यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने दावा किया- रामगोपाल यादव ने गृहमंत्री अमित शाह को सपा के बागी सांसदों की लिस्ट सौंपी है। इसके बाद चर्चा शुरू हुई कि क्या TMC और शिवसेना (उद्धव) की तरह सपा भी टूटने जा रही है? सपा को तोड़ने के लिए कितने सांसदों की जरूरत होगी? राजभर के दावों की सच्चाई जानने के लिए दैनिक भास्कर ने सपा के सभी 37 सांसदों से बात की। उनसे 2 सवाल पूछे। पहला- राजभर के दावे में कितना दम है? दूसरा- क्या आप सपा से नाराज हैं? 16 सांसदों से बात नहीं हो सकी। 20 सांसदों के बयानों से एक कॉमन बात निकली। वो बोले- राजभर हवाबाज हैं। TRP बटोरने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं। जो डरेगा, वही जाएगा। पूर्वांचल के जिन सांसदों को टारगेट किया, वो बोले- हवाबाजी कर रहे ओम प्रकाश राजभर का कहना है,- पूर्वांचल में सपा के मुस्लिम और यादव सांसदों को छोड़कर ज्यादातर दलित, पिछड़े और जनरल कैटेगरी के सांसद पार्टी छोड़ने के लिए तैयार हैं। सपा ने 2024 लोकसभा चुनाव में 37 सीटें जीती थीं। इनमें 17 सीटें पूर्वांचल की कौशांबी, अंबेडकरनगर, श्रावस्ती, बस्ती, संतकबीरनगर, लालगंज, आजमगढ़, घोसी, सलेमपुर, बलिया, जौनपुर, मछलीशहर, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, गाजीपुर, चंदौली और सोनभद्र शामिल हैं। गाजीपुर में मुस्लिम सांसद अफजाल अंसारी हैं और आजमगढ़ में धर्मेंद्र यादव हैं। इनमें से 10 सांसदों से दैनिक भास्कर की बात हुई। पुष्पेंद्र सरोज (कौशांबी) – राजभर को अपनी पार्टी देखनी चाहिए। वो बताएं कि उनके साथ कितने विधायक हैं? भाजपा से आज से नहीं, बहुत पहले से हम लोगों पर डोरे डाल रही है। जो डरेगा, वही कहीं और जाएगा। हम लोग सपा छोड़कर कहीं नहीं जा रहे। राजीव राय (घोसी) – राजभर को बड़बोलापन की बीमारी है। ये अब लाइलाज हो चुकी है। वो अपने बेटों के टिकट के लिए बदहवासी में कुछ भी बोले जा रहे हैं। सपा सांसदों का भाजपा में जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। दरोगा प्रसाद सरोज (लालगंज) – सपा को वही छोड़ सकता है, जो खुद चोर होगा। दलाली में कहीं फंसा होगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने टिकट दिया, सबको सम्मान दिया। बाकी सब मिथ्या है। राम प्रसाद चौधरी (बस्ती) – वो हवाबाज हैं। उनका यही काम है, इसमें कोई सच्चाई नहीं। उनकी यही इमेज है। मोदीजी के सामने बड़े वफादार हैं, भाजपा के पिछड़े नेता ऐसा ही कर रहे हैं। सपा का कोई सांसद कहीं नहीं जा रहा। सनातन पांडेय (बलिया) – अब तक सपा ने मुझे MLA और MP बनने का मौका दिया, लेकिन अब OP राजभर ने मुझे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर कर दिया। सपा टूट नहीं रही है। बाबू सिंह कुशवाहा (जौनपुर) – वो जिस सूची की बात कर रहे हैं, वो है कहां? वो भाजपा के सहयोगी हैं। उन्हें उन लोगों के नाम का भी खुलासा करना चाहिए, जिनके बारे में वो कह रहे हैं कि वो सपा से जा रहे हैं। ये भी बताएं कि इन लोगों ने गलत क्या किया है? प्रिया सरोज (मछलीशहर) – ऐसे व्यक्ति के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती, जिसकी कथनी और करनी में अंतर हो। सपा ने उन्हें 2024 में बुरी तरह से हराया था और 2027 में फिर हराएंगे। सपा के सभी सांसद अपने नेता के प्रति वफादार हैं। कोई कहीं नहीं जा रहा है। वीरेंद्र सिंह (चंदौली) – भाजपा में उन्हें अपनी विश्वसनीयता