4 महीने से पेट पर आंत रखे है रेप पीड़िता:रामपुर की बच्ची का प्राइवेट पार्ट डैमेज, पेट चीरकर बनाया मल-मूत्र का रास्ता

यूपी के रामपुर की रेप पीड़िता मंदबुद्धि बच्ची की फैमिली को कोर्ट से तो सिर्फ 4 महीने में इंसाफ मिल गया। लेकिन, 11 साल की यह बच्ची जिंदा लाश बनकर रह गई है। उसके प्राइवेट पार्ट में गहरी चोटें हैं। मल-मूत्र के लिए डॉक्टरों ने पेट चीरकर रास्ता बना रखा है। दोनों आंतें पेट के ऊपर रखी हैं, जो रूमाल के सहारे टिकी रहती हैं। बच्ची जब भी मल-मूत्र जाती है, पूरा पेट और रूमाल गंदा हो जाता है। मां उसे रूई (कॉटन) से साफ करती है। इस घटना से परिवार इतना डर गया है कि बेटियां अब घर से बाहर खेलने तक नहीं जातीं। कानूनी लड़ाई लड़ने में बच्ची के भाई की नौकरी छूट गई। दोषी पर जो 6 लाख रुपए का जुर्माना लगा है, बस वही आर्थिक सहारे की उम्मीद इस परिवार को दिख रही है। हालांकि, उसके भी मिलने की उम्मीद कम है। ये ऐसा केस है, जिसमें पीड़ित परिवार कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं है। दोषी को उम्रकैद हुई, लेकिन परिवार उसको फांसी चाहता है। इसके लिए वो लोअर कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर करने की तैयारी में है। कोर्ट का फैसला आने के बाद दैनिक भास्कर इस बच्ची के घर पहुंचा। परिवार कितने मुश्किलों भरे दौर से गुजरा? बच्ची की स्थिति कैसी है? परिवार की आर्थिक हालत क्या है? इस पर विस्तार से बात की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सबसे पहले घटनाक्रम समझिए बच्ची गूंगी है, CCTV से हुई दरिंदे की पहचान
सेफनी थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली 11 साल की लड़की 15 अप्रैल, 2025 को खेत की तरफ गई थी। काफी देर तक वो घर नहीं लौटी। परिवार वालों ने खोजबीन शुरू की, तो एक खेत में बदहवास हालत में पड़ी मिली। चेहरे और शरीर पर चोट के निशान थे। चूंकि बच्ची गूंगी है, इसलिए वो ये बता नहीं पा रही थी कि उसके साथ हुआ क्या है? मेडिकल जांच में पुष्टि हुई कि बच्ची से रेप हुआ है। जब CCTV खंगाले गए, तो पता चला कि गांव का ही दान सिंह यादव बच्ची को अपने साथ ले गया था। 14 दिन तक बच्ची का इलाज मेरठ के LLRM मेडिकल कॉलेज में चला था। इस मामले में 11 अगस्त को रामपुर के विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) रामगोपाल सिंह ने दोषी दान सिंह यादव को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मां बोली- बेटी की हालत खराब, इसकी कोई जिंदगी नहीं
कोर्ट का फैसला आने के बाद हम सीधे बच्ची के गांव पहुंचे। 2 कमरे के घर की दीवारों पर सीमेंटेड प्लास्टर नहीं है। फर्श पीली मिट्टी से लिपा हुआ है। आंगन में ही बच्ची अपनी मां और बहन के पास बैठी थी। बच्ची के पेट पर एक रूमाल बंधा था। ये क्या है? पूछने पर मां कहती हैं- बच्ची की हालत खराब है। वो अभी सही नहीं है। अभी इसकी कोई जिंदगी नहीं है। जब सही हो जाए, तब जानें। उसके पेट में दर्द होता है। नीचे (प्राइवेट पार्ट) भी तकलीफ बताती है। बच्ची परेशान है, तो हम लोग भी परेशान हैं। आंतों के सहारे मल-मूत्र करने के लिए 270 रुपए का बैग (मेडिकल इक्विपमेंट) आता है। कभी-कभी एक दिन में दो-दो बैग भी लग जाते हैं। हमारे पास इतने रुपए नहीं कि रोजाना बैग बांध सकें। इसलिए बेटी के पेट पर रूमाल या कोई और कपड़ा बांध देते हैं। बेटी जब बाथरूम करती है, तो मुझे रूई से शरीर साफ करना पड़ता है। मुझे रात-रातभर जागना पड़ता है। मैं उस पर पूरी नजर रखती हूं। कभी बेटी उस घाव (आंत) को अपने हाथों से नोंच न ले। केस लड़ने की वजह से भाई की छूटी नौकरी
