लखनऊ-कानपुर के बीच देश का सबसे छोटा एक्सप्रेस-वे बन रहा है। इसकी लंबाई 63 किलोमीटर है और लागत करीब 4700 करोड़ रुपए। जून- 2025 में इसका उद्घाटन प्रस्तावित था। लेकिन, बिजली के एक पोल से लगातार देरी होती चली गई। फाइनली उस बिजली के पोल की टेस्टिंग पूरी हो गई। अब उम्मीद है कि अगले डेढ़ से दो महीने के बीच काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद लखनऊ-कानपुर के बीच की दूरी एक घंटे कम हो जाएगी। दैनिक भास्कर की टीम ने एक्सप्रेस-वे की मौजूदा स्थिति को देखा। बाकी बचे कामों को देखा। जहां बन चुका है, उसकी मजबूती परखी। उस दावे की भी पड़ताल की, जिसमें कहा गया कि प्रदेश की राजधानी से प्रदेश की कॉमर्शियल राजधानी के बीच की दूरी 40 मिनट में पूरी होगी। उन लोगों से बात की, जिन्हें इसके बनने से राहत मिलेगी। कुछ ऐसे लोग भी मिले, जिनका रोजगार इस एक्सप्रेस-वे के बनने से ठप हो गया। एक्सप्रेस-वे बनने से 1 घंटे समय बचेगा
हमारी टीम इस पूरे एक्सप्रेस-वे को कवर करने के लिए लखनऊ से निकली। अमौसी एयरपोर्ट के पास से इस एक्सप्रेस-वे की शुरुआत होती है। अभी लोग लखनऊ से कानपुर जाने वाले नेशनल हाईवे-27 का सहारा लेते हैं। इस हाईवे से दोनों शहरों के बीच की दूरी 93 किलोमीटर पड़ती है। अगर कोई मोहनलालगंज से मौरवां और उन्नाव होते हुए कानपुर पहुंचता है, तो 127 किलोमीटर चलना पड़ता है। हवाई मार्ग से दोनों शहरों के बीच की दूरी 77 किलोमीटर है। हालांकि, दोनों शहरों के बीच कोई फ्लाइट नहीं है। ट्रेन से दोनों शहरों के बीच की दूरी 74 किलोमीटर है। इस एक्सप्रेस-वे को बनाने के पीछे की वजह दोनों शहरों के बीच लगने वाला जाम है। इस वक्त लखनऊ से कानपुर का सफर जाम के चलते 2 से 3 घंटे में पूरा होता है। कई बार तो 3 घंटे से भी ज्यादा लग जाते हैं। एक्सप्रेस-वे बनने से यह समय 1 से डेढ़ घंटा कम हो जाएगा। हर उस जगह पर फ्लाईओवर बनाया गया है, जहां जाम की स्थिति बनती है। यह लखनऊ के 11 गांव से होकर गुजरता है। बाकी का हिस्सा उन्नाव में आता है, वहां के 31 गांव शामिल हैं। अभी तो बहुत संघर्ष करना पड़ता है
एनएच-27 पर स्थित प्रधान ढाबा पर हमारी मुलाकात कानपुर के सोनू प्रताप सिंह से हुई। वह कहते हैं- जब ये बन जाएगा, तो बहुत अच्छा रहेगा। अभी जहां-जहां भी एक्सप्रेस-वे का इस्तेमाल किए हैं, उसमें आनंद आया है। यह भी बन जाएगा, तो इसके जरिए चलेंगे और फिर अच्छे से इसका अनुभव बता पाएंगे। लेकिन हां, इसके बनने के बाद क्विक सर्विस मिलेगी। आदमी खटाक से कानपुर से आएगा, फटाक से लखनऊ से चला जाएगा। यहीं हमें भाजपा कानपुर महानगर के पूर्व जिला उपाध्यक्ष बबलू विश्वकर्मा मिले। वह कहते हैं- कानपुर महानगर तो इस एक्सप्रेस-वे को बहुत पहले से मांग रहा था। सीएम योगी की योजना है, इसलिए बहुत बढ़िया तरीके से बन रही। अभी कहीं-कहीं काम बाकी है। सीएम साहब का आदेश है कि जब पूरा काम हो जाए तभी इसे शुरू किया जाए। क्योंकि, कानपुर-दिल्ली रोड का भार भी इस पर ही पड़ेगा। बिजली के तार ने 6 महीने से काम रोका