साबित करनी है। सपा के साथ थे, तो योगी को गाली देते थे। अब भाजपा में हैं, तो सपा को गाली दे रहे हैं। दीपक बुझने वाला होता है, तो फड़फड़ाता है। हमने 17 सीटें दी थीं, हम चाहते हैं इस बार उन्हें 25 सीट मिलें। सपा नेता भ्रष्टाचार से घिरे, क्या ये नैरेटिव सेट करना चाह रहे ‘बड़ी टूट’ की स्क्रिप्ट से असंतुष्ट सांसदों को संकेत राजभर ने खुलेआम दावा किया है कि शिवसेना और टीएमसी की तरह यूपी में भी सपा में बहुत बड़ी टूट होने वाली है। पूरी सपा भाजपा में शामिल होने को तैयार बैठी है। इस तरह के माहौल से उन असंतुष्ट सपा सांसदों को संकेत दिया है, जो पाला बदलने की सोच रहे हैं। खुद अखिलेश यादव ने भी इसके पलटवार में माना कि जो डर जाएगा या जिसके स्वार्थ होंगे, वह चला जाएगा। भ्रष्टाचार के मुद्दों को हवा देकर सपा को घेरना राजभर ने इस बयान को खनन घोटाले और गोमती रिवर फ्रंट घोटाले की जांच से जोड़ा है। उनका दावा है कि जांच की आंच से अखिलेश यादव, शिवपाल यादव और गायत्री प्रजापति जैसे नेताओं को बचाने के लिए राम गोपाल यादव ने यह ‘लिस्ट’ सौंपी है। इसके जरिए राजभर जनता के बीच यह नैरेटिव सेट करना चाहते हैं कि सपा के नेता भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे हैं। खुद को बचाने के लिए सरेंडर कर रहे हैं। सपा सांसदों ने कहा- राजभर अपने सांसद संभालें अखिलेश यादव (कन्नौज) – भाजपा कई दलों को तोड़ चुकी है। यूपी में भी सपा के कई विधायक, MLC उन्होंने तोड़े थे। क्या स्वार्थ रहा होगा, क्या लालच रहा होगा क्या डर रहा होगा? जो डर जाएगा, वो अपना दल छोड़कर चला जाएगा। अगर भाजपा से मुकाबला करना है, तो बहादुर लोगों की टीम होनी चाहिए। मुकाबला करने के लिए सपा तैयार है। इकरा हसन (कैराना) – राजभर को अपनी पार्टी देखनी चाहिए कि उनके विधायक साथ हैं या नहीं। मैं अपने बारे में कह सकती हूं कि मैं सपा में हूं और रहूंगी…कहीं नहीं जा रही। हरेंद्र मलिक (मुजफ्फरनगर) – ओपी राजभर सपा में आने का प्रयास कर रहे हैं। यहां उन्हें स्वीकार नहीं किया जा रहा। भाजपा में अपने नंबर बढ़ाने के लिए हवाबाजी कर रहे हैं। सपा सांसदों में न मतभेद है, न मनभेद है। रुचिवीरा (मुरादाबाद) – वो नॉन सीरियस व्यक्ति हैं। कुछ भी बोलते रहते हैं। वो खुद सपा में आना चाहते हैं। उनके बेटे राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने की कोशिश कर रहे थे। वहां दाल नहीं गली, तो इस तरह की अफवाह फैला रहे हैं। देवेश शाक्य (एटा) – जिसका न सुबह का पता और न शाम का, उनके बयान को महत्व देने की जरूरत नहीं। भाजपा और राजभर अपने विधायकों और सांसदों को संभाले। राजभर का खुद पता नहीं कि वे कल कहां थे और कल कहां रहेंगे? मोहिबुल्लाह (रामपुर) – सपा के सांसद एकजुट हैं, अखिलेश यादव के साथ हैं। राजभर ने हकीकत से दूर इल्जाम लगाया है, जिसका कोई आधार नहीं। रामगोपाल यादव ने जो पर्ची दी थी, वो वीडियो तो 1 साल पुराना है। आदित्य यादव (बदायूं) – भाजपा के लोग षडयंत्र करते हैं, सपा का कोई सांसद टूट नहीं रहा। ये लोग अपनी TRP बढ़ाने के लिए ऐसा बोल रहे। चुनाव के साथ इस तरह से सीटें बढ़ाना चाहते हैं। मुझे तो लगता है कि राजभर को ट्वीट करने का भी पैसा मिलता है। नीरज मौर्य (आंवला) – राजभर के बेटे की 2024 में जिस तरह से हार हुई, वो उससे अभी उबर नहीं सके हैं। सपा तो एकजुट है, 2024 में जो परिणाम आया, उससे ज्यादा सीटें 2027 में आएंगी। उत्कर्ष वर्मा ‘मधुर‘ (खीरी) – लगता है कि वो भी वनस्पति का सेवन करने लगे हैं, वो झूठे हैं। 