यूपी विधानसभा चुनाव समय से पहले होने की चर्चा के बीच राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। पिछली बार सपा के साथ 19 सीटों पर चुनाव लड़ चुकी सुभासपा 2027 में 44 सीटों पर लड़ने की तैयारी में है। इनमें 8 पर अभी भाजपा के विधायक हैं। 2 सीटें ऐसी हैं, जहां पिछली बार निषाद पार्टी के प्रत्याशी चुनाव में उतरे थे। यूपी सरकार में मंत्री दारा सिंह चौहान की घोसी और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा की मधुबन सीट पर भी ओपी राजभर ने दावेदार तय किए हैं। सुभासपा की दावेदारी वाली 5 चर्चित सीटें घोसी- मऊ जिले की इस सीट पर 2022 में सपा से दारा सिंह चौहान 22 हजार वोटों से जीते थे। बाद में इस्तीफा देकर भाजपा से उपचुनाव लड़े, लेकिन सपा के सुधाकर सिंह से हार गए। सुधाकर सिंह का भी निधन हो चुका है। सुभासपा ने इस सीट पर प्रदेश उपाध्यक्ष फागू सिंह को प्रभारी और युवा मंच के राष्ट्रीय प्रवक्ता जितेंद्र कुमार भारती को सह-प्रभारी बनाया है। मधुबन- मऊ जिले की इस विधानसभा सीट पर अभी भाजपा के रामविलास चौहान विधायक हैं। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा की इस सीट पर नजर है। सुभासपा ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. संतोष पांडेय को प्रभारी और श्रम प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रितेश मल्ल को सह-प्रभारी बनाया है। इटवा- सिद्धार्थनगर जिले की इस सीट पर अभी नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे काबिज हैं। उन्होंने 2022 में इस सीट पर बेसिक शिक्षा मंत्री रहे सतीश चंद्र द्विवेदी को 1662 वोटों से हराया था। सुभासपा ने पूर्वांचल प्रदेश उपाध्यक्ष केशव राजभर को प्रभारी तो जिलाध्यक्ष सिद्धार्थनगर रामनिवास राजभर को सह-प्रभारी बनाया है। मल्हनी- जौनपुर की इस सीट पर अभी सपा के लकी यादव विधायक हैं। उन्होंने 2022 में जेडीयू प्रत्याशी धनंजय सिंह को 17 हजार से ज्यादा अंतर से हराया था। इस बार भी धनंजय सिंह यहां से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। सुभासपा से मेल-जोल बढ़ा रहे हैं। सुभासपा ने बृजभान राजभर को प्रभारी बनाया है। इसौली- सुल्तानपुर जिले की इस सीट को सपा के मोहम्मद ताहिर खान ने भाजपा के ओमप्रकाश पांडे को 269 वोटों से हराकर जीता था। सुभासपा ने पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवकुमार सिंह को प्रभारी और जिला संगठन मंत्री मनोज शर्मा को सह-प्रभारी बनाया है। सुभासपा की नजर इन जिलों में संगठन मजबूत करने की सुभासपा की नजर पूर्वांचल के गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी, चंदौली, भदोही, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, कुशीनगर और महाराजगंज पर है। वहीं, अवध क्षेत्र के अंबेडकर नगर, सुल्तानपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती और बाराबंकी उसकी नजर है। मध्य यूपी के हरदोई और सीतापुर, जबकि बुंदेलखंड में बांदा पर सुभासपा की नजर है। इसके अलावा पश्चिमी यूपी के शामली, बिजनौर, मुरादाबाद और फिरोजाबाद जैसे जिलों पर भी आंखें गड़ाए है। राजभर और अति पिछड़ों को गोलबंद कर ओमप्रकाश राजभर इन जिलों में अपनी पार्टी को मजबूत करने में जुटे हैं। राष्ट्रीय परिषद की बैठक में बनी रणनीति सुभासपा की पिछले दिनों वाराणसी में राष्ट्रीय परिषद की बैठक हुई थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर और राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव डॉ. अरविंद राजभर की मौजूदगी में हुई संगठन की बैठक में तय किया गया कि 2027 विधानसभा से पहले पार्टी प्रदेश की कम से कम 50 से 60 सीटों पर अपनी मजबूत तैयारी करें। इन