हम यहां से आगे बढ़े। स्कूटर इंडिया के पास गौरी बाजार चौराहा है। यहीं एक जगह है, जहां अभी एक्सप्रेस-वे का पिलर नहीं बन पाया है। करीब 300 मीटर का एरिया खुला है। पिलर आधे बने हैं। ऊपर से दो हाईटेंशन बिजली के तार गुजरे हैं। एक का तो इंतजाम हो गया है, उसे ऊपर कर दिया गया है। लेकिन, 1.32 लाख पावर लाइन वाला खंबा अभी नहीं लग पाया है। इसी वजह से यहां इस वक्त सबसे ज्यादा जाम की स्थिति बनती है। हमने यहां की साइट के इंजीनियर मोहन अवस्थी से बात की। मोहन कहते हैं- यहां तार को ऊंचा करने के लिए 3 मोनोपोल लगाए जाएंगे। 2 हमारे पास आ भी गए हैं। एक आना बाकी है। जैसे ही वह आ जाएगा, हम उसे लगाना शुरू कर देंगे। तीनों का फाउंडेशन बन चुका है। हमने पूछा कि आखिर पहले से मोनोपोल क्यों नहीं तैयार हुए? मोहन कहते हैं- इसका एक प्रोसेस है, पहले तैयार होने के बाद भी टेस्ट के लिए हैदराबाद भेजा गया था। वहां जांच में वह रिजेक्ट कर दिया गया। इसके बाद दोबारा से बनना शुरू हुआ। पता चला है कि वो बन भी गया है। एक्सप्रेस-वे गुजरा और दुकान चली गई
बनी (जगह का नाम) के पास हमें मो. अशफाक मिले। पहले उनकी दुकान नेशनल हाईवे के बगल थी। लेकिन एक्सप्रेस-वे गुजरा, तो उनकी दुकान के साथ 22 दुकानें टूट गईं। अशफाक कहते हैं- एक्सप्रेस-वे लोगों के लिए तो राहत वाला होगा, लेकिन हमारे लिए नुकसान वाला है। एक्सप्रेस-वे बन जाएगा, तो लोग ऊपर से चले जाएंगे। नीचे बहुत कम लोग हो जाएंगे। पास खड़े रमाशंकर कहते हैं- जब नीचे गाड़ियां कम चलेंगी, तो स्वाभाविक है कि व्यापार कम हो जाएगा। जहां एलिवेटेड, वहां 4 लेन, बाकी 6 लेन
लखनऊ में एक्सप्रेस-वे का जितना हिस्सा पड़ता है, उसमें ज्यादातर एलिवेटेड है। क्योंकि, नीचे पहले से ही हाईवे मौजूद है। अमौसी से दरोगा खेड़ा तक 4 लेन है, इसके आगे जहां से ग्रीन फील्ड शुरू होती है। वहां यह 8 लेन का हो गया है। बनी तक यह एक्सप्रेस-वे नेशनल हाईवे के ऊपर चलता है। वहां से इसकी दिशा बदल जाती है। यहां से एक्सप्रेस-वे 45 किलोमीटर ग्रीनफील्ड है। मतलब उधर से पहले कोई रास्ता नहीं था। ये दतौली, कांथा, तौरा, नेरोना से होते हुए अमरसास तक जाता है। इधर एक्सप्रेस-वे का काम पूरा हो गया है। इस पूरे एक्सप्रेस-वे में 3 बड़े पुल, 28 छोटे पुल, 38 अंडरपास और 6 फ्लाईओवर बनाए जा रहे हैं। 90% निर्माण पूरा हो गया है। जहां टोल गेट बनाया जाना है, वहां साइड की सड़कों का निर्माण आखिरी दौर में है। यह एक्सप्रेस-वे कानपुर के गंगा पुल से करीब 5 किलोमीटर पहले उन्नाव के आजाद चौराहे पर खत्म होता है। जो लोग लखनऊ से कानपुर जाएंगे, उन्हें गंगा पुल पार करना होगा। कई बार जाम की वजह यह पुल भी बन जाता है। यह देश का सबसे महंगा एक्सप्रेस-वे होगा
यूपी में इस वक्त 2 एक्सप्रेस-वे का निर्माण जारी है। पहला- गंगा एक्सप्रेस-वे। दूसरा- लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे। गंगा एक्सप्रेस-वे मेरठ से प्रयागराज के बीच बन रहा। 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे का बजट 37 हजार 350 करोड़ रुपए है। यानी एक किलोमीटर एक्सप्रेस-वे की कीमत 62 करोड़ 87 लाख रुपए पड़ेगी। वहीं, कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 62.7 किलोमीटर है। ऐसे में 1 किलोमीटर एक्सप्रेस-वे का खर्च 75 करोड़ रुपए आ रहा। उन्नाव के पास यह एक्सप्रेस-वे गंगा एक्सप्रेस-वे से भी मिल रहा है। कुल मिलाकर लखनऊ-कानपुर देश का सबसे महंगा एक्सप्रेस-वे होगा। महंगा होने की मुख्य वजह जमीन का रेट है। असल में यह एक्सप्रेस-वे राजधानी से गुजरता है, यहां का सर्किल रेट ज्यादा है। मुआवजा ज्यादा देना पड़ा। इसके अलावा इसमें 6 फ्लाईओवर, 38 अंडरपास, 28 छोटे पुल हैं। इससे इसकी लागत बढ़ गई है। आखिरी सवाल- कब शुरू होगा?
इस पूरे एक्सप्रेस-वे को देखने के बाद यह समझ आया कि स्कूटर इंडिया के पास वाला हिस्सा बनते ही इसे शुरू किया जा सकता है। क्योंकि, एक्सप्रेस-वे का मुख्य कैरिज-वे हर जगह बन गया है। थोड़ा-बहुत काम ही बाकी है। स्कूटर इंडिया के पास बचे हुए काम को लेकर एक्सप्रेस-वे के इंजीनियर कहते हैं, पोल लगने के बाद यहां का काम तेजी से होगा। हमें सिर्फ पिलर ही तैयार करना है, बाकी का हिस्सा बनाया जा चुका है। वह सिर्फ रखा जाएगा। अगले 2 महीने में हम इसे तैयार कर देंगे। इसका मतलब यह हुआ कि यह एक्सप्रेस-वे जनवरी के महीने में शुरू किया जा सकता है। —————————— ये खबर भी पढ़ें… क्या 9 करोड़ का इंजेक्शन बचा सकता है जान, यूपी के 13 महीने के बच्चे को चाहिए; अब तक 90 बच्चों को लग चुका मिर्जापुर के करजी गांव के आलोक और प्रतिभा का इकलौता बेटा विनायक 13 महीने का है। दिल्ली AIIMS के डॉक्टरों ने कहा कि उसे 9 करोड़ का एक इंजेक्शन नहीं लगा, तो अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता। विनायक को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) नाम की दुर्लभ बीमारी है। यह बीमारी 10 लाख बच्चों में से किसी एक को होती है। विनायक को देखकर माता-पिता सिर्फ रो लेते हैं। दोनों घर का खर्च ही मुश्किल से चला पाते हैं, फिर 9 करोड़ कहां से लाएं। वह मदद के लिए अपील कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) क्या होती है? क्या यह इंजेक्शन लगने के बाद बच्चे की जान बच सकती है? पढ़िए पूरी खबर…
हमारी टीम इस पूरे एक्सप्रेस-वे को कवर करने के लिए लखनऊ से निकली। अमौसी एयरपोर्ट के पास से इस एक्सप्रेस-वे की शुरुआत होती है। अभी लोग लखनऊ से कानपुर जाने वाले नेशनल हाईवे-27 का सहारा लेते हैं। इस हाईवे से दोनों शहरों के बीच की दूरी 93 किलोमीटर पड़ती है। अगर कोई मोहनलालगंज से मौरवां और उन्नाव होते हुए कानपुर पहुंचता है, तो 127 किलोमीटर चलना पड़ता है। हवाई मार्ग से दोनों शहरों के बीच की दूरी 77 किलोमीटर है। हालांकि, दोनों शहरों के बीच कोई फ्लाइट नहीं है। ट्रेन से दोनों शहरों के बीच की दूरी 74 किलोमीटर है। इस एक्सप्रेस-वे को बनाने के पीछे की वजह दोनों शहरों के बीच लगने वाला जाम है। इस वक्त लखनऊ से कानपुर का सफर जाम के चलते 2 से 3 घंटे में पूरा होता है। कई बार तो 3 घंटे से भी ज्यादा लग जाते हैं। एक्सप्रेस-वे बनने से यह समय 1 से डेढ़ घंटा कम हो जाएगा। हर उस जगह पर फ्लाईओवर बनाया गया है, जहां जाम की स्थिति बनती है। यह लखनऊ के 11 गांव से होकर गुजरता है। बाकी का हिस्सा उन्नाव में आता है, वहां के 31 गांव शामिल हैं। अभी तो बहुत संघर्ष करना पड़ता है
