कानपुर में बाढ़ में 4 हजार की आबादी फंसी:गंगा बैराज की सड़क पर तंबू बनाकर रहने को मजबूर, बोले- बच्चे भूख में रोते हैं

कानपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ गया। चेतावनी बिंदु को पार कर खतरे के निशान की तरफ जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में गंगा किनारे बसे एक दर्जन से ज्यादा गांवों में पानी घुस गया। हजारों बीघा फसल बर्बाद हो गई। करीब 600 घर गंगा के पानी से प्रभावित हैं। इन गांव में रहने वाली 4000 से ज्यादा की आबादी फंस गई है। लोग अब गांव से किसी तरह निकल कर गंगा बैराज से बिठूर की तरफ जाने वाले रोड पर तंबू बनाकर रहने को मजबूर हैं। महिलाओं और बच्चों के साथ गांव के लोग किसी तरह नाव या पानी के बीच से होकर बाहर निकल रहे हैं। बाढ़ में फंसे लोगों ने कहा- हमारी दुख-दर्द सुनने नेता और अधिकारी नहीं आते। बच्चे भूख में रोते हैं। खाना कहां बनाएं, क्या बनाएं? दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची और बैराज से सटे आठ गांवों में पहुंच कर हालत का जायजा लिया… पहले 3 तस्वीरें देखिए- गांव में 5 फीट तक पानी भरा
गंगा बैराज से बिठूर की तरफ जाने वाली सड़क पर लाइन से लगे डंडों में पन्नियों से बांधकर बनाए गए तंबू दिखाई दिए। इन तंबू में नन्हे बच्चे, लड़कियां महिलाएं चारपाई पर बैठे थे तो कहीं लोग जमीन पर ही बैठे दिखे। गांव से निकलकर सड़क पर आकर रहने को मजबूर बाढ़ से पीड़ित गांव वाले व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि गांव में पूरी तरह से पानी भर गया है। निकालने के रास्ते में भी 5 फीट से ज्यादा पानी भर चुका है। किसी भी तरह से नाव की व्यवस्था नहीं कराई गई है। जिन लोगों के पास निजी नाव हैं, वही चला रहे हैं। कुछ लोगों को गांव से बाहर सड़क पर ले जाने में मदद कर रहे हैं। लोग बोले- न खाने की व्यवस्था, न गांव से बाहर निकलने के साधन
क्या बुजुर्ग, क्या महिला अपनी गृहस्थी लेकर पानी के बीच से होकर सड़क तक पहुंच कर किनारा ढूंढने को मजबूर हैं। कई लोग सड़क के किनारे कच्ची जगह पर उगे पेड़ पौधों को हटाकर वहां पर बैठने की जगह बनाते हुए नजर आए। गांव से निकले हुए लोगों ने यह भी कहा कि ना ही खाने की कोई व्यवस्था है और ना ही गांव से निकलने का कोई संसाधन है। इसी तरह से गांव में जो लोग पानी के बीच रहने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि घर के अंदर पानी पूरी तरह से घुस गया है। घर में रखा सामान बर्बाद हो गया। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। जानवरों को बांधने वाली जगह पानी से डूब गई है। लोग ज्यादातर अपने घर की छतों पर या फर्स्ट फ्लोर पर रह रहे हैं। कई घर ऐसे भी हैं। जहां पानी के बीच में ही लोगों को खाना बनाना पड़ रहा है। बच्चे भी दिनभर वहीं रहने को मजबूर हैं। गांव किनारे मगरमच्छ पहुंच गया था
नाव चालक कृष्णा निषाद ने कहा- गांव से बाहर लाने के लिए नाव का इंतजाम निजी तौर पर ही यहां के लोग कर रहे हैं। गांव में जिन लोगों के पास तीन-चार नाव हैं, वही लोग गांव के लोगों को बाहर निकाल रहे हैं।बाकी खुद पानी के बीच से चार से पांच फीट पानी में घुसकर जाने को मजबूर हैं। किसी भी गांव वाले से बिना पैसे लिए सड़क तक पहुंचाने का काम लगातार तीन से चार नाव कर रही हैं। 2 दिन पहले ही तालाब किनारे मगरमच्छ भी पहुंच गया था। इसके बाद जो लोग पानी के बीच से होकर गुजर रहे हैं, उनके लिए भी खतरा बना हुआ है। जो लोग गांव में बाढ़ में फंसे, उनकी बातचीत पढ़िए- छत पर खाना बना रहे, लकड़ी नहीं मिल रही