विधानसभा क्षेत्रों में बूथ लेवल तक संगठन को मजबूत करने पर सहमति बनी है। इसके लिए वंचित और अति पिछड़ी जातियों को पार्टी से जोड़ने का टारगेट रखा गया है। निषाद पार्टी की लड़ी 2 सीटें, रालोद की जीती 1 सीट पर भी नजर ओपी राजभर ने गठबंधन के समीकरणों को दरकिनार करते हुए सहयोगियों की इन सीटों पर भी अपने चेहरे उतार दिए हैं। निषाद पार्टी (2 सीटें) : आजमगढ़ की अतरौलिया सीट पर ओपी राजभर अपने बेटे अरुण राजभर को प्रभारी बनाकर बड़ी जनसभा भी कर चुके हैं। यहां 2022 में निषाद पार्टी के प्रशांत सिंह, सपा के संग्राम यादव से 17 हजार वोटों से हारे थे। सुभासपा ने जालौन की कालपी सीट पर कालूराम प्रजापति को उतारा है। यहां निषाद पार्टी 2,816 वोटों से हारी थी। रालोद (1 सीट) : शामली की थानाभवन सीट, जिसे 2022 में रालोद के अशरफ अली खान ने जीता था, वहां सुभासपा ने पवन कश्यप को प्रभारी नियुक्त कर दिया है। सुभासपा के 5 ‘गढ़’, जहां खुद राजभर प्रभारी हैं सपा की जीती हुई इन 19 सीटों पर सुभासपा की नजर सपा के प्रभाव वाले इलाकों में अति-पिछड़े और राजभर वोटरों के बीच पकड़ बढ़ाने के लिए सुभासपा ने प्रभारियों की तैनाती की है। जौनपुर-बलिया-चंदौली- केराकत (रितेश राम), रसड़ा (शिवेंद्र सिंह), सकलडीहा (नित्यानंद पांडेय), सिकंदरपुर (रजनीश श्रीवास्तव), फेफना (अजय राजभर)। आजमगढ़ और अंबेडकर नगर- भदोही सदर (राकेश वर्मा), फूलपुर पवई (खुर्शीद आलम), दीदारगंज (शैलेंद्र सिंह), आजमगढ़ सदर (हेमंत सिंह), मेंहनगर (रामदहिन पासवान), मुहम्मदाबाद गोहना (संतोष मास्टर), अकबरपुर (विच्छेलाल राजभर-MLC), जलालपुर (रमतेश दुबे), टांडा (राधिका पटेल)। अन्य जिले. रुधौली (बस्ती- रामललित चौधरी), मुरादाबाद ग्रामीण (रवि चौधरी), शिकोहाबाद (फिरोजाबाद- शिशुपाल यादव), बबेरू (बांदा- लल्लू सिंह खंगार), नजीबाबाद (बिजनौर- मो. शहाबुद्दीन)। करीबी अंतर से चूक गई भाजपा की इन सीटों पर भी ठोका दावा इसौली- सुल्तानपुर जिले की इस सीट पर शिवकुमार सिंह वरिष्ठ नेता (प्रभारी), मनोज शर्मा जिला संगठन मंत्री सुल्तानपुर (सह-प्रभारी)। सपा के मोहम्मद ताहिर से भाजपा महज 269 वोटों से हारी थी। डुमरियागंज- सिद्धार्थनगर जिले की इस सीट पर गंगाराम राजभर प्रदेश उपाध्यक्ष (प्रभारी), अमजद खान वरिष्ठ नेता (सह-प्रभारी)। सपा की सैय्यदा खातून भाजपा से महज 771 वोटों के अंतर से जीती थीं। बस्ती सदर- विनोद राजभर राष्ट्रीय सचिव (प्रभारी), बृजभूषण मिश्रा प्रदेश अध्यक्ष बौद्धिक प्रकोष्ठ (सह-प्रभारी)। सपा के महेंद्र नाथ यादव ने भाजपा के दयाराम चौधरी को 1779 वोटों से हराया था। फरेंदा- महराजगंज जिले की इस सीट पर जितेंद्र सिंह राष्ट्रीय सचिव (प्रभारी), कबिलाश राजभर प्रदेश उपाध्यक्ष (सह-प्रभारी)। कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी भाजपा के बजरंग बहादुर सिंह से महज 1246 वोटों से जीते थे। रामनगर- बाराबंकी जिले की इस सीट पर संजय तिवारी राष्ट्रीय सचिव (प्रभारी), अनिल राजभर प्रदेश सचिव मध्यांचल (सह-प्रभारी)। सपा के फरीद महफूज किदवई ने भाजपा को 261 वोट से हराया था। ————————– यह खबर भी पढ़ें- डिंपल यादव ने शंकराचार्य के सामने माथा टेका, आरती उतारी, खुद को यदुवंशी बताया, शिवपाल के साथ आशीर्वाद लिया शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के मैनपुरी पहुंचते की सबसे ज्यादा नजदीकी डिंपल यादव ने दिखाई। पहले मैनपुरी और फिर सैफई में शंकराचार्य के कार्यक्रमों में शरीक हुईं। कहा जा रहा है कि डिंपल सपा के लिए हिंदुत्व चेहरा बनने की कोशिश कर रही हैं। यही वजह है कि डिंपल ने खुद को यदुवंशी और गाय को अपनी माता बताया। VIDEO में देखिए डिंपल यादव की बदली रणनीति की कहानी…