एनएच-27 पर स्थित प्रधान ढाबा पर हमारी मुलाकात कानपुर के सोनू प्रताप सिंह से हुई। वह कहते हैं- जब ये बन जाएगा, तो बहुत अच्छा रहेगा। अभी जहां-जहां भी एक्सप्रेस-वे का इस्तेमाल किए हैं, उसमें आनंद आया है। यह भी बन जाएगा, तो इसके जरिए चलेंगे और फिर अच्छे से इसका अनुभव बता पाएंगे। लेकिन हां, इसके बनने के बाद क्विक सर्विस मिलेगी। आदमी खटाक से कानपुर से आएगा, फटाक से लखनऊ से चला जाएगा। यहीं हमें भाजपा कानपुर महानगर के पूर्व जिला उपाध्यक्ष बबलू विश्वकर्मा मिले। वह कहते हैं- कानपुर महानगर तो इस एक्सप्रेस-वे को बहुत पहले से मांग रहा था। सीएम योगी की योजना है, इसलिए बहुत बढ़िया तरीके से बन रही। अभी कहीं-कहीं काम बाकी है। सीएम साहब का आदेश है कि जब पूरा काम हो जाए तभी इसे शुरू किया जाए। क्योंकि, कानपुर-दिल्ली रोड का भार भी इस पर ही पड़ेगा। बिजली के तार ने 6 महीने से काम रोका
हम यहां से आगे बढ़े। स्कूटर इंडिया के पास गौरी बाजार चौराहा है। यहीं एक जगह है, जहां अभी एक्सप्रेस-वे का पिलर नहीं बन पाया है। करीब 300 मीटर का एरिया खुला है। पिलर आधे बने हैं। ऊपर से दो हाईटेंशन बिजली के तार गुजरे हैं। एक का तो इंतजाम हो गया है, उसे ऊपर कर दिया गया है। लेकिन, 1.32 लाख पावर लाइन वाला खंबा अभी नहीं लग पाया है। इसी वजह से यहां इस वक्त सबसे ज्यादा जाम की स्थिति बनती है। हमने यहां की साइट के इंजीनियर मोहन अवस्थी से बात की। मोहन कहते हैं- यहां तार को ऊंचा करने के लिए 3 मोनोपोल लगाए जाएंगे। 2 हमारे पास आ भी गए हैं। एक आना बाकी है। जैसे ही वह आ जाएगा, हम उसे लगाना शुरू कर देंगे। तीनों का फाउंडेशन बन चुका है। हमने पूछा कि आखिर पहले से मोनोपोल क्यों नहीं तैयार हुए? मोहन कहते हैं- इसका एक प्रोसेस है, पहले तैयार होने के बाद भी टेस्ट के लिए हैदराबाद भेजा गया था। वहां जांच में वह रिजेक्ट कर दिया गया। इसके बाद दोबारा से बनना शुरू हुआ। पता चला है कि वो बन भी गया है। एक्सप्रेस-वे गुजरा और दुकान चली गई
बनी (जगह का नाम) के पास हमें मो. अशफाक मिले। पहले उनकी दुकान नेशनल हाईवे के बगल थी। लेकिन एक्सप्रेस-वे गुजरा, तो उनकी दुकान के साथ 22 दुकानें टूट गईं। अशफाक कहते हैं- एक्सप्रेस-वे लोगों के लिए तो राहत वाला होगा, लेकिन हमारे लिए नुकसान वाला है। एक्सप्रेस-वे बन जाएगा, तो लोग ऊपर से चले जाएंगे। नीचे बहुत कम लोग हो जाएंगे। पास खड़े रमाशंकर कहते हैं- जब नीचे गाड़ियां कम चलेंगी, तो स्वाभाविक है कि व्यापार कम हो जाएगा। जहां एलिवेटेड, वहां 4 लेन, बाकी 6 लेन
लखनऊ में एक्सप्रेस-वे का जितना हिस्सा पड़ता है, उसमें ज्यादातर एलिवेटेड है। क्योंकि, नीचे पहले से ही हाईवे मौजूद है। अमौसी से दरोगा खेड़ा तक 4 लेन है, इसके आगे जहां से ग्रीन फील्ड शुरू होती है। वहां यह 8 लेन का हो गया है। बनी तक यह एक्सप्रेस-वे नेशनल हाईवे के ऊपर चलता है। वहां से इसकी दिशा बदल जाती है। यहां से एक्सप्रेस-वे 45 किलोमीटर ग्रीनफील्ड है। मतलब उधर से पहले कोई रास्ता नहीं था। ये दतौली, कांथा, तौरा, नेरोना से होते हुए अमरसास तक जाता है। इधर एक्सप्रेस-वे का काम पूरा हो गया है। इस पूरे एक्सप्रेस-वे में 3 बड़े पुल, 28 छोटे पुल, 38 अंडरपास और 6 फ्लाईओवर बनाए जा रहे हैं। 90% निर्माण पूरा हो गया है। जहां टोल गेट बनाया जाना है, वहां साइड की सड़कों का निर्माण आखिरी दौर में है। यह एक्सप्रेस-वे कानपुर के गंगा पुल से करीब 5 किलोमीटर पहले उन्नाव के आजाद चौराहे पर खत्म होता है। जो लोग लखनऊ से कानपुर जाएंगे, उन्हें गंगा पुल पार करना होगा। कई बार जाम की वजह यह पुल भी बन जाता है। यह देश का सबसे महंगा एक्सप्रेस-वे होगा
