यूपी के 6 जिलों में एक नाम और एक पहचान से एक्स-रे टेक्नीशियन की नौकरी करने वाले अर्पित सिंह पर बड़ा एक्शन हुआ है। पैरामेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर रंजना खरे ने लखनऊ के वजीरगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। FIR में बलरामपुर, फर्रुखाबाद, बांदा, रामपुर, अमरोहा और शामली के अलग-अलग अर्पित सिंह को नामजद किया गया है। इन सभी के पिता का नाम अनिल कुमार सिंह। अर्पित सिंह नाम का व्यक्ति 2016 से सरकारी नौकरी कर रहा था। वह अखिलेश सरकार में 403 एक्स-रे टेक्नीशियन के साथ भर्ती हुआ था। अब तक करीब 4.5 करोड़ रुपए वेतन उसने हासिल किए हैं। अब मानव संपदा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होते ही उसकी हेराफेरी पकड़ी गई। अब विस्तार से पढ़िए… अर्पित-अंकित और अंकुर नाम से फर्जीवाड़ा सामने आया
वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) से चयनित 403 टेक्नीशियन की सूची में एक नाम के कई लोगों के नौकरी पाना का फर्जीवाड़ा सामने आया था। जिसके बाद महानिदेशालय में तैनात निदेशक पैरामेडिकल ने नियुक्ति आदेश जारी किए थे। यह भी पता लगाया जा रहा है कि चयनित 403 टेक्नीशियन की सूची को आधार बनाकर और कितने लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं। साथ ही आयोग से लिस्ट भी मंगाई गई थी। इस दौरान अर्पित और अंकित के नाम से छह-छह, अंकुर के नाम से दो एक्स-रे टेक्नीशियन को संदिग्ध माना गया। अब स्वास्थ्य महानिदेशालय के तत्कालीन महानिदेशक, निदेशक पैरामेडिकल, संयुक्त निदेशक पैरामेडिकल, पैरामेडिकल की नियुक्ति, तबादला का काम देखने वाले फोर-डी (2) अनुभाग के कार्यालय अधीक्षक और लिपिकों से पूछताछ होगी। रविवार को 6 जिलों के सीएमओ महानिदेशालय पहुंचे थे
इससे पहले एक्स-रे टेक्नीशियन नियुक्ति में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद रविवार को फर्रुखाबाद, बांदा, हाथरस, बलरामपुर, बदायूं, रामपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) अपनी जांच रिपोर्ट लेकर स्वास्थ्य महानिदेशालय पहुंचे। इन सभी ने महानिदेशालय स्तर पर बनी जांच समिति के सामने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रतन पाल सिंह सुमन ने निदेशक राष्ट्रीय कार्यक्रम, डॉ. शुभ्रा मिश्रा, निदेशक नर्सिंग डॉ. सीमा श्रीवास्तव, वित्त नियंत्रक शिवेंद्र मिश्रा को इस फर्जीवाड़े की जांच की जिम्मेदारी दी है। 403 टेक्नीशियन की सूची में क्रमांक 80 पर दर्ज अर्पित सिंह ने 2016 में हाथरस सीएमओ के अधीन तैनाती पाई थी। अन्य जिलों में उसके नाम से फर्जी लोगों के नौकरी करने की जानकारी मिली थी। सभी सीएमओ से तैनाती, वेतन जारी होने के दस्तावेज तलब किए गए थे। अर्पित सिंह के 6 जिलों में रिकॉर्ड एक अर्पित सिंह नाम के इस शख्स का नाम, जन्मतिथि और पिता का नाम सभी रिकॉर्ड में समान पाया गया, लेकिन इसके बावजूद वह 6 अलग-अलग जिलों में एक ही समय पर नियुक्त था- फर्रुखाबाद, बांदा, बलरामपुर, बदायूं, रामपुर और शामली। यूपी के ये 6 जिले अब इस फर्जीवाड़े की वजह से चर्चा में हैं। वहीं, वेतन की बात करें तो एक अर्पित सिंह हर महीने 69,595 रुपए ले रहा था। एक साल में सिर्फ एक जिले से ही 8,35,140 रुपए की सैलरी ली गई। 9 सालों में केवल एक जिले से 75,16,260 रुपए का भुगतान हो चुका है। अगर 6 जिलों के अर्पित सिंहों के वेतन जोड़ें, तो लगभग 4.5 करोड़ रुपए सिर्फ छह व्यक्तियों ने विभाग से हासिल कर लिए। ———————– ये खबर भी पढ़िए… PET में सॉल्व कराते MBBS डॉक्टर सहित 3 गिरफ्तार:लखनऊ पुलिस ने दबोचा, दूसरे की जगह बैठे बिहार के आरोपी ने सबको पकड़वाया PET-2025 के दौरान लखनऊ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पेपर सॉल्व करा रहे MBBS डॉक्टर सहित 3 लोगों को गिरफ्तार किया। दूसरे की जगह पेपर दे रहा बिहार का एक युवक पकड़ा गया। इसके बाद उसने सॉल्व कराने वाले MBBS डॉक्टर और एक तीसरे आरोपी को भी पकड़वा दिया। (पूरी खबर पढ़िए)
वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) से चयनित 403 टेक्नीशियन की सूची में एक नाम के कई लोगों के नौकरी पाना का फर्जीवाड़ा सामने आया था। जिसके बाद महानिदेशालय में तैनात निदेशक पैरामेडिकल ने नियुक्ति आदेश जारी किए थे। यह भी पता लगाया जा रहा है कि चयनित 403 टेक्नीशियन की सूची को आधार बनाकर और कितने लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं। साथ ही आयोग से लिस्ट भी मंगाई गई थी। इस दौरान अर्पित और अंकित के नाम से छह-छह, अंकुर के नाम से दो एक्स-रे टेक्नीशियन को संदिग्ध माना गया। अब स्वास्थ्य महानिदेशालय के तत्कालीन महानिदेशक, निदेशक पैरामेडिकल, संयुक्त निदेशक पैरामेडिकल, पैरामेडिकल की नियुक्ति, तबादला का काम देखने वाले फोर-डी (2) अनुभाग के कार्यालय अधीक्षक और लिपिकों से पूछताछ होगी। रविवार को 6 जिलों के सीएमओ महानिदेशालय पहुंचे थे
इससे पहले एक्स-रे टेक्नीशियन नियुक्ति में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद रविवार को फर्रुखाबाद, बांदा, हाथरस, बलरामपुर, बदायूं, रामपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) अपनी जांच रिपोर्ट लेकर स्वास्थ्य महानिदेशालय पहुंचे। इन सभी ने महानिदेशालय स्तर पर बनी जांच समिति के सामने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रतन पाल सिंह सुमन ने निदेशक राष्ट्रीय कार्यक्रम, डॉ. शुभ्रा मिश्रा, निदेशक नर्सिंग डॉ. सीमा श्रीवास्तव, वित्त नियंत्रक शिवेंद्र मिश्रा को इस फर्जीवाड़े की जांच की जिम्मेदारी दी है। 403 टेक्नीशियन की सूची में क्रमांक 80 पर दर्ज अर्पित सिंह ने 2016 में हाथरस सीएमओ के अधीन तैनाती पाई थी। अन्य जिलों में उसके नाम से फर्जी लोगों के नौकरी करने की जानकारी मिली थी। सभी सीएमओ से तैनाती, वेतन जारी होने के दस्तावेज तलब किए गए थे। अर्पित सिंह के 6 जिलों में रिकॉर्ड एक अर्पित सिंह नाम के इस शख्स का नाम, जन्मतिथि और पिता का नाम सभी रिकॉर्ड में समान पाया गया, लेकिन इसके बावजूद वह 6 अलग-अलग जिलों में एक ही समय पर नियुक्त था- फर्रुखाबाद, बांदा, बलरामपुर, बदायूं, रामपुर और शामली। यूपी के ये 6 जिले अब इस फर्जीवाड़े की वजह से चर्चा में हैं। वहीं, वेतन की बात करें तो एक अर्पित सिंह हर महीने 69,595 रुपए ले रहा था। एक साल में सिर्फ एक जिले से ही 8,35,140 रुपए की सैलरी ली गई। 9 सालों में केवल एक जिले से 75,16,260 रुपए का भुगतान हो चुका है। अगर 6 जिलों के अर्पित सिंहों के वेतन जोड़ें, तो लगभग 4.5 करोड़ रुपए सिर्फ छह व्यक्तियों ने विभाग से हासिल कर लिए। ———————– ये खबर भी पढ़िए… PET में सॉल्व कराते MBBS डॉक्टर सहित 3 गिरफ्तार:लखनऊ पुलिस ने दबोचा, दूसरे की जगह बैठे बिहार के आरोपी ने सबको पकड़वाया PET-2025 के दौरान लखनऊ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पेपर सॉल्व करा रहे MBBS डॉक्टर सहित 3 लोगों को गिरफ्तार किया। दूसरे की जगह पेपर दे रहा बिहार का एक युवक पकड़ा गया। इसके बाद उसने सॉल्व कराने वाले MBBS डॉक्टर और एक तीसरे आरोपी को भी पकड़वा दिया। (पूरी खबर पढ़िए)