हमारा सबसे ज्यादा फोकस रिसर्च और इनोवेशन पर है। हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स स्टार्टअप बनाने में सफल हों। इसके लिए हम सभी जरूरी प्रयास भी कर रहे हैं। अब वह समय आ गया है कि लखनऊ जैसे शहरों से भविष्य के नारायण मूर्ति और बिल गेट्स निकलें। भारत के स्टूडेंट्स का मुकाबला दुनिया का कोई देश नहीं कर सकता है। उनमें टैलेंट की कोई कमी नहीं है। ये कहना है एमिटी ग्रुप के चेयरमैन डॉ. असीम चौहान का। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द दुनिया के तमाम देशों के स्टूडेंट्स हायर एजुकेशन के लिए भारत का रुख करेंगे। कई नई प्राइवेट यूनिवर्सिटी के आने पर उनका कहना है कि जिनके पास लांग टर्म विजन है, वही आगे सफल हो पाएंगे। एमिटी लखनऊ के 21वां कन्वोकेशन में आए डॉ. असीम चौहान ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। पढ़िए प्रमुख अंश… सवाल: एमिटी लखनऊ का 21वां कन्वोकेशन है। इस पल और इस सफरनामे को कैसे देखते हैं? जवाब: देखिए… कन्वोकेशन के दिन बच्चे अपनी डिग्री और अवॉर्ड लेने के लिए आते हैं। इससे ज्यादा खुशी का दिन हमारे लिए या उनके परिवारों के लिए नहीं हो सकता है। इतने सालों की मेहनत के बाद वह अपनी डिग्री पा रहे हैं। सफल हो रहे और आगे बढ़ रहे हैं। आज एमिटी ग्रुप की 13 राज्यों में यूनिवर्सिटीज हैं। पूरे देश में 40 कैंपस हैं। 12 देशों में 18 कैंपस हैं। जहां पर भी कन्वोकेशन होता है। हम देखते हैं कि हमारे बच्चे इतनी सफलता पा रहे हैं। इतने खुश होते हैं। लखनऊ में पिछले 21 सालों में बहुत ग्रोथ हुई है। आप यहां का कैंपस देखें। कई लोग कहते हैं कि ये सबसे खूबसूरत कैंपस है। यहां का इन्फ्रास्ट्रक्चर उम्दा है। यहां के रिसर्च और इंडस्ट्री ओरिएंटेड प्रोग्राम, बच्चों के लिए फैसिलिटी बेहतरीन है। आपने सुना कि इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने कहा कि एमिटी के स्टूडेंट्स की एम्पलॉयबिलीटी बेहतरीन है। सर्विस में जाने के बाद वह पहले दिन से ही कंपनी को बेस्ट देने लगते हैं। ये बहुत बड़ी बात है। सवाल: फ्यूचर प्लान को कैसे देखते हैं? जवाब: दुनिया में कई तरीके के नए डेवलपमेंट आ रहे हैं। टेक्नोलॉजी, साइंस एंड रिसर्च, कॉर्पोरेट वर्किंग या फिर मीडिया की वर्किंग सभी में कई तरीके के बदलाव आए हैं। हमारे भी इंस्टीट्यूशन इसके साथ-साथ अपने करिकुलम और एग्जामिनेशन सिस्टम को बदल रहे हैं। ऐसे में एक सवाल यह है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एजुकेशन सिस्टम पर क्या इम्पैक्ट आएगा? हमने ऐसे प्रोग्राम बनाए हैं, जिससे हर एक स्टूडेंट को AI के टूल्स और टेक्नोलॉजी का, उसका सही तरीके के एक्सपोजर मिल सके। लोग कहते हैं कि AI जॉब्स को ले लेगा, लेकिन मेरा यह मानना है कि जॉब ना भी ले पर जो AI में एक्सपर्ट होंगे वह अपना काम बेहतरीन तरीके से कर सकेंगे। कुछ चीज है, जो हमेशा से नहीं बदली- जैसे संस्कारों पर जो हमारा फोकस है। वह अभी भी बरकरार है। वैल्यूज पर फोकस अभी भी मौजूद है। जैसे बड़ों का हमेशा सम्मान करें आदि, ये सब हमारे स्टूडेंट्स फॉलो भी करते हैं। यही कारण है कि एमिटी के पेरेंट्स बेहद खुश रहते हैं कि उनके बच्चे सफलता भी पा रहे हैं और बड़ों का सम्मान भी कर रहे हैं। सवाल: 21 साल पहले