यूपी में इस वक्त 2 एक्सप्रेस-वे का निर्माण जारी है। पहला- गंगा एक्सप्रेस-वे। दूसरा- लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे। गंगा एक्सप्रेस-वे मेरठ से प्रयागराज के बीच बन रहा। 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे का बजट 37 हजार 350 करोड़ रुपए है। यानी एक किलोमीटर एक्सप्रेस-वे की कीमत 62 करोड़ 87 लाख रुपए पड़ेगी। वहीं, कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 62.7 किलोमीटर है। ऐसे में 1 किलोमीटर एक्सप्रेस-वे का खर्च 75 करोड़ रुपए आ रहा। उन्नाव के पास यह एक्सप्रेस-वे गंगा एक्सप्रेस-वे से भी मिल रहा है। कुल मिलाकर लखनऊ-कानपुर देश का सबसे महंगा एक्सप्रेस-वे होगा। महंगा होने की मुख्य वजह जमीन का रेट है। असल में यह एक्सप्रेस-वे राजधानी से गुजरता है, यहां का सर्किल रेट ज्यादा है। मुआवजा ज्यादा देना पड़ा। इसके अलावा इसमें 6 फ्लाईओवर, 38 अंडरपास, 28 छोटे पुल हैं। इससे इसकी लागत बढ़ गई है। आखिरी सवाल- कब शुरू होगा?
इस पूरे एक्सप्रेस-वे को देखने के बाद यह समझ आया कि स्कूटर इंडिया के पास वाला हिस्सा बनते ही इसे शुरू किया जा सकता है। क्योंकि, एक्सप्रेस-वे का मुख्य कैरिज-वे हर जगह बन गया है। थोड़ा-बहुत काम ही बाकी है। स्कूटर इंडिया के पास बचे हुए काम को लेकर एक्सप्रेस-वे के इंजीनियर कहते हैं, पोल लगने के बाद यहां का काम तेजी से होगा। हमें सिर्फ पिलर ही तैयार करना है, बाकी का हिस्सा बनाया जा चुका है। वह सिर्फ रखा जाएगा। अगले 2 महीने में हम इसे तैयार कर देंगे। इसका मतलब यह हुआ कि यह एक्सप्रेस-वे जनवरी के महीने में शुरू किया जा सकता है। —————————— ये खबर भी पढ़ें… क्या 9 करोड़ का इंजेक्शन बचा सकता है जान, यूपी के 13 महीने के बच्चे को चाहिए; अब तक 90 बच्चों को लग चुका मिर्जापुर के करजी गांव के आलोक और प्रतिभा का इकलौता बेटा विनायक 13 महीने का है। दिल्ली AIIMS के डॉक्टरों ने कहा कि उसे 9 करोड़ का एक इंजेक्शन नहीं लगा, तो अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता। विनायक को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) नाम की दुर्लभ बीमारी है। यह बीमारी 10 लाख बच्चों में से किसी एक को होती है। विनायक को देखकर माता-पिता सिर्फ रो लेते हैं। दोनों घर का खर्च ही मुश्किल से चला पाते हैं, फिर 9 करोड़ कहां से लाएं। वह मदद के लिए अपील कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) क्या होती है? क्या यह इंजेक्शन लगने के बाद बच्चे की जान बच सकती है? पढ़िए पूरी खबर…