लखनऊ की पर्वतारोही पूर्वा धवन ने उत्तराखंड की 5,826 मीटर ऊंची माउंट रुद्रगैरा चोटी पर तिरंगा फहराकर नई उपलब्धि हासिल की है। पूर्वा ने 10 सितंबर को दोपहर 12:30 बजे चोटी पर पहुंचकर भारतीय ध्वज फहराया। गंगोत्री से शुरू हुआ यह अभियान बर्फीले और चट्टानी रास्तों, कम ऑक्सीजन और कठिन मौसम के बीच पूरा हुआ। रुद्रगैरा फतह करने के बाद अब पूर्वा ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने का लक्ष्य तय किया है। पूर्वा ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा और योगदान को दिया है। उनका कहना है कि बेटियों को आगे बढ़ने के लिए अवसर और परिवार का भरोसा मिले तो वे कठिन से कठिन लक्ष्य हासिल कर सकती हैं। गंगोत्री से शुरू हुआ सफर, दो दिन बाद बेस कैंप पहुंची टीम पूर्वा के साथ पर्वतारोही शैलेश सेमवाल और बिहारी सिंह राणा ने 7 सितंबर सुबह 9 बजे गंगोत्री से चढ़ाई शुरू की। करीब दो दिन की कठिन यात्रा के बाद टीम 4,350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रुद्रगैरा बेस कैंप पहुंची।
इसके बाद 10 सितंबर की सुबह 4 बजे टीम ने चोटी के लिए अंतिम चढ़ाई शुरू की। करीब आठ घंटे 30 मिनट की लगातार चढ़ाई के बाद टीम ने लगभग 1,300 मीटर की ऊंचाई पार की और दोपहर 12:30 बजे 5,826 मीटर ऊंची रुद्रगैरा चोटी पर पहुंच गई। खड़ी बर्फ और चट्टानों के बीच चढ़ाई रुद्रगैरा का रास्ता कई जगह बेहद चुनौतीपूर्ण था। चढ़ाई के दौरान खड़ी बर्फ, चट्टानी हिस्सों और खुले कठिन रास्तों से गुजरना पड़ा। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की कमी और शारीरिक थकान भी चुनौती बढ़ाती रही। इसके बावजूद पूर्वा और उनकी टीम ने हिम्मत नहीं छोड़ी। करीब साढ़े आठ घंटे की अंतिम चढ़ाई के बाद जब चोटी पर तिरंगा लहराया तो अभियान का सबसे गौरवपूर्ण क्षण सामने आया। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश भी पहुंचाया पूर्वा ने अपनी पर्वतारोहण उपलब्धि को महिला सशक्तीकरण और बेटियों को आगे बढ़ाने के संदेश से भी जोड़ा है। उनका कहना है कि बेटियों को शिक्षा, सुरक्षा, परिवार का भरोसा और सही अवसर मिले तो वे उन क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना सकती हैं, जिन्हें बेहद कठिन माना जाता है। लखनऊ की पूर्वा की यह उपलब्धि साहसिक खेलों में रुचि रखने वाली दूसरी बेटियों के लिए भी प्रेरणा का काम करेगी। रुद्रगैरा के बाद अब एवरेस्ट की तैयारी पूर्वा ने पर्वतारोहण को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा है। ‘पीक्स एंड प्लास्टिक’ पहल के जरिए वह हिमालयी क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के प्रति जागरूकता फैलाने और जिम्मेदार पर्वतारोहण का संदेश दे रही हैं। पूर्वा का कहना है कि हिमालय की चोटियों पर पहुंचना उपलब्धि है, लेकिन उन्हें स्वच्छ और सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। अब उनका अगला लक्ष्य 8,848.86 मीटर ऊंची माउंट एवरेस्ट की चोटी फतह करना है। वह एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के साथ महिला सशक्तीकरण, युवा प्रेरणा और स्वच्छ हिमालय का संदेश पहुंचाना चाहती हैं।
इसके बाद 10 सितंबर की सुबह 4 बजे टीम ने चोटी के लिए अंतिम चढ़ाई शुरू की। करीब आठ घंटे 30 मिनट की लगातार चढ़ाई के बाद टीम ने लगभग 1,300 मीटर की ऊंचाई पार की और दोपहर 12:30 बजे 5,826 मीटर ऊंची रुद्रगैरा चोटी पर पहुंच गई। खड़ी बर्फ और चट्टानों के बीच चढ़ाई रुद्रगैरा का रास्ता कई जगह बेहद चुनौतीपूर्ण था। चढ़ाई के दौरान खड़ी बर्फ, चट्टानी हिस्सों और खुले कठिन रास्तों से गुजरना पड़ा। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की कमी और शारीरिक थकान भी चुनौती बढ़ाती रही। इसके बावजूद पूर्वा और उनकी टीम ने हिम्मत नहीं छोड़ी। करीब साढ़े आठ घंटे की अंतिम चढ़ाई के बाद जब चोटी पर तिरंगा लहराया तो अभियान का सबसे गौरवपूर्ण क्षण सामने आया। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश भी पहुंचाया पूर्वा ने अपनी पर्वतारोहण उपलब्धि को महिला सशक्तीकरण और बेटियों को आगे बढ़ाने के संदेश से भी जोड़ा है। उनका कहना है कि बेटियों को शिक्षा, सुरक्षा, परिवार का भरोसा और सही अवसर मिले तो वे उन क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना सकती हैं, जिन्हें बेहद कठिन माना जाता है। लखनऊ की पूर्वा की यह उपलब्धि साहसिक खेलों में रुचि रखने वाली दूसरी बेटियों के लिए भी प्रेरणा का काम करेगी। रुद्रगैरा के बाद अब एवरेस्ट की तैयारी पूर्वा ने पर्वतारोहण को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा है। ‘पीक्स एंड प्लास्टिक’ पहल के जरिए वह हिमालयी क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के प्रति जागरूकता फैलाने और जिम्मेदार पर्वतारोहण का संदेश दे रही हैं। पूर्वा का कहना है कि हिमालय की चोटियों पर पहुंचना उपलब्धि है, लेकिन उन्हें स्वच्छ और सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। अब उनका अगला लक्ष्य 8,848.86 मीटर ऊंची माउंट एवरेस्ट की चोटी फतह करना है। वह एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के साथ महिला सशक्तीकरण, युवा प्रेरणा और स्वच्छ हिमालय का संदेश पहुंचाना चाहती हैं।