इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है। अगर आप तय समय तक ITR दाखिल नहीं करते, तो सालाना ₹5 लाख तक की आय पर ₹1 हजार और ₹5 लाख से ज्यादा आय होने पर ₹5 हजार तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है। आयकर विभाग ने ई-फाइलिंग पोर्टल के जरिए ITR भरने की प्रक्रिया पहले से काफी आसान कर दी है। अब आप घर बैठे खुद भी आसानी से ITR फाइल कर सकते हैं। इसका मकसद है कि लोगों को रिटर्न भरने के लिए हर बार सिर्फ चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) पर निर्भर न रहना पड़े। सबसे पहले नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था को समझें चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक तिवारी के मुताबिक, अगर आप असेसमेंट ईयर 2026-27 का ITR भर रहे हैं, तो सबसे पहले यह जान लें कि नई टैक्स व्यवस्था अब डिफॉल्ट है। अगर आप कोई ऑप्शन नहीं चुनेंगे, तो सिस्टम अपने आप आपको नई टैक्स व्यवस्था में डाल देगा। इसलिए ये जानना जरूरी है कि कौन-सी व्यवस्था चुनें? नई व्यवस्था में ₹12 लाख आय तक इनकम टैक्स शून्य नई टैक्स व्यवस्था में सरकार ने टैक्स छूट का दायरा बढ़ा दिया है। अब ₹4 लाख तक की आय पर सीधे कोई टैक्स नहीं लगता। इसके बाद अगर आपकी कुल टैक्स योग्य आय ₹12 लाख तक है, तो सरकार धारा 87A के तहत ₹60 हजार तक का टैक्स रिबेट देती है। इसकी वजह से आपका पूरा टैक्स माफ हो जाता है और आपको कोई टैक्स नहीं देना पड़ता। नौकरीपेशा लोगों को इसके अलावा ₹75 हजार की स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलती है। यानी अगर आपकी सालाना सैलरी ₹12.75 लाख तक है, तो स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद आपकी टैक्स योग्य आय ₹12 लाख रह जाती है। ऐसे में आपको रिबेट का फायदा मिलता है और आपका टैक्स शून्य हो जाता है। अब जानिए पुरानी टैक्स व्यवस्था के बारे अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनते हैं, तो ₹2.5 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। ₹5 लाख तक की टैक्स योग्य आय पर धारा 87A के तहत ₹12,500 की रिबेट मिलती है। इसलिए टैक्स नहीं देना पड़ता। इस व्यवस्था में 80C, 80D, HRA जैसी टैक्स छूट का फायदा मिल सकता है। अब घर बैठे भरें ITR अलग-अलग कमाई को ITR में ऐसे दिखाएं मकान का किराया : टैक्स कंसल्टेंट विनय तिवारी के मुताबिक, किराए से होने वाली आमदनी को Income from House Property में दिखाना होगा। सरकार कुल किराए पर सीधे 30% की स्टैंडर्ड कटौती देती है। यानी सालभर में ₹1 लाख किराया मिला, तो टैक्स सिर्फ ₹70 हजार पर लगेगा। अगर उसी मकान पर होम लोन है, तो उसके ब्याज पर ₹2 लाख तक की अतिरिक्त छूट भी मिल सकती है। बैंक ब्याज : बैंक खातों या एफडी से मिलने वाला हर ब्याज Income from Other Sources में भरना जरूरी है, क्योंकि यह आपके AIS में पहले से दर्ज होता है। पुरानी टैक्स व्यवस्था में सामान्य लोगों को सेविंग अकाउंट के ब्याज पर धारा 80TTA के तहत ₹10 हजार तक की छूट मिलती है। वहीं सीनियर सिटीजंस को धारा 80TTB के तहत FD और सेविंग्स दोनों के ब्याज पर कुल ₹50 हजार तक की छूट मिलती है। शेयर और म्यूचुअल फंड : कई लोगों को लगता है कि शेयर और म्यूचुअल फंड का पूरा डेटा अपने आप ITR में भर जाता है। असल