2022 के चुनाव में क्या-क्या बोला था। वो अनाप-शनाप बातें करते हैं। राजभर इसलिए बौखला रहे हैं, क्योंकि सपा की सरकार बनने वाली है। सपा के सांसद अखिलेश यादव के साथ हैं। आनंद भदौरिया (धौरहरा) – ये केवल लफ्फाजी है, इसमें थोड़ी भी सच्चाई नहीं है। कोई भी सपा नेता अपनी विचारधारा से समझौता नहीं कर सकता। अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए हम सब मजबूती से खड़े हैं। धर्मेंद्र यादव (आजमगढ़) – हमारे चाचा राम गोपाल यादव ने जो प्रतिक्रिया दी है, वही हम भी कहेंगे। रामभुआल निषाद (सुल्तानपुर) – राजभर को मायावती ने गाली देकर भगाया था। अखिलेश यादव की वजह से उन्हें संजीवनी मिल गई। 6 सीट भी मिलीं। अब वो एक भी सीट को जीतकर दिखा दें। वो क्या हैं, ये सबने देखा है। सपा ने हमें सब कुछ दिया, हम भाजपा में क्यों जाएंगे। क्या कहता है दल-बदल कानून सपा के 37 में 25 सांसद टूटें, तभी दल-बदल कानून से बच सकेंगे आसान शब्दों में समझें, तो दल-बदल कानून के तहत किसी भी पार्टी के सांसदों या विधायकों को अगर दूसरे दल में जाना है, तो कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्यों का एक साथ होना जरूरी है। अगर संख्या इससे कम रही, तो दल छोड़ने वाले नेताओं की सदस्यता चली जाएगी। समाजवादी पार्टी के मामले में गणित बिल्कुल साफ है। लोकसभा में सपा के कुल 37 सांसद हैं। इस नियम के मुताबिक, भाजपा में शामिल होने के लिए कम से कम 25 सांसदों का एक गुट बनाना होगा। अगर यह संख्या 24 भी रह गई, तो पाला बदलने वाले सभी सांसदों की लोकसभा सदस्यता रद्द हो जाएगी और उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा। मोदी सरकार को लोकसभा में दो-तिहाई सांसदों का साथ क्यों चाहिए? दरअसल, 16 से 18 अप्रैल, 2026 को मोदी सरकार लोकसभा में 3 विधेयक लाई थी। तर्क दिया था कि 2029 चुनाव तक महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए ये तीनों विधेयक पारित होने जरूरी हैं। इसमें एक संविधान संशोधन विधेयक था। इसमें लोकसभा की अधिकतम सीटें 550 से बढ़ाकर 850 करने और संविधान के आर्टिकल 81 और 82 में बदलाव करने के प्रावधान थे। संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है। मतलब, वोटिंग में आधे से ज्यादा सदस्य सदन में मौजूद हों और जितने सदस्य मौजूद हैं, उनमें से कम से कम दो-तिहाई सांसद इसके पक्ष में वोट दें। अप्रैल में वोटिंग के दौरान लोकसभा में 528 सांसद मौजूद थे। इसके दो-तिहाई के हिसाब से बिल को पास कराने के लिए 352 वोट चाहिए थे। वोटिंग हुई, तो बिल के समर्थन में 298 वोट और विरोध में 230 वोट पड़े। इससे संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 54 वोटों से गिर गया। यही वजह है कि भाजपा अब लोकसभा में 360 सांसदों का सपोर्ट चाहती है। ———————– यह खबर भी पढ़ें – राजभर बोले-अखिलेश को भी पता कि सांसद पार्टी छोड़ रहे, इसलिए कहा- जो कमजोर होगा, वह जाएगा यूपी में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर सपा में टूट होने का दावा किया है। उन्होंने गुरुवार दोपहर कहा- लोकसभा के मानसून सत्र से पहले ही पूर्वांचल के सपा के अधिकांश सांसद सपा छोड़ देंगे। अखिलेश यादव को भी पता है कि उनके सांसद पार्टी छोड़ रहे हैं, इसलिए उन्होंने बुधवार को बयान दिया कि जो कमजोर होगा, वह चला जाएगा। पढ़िए पूरी खबर…