाभिषेक करते हुए लाइव देखा। दरअसल, गुजरात के सोमनाथ में आज मंदिर के जीर्णोद्धार के 75 साल पूरे हो रहे हैं। 11 मई 1951 को स्वतंत्र भारत में नए सिरे से बनाए गए सोमनाथ मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी। इतिहास के इस बड़े घटनाक्रम के उपलक्ष्य में सोमनाथ अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। इसी मौके पर काशी में भी कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें छात्राओं और छात्रों ने शंखनाद के साथ डमरू वादन किया। गुजरात से काशी पहुंचीं महिलाओं ने पीएम मोदी के लिए ‘वोट फॉर भाईसाहब’ के नारे लगाए। तस्वीरें देखिए- सीएम की 5 बड़ी बातें पढ़िए 1- औरंगजेब ने विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त कर गुलामी का ढांचा खड़ा किया
सीएम योगी ने कहा कि हम सब इस बात को जानते हैं कि मुहम्मद गौरी से लेकर मुगलों तक कई विदेशी आततायियों ने हमारी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने का प्रयास किया। औरंगजेब ने बाबा विश्वनाथ के प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर गुलामी का ढांचा यहां खड़ा किया। लेकिन वे भारत की आत्मा को नहीं तोड़ पाए। वे समझ नहीं पाए कि सनातन केवल मंदिरों की दीवारों में नहीं, बल्कि भारत की चेतना में बसता है। भारत की चेतना आत्मा को अजर और अमर मानकर चलती है। यही भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत हम सबके सामने झलकती है। 2- काशी विश्वनाथ और सोमनाथ मंदिर भारत के गौरव
सीएम ने कहा- काशी विश्वनाथ धाम हो या सोमनाथ महादेव का मंदिर, दोनों भारत के गौरव के प्रतीक हैं। काशी में काशी विश्वनाथ धाम का दिव्य और भव्य स्वरूप देखने को मिल रहा है। सोमनाथ मंदिर फिर उसी तेजस्विता के साथ भारत के गौरव का उद्घोष कर रहा है। दुर्भाग्य से आज भी ऐसी कई शक्तियां हैं, जो भारत के गौरव के प्रतीक इन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को आगे बढ़ते हुए देखना नहीं चाहतीं। हम लोग यह भी जानते हैं कि वे कौन लोग थे, जिन्होंने सोमनाथ महादेव मंदिर के पुनर्प्रतिष्ठा कार्यक्रम में बाधा डाली थी। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में भी इन लोगों ने बार-बार बाधा खड़ी करने का प्रयास किया था। 3- आक्रांताओं ने सोमनाथ मंदिर के वैभव को खंडित करने का प्रयास किया
सीएम ने कहा- 1000 साल पहले विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी के आक्रमण सहित अन्य विदेशी आक्रांताओं ने सोमनाथ मंदिर पर 17 बार आक्रमण किया। मंदिर के वैभव को खंडित करने का प्रयास किया गया। उन्हें यह भ्रम था कि मूर्ति को खंडित कर और इसके वैभव को लूटकर भारत की आत्मा को सदैव के लिए समाप्त किया जा सकता है। यह केवल सोमनाथ महादेव मंदिर के साथ ही नहीं हुआ, बल्कि भारत के हजारों स्थलों के साथ हुआ है। इसमें काशी विश्वनाथ धाम भी शामिल है। 4- पहले भारतीयता और सनातन परंपरा को लेकर वैसी सोच नहीं थी
सीएम योगी ने कहा कि आजादी के बाद एक समय ऐसा भी था, जब भारत अपनी सनातन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को मजबूती से आगे बढ़ा सकता था। लेकिन उस दौर में भारत, भारतीयता और सनातन परंपरा को लेकर वैसी सोच नहीं थी, जो देश के आत्मसम्मान को दोबारा स्थापित कर सके। उन्होंने कहा कि आज पीएम मोदी के मजबूत नेतृत्व में देश को नई दिशा मिली है। इसका नतीजा यह है कि आज हम उन परंपराओं और मूल्यों को फिर से सम्मान दिला पा रहे हैं, जिन्हें करीब एक हजार साल पहले विदेशी आक्रांताओं ने नष्ट करने की कोशिश की थी। सोमनाथ महादेव के पुनर्प्रतिष्ठा के 75 साल पूरे होने के मौके पर काशी विश्वनाथ में इसका उदाहरण देखने को मिल रहा है। 5- शाश्वत के प्रतीक हैं भारत के देवस्थल
सीएम ने कहा- तत्कालीन सरकार के विरोध के बावजूद भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद गुजरात गए। उन्होंने कहा था कि भौतिक वस्तुओं को कुछ समय के लिए क्षतिग्रस्त और विखंडित किया जा सकता है, लेकिन आक्रांता यह भूल गए कि भारत की आत्मा अजर और अमर है। उसी शाश्वत का प्रतीक हैं भारत के देवस्थल। सीएम योगी से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
सीएम योगी ने कहा कि हम सब इस बात को जानते हैं कि मुहम्मद गौरी से लेकर मुगलों तक कई विदेशी आततायियों ने हमारी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने का प्रयास किया। औरंगजेब ने बाबा विश्वनाथ के प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर गुलामी का ढांचा यहां खड़ा किया। लेकिन वे भारत की आत्मा को नहीं तोड़ पाए। वे समझ नहीं पाए कि सनातन केवल मंदिरों की दीवारों में नहीं, बल्कि भारत की चेतना में बसता है। भारत की चेतना आत्मा को अजर और अमर मानकर चलती है। यही भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत हम सबके सामने झलकती है। 2- काशी विश्वनाथ और सोमनाथ मंदिर भारत के गौरव
सीएम ने कहा- काशी विश्वनाथ धाम हो या सोमनाथ महादेव का मंदिर, दोनों भारत के गौरव के प्रतीक हैं। काशी में काशी विश्वनाथ धाम का दिव्य और भव्य स्वरूप देखने को मिल रहा है। सोमनाथ मंदिर फिर उसी तेजस्विता के साथ भारत के गौरव का उद्घोष कर रहा है। दुर्भाग्य से आज भी ऐसी कई शक्तियां हैं, जो भारत के गौरव के प्रतीक इन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को आगे बढ़ते हुए देखना नहीं चाहतीं। हम लोग यह भी जानते हैं कि वे कौन लोग थे, जिन्होंने सोमनाथ महादेव मंदिर के पुनर्प्रतिष्ठा कार्यक्रम में बाधा डाली थी। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में भी इन लोगों ने बार-बार बाधा खड़ी करने का प्रयास किया था। 3- आक्रांताओं ने सोमनाथ मंदिर के वैभव को खंडित करने का प्रयास किया
सीएम ने कहा- 1000 साल पहले विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी के आक्रमण सहित अन्य विदेशी आक्रांताओं ने सोमनाथ मंदिर पर 17 बार आक्रमण किया। मंदिर के वैभव को खंडित करने का प्रयास किया गया। उन्हें यह भ्रम था कि मूर्ति को खंडित कर और इसके वैभव को लूटकर भारत की आत्मा को सदैव के लिए समाप्त किया जा सकता है। यह केवल सोमनाथ महादेव मंदिर के साथ ही नहीं हुआ, बल्कि भारत के हजारों स्थलों के साथ हुआ है। इसमें काशी विश्वनाथ धाम भी शामिल है। 4- पहले भारतीयता और सनातन परंपरा को लेकर वैसी सोच नहीं थी
सीएम योगी ने कहा कि आजादी के बाद एक समय ऐसा भी था, जब भारत अपनी सनातन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को मजबूती से आगे बढ़ा सकता था। लेकिन उस दौर में भारत, भारतीयता और सनातन परंपरा को लेकर वैसी सोच नहीं थी, जो देश के आत्मसम्मान को दोबारा स्थापित कर सके। उन्होंने कहा कि आज पीएम मोदी के मजबूत नेतृत्व में देश को नई दिशा मिली है। इसका नतीजा यह है कि आज हम उन परंपराओं और मूल्यों को फिर से सम्मान दिला पा रहे हैं, जिन्हें करीब एक हजार साल पहले विदेशी आक्रांताओं ने नष्ट करने की कोशिश की थी। सोमनाथ महादेव के पुनर्प्रतिष्ठा के 75 साल पूरे होने के मौके पर काशी विश्वनाथ में इसका उदाहरण देखने को मिल रहा है। 5- शाश्वत के प्रतीक हैं भारत के देवस्थल
सीएम ने कहा- तत्कालीन सरकार के विरोध के बावजूद भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद गुजरात गए। उन्होंने कहा था कि भौतिक वस्तुओं को कुछ समय के लिए क्षतिग्रस्त और विखंडित किया जा सकता है, लेकिन आक्रांता यह भूल गए कि भारत की आत्मा अजर और अमर है। उसी शाश्वत का प्रतीक हैं भारत के देवस्थल। सीएम योगी से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…