जब आपने यह कैंपस सेटअप किया था तब एमिटी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में सबसे आगे थी। अब चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी जैसे कई प्राइवेट संस्थान आ चुके हैं। इस बदलाव को कैसे देखते हैं? जवाब: आपने सही कहा तब एमिटी पहली प्राइवेट यूनिवर्सिटी थी, जिसे राज्य सरकार से मान्यता मिली थी। इसके बाद अलग-अलग राज्यों में हमने यूनिवर्सिटी बनाई। इसमें थोड़ा समय लगा, लेकिन हम जब तमाम राज्यों में अपने कैंपस खोल रहे थे, तब हम सिर्फ अपने इंस्टीट्यूशन नहीं बना रहे थे। हमें समाज के लिए सेवा करनी थी और अच्छा इम्पैक्ट लाना था। जब अच्छे लोग आकर काम करते हैं। नई यूनिवर्सिटीज आती हैं। नए मॉडल आते हैं, तो सबका भला होगा। आज के दिन देखा जाए तो जब भारत का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशों (GER) यानी जो बच्चे हायर एजुकेशन में एनरोल्ड हैं उसकी संख्या 25% है। जब हमने 21 साल पहले यह कैंपस शुरू किया था तब यह 12% था। हायर एजुकेशन में अवसर बढ़े हैं, लेकिन कुछ ही सालों में हमें 25% के आंकड़े को 50% तक लेकर जाना है। इसका मतलब है कि साढ़े चार करोड़ नए बच्चों को हायर एजुकेशन में लाना है। यह काम अकेला कोई आदमी नहीं कर सकता। हम एक ऐसा मॉडल बनाते हैं कि और लोग भी देखकर उसे फॉलो कर पाएं। बाकी लोग यह कहते भी हैं कि हमने एमिटी को देखकर अपनी यूनिवर्सिटी बनाई है। उसे फॉलो भी कर रहे हैं। हमें खुशी है कि बहुत सारे अच्छे लोग आ रहे हैं। इसमें इन्वेस्ट भी कर रहे हैं। आखिरकार, हमें साढ़े चार करोड़ बच्चों को हायर एजुकेशन में लेकर आना है। फिर इसके आगे GER को हमें 50% से बढ़कर 80% तक लाना है, जो विकसित देशों की श्रेणी में लाकर हमें खड़ा कर देगा। उसके लिए हमें कम से कम 1000 यूनिवर्सिटी की जरूरत होगी। वह भी अच्छे स्केल पर जो क्वालिटी एजुकेशन दे रही हों। आप भी जानते हैं कि जो भी यूनिवर्सिटी आती है, उनमें सभी क्वालिटी एजुकेशन देने में सफल नहीं हो पाती हैं, क्योंकि उनमें लॉन्ग टर्म विजन की कमी होती है। एमिटी ने इसे कर दिखाया है। सवाल: आज बेरोजगारी अहम मुद्दा है। ऐसे में एमिटी का क्या बेहतर रोल हो सकता है? जवाब: हम पीएम मोदी के विकसित भारत के मिशन के लिए पूरी तरह से एलाइन हैं। हमारा ये मानना है कि मार्केट में जॉब की कमी नहीं है। कमी है तो अच्छे स्किल्स के स्टूडेंट्स की। कमी है उन अच्छी स्किल्स की, जिनके जरिए स्टूडेंट अपने जॉब में अच्छा परफॉर्म कर पाएं। कमी है उन लोगों की, जो जाकर अपने स्टार्टअप बनाएं और जॉब को क्रिएट करें। एमिटी में शुरू से ही हमारा विजन इसी दिशा में था। हमने 1200 स्टार्टअप क्रिएट किए हैं। लाखों की संख्या में जॉब क्रिएट हुई हैं। हमारे इंस्टीट्यूशन में पढ़ाई पूरी करने के बाद ये बच्चे चाहते तो जॉब भी कर सकते थे, लेकिन इन्होंने जॉब क्रिएटर बनने का मन बनाया। एमिटी में इन चीजों पर शुरू से फोकस रहा। अगर सभी इंस्टीट्यूशन इस बात पर ध्यान दें कि करिकुलम अपडेटेड है या नहीं। टीचर्स क्लास में जाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं या नहीं। हमारी लैब फैसिलिटी अपडेटेड है या नहीं, हम ग्लोबल ट्रेंड्स के साथ चल रहे हैं या नहीं, अगर यह सब देखा जाए तो किसी भी स्टूडेंट को जॉब