संभल दंगे- मारे गए शख्स के परिवार को जमीन दी:1978 में हत्या करके कुएं में लाश फेंक दी थी, मंत्री बोले- संभल आज आजाद हुआ

संभल के 1978 के दंगा पीड़ित परिवारों को खाली कराई गई कब्रिस्तान की 3 बीघा जमीन पर बसाया जा रहा। गुरुवार को दंगा पीड़ित रामशरण रस्तोगी के परिवार को 100 वर्ग मीटर जमीन का पट्‌टा दिया गया। मंत्री जेपीएस राठौर ने कहा- संभल में 48 साल पहले जिनके आशियाने जलाए गए, आज उनके आंसू पोंछने आया हूं। न जाने कितनी पीढ़ियां इंतजार करते-करते गुज़र गईं। भारत 1947 में आजाद हुआ था। लेकिन सही मायने में संभल आज के दिन आज़ाद हुआ है। मुरादाबाद मंडल कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने कहा कि दंगा पीड़ितों को बसाने की प्रक्रिया आज से शुरू हुई है। जितने भी लोग पलायन कर गए थे, उन सभी से हम रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि वो अपने प्रमाणों के साथ जिला प्रशासन से संपर्क करें। हम सभी को जमीन देंगे। इसके पहले प्रभारी मंत्री जेपीएस राठौर ने रामशरण रस्तोगी की बहू रुक्मिनी को पट्‌टे की जमीन का प्रमाण-पत्र दिया। मंत्री ने रुक्मिनी और उनके बेटे कपिल के साथ जमीन का भूमि-पूजन भी किया।कब्रिस्तान से खाली कराई गई जमीन कोतवाली क्षेत्र के शेर खां सराय गांव में टीले वाली मस्जिद के पास है। तस्वीरें देखिए… सीएम योगी ने दंगा पीड़ितों को बसाने का दिया था निर्देश 7 अप्रैल को मथुरा में सीएम योगी ने कहा था कि संभल में 1978 में हुए दंगों में सैकड़ों हिंदुओं को मारा गया। डर के मारे लोग दिल्ली समेत अन्य शहरों में पलायन कर गए। पीड़ित परिवार अपनी जमीन के कागज लेकर आएं तो उन्हें उनकी जमीन वापस दिलाई जाएगी। उनको उनकी जमीन पर कब्जा दिलवाऊंगा। मुख्यमंत्री ने बनवारी लाल गोयल के परिवार का उदाहरण दिया था। उनकी ‘मुरारी लाल एंड संस’ नाम से दुकान थी। दंगे के दौरान दंगाइयों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली से दुकान का गेट तोड़ दिया। दंगाइयों ने पहली मंजिल पर मौजूद लोगों को नीचे उतारा और दुकान पर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी, जिससे बनवारी लाल समेत कई लोग जिंदा जल गए। अब जानिए संभल दंगों के बारे में… संभल में 29 मार्च 1978 को सांप्रदायिक दंगा भड़का था। इस दंगे में करीब 150 लोग मारे गए थे। इनमें रामशरण रस्तोगी की भी जान गई थी। रामशरण रस्तोगी के पोते कपिल रस्तोगी बताते हैं कि एकता पुलिस चौकी के मोहल्ला महमूद खां सराय के मुख्य बाजार में मेरे बाबा रामशरण की किराने की दुकान थी। दंगाइयों की भीड़ ने बाबा की हत्या कर दी थी। लूटपाट कर दुकान में आग लगा दी थी। बाबा की लाश को दुकान के सामने कुएं में तराजू और बांट बांधकर फेंक दिया था। तीन दिन बाद उनका शव बरामद हुआ था। शरीर पर चाकू से गोदने के निशान थे। पैरों पर कुल्हाड़ी के गहरे घाव थे। दंगा पीड़ित अनिल कुमार रस्तोगी अपनी जली हुई दुकान की फोटो दिखाकर कहते हैं- मेरी दलहन की दुकान थी। दंगा भड़कने के बाद मैं जान बचाने के लिए दुकान छोड़कर घर भाग गया था। जब लौटा तो देखा कि दंगाइयों ने मेरी दुकान में आग लगा दी। सारा सामान जल गया। उस समय करीब 1 लाख माल जलकर राख हो गया था। दंगे के कुछ दिन बाद पीएसी का पहरा रहा। लेकिन हम लोग डर के मारे पलायन कर दिल्ली चले गए थे। संभल में हो रहे कार्यक्रम के अपडेट के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइये…