यूपी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय राय आज, शनिवार को वाराणसी के पिंडरा में मां नकटेश्वरी धाम में शक्ति प्रदर्शन करेंगे। वह पार्टी से नाराज बताए जा रहे हैं। इसकी वजह 11 अक्टूबर को लखनऊ के पार्टी मुख्यालय में ममता चौधरी के साथ हुआ विवाद है। डैमेज कंट्रोल करने के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें दिल्ली बुलाया था। 14 अक्टूबर को वे गए भी, लेकिन राहुल गांधी से मुलाकात नहीं हुई। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या अजय राय कांग्रेस छोड़ देंगे? अगर पार्टी छोड़ते हैं, तो क्या पुराने दल में वापसी करेंगे या अनुप्रिया पटेल के साथ नई सियासी पारी शुरू करेंगे? पढ़िए पूरी स्टोरी… अजय राय तीन साल से ज्यादा समय तक यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे। हालांकि, 2 अक्टूबर को अचानक उन्हें पद से हटाकर आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। इससे पहले आराधना मिश्रा विधानमंडल दल की नेता थीं। अजय राय ने पार्टी के इस फैसले को स्वीकार किया और आराधना मिश्रा को बधाई दी। उन्होंने कहा, “मैं राहुल गांधी का सिपाही हूं।” कौन अध्यक्ष… इस तंज से शुरू हुआ विवाद 11 अक्टूबर को नवरात्र के पहले दिन आराधना मिश्रा ने प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालने का कार्यक्रम रखा था। इसमें शामिल होने के लिए अजय राय भी वाराणसी से अपने समर्थकों के साथ पहुंचे। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय के समर्थक भीड़ से रास्ता देने के लिए कह रहे थे। वे बोल रहे थे, “अध्यक्ष जी आ रहे हैं।” इस पर कांग्रेस की मध्य क्षेत्र की महिला मोर्चा अध्यक्ष ममता चौधरी ने तंज कसते हुए कहा, “कौन अध्यक्ष? ऐसे अध्यक्ष को तो मैं देखना भी पसंद नहीं करती।” ममता की इस टिप्पणी पर अजय राय के समर्थकों ने आपत्ति जताई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी बढ़ गई। विवाद इतना बढ़ा कि अजय राय के समर्थकों ने जूते तक निकाल लिए। घटना से नाराज अजय राय पार्टी कार्यालय से जाने लगे। राज्यसभा सांसद और आराधना मिश्रा के पिता प्रमोद तिवारी ने उन्हें किसी तरह मनाया। हालांकि, इस घटना के बाद अजय राय की नाराजगी की चर्चा तेज हो गई। पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ममता चौधरी के आराधना मिश्रा से अच्छे संबंध हैं। ऐसे में ममता की टिप्पणी को लेकर चर्चा है कि उन्हें मोना मिश्रा का समर्थन हासिल था। हालांकि, इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है। पार्टी ने अब तक ममता चौधरी के खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं की है। अजय के खिलाफ साजिश- पक्ष रखने का मौका तक नहीं अजय राय ने 19 अगस्त 2023 को यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाली थी। उस समय पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार चुकी थी। उसके सिर्फ दो विधायक चुने गए थे और कार्यकर्ताओं का मनोबल भी टूट चुका था। तीन साल से ज्यादा के कार्यकाल में अजय राय ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश की। प्रदेश में होने वाली छोटी-बड़ी घटनाओं पर वे सक्रिय नजर आए और लोगों से जुड़ाव बढ़ाया। बताया जाता है कि पार्टी कार्यालय का पूरा खर्च भी उन्होंने अपने स्तर से उठाया। लोकसभा चुनाव में पार्टी के सांसदों की संख्या 2019 के एक से बढ़कर 2024 में छह हो गई। अब अजय राय विधानसभा चुनाव में पार्टी की ताकत बढ़ाने में जुटे थे, लेकिन अचानक उन्हें पद से हटा दिया गया। बताया जाता है कि अजय राय को हटाने के लिए यूपी कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम पिछले एक महीने से सक्रिय थे। उन्होंने पार्टी के बड़े नेताओं को समझाया कि अजय राय के नेतृत्व में कांग्रेस विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएगी। अजय राय के सख्त व्यवहार को भी बदलाव की एक वजह बताया जा रहा है। इसके अलावा जातीय समीकरणों की चर्चा भी सामने आई। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी इस बदलाव के पक्ष में नहीं थे। वे चाहते थे कि विधानसभा चुनाव तक प्रदेश अध्यक्ष बदलने का फैसला टाल दिया जाए। शुरुआत में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसी मुस्लिम नेता को सौंपने पर विचार किया गया। हालांकि, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रियंका गांधी चाहती थीं कि यह पद ब्राह्मण चेहरे आराधना मिश्रा को दिया जाए। आखिरकार आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। बताया जाता है कि अजय राय इस बात से भी नाराज हैं कि उन्हें पद से हटाने के लिए उनके खिलाफ साजिश रची गई। राजेंद्र पाल गौतम की रिपोर्ट के बाद उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया था, लेकिन सूत्रों का दावा है कि प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल के विरोध के चलते उनकी बात नहीं सुनी गई। अजय के लिए कांग्रेस छोड़ना आसान नहीं पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद राहुल गांधी ने उन्हें तुरंत AICC का सदस्य बनाने और