इस घटना को 4 महीने हो चुके हैं। कानूनी लड़ाई लड़ने की वजह से बच्ची के सबसे बड़े भाई की नौकरी छूट गई। वो बताते हैं- मैं हिमाचल प्रदेश के बद्दी में एक ब्यूटी प्रोडक्ट कंपनी में जॉब करता था। 20 हजार रुपए महीना मिल जाते थे। घटना की खबर सुनकर मुझे वापस घर आना पड़ा। बहन की हालत देखकर मैं वापस ड्यूटी पर नहीं जा सका। ऐसे में मुझे नौकरी छोड़नी पड़ गई। इन 4 महीनों में मैंने थाने और कोर्ट के तमाम चक्कर लगाए। जो पैसा था, वो कानूनी लड़ाई लड़ने में खर्च हो गया। अब आरोपी को सजा हो चुकी है। इसलिए अब फिर से नौकरी की तलाश कर रहा हूं। इस बार कहीं बाहर नौकरी नहीं करूंगा। रामपुर जिले में ही कोई नौकरी मिल जाए तो बेहतर रहेगा, ताकि रोजाना अप-डाउन करके परिवार का भी ख्याल रख सकूं। इस परिवार में रेप पीड़िता बच्ची, उसकी बड़ी बहन, सबसे बड़ा भाई, मां और पिता हैं। पीड़ित बच्ची की तरह ही उसके पिता भी मामूली रूप से मंदबुद्धि हैं। कभी-कभी मां खेतों में मजदूरी करके थोड़ा-बहुत कमा लेती है। ऐसे में घर का आर्थिक सहारा भी एकमात्र यही भाई है। ताऊ बोले- दरिंदे को फांसी होनी चाहिए थी
बच्ची के इलाज से लेकर रेपिस्ट दान सिंह यादव को सजा दिलाने तक सबसे ज्यादा भाग-दौड़ बच्ची के ताऊ ने की। वो गांव में ही मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बीते 4 महीने में परिवार किस दौर से गुजर रहा है? यह पूछने पर ताऊ कहते हैं- परिवार नरक जैसी स्थिति से गुजर रहा है। बच्ची का मल-मूत्र पेट की आंतों के द्वारा निकल रहा है। इससे बार-बार गंदगी फैलती है। पूरे परिवार को दिक्कत ही दिक्कत है। कोई सुख नहीं है। उस दरिंदे को फांसी होनी चाहिए थी, तभी परिवार को शांति मिलती। कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है, उससे तो हम सहमत हैं ही। लेकिन इतना भी बढ़िया फैसला नहीं है, जो हम चाह रहे थे। प्राइवेट पार्ट के जख्म सूखने पर होगा ऑपरेशन
LLRM मेडिकल कॉलेज मेरठ की डॉक्टर शीतल ने कोर्ट को बताया- बच्ची के शरीर पर कुल 11 चोटें थीं। हाइमन फटा हुआ था। प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोटें होने के कारण मल-मूत्र करने के लिए पेट के ऊपर एक डायवर्जन मार्ग बनाया गया था। चूंकि प्राइवेट पार्ट की झिल्ली फट गई थी, इसलिए उस वक्त प्राइवेट पार्ट की सर्जरी करना संभव नहीं था। जैसे ही बच्ची के प्राइवेट पार्ट के जख्म सूखेंगे, जो टेम्प्रेरी डायवर्जन मार्ग बनाया गया था, उसको ऑपरेशन करके बंद किया जाएगा। पीड़ित फैमिली ने हमें बताया- पिछले दिनों हम LLRM मेडिकल कॉलेज मेरठ गए थे। डॉक्टरों ने कुल 2 ऑपरेशन बताए हैं। एक ऑपरेशन होने में अभी करीब डेढ़ महीने का वक्त लगेगा। ऐसे में बच्ची को पूरी तरह ठीक होने में कई महीने का वक्त लग सकता है। ———————- ये खबर भी पढ़ें… CM दरबार पहुंचा रिटायर्ड फौजी, बोला- मैंने जहर खाया, MLA नंद किशोर से मुझे खतरा, वो गाजियाबाद में ‘नंदू टैक्स’ वसूल रहे लखनऊ में सीएम के जनता दरबार में गुरुवार को एक रिटायर्ड फौजी पहुंचा। अंदर पहुंचते ही उसने वहां मौजूद लोगों से कहा- मैं जहर खाकर आया हूं। यह पता लगते ही वहां हड़कंप मच गया। आनन-फानन में रिटायर्ड फौजी को सिविल अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल, उनकी हालत ठीक है। डॉक्टर चेकअप कर रहे हैं। रिटायर्ड फौजी का नाम सतबीर गुर्जर (65) पुत्र प्रेम सिंह है। वह गाजियाबाद के लोनी के सिरौली इलाके के रहने वाले हैं। गाजियाबाद विधायक नंद किशोर गुर्जर की शिकायत लेकर सीएम योगी से मिलने के लिए लखनऊ आए थे। पहले सूचना आई थी कि सतबीर ने जनता दरबार के अंदर ही जहर खाया। हालांकि, बाद में यह बात गलत निकली। पढ़ें पूरी खबर