यूपी के सहारनपुर में सिंचाई विभाग ने करीब 300 से ज्यादा मकानों पर लाल निशान लगाए हैं। इन्हें 3 दिन में खाली करने के लिए कहा है। निशान लगाने वालों ने मौखिक रूप से कहा है कि ये मकान अवैध हैं और इन पर बुलडोजर चलाया जाएगा। सबसे प्रमुख बात ये है कि इस एरिया में प्रधानमंत्री आवासीय योजना के तहत जो मकान बने हैं, वो भी अवैध बता दिए गए हैं। यहां के लोग कहते हैं– हम 40–50 साल से इन मकानों में रह रहे हैं। अब मकान खाली करके कहां जाएंगे? ‘दैनिक भास्कर’ ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर इन लोगों की बात सुनी। इस पूरे क्षेत्र का इतिहास समझा। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का भी पक्ष जाना। ये रिपोर्ट पढ़िए। सबसे पहले कॉलोनी का इतिहास जानिए– 45 साल पहले इंदिरा गांधी के नाम पर बसाई थी कॉलोनी
सहारनपुर में प्रसिद्ध शाकुंभरी देवी मंदिर से करीब 20 किलोमीटर पहले कस्बा बेहट है। बेहट नगर पंचायत क्षेत्र से पूर्वी गंगनहर गुजर रही है। ये नहर यूपी–हरियाणा बॉर्डर स्थित हथनीकुंड बैराज से निकलती है। कस्बा बेहट में इस नहर के किनारे 1980 के दशक में पूर्व PM इंदिरा गांधी के नाम पर ‘इंदिरा कॉलोनी’ बसाई गई थी। इसमें प्रमुख भूमिका सरसावा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक रहे निर्भय पाल शर्मा की थी। उस वक्त 30–40 छप्परनुमा मकान थे। हालांकि आज इस क्षेत्र की आबादी 4500 और घरों की संख्या एक हजार के आसपास है। पुराने लोग बताते हैं कि जब ये क्षेत्र बसाया गया, तब भी स्थानीय प्रशासन ने इसे अवैध करार देते हुए ध्वस्त करने का प्रयास किया था। ज्यादा विरोध होने की वजह से वो इसे ध्वस्त नहीं कर पाए थे। अब करीब 45 साल बाद इस जमीन के विवाद का जिन्न एक बार फिर से बाहर निकला है। सिंचाई कर्मचारियों ने कहा– बुलडोजर चलाएंगे, पैसा भी तुम्ही से लेंगे
3 नवंबर, 2025 को सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने बेहट कस्बे की इंदिरा कॉलोनी और सड़क पार मध्य के 300 से ज्यादा मकानों पर रेड क्रॉस के निशान बना दिए हैं। जब स्थानीय लोगों ने निशान लगाने की वजह पूछी तो उन्होंने बताया- ये जमीन सिंचाई विभाग की है। इन मकानों में रहने वाले लोगों को 3 दिन के भीतर खाली करने का मौखिक निर्देश दिया गया। ऐसा न करने पर सामान सहित मकान बुलडोजर से ध्वस्त करने की चेतावनी दी गई। ये भी कहा गया कि बुलडोजर का पैसा इन मकानों में रहने वाले लोगों से ही वसूला जाएगा। मौखिक निर्देश की अवधि 5 नवंबर को समाप्त हो गई। 6 नवंबर को लोग चिंता में डूबे थे कि कहीं मकान गिराने वाली टीम न आ जाए। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। बेशक सिंचाई विभाग ने रेड क्रॉस निशान लगा दिए हों, लेकिन यहां लोगों ने एक भी मकान अभी तक खाली नहीं किया है। बेहट नगर पंचायत में वार्ड–3 की सभासद आयशा उर्फ विजय लक्ष्मी और उनके पति टीपू सुल्तान 6 नवंबर को इस प्रकरण में सिंचाई विभाग के XEN प्रवीण जोशीय से मिले। उन्हें बताया कि मकानों पर गलत तरीके से निशान लगाए गए हैं। सिंचाई विभाग पुन: जांच करे और फिलहाल के लिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोकी जाए। XEN ने उन्हें भरोसा दिया है कि फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं होगी और जमीन पर रहने वाले लोगों के कागजों की जांच होगी। अब स्थानीय लोगों की बात- ‘जमाबंदी के आधार पर लोगों ने कराए बैनामे’ पार्षद पति टीपू सुल्तान बताते हैं– बेहट कस्बे में इंदिरा कॉलोनी तत्कालीन विधायक निर्भय पाल शर्मा ने बसाई थी। आज यहां एक हजार से ज्यादा मकान हैं। इस वार्ड का पोलिंग ही 1510 मतदाताओं का है। उन दिनों नगर पंचायत में जमाबंदी होती थी। इसके तहत जो व्यक्ति जहां पर काबिज था, वो जगह उसके नाम जमाबंदी के दस्तावेजों में दर्ज कर दी गई। बाद में इसी जमाबंदी के आधार पर लोगों ने इन घरों के बैनामे करा लिए। नगर पंचायत भी इसी आधार पर आज तक इन घरों से गृहकर और जलकर वसूल रहा है। इसलिए अब ये मकान कहीं से भी अवैध नहीं हैं। सिंचाई विभाग ने लाल निशान तो लगाए हैं, लेकिन किसी को भी लिखित में नोटिस नहीं दिया है। ‘50 साल से रह रहे, घर छिना तो कहां जाएंगे’ ‘दैनिक भास्कर’ टीम जब कस्बा बेहट में ग्राउंड जीरो पर मौजूद थी, तब हमें PM आवास योजना के कई ऐसे मकान मिले, जिन पर रेड क्रॉस का निशान बना हुआ था। हमने ऐसे परिवारों से भी बात की। मोहल्ला सड़क पार में कासमीन पत्नी अबरार का मकान प्रधानमंत्री आवासीय योजना के तहत बना है। मकान बनाने के लिए सरकार से ढाई लाख रुपए मिले थे। कासमीन के पति अबरार कहते हैं– मैं इस मकान में पिछले करीब 50 साल से रह रहा हूं। पीएम योजना के तहत करीब 3 साल पहले ये मकान बनवाया था। अब सिंचाई विभाग वाले आकर निशान लगा गए हैं। 3 दिन का वक्त दे गए हैं। कह गए हैं कि इसके बाद तोड़फोड़ कर देंगे। अब हम डॉक्यूमेंट्स तैयार कर रहे हैं, ताकि जवाब दे सकें। इस मकान में हमारे पुरखे रहते आए हैं, अब हम रह रहे हैं। ‘हमारा घर मोदी जी ने बनवाया, कहीं नहीं जाएंगे’ PM आवास योजना के तहत ढाई लाख रुपए पाकर मकान बनाने वाली शहनाज कहती हैं– जब सरकारी योजना में हमारा मकान बना, तब पूरी जांच–पड़ताल हुई थी। तब हमारा मकान अवैध नहीं था। इसलिए ही सरकारी सहायता मिली थी। नगर पंचायत के कागजातों में हमारा मकान दर्ज है। हम मकान के टैक्स भी लगातार जमा कर रहे हैं। इन टैक्स की रसीद हमारे पास मौजूद हैं। हमें ये मकान मोदी ने दिया है। पहले 50 हजार, फिर डेढ़ लाख और फिर 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता मिली। तब जाकर हमारा मकान बन पाया। कस्बे में जो अवैध कॉलोनियां थीं, वहां तो पीएम आवास नहीं बने। क्योंकि वो अवैध थीं, हमारी वैध थी। हमारे घर पर लाल निशान लगाया गया है। ऐसा लगता है कि ये निशान भूल–चूक में लगा दिया होगा। ‘पहले घर दे रहे फिर तोड़ रहे, ये कौन सी बात हुई’ नसरीन के घर के बाहर सरकारी प्लेट लगी है, जो ये दर्शाती है कि उनका मकान पीएम आवास योजना के तहत बना है। इस प्लेट के बगल में ही लाल रंग का क्रॉस निशान बना हुआ है। नसरीन कहती हैं– मैं उस दिन घर से बाहर गई थी। लौटकर आई तो गेट पर लाल निशान बना हुआ था। आसपास के लोगों से हमने पूछा तो जानकारी हुई कि सिंचाई विभाग वाले आए थे। सिंचाई विभाग वाले ये निशान बनाकर गए हैं। उन्होंने मकान खाली करने के लिए तीन दिन का वक्त दिया है। ये कहा है कि बुलडोजर चलेगा और बुलडोजर का किराया भी आप दोगे। मैंने अभी मकान खाली नहीं किया है। सामान घर के अंदर मौजूद है। हम यहीं रहेंगे और कहां जाएंगे। सहारनपुर सिंचाई विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर प्रवीण जोशीय का कहना है… यह जमीन सिंचाई सहित कई सरकारी विभागों की है। हमने अवैध मकानों पर रेड क्रॉस के निशान लगाए हैं। अब आगे की कार्रवाई चल रही है। ………………………. ये खबर भी पढ़ें… लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे इस साल शुरू होना मुश्किल:तार ने 6 महीने रोका काम, नए साल में जाम से मुक्ति मिलेगी लखनऊ-कानपुर के बीच देश का सबसे छोटा एक्सप्रेस-वे बन रहा है। इसकी लंबाई 63 किलोमीटर है और लागत करीब 4700 करोड़ रुपए। जून- 2025 में इसका उद्घाटन प्रस्तावित था। लेकिन, बिजली के एक पोल से लगातार देरी होती चली गई। फाइनली उस बिजली के पोल की टेस्टिंग पूरी हो गई। अब उम्मीद है कि अगले डेढ़ से दो महीने के बीच काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद लखनऊ-कानपुर के बीच की दूरी एक घंटे कम हो जाएगी। पढ़िए पूरी खबर…
सहारनपुर में प्रसिद्ध शाकुंभरी देवी मंदिर से करीब 20 किलोमीटर पहले कस्बा बेहट है। बेहट नगर पंचायत क्षेत्र से पूर्वी गंगनहर गुजर रही है। ये नहर यूपी–हरियाणा बॉर्डर स्थित हथनीकुंड बैराज से निकलती है। कस्बा बेहट में इस नहर के किनारे 1980 के दशक में पूर्व PM इंदिरा गांधी के नाम पर ‘इंदिरा कॉलोनी’ बसाई गई थी। इसमें प्रमुख भूमिका सरसावा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक रहे निर्भय पाल शर्मा की थी। उस वक्त 30–40 छप्परनुमा मकान थे। हालांकि आज इस क्षेत्र की आबादी 4500 और घरों की संख्या एक हजार के आसपास है। पुराने लोग बताते हैं कि जब ये क्षेत्र बसाया गया, तब भी स्थानीय प्रशासन ने इसे अवैध करार देते हुए ध्वस्त करने का प्रयास किया था। ज्यादा विरोध होने की वजह से वो इसे ध्वस्त नहीं कर पाए थे। अब करीब 45 साल बाद इस जमीन के विवाद का जिन्न एक बार फिर से बाहर निकला है। सिंचाई कर्मचारियों ने कहा– बुलडोजर चलाएंगे, पैसा भी तुम्ही से लेंगे
3 नवंबर, 2025 को सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने बेहट कस्बे की इंदिरा कॉलोनी और सड़क पार मध्य के 300 से ज्यादा मकानों पर रेड क्रॉस के निशान बना दिए हैं। जब स्थानीय लोगों ने निशान लगाने की वजह पूछी तो उन्होंने बताया- ये जमीन सिंचाई विभाग की है। इन मकानों में रहने वाले लोगों को 3 दिन के भीतर खाली करने का मौखिक निर्देश दिया गया। ऐसा न करने पर सामान सहित मकान बुलडोजर से ध्वस्त करने की चेतावनी दी गई। ये भी कहा गया कि बुलडोजर का पैसा इन मकानों में रहने वाले लोगों से ही वसूला जाएगा। मौखिक निर्देश की अवधि 5 नवंबर को समाप्त हो गई। 6 नवंबर को लोग चिंता में डूबे थे कि कहीं मकान गिराने वाली टीम न आ जाए। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। बेशक सिंचाई विभाग ने रेड क्रॉस निशान लगा दिए हों, लेकिन यहां लोगों ने एक भी मकान अभी तक खाली नहीं किया है। बेहट नगर पंचायत में वार्ड–3 की सभासद आयशा उर्फ विजय लक्ष्मी और उनके पति टीपू सुल्तान 6 नवंबर को इस प्रकरण में सिंचाई विभाग के XEN प्रवीण जोशीय से मिले। उन्हें बताया कि मकानों पर गलत तरीके से निशान लगाए गए हैं। सिंचाई विभाग पुन: जांच करे और फिलहाल के लिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोकी जाए। XEN ने उन्हें भरोसा दिया है कि फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं होगी और जमीन पर रहने वाले लोगों के कागजों की जांच होगी। अब स्थानीय लोगों की बात- ‘जमाबंदी के आधार पर लोगों ने कराए बैनामे’ पार्षद पति टीपू सुल्तान बताते हैं– बेहट कस्बे में इंदिरा कॉलोनी तत्कालीन विधायक निर्भय पाल शर्मा ने बसाई थी। आज यहां एक हजार से ज्यादा मकान हैं। इस वार्ड का पोलिंग ही 1510 मतदाताओं का है। उन दिनों नगर पंचायत में जमाबंदी होती थी। इसके तहत जो व्यक्ति जहां पर काबिज था, वो जगह उसके नाम जमाबंदी के दस्तावेजों में दर्ज कर दी गई। बाद में इसी जमाबंदी के आधार पर लोगों ने इन घरों के बैनामे करा लिए। नगर पंचायत भी इसी आधार पर आज तक इन घरों से गृहकर और जलकर वसूल रहा है। इसलिए अब ये मकान कहीं से भी अवैध नहीं हैं। सिंचाई विभाग ने लाल निशान तो लगाए हैं, लेकिन किसी को भी लिखित में नोटिस नहीं दिया है। ‘50 साल से रह रहे, घर छिना तो कहां जाएंगे’ ‘दैनिक भास्कर’ टीम जब कस्बा बेहट में ग्राउंड जीरो पर मौजूद थी, तब हमें PM आवास योजना के कई ऐसे मकान मिले, जिन पर रेड क्रॉस का निशान बना हुआ था। हमने ऐसे परिवारों से भी बात की। मोहल्ला सड़क पार में कासमीन पत्नी अबरार का मकान प्रधानमंत्री आवासीय योजना के तहत बना है। मकान बनाने के लिए सरकार से ढाई लाख रुपए मिले थे। कासमीन के पति अबरार कहते हैं– मैं इस मकान में पिछले करीब 50 साल से रह रहा हूं। पीएम योजना के तहत करीब 3 साल पहले ये मकान बनवाया था। अब सिंचाई विभाग वाले आकर निशान लगा गए हैं। 3 दिन का वक्त दे गए हैं। कह गए हैं कि इसके बाद तोड़फोड़ कर देंगे। अब हम डॉक्यूमेंट्स तैयार कर रहे हैं, ताकि जवाब दे सकें। इस मकान में हमारे पुरखे रहते आए हैं, अब हम रह रहे हैं। ‘हमारा घर मोदी जी ने बनवाया, कहीं नहीं जाएंगे’ PM आवास योजना के तहत ढाई लाख रुपए पाकर मकान बनाने वाली शहनाज कहती हैं– जब सरकारी योजना में हमारा मकान बना, तब पूरी जांच–पड़ताल हुई थी। तब हमारा मकान अवैध नहीं था। इसलिए ही सरकारी सहायता मिली थी। नगर पंचायत के कागजातों में हमारा मकान दर्ज है। हम मकान के टैक्स भी लगातार जमा कर रहे हैं। इन टैक्स की रसीद हमारे पास मौजूद हैं। हमें ये मकान मोदी ने दिया है। पहले 50 हजार, फिर डेढ़ लाख और फिर 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता मिली। तब जाकर हमारा मकान बन पाया। कस्बे में जो अवैध कॉलोनियां थीं, वहां तो पीएम आवास नहीं बने। क्योंकि वो अवैध थीं, हमारी वैध थी। हमारे घर पर लाल निशान लगाया गया है। ऐसा लगता है कि ये निशान भूल–चूक में लगा दिया होगा। ‘पहले घर दे रहे फिर तोड़ रहे, ये कौन सी बात हुई’ नसरीन के घर के बाहर सरकारी प्लेट लगी है, जो ये दर्शाती है कि उनका मकान पीएम आवास योजना के तहत बना है। इस प्लेट के बगल में ही लाल रंग का क्रॉस निशान बना हुआ है। नसरीन कहती हैं– मैं उस दिन घर से बाहर गई थी। लौटकर आई तो गेट पर लाल निशान बना हुआ था। आसपास के लोगों से हमने पूछा तो जानकारी हुई कि सिंचाई विभाग वाले आए थे। सिंचाई विभाग वाले ये निशान बनाकर गए हैं। उन्होंने मकान खाली करने के लिए तीन दिन का वक्त दिया है। ये कहा है कि बुलडोजर चलेगा और बुलडोजर का किराया भी आप दोगे। मैंने अभी मकान खाली नहीं किया है। सामान घर के अंदर मौजूद है। हम यहीं रहेंगे और कहां जाएंगे। सहारनपुर सिंचाई विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर प्रवीण जोशीय का कहना है… यह जमीन सिंचाई सहित कई सरकारी विभागों की है। हमने अवैध मकानों पर रेड क्रॉस के निशान लगाए हैं। अब आगे की कार्रवाई चल रही है। ………………………. ये खबर भी पढ़ें… लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे इस साल शुरू होना मुश्किल:तार ने 6 महीने रोका काम, नए साल में जाम से मुक्ति मिलेगी लखनऊ-कानपुर के बीच देश का सबसे छोटा एक्सप्रेस-वे बन रहा है। इसकी लंबाई 63 किलोमीटर है और लागत करीब 4700 करोड़ रुपए। जून- 2025 में इसका उद्घाटन प्रस्तावित था। लेकिन, बिजली के एक पोल से लगातार देरी होती चली गई। फाइनली उस बिजली के पोल की टेस्टिंग पूरी हो गई। अब उम्मीद है कि अगले डेढ़ से दो महीने के बीच काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद लखनऊ-कानपुर के बीच की दूरी एक घंटे कम हो जाएगी। पढ़िए पूरी खबर…