10 से अधिक गांव में गंगा का पानी घुस गया है। यहां घरों के अंदर 1 से 2 फीट पानी भरा है। इन गांवों में भोपालपुरवा, दिल्लीपुर, लक्ष्मणपुरवा, भगवानदीनपुर, बनियापुर, दुर्गापुर में पानी घुस गया है। यहां से निकलने के लिए लोग नाव का इस्तेमाल कर रहे हैं। भोपालपुरवा में निशा ने बताया- गांव में पानी घर के भीतर घुस गया है। यहां कोई भी देखने तक नहीं आया। यहां तक नाव का भी इंतजाम नहीं है। जैसे तैसे बस काम चल रहा है। भोपालपुरवा में रामदेव ने बताया की सबसे ज्यादा दिक्कत तो जानवरों को हो रही है। उनका चारा कहां से लाएं, कहां खिलाएं। घर में खाना बनाने की भी दिक्कत है। गांव के एक बुजुर्ग ने बताया कि इतनी अधिक दिक्कतें हैं कि खेती किसानी और काम धंधा सब बर्बाद हो गया। गांव में अपने घर के दरवाजे पर खड़ी नहंकी देवी ने बताया- घर के भीतर पानी घुसने से जानवर को खिलाने वाला भूसा पूरी तरह से बर्बाद हो गया। बस घर में ही घुसे रहते हैं। छत पर खाना बनाते हैं। लकड़ी न होने की वजह से भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गांव में ही बुजुर्ग गंगाराम ने बताया कि किसानी तो पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। खेत में जो भी बोया था, सारी फसल चली गई। कभी कोई काम नहीं किया, इसलिए बड़ा नुकसान हुआ है। अब केवल जानवर हैं, उन्हें चराने के लिए भी जगह नहीं मिल रही है। चारों तरफ पानी भरा हुआ है। अब जो लोग सड़क किनारे गुजारा कर रहें, उनकी बातचीत पढ़िए- सड़क पर तंबू बनाकर रह रहे महेश ने कहा- लोगों को अलर्ट तो कर दिया गया कि गांव से निकलकर हाईवे पर आ जाओ, लेकिन यहां छांव की व्यवस्था नहीं है। खुद ही पेड़ काटकर लकड़ियों के सहारे पन्नियों से तंबू बना कर रह रहे हैं। साथ में महिलाएं भी हैं। बारिश में बच्चों को लेकर भीगते हैं। यहां खाने की कोई व्यवस्था नहीं है। न ही कोई मिलने आता है। प्रशासन से अपील है कि यहां पर व्यवस्थाएं कराई जाएं, जिससे हमें कुछ राहत मिल सके। रामचंद्र ने बताया और सब लोग चिकनाई गांव में पानी भर चुका है हम लोग सब सड़क पर आ गए हैं। उनके मुताबिक हजारों लोग गांव में पानी के बीच फंस गए हैं जो किसी तरह से नव से बाहर आ रहे हैं। बुजुर्ग राजकुमारी जिनकी उम्र 80 साल है उन्होंने बताया कि घर में पूरा पानी भर गया बहू और बच्चों के साथ हम सब ना उसे सड़क पर आ गए हैं। इसी तरह से बनियापुर से आए राम अवतार ने बताया कि हम लोग गृहस्ती लेकर बाहर आ गए हैं और आप यहां तंबू लगा रहे हैं। यहां भूखे प्यासे हैं अभी तक किसी ने कुछ नहीं पूछा। युवक हरि ओम ने बताया की घरों के अंदर पूरी तरह से पानी पहुंच गया है हम लोग जैसे तैसे बाहर आ गए हैं सबसे ज्यादा दिक्कत है बच्चों को हो रही हैं कि हम लोग तो जैसे तैसे बाहर निकाला है लेकिन बच्चों को लाने में बहुत दिक्कत हो रही है क्योंकि कमर के ऊपर तक पानी भर चुका है। प्रशासन ने टेंट लगवाया, मेडिकल कैंप बनाए
गंगा बैराज के किनारे बिठूर जाने वाले मार्ग पर चौकी के पास प्रशासन की तरफ से एक बड़ा तंबू लगाया गया है। यहां पर कुछ लोग बैठे दिखे। लेकिन, ज्यादातर लोग अपने खुद के तंबू बनाते दिखाई दिए। इसी तरह से नगर निगम द्वारा पानी के टैंकर भी वहां भेजे गए। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम का भी कैंप लगा है, जहां डॉक्टर और दवाई वितरण करने वाले कर्मचारी बैठ रहे हैं। ADM एफआर विवेक चतुर्वेदी ने कहा- गांव में पानी भरने के बाद वहां से निकलने वाले लोगों के लिए उचित व्यवस्थाएं कराई जा रही हैं। भोजन-पानी से लेकर मानक के अनुसार नाश्ते का भी इंतजाम किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम नगर निगम द्वारा अच्छी व्यवस्थाएं और टेंट लगाने का भी काम किया जा रहा है। बारिश से किसी भी ग्रामीण को दिक्कत ना हो, उन्हें छाया मिले, इसकी भी समुचित व्यवस्था कराई जा रही है। पशु चिकित्सा अधिकारी की टीम भी भ्रमण कर रही है। ————- ये खबर भी पढ़िए- नोएडा में रूम पार्टनर ने की MBA छात्र की हत्या: हॉस्टल में वारदात, मर्डर के बाद खुद को भी गोली मारी, हालत गंभीर ग्रेटर नोएडा में मैनेजमेंट के एक छात्र ने अपने साथी की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने खुद को भी गोली मार ली। गोली लाइसेंसी पिस्टल से मारी गई है। घायल छात्र को पास के ही प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने एक लाइसेंसी रिवॉल्वर, 4 जिंदा कारतूस, 2 खोखे, मोबाइल और लैपटॉप बरामद किया है। मामला नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र का है। पढ़ें पूरी खबर…