मिलने में कोई परेशानी नहीं आएगी। सवाल: आपने खुद व्हार्टन से पढ़ाई की है। एक समय ऐसा था जब भारतीयों के मन में विदेश में पढ़ाई करने की सपना होता था। आप क्या इस ट्रेंड में बदलाव देख रहे हैं? जवाब: मैं 18 साल जर्मनी में रहा। इसके बाद 16-17 साल अमेरिका में था। पूरे यूरोप को नजदीक से देखा है। एक समय था जब युवाओं को लगता था कि भारत छोड़कर अमेरिका पहुंच जाएं। वहां पर जॉब करेंगे, करियर बनेगा और फैमिली भी खुश रहेगी। एक बदलाव हम यह देख रहे हैं कि अब बहुत सारे लोग अमेरिका, यूरोप छोड़कर वापस भारत आ रहे हैं। पिछले कुछ सालों में कई सौ फैकल्टी मेंबर्स, रिसर्च साइंटिस्ट विदेश छोड़कर भारत आकर एमिटी जॉइन कर चुके हैं। अपने साथ वह फैलोशिप भी लेकर आते हैं। चाहे वह रामालिंगम स्वामी फैलोशिप हो या रामानुजम फैलोशिप हो। वह वापस आकर इंडिया में बस रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि अपना देश है, अपनापन भी है और अब यहां पर अवसर भी हैं। यहां जो इन्वेस्टमेंट आ रहे हैं। ग्रोथ हो रहा है और इसके साथ ही जो एजुकेशनल इंस्टीट्यूट हैं वह भी अब लगभग उसी लेवल पर आ चुके हैं। ये सच है कि विदेश की जो यूनिवर्सिटीज है। उनके पास बहुत सारी फंडिंग है। चाहे वह अमेरिका की हो या यूरोप की, गवर्नमेंट के पास जो फंडिंग है RD के लिए उसमें फर्क है। उस गैप को फिल करने में थोड़ा टाइम लग सकता है, लेकिन हमारे बच्चों में जो टैलेंट है उसका कोई मुकाबला नहीं है। अमेरिका हो, यूरोप हो, या फिर सिंगापुर लगभग सभी जगह जो टॉप साइंटिस्ट या बड़े संस्थानों के टीचर्स हैं, वह इंडियंस हैं। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि हमारे पास टैलेंट है, तो कुछ ही समय में जब हमारे यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर, इन्वेस्टमेंट और साइंटिफिक लैब्स बढ़ेंगी, पूरी दुनिया भारत आने वाली है। सवाल: अगले कुछ सालों के लिए आपके टॉप 3 टारगेट क्या हैं? जवाब: पहला- हमारा फोकस हर तरीके की रिसर्च और इनोवेशन के आउटकम को कई गुना बढ़ाने पर है। हमें दुनिया को यह दिखाना होगा कि इंडिया की रिसर्च और आगे की सोच किसी भी देश से कम नहीं है। आपने देखा होगा कि कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर चीन, अमेरिका से आगे बढ़ चुका है। जैसे- पेटेंट या पब्लिकेशन का क्षेत्र। इन फील्ड्स में भारत को बहुत काम करने का स्कोप है। हमें लगता है कि इन क्षेत्रों में एमिटी बेहतरीन कंट्रीब्यूशन कर सकता है। मेरा मानना है कि हर एक इंस्टीट्यूशन को इस क्षेत्र में जरूर अपना कॉन्ट्रीब्यूशन देना चाहिए। दूसरा- मैं यह देखना चाहूंगा कि हमारे बच्चे कुछ ऐसे स्टार्टअप बनाएं, जिससे फ्यूचर के नारायण मूर्ति बन पाएं। फ्यूचर के बिल गेट्स बन पाएं। आज के दिन भारत में 1 लाख 80 हजार स्टार्टअप हैं। हर साल 80 हजार नए स्टार्टअप आ रहे हैं। हर 4 मिनट में एक नई स्टार्टअप शुरू हो रहा है। उनमें से कई सारे स्टार्टअप हमारे एमिटी के स्टूडेंट्स के जरिए भी आ सकते हैं। उनमें भी दुनिया बदलने की क्षमता है। तीसरा- दुनिया में कई देशों में एमिटी यूनिवर्सिटी के कैंपस है। हम चाहते हैं कि इन कैंपस के जरिए दुनिया को हम दिखा सके कि भारत का कोई मुकाबला नहीं है। देश के नाम को और ऊंचाइयों तक ले जा सकें।