किसी राज्य का प्रभारी बनाने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, अजय राय ने इसे स्वीकार नहीं किया। राहुल गांधी लगातार अजय राय के संपर्क में हैं। ऐसे में उनके लिए कांग्रेस छोड़ने का फैसला आसान नहीं होगा। अजय राय के करीबी एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे। वे तभी पार्टी छोड़ सकते हैं, जब खुद राहुल गांधी उनके साथ दुर्व्यवहार करें। नेता के मुताबिक, अजय राय के पास दूसरे राजनीतिक विकल्प भी सीमित हैं। क्या भाजपा में वापस लौट सकते हैं अजय राय अजय राय ने राजनीति की शुरुआत RSS और भाजपा के छात्र संगठन ABVP से की थी। वे भाजपा के टिकट पर 1996, 2002 और 2007 में लगातार तीन बार कोलअसला विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने पार्टी और विधायकी, दोनों से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वे सपा में शामिल हो गए और वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। उनके इस्तीफे से कोलअसला विधानसभा सीट खाली हो गई। उपचुनाव में वे निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर फिर विधायक चुने गए। 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले अजय राय कांग्रेस में शामिल हो गए। इसी साल उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर पिंडरा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन तीनों बार हार गए। पिंडरा सीट पर भी आसान नहीं होगी राह वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय के मुताबिक, अजय राय की भाजपा में वापसी मुश्किल है। अजय राय पिंडरा सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। फिलहाल इस सीट से भाजपा के अवधेश सिंह विधायक हैं। वे भी अजय राय की तरह भूमिहार समाज से आते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में अजय राय पिंडरा सीट पर तीसरे स्थान पर रहे थे, जबकि बसपा के बाबूलाल दूसरे नंबर पर थे। 2017 के चुनाव में भी नतीजा ऐसा ही रहा था। भाजपा से जुड़े एक सूत्र का दावा है कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए अजय राय ने अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के मामले की खुलकर आलोचना की थी। ऐसे में उनकी भाजपा में वापसी की संभावना कम है। अनुप्रिया पटेल के साथ गए, तब भी सीट पर फंसेगा पेंच दिल्ली जाकर भी राहुल गांधी से मुलाकात क्यों नहीं की 14 अक्टूबर को दावा किया गया कि राहुल गांधी ने अजय राय को दिल्ली बुलाया है। अजय राय दिल्ली गए, लेकिन राहुल गांधी से उनकी मुलाकात नहीं हुई। इससे पहले राहुल गांधी के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुलाया गया था, लेकिन अजय राय उसमें भी शामिल नहीं हुए। इसके बाद चर्चा होने लगी कि वे नाराजगी के चलते राहुल गांधी से नहीं मिले। हालांकि, दैनिक भास्कर से बातचीत में अजय राय ने पार्टी से नाराज होने की बात खारिज की। उन्होंने कहा, मैं दिल्ली बच्चे के एडमिशन के सिलसिले में गया था। राहुल गांधी से मुलाकात का कोई कार्यक्रम नहीं था। घर में कोई नाराज होता है क्या? कांग्रेस मेरा परिवार और घर है। पिंडरा में 17 अक्टूबर को अचानक शक्ति प्रदर्शन क्यों? 11 अक्टूबर को कांग्रेस कार्यालय में हुए विवाद के बाद अजय राय ने 14 अक्टूबर की रात सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। इसमें उन्होंने 17 अक्टूबर को दोपहर 12:30 बजे पिंडरा में मां नकटेश्वरी धाम के पास रैली करने का ऐलान किया। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “पिंडरा मेरा परिवार।” वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय के मुताबिक, प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद अजय राय के सामने अपने विधानसभा क्षेत्र में तैयारी करने का विकल्प है। पिंडरा में शक्ति प्रदर्शन करके वे अपने समर्थकों का मनोबल बढ़ाना चाहेंगे। वहीं, पार्टी से जुड़े लोगों का मानना है कि 11 अक्टूबर के विवाद की जांच के लिए बनाई गई कमेटी की रिपोर्ट भी 17 अक्टूबर को आने वाली है। ऐसे में अजय राय रैली के जरिए अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं। इसके साथ ही वे यह संदेश भी देना चाहते हैं कि कांग्रेस में उनकी कितनी अहमियत है। यूपी कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने दैनिक भास्कर के सवाल पर कहा, “अजय राय हमारे परिवार के सदस्य हैं। वरिष्ठ नेता हैं और हमारे बड़े भाई हैं।” —————- ये पढ़ें – सपा के बागी 3 विधायकों का भाजपा से टिकट पक्का:बाहुबली अभय के खिलाफ संगठन; विनोद की कालपी सीट पर ‘निषाद कोटे’ का पेंच सपा के 7 बागी विधायकों में से 3 को भाजपा से टिकट मिलना पक्का माना जा रहा है। इनमें ऊंचाहार के विधायक मनोज पांडेय हैं, जिन्हें योगी कैबिनेट में मंत्री बनाया गया है। चायल विधायक पूजा पाल को भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बना चुकी हैं। राकेश प्रताप सिंह ने 14 अक्टूबर को भाजपा जॉइन कर ली है। सपा से बगावत करने वाले 3 विधायकों को कहां से टिकट मिल सकता है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट…