शराब असली है या नकली, अब इसका पता लगाना काफी आसान हो गया है। यूपी सरकार ने इसके लिए एक खास मोबाइल एप लॉन्च किया है। अपने मोबाइल फोन से बोतल पर दिए गए QR कोड को स्कैन करते ही शराब की पूरी जानकारी आपके सामने आ जाएगी। आबकारी एवं मद्यनिषेध राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने गन्ना संस्थान स्थित सभागार में यूपी एक्साइज सिटिजन एप (‘UP Excise Citizen App’) लॉन्च किया है। सवाल यह है कि ये एप क्या है? कैसे काम करता है? इससे आपको क्या-क्या जानकारी मिल सकती है? पहले असली-नकली शराब की जांच कैसे होती थी? पढ़िए सारे सवालों के जवाब भास्कर एक्सप्लेनर में सवाल: यूपी एक्साइज सिटिजन एप क्या है?
जवाब: यूपी सरकार के आबकारी विभाग का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। जिसे शराब की बिक्री और सुरक्षा को पारदर्शी बनाने के लिए तैयार किया गया है। इस एप का काम शराब की हर बोतल की असलियत की जांच आसान बनाना है। राज्य में बिकने वाली हर बोतल पर एक यूनीक क्यूआर (QR) कोड दिया जाता है। इस एप से आप उस QR कोड को स्कैन करते ही बोतल की पूरी जानकारी देख सकते हैं। यह एप ग्राहकों, दुकानदारों और अधिकारियों सबके लिए उपयोगी है। क्योंकि यह शराब की अवैध बिक्री, मिलावट और फर्जी बोतलों पर रोक लगाने में मदद करता है। सबसे पहले पंजाब एक्साइज विभाग ने एक्साइज क्यूआर कोड लेवल वेरिफिकेशन सिटिजन एप ( “Excise QR Code Label Verification Citizen App” ) दिसंबर 2022 में लॉन्च किया था। देश के कई राज्यों में ऐसे एप काम कर रहे हैं। अब यूपी सरकार ने नकली शराब के बिक्री पर रोक लगाने के लिए इसको लॉन्च किया है। सवाल: यह एप कैसे काम करेगा?
जवाब: आपको इसके लिए गूगल के प्ले स्टोर से या एपल एप स्टोर से यूपी एक्साइज स्कैनर एप डाउनलोड करना होगा। उसके बाद शराब की बोतल का क्यूआर कोड स्कैन करना होगा। अगर शराब असली है तो आपके सामने शराब की पूरी जानकारी आ जाएगी। इसमें पूरी डिटेल होगी कि यह शराब कब बनी और कहां बनी और किस दुकान को आवंटित हुई है? अगर शराब नकली हुई तो स्कैनर काम नहीं करेगा और आपको जानकारी नहीं मिल पाएगी। सवाल: स्कैन करने पर क्या-क्या नजर आएगा?
जवाब: आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने बताया कि जैसे ही शराब की बोतल पर लगे QR कोड को स्कैन करेंगे। इस पर मोबाइल स्क्रीन पर तुरंत ब्रांड का नाम और बोतल में भरी शराब की कितनी तीव्रता है, यह जानकारी दिख जाएगी। इसमें बीयर, वाइन, LAB, व्हिस्की, वोदका, रम, जिन, देसी शराब और UPML जैसी सभी कैटेगरी शामिल होंगी। उन्होंने बताया कि एप पर यह भी दिखेगा कि बोतल किस तरह की पैकेजिंग में है- ग्लास बोतल, प्लास्टिक बोतल, टेट्रा पैक या कैन। साथ ही, किस थोक गोदाम से यह बोतल आई और किस तारीख को दुकान के स्टॉक में जोड़ी गई यह पूरी डिटेल भी एप में दिखेगी। सवाल: यूपी में पहले कैसे असली-नकली शराब चेक होती थी?
जवाब: यूपी में शराब की बोतलों की असलियत जांचने के लिए अब भले ही एप के जरिए QR कोड स्कैन करने की सुविधा उपलब्ध हो गई हो। लेकिन, इससे पहले प्रदेश में नकली और असली शराब पहचानने की प्रक्रिया पूरी तरह मैनुअल तरीकों पर आधारित थी। लंबे समय तक एक्साइज विभाग और पुलिस तीन प्रमुख तरीकों से ही शराब की वैधता की पुष्टि करते थे… 1. होलोग्राम देखकर 2. कैप-सील की जांच 3. MRP और बैच नंबर मिलाना सवाल: पहले जांच के लिए सरकार क्या करती थी?
जवाब: जांच के लिए पहले एक्साइज विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से अलग-अलग स्तर पर चेकिंग करते थे। सरकार हर जिले में तैनात एक्साइज इंस्पेक्टरों के जरिए रूटीन चेकिंग कराती थी। सरकारी गोदामों, डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट और हॉटस्पॉट इलाकों में टीमों को भेजकर सरकार फिजिकल वेरिफिकेशन कराती थी। बोतलों पर लगे सुरक्षा होलोग्राम को देखकर ही असलियत का पता लगाया जाता था। एक्साइज विभाग और पुलिस कैप, ढक्कन और रैपर की बारीकी से जांच करते थे। इसके साथ ही सरकार समय-समय पर विशेष अभियान चलाती थी। इन अभियानों में पुलिस, SOG और एक्साइज की संयुक्त टीमें शामिल होती थीं। सवाल: अगर शराब नकली मिली को क्या कार्रवाई हो सकती है?
जवाब: यूपी में शराब की बोतलों में किसी भी तरह की विसंगति या नकलीपन पाए जाने पर आबकारी विभाग सख्त कार्रवाई करता है। नकली शराब बेचने वाले दुकानदार का लाइसेंस तुरंत निलंबित किया जा सकता है। पूरी दुकान का स्टॉक जब्त होता है। साथ ही संबंधित के खिलाफ यूपी एक्साइज एक्ट और आईपीसी की धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाता है। नकली शराब बेचने या बनाने पर आरोपी को जेल और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, जहरीली शराब से किसी व्यक्ति की मौत या स्वास्थ्य नुकसान की स्थिति में आरोपियों पर हत्या, गैर इरादतन हत्या और जानलेवा हमले की धाराएं भी लग सकती हैं। आबकारी विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि शराब खरीदते समय ऑफिशियल एप से बोतल की जांच जरूर करें। किसी भी विसंगति की जानकारी तत्काल जिला आबकारी अधिकारी या विभाग की टोल–फ्री हेल्पलाइन (14405) पर दी जा सकती है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… यूपी में काम के घंटे से लेकर छुटि्टयां भी तय, प्राइवेट कर्मचारियों के लिए नया कानून यूपी में प्राइवेट कर्मचारी कहीं पिस तो नहीं रहा? उसके साथ कंपनी या मालिक अन्याय तो नहीं कर रहे? फिक्स घंटों से ज्यादा तो काम नहीं करना पड़ रहा? इस तरह के सवाल आम बात है। हर प्राइवेट कर्मचारी के अंदर इसको लेकर दर्द है। इसीलिए यूपी सरकार ने दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम 1962 में 63 साल बाद बड़ा बदलाव किया है। अब यह कानून सिर्फ शहरों में ही नहीं, पूरे यूपी में लागू होगा। इस बदलाव का मुख्य मकसद बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा और उनके अधिकार दिलाना है। दुकान एवं वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम क्या होता है? यह कहां-कहां लागू होगा? महिलाओं और युवाओं से जुड़े क्या प्रावधान हैं? आम आदमी को इसके लागू होने से क्या फायदा-नुकसान होगा? नियम न मानने पर क्या पेनल्टी है? पढ़िए पूरी खबर…
जवाब: यूपी सरकार के आबकारी विभाग का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। जिसे शराब की बिक्री और सुरक्षा को पारदर्शी बनाने के लिए तैयार किया गया है। इस एप का काम शराब की हर बोतल की असलियत की जांच आसान बनाना है। राज्य में बिकने वाली हर बोतल पर एक यूनीक क्यूआर (QR) कोड दिया जाता है। इस एप से आप उस QR कोड को स्कैन करते ही बोतल की पूरी जानकारी देख सकते हैं। यह एप ग्राहकों, दुकानदारों और अधिकारियों सबके लिए उपयोगी है। क्योंकि यह शराब की अवैध बिक्री, मिलावट और फर्जी बोतलों पर रोक लगाने में मदद करता है। सबसे पहले पंजाब एक्साइज विभाग ने एक्साइज क्यूआर कोड लेवल वेरिफिकेशन सिटिजन एप ( “Excise QR Code Label Verification Citizen App” ) दिसंबर 2022 में लॉन्च किया था। देश के कई राज्यों में ऐसे एप काम कर रहे हैं। अब यूपी सरकार ने नकली शराब के बिक्री पर रोक लगाने के लिए इसको लॉन्च किया है। सवाल: यह एप कैसे काम करेगा?
जवाब: आपको इसके लिए गूगल के प्ले स्टोर से या एपल एप स्टोर से यूपी एक्साइज स्कैनर एप डाउनलोड करना होगा। उसके बाद शराब की बोतल का क्यूआर कोड स्कैन करना होगा। अगर शराब असली है तो आपके सामने शराब की पूरी जानकारी आ जाएगी। इसमें पूरी डिटेल होगी कि यह शराब कब बनी और कहां बनी और किस दुकान को आवंटित हुई है? अगर शराब नकली हुई तो स्कैनर काम नहीं करेगा और आपको जानकारी नहीं मिल पाएगी। सवाल: स्कैन करने पर क्या-क्या नजर आएगा?
जवाब: आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने बताया कि जैसे ही शराब की बोतल पर लगे QR कोड को स्कैन करेंगे। इस पर मोबाइल स्क्रीन पर तुरंत ब्रांड का नाम और बोतल में भरी शराब की कितनी तीव्रता है, यह जानकारी दिख जाएगी। इसमें बीयर, वाइन, LAB, व्हिस्की, वोदका, रम, जिन, देसी शराब और UPML जैसी सभी कैटेगरी शामिल होंगी। उन्होंने बताया कि एप पर यह भी दिखेगा कि बोतल किस तरह की पैकेजिंग में है- ग्लास बोतल, प्लास्टिक बोतल, टेट्रा पैक या कैन। साथ ही, किस थोक गोदाम से यह बोतल आई और किस तारीख को दुकान के स्टॉक में जोड़ी गई यह पूरी डिटेल भी एप में दिखेगी। सवाल: यूपी में पहले कैसे असली-नकली शराब चेक होती थी?
जवाब: यूपी में शराब की बोतलों की असलियत जांचने के लिए अब भले ही एप के जरिए QR कोड स्कैन करने की सुविधा उपलब्ध हो गई हो। लेकिन, इससे पहले प्रदेश में नकली और असली शराब पहचानने की प्रक्रिया पूरी तरह मैनुअल तरीकों पर आधारित थी। लंबे समय तक एक्साइज विभाग और पुलिस तीन प्रमुख तरीकों से ही शराब की वैधता की पुष्टि करते थे… 1. होलोग्राम देखकर 2. कैप-सील की जांच 3. MRP और बैच नंबर मिलाना सवाल: पहले जांच के लिए सरकार क्या करती थी?
जवाब: जांच के लिए पहले एक्साइज विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से अलग-अलग स्तर पर चेकिंग करते थे। सरकार हर जिले में तैनात एक्साइज इंस्पेक्टरों के जरिए रूटीन चेकिंग कराती थी। सरकारी गोदामों, डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट और हॉटस्पॉट इलाकों में टीमों को भेजकर सरकार फिजिकल वेरिफिकेशन कराती थी। बोतलों पर लगे सुरक्षा होलोग्राम को देखकर ही असलियत का पता लगाया जाता था। एक्साइज विभाग और पुलिस कैप, ढक्कन और रैपर की बारीकी से जांच करते थे। इसके साथ ही सरकार समय-समय पर विशेष अभियान चलाती थी। इन अभियानों में पुलिस, SOG और एक्साइज की संयुक्त टीमें शामिल होती थीं। सवाल: अगर शराब नकली मिली को क्या कार्रवाई हो सकती है?
जवाब: यूपी में शराब की बोतलों में किसी भी तरह की विसंगति या नकलीपन पाए जाने पर आबकारी विभाग सख्त कार्रवाई करता है। नकली शराब बेचने वाले दुकानदार का लाइसेंस तुरंत निलंबित किया जा सकता है। पूरी दुकान का स्टॉक जब्त होता है। साथ ही संबंधित के खिलाफ यूपी एक्साइज एक्ट और आईपीसी की धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाता है। नकली शराब बेचने या बनाने पर आरोपी को जेल और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, जहरीली शराब से किसी व्यक्ति की मौत या स्वास्थ्य नुकसान की स्थिति में आरोपियों पर हत्या, गैर इरादतन हत्या और जानलेवा हमले की धाराएं भी लग सकती हैं। आबकारी विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि शराब खरीदते समय ऑफिशियल एप से बोतल की जांच जरूर करें। किसी भी विसंगति की जानकारी तत्काल जिला आबकारी अधिकारी या विभाग की टोल–फ्री हेल्पलाइन (14405) पर दी जा सकती है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… यूपी में काम के घंटे से लेकर छुटि्टयां भी तय, प्राइवेट कर्मचारियों के लिए नया कानून यूपी में प्राइवेट कर्मचारी कहीं पिस तो नहीं रहा? उसके साथ कंपनी या मालिक अन्याय तो नहीं कर रहे? फिक्स घंटों से ज्यादा तो काम नहीं करना पड़ रहा? इस तरह के सवाल आम बात है। हर प्राइवेट कर्मचारी के अंदर इसको लेकर दर्द है। इसीलिए यूपी सरकार ने दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम 1962 में 63 साल बाद बड़ा बदलाव किया है। अब यह कानून सिर्फ शहरों में ही नहीं, पूरे यूपी में लागू होगा। इस बदलाव का मुख्य मकसद बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा और उनके अधिकार दिलाना है। दुकान एवं वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम क्या होता है? यह कहां-कहां लागू होगा? महिलाओं और युवाओं से जुड़े क्या प्रावधान हैं? आम आदमी को इसके लागू होने से क्या फायदा-नुकसान होगा? नियम न मानने पर क्या पेनल्टी है? पढ़िए पूरी खबर…