में AIS में सिर्फ खरीद-बिक्री की जानकारी दिखती है, टैक्स का कैलकुलेशन खुद करना होता है। इसके लिए आपको अपने ब्रोकर (Zerodha या Groww) से Capital Gains Statement डाउनलोड करके खुद जानकारी भरनी होगी। शेयरों से मिलने वाला डिविडेंड भी Income from Other Sources में दिखाना अनिवार्य है। रिफंड नहीं आ रहा? ये वजह हो सकती है ITR भरने के बाद अगर रिफंड नहीं आ रहा है, तो सबसे पहले अपना बैंक खाता चेक करें। आयकर पोर्टल पर आपका बैंक अकाउंट Pre-validated होना चाहिए। साथ ही बैंक खाते में दर्ज नाम और PAN पोर्टल पर दी गई जानकारी से पूरी तरह मेल खाने चाहिए। अगर ऐसा नहीं होगा, तो रिफंड मंजूर होने के बाद भी पैसा आपके खाते में नहीं आएगा और अटक सकता है। Form-16 में टैक्स जीरो है, क्या फिर भी ITR भरना जरूरी है? अगर Form-16 में टैक्स जीरो दिख रहा है, तो यह मत समझिए कि ITR भरने की जरूरत नहीं है। ITR भरना इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी कुल आय और वित्तीय लेनदेन आयकर विभाग के तय नियमों में आते हैं या नहीं। कुछ मामलों में टैक्स न बनने पर भी ITR दाखिल करना जरूरी होता है। किसी टैक्सपेयर की मौत हो जाए तो क्या ITR भरना पड़ेगा? हां…कानूनी वारिस को आयकर पोर्टल पर खुद को Legal Heir के रूप में रजिस्टर करना होगा। इसके लिए मृत्यु प्रमाणपत्र, PAN और दूसरे जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। मंजूरी मिलने के बाद वही मृतक की ओर से ITR भरेगा। अगर रिफंड बनता है, तो वह कानूनी वारिस के वेरिफाइड बैंक खाते में आएगा। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, अगर भविष्य में किसी व्यक्ति की सड़क एक्सीडेंट में मौत हो जाती है या वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो उसके परिवार को मिलने वाले मुआवजे की रकम तय करने में ITR अहम आधार होगा। कारोबारियों के मामले में पिछले 3 साल के ITR की औसत आय के आधार पर मुआवजे का कैलकुलेशन होगा। ————————- आपके काम की ये खबरें भी पढ़िए… UP में पासपोर्ट की तर्ज पर बनेंगे ड्राइविंग लाइसेंस:ऑटोमैटिक टेस्ट और पुलिस वेरिफिकेशन होगा जरूरी; कैमरे और सेंसर करेंगे पास या फेल यूपी में ड्राइविंग लाइसेंस अब पासपोर्ट के पैटर्न पर बनेंगे। यानी पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य हो जाएगा। ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग के बाद अधिकारियों के साथ इंटरव्यू और फिर टेस्ट होगा। परिवहन विभाग जल्द नए नियम जारी कर देगा। सरकार चाहती है कि लाइसेंस सिर्फ उन्हीं को मिले, जिन्हें गाड़ी ठीक से ड्राइव करना हो। साथ ही, वह ट्रैफिक नियमों को जानता हो। पूरी खबर पढें.. ——————————– UP में किसानों के लिए अब ‘फार्मर आईडी’ जरूरी:बिना इसके खाद-बीज नहीं मिलेगा; जानें घर बैठे मोबाइल से कैसे बनाएं यूपी सरकार किसानों के लिए 12 अंकों की यूनीक आईडी तैयार कर रही है। जिसे ‘फार्मर आईडी’ या ‘किसान रजिस्ट्री’ का नाम दिया गया है। आईडी में किसानों की जमीन और खेती से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड रहेगी। ये आईडी खाद-बीज, पीएम किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड और कर्ज माफी जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए जरूरी है। पूरी खबर पढ़िए…