गैंगरेप आरोपी दरोगा को पुलिस ने भागने का वक्त दिया:पीड़िता ने कानपुर कोर्ट में 30 मिनट में दरिंदगी सुनाई; ACP लाइन हाजिर, चौकी इंचार्ज सस्पेंड

कानपुर गैंगरेप कांड में 4 दिन बाद पीड़िता के बयान कोर्ट में दर्ज हुए। 30 मिनट तक जज दरिंदगी की कहानी सुनते रहे। फिर उन्होंने सुबक रही पीड़िता की तरफ देखकर कहा- इंसाफ होगा। एक दिन पहले कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई थी कि लड़की 14 साल की है, मगर केस को पॉक्सो एक्ट में दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद कानपुर पुलिस ने FIR में गैंगरेप, किडनैपिंग के साथ पॉक्सो एक्ट बढ़ा दिया। रेप करने के आरोपी दरोगा अमित कुमार को ढूंढते हुए पुलिस गोरखपुर पहुंची, मगर वो वहां से निकल भाग चुका था। कोर्ट में बयान के बाद पीड़िता को उसके भाई के साथ घर भेजा गया है, मगर घर में भी पीड़िता को सुरक्षा दी गई है। इस मामले में सियासत भी शुरू हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पीड़िता से मिलने आ सकते हैं। ये भी सामने आया कि पूरे मामले में कानपुर पुलिस ने आरोपी दरोगा अमित कुमार को भागने के लिए पर्याप्त वक्त दिया, वरना उसकी अरेस्टिंग पहले ही हो सकती थी। पूरे मामले में 9 जनवरी को कमिश्नर रघुबीर लाल ने ACP पनकी शिखर कुमार को लाइन हाजिर कर दिया। वहीं, भीमसेन चौकी इंचार्ज दिनेश कुमार को सस्पेंड किया गया। पढ़िए, कानपुर पुलिस की लापरवाही पर रिपोर्ट… हर कदम पर पुलिस ने पीड़िता नहीं, दरोगा का साथ दिया
5 जनवरी की रात को गैंगरेप होने के बाद पीड़िता और उसका भाई 6 जनवरी की सुबह भीमसेन चौकी पर पहुंचे। दरोगा अमित कुमार और यूट्यूबर शिवबरन के खिलाफ शिकायत सौंपी। मगर दरोगा सुभाष चंद इन लोगों को भगा देते हैं, लिखित शिकायत देने के बाद भी FIR नहीं लिखी जाती है। पीड़िता पुलिस कमिश्नर से मिलती है, इसके बाद थाने में FIR तो लिखी गई, मगर अज्ञात में। मामले की जांच ADCP (वेस्ट) कपिल देव सिंह को दी गई। वो खुद गैंगरेप के स्पॉट पर गए। सर्विलांस की मदद से सामने आया कि जिस दरोगा अमित कुमार को आरोपी बताया जा रहा है, वो इस स्पॉट पर 5 जनवरी की रात को करीब 20 मिनट तक मौजूद था। पुलिस ने सचेंडी इलाके से उसकी काली स्कॉर्पियो भी बरामद की। जिसमें गैंगरेप हुआ था। इसके साक्ष्यों के बावजूद पुलिस ने दरोगा के घर पर दबिश नहीं दी। उल्टा यूट्यूबर शिवबरन को बुलाकर अरेस्ट किया। इसके बाद ही दरोगा के घर पर पुलिस टीम भेजी गई। इतना वक्त काफी था, दरोगा अपने घर से भाग निकला। उसकी लास्ट लोकेशन बर्रा इलाके में मिली, मगर इसके बाद दोनों मोबाइल स्विच ऑफ हो गए। अब दरोगा के सामने 2 ही रास्ते हैं। पहला- वो अरेस्ट स्टे के लिए हाईकोर्ट में प्रयास करे। दूसरा- अपने वकील के जरिए कोर्ट में सरेंडर कर दे। इन लापरवाहियों के चलते पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने 9 जनवरी को 3 एक्शन लिए। 1. ACP पनकी शिखर कुमार को लाइन हाजिर किया। लापरवाही – उनका ऑब्जर्वेशन सही नहीं पाया गया। 2. भीमसेन चौकी इंचार्ज दिनेश कुमार को सस्पेंड किया गया। लापरवाही – वो घटना के बाद छुट्‌टी पर चले गए थे। 3. विवेचक सुभाष चंद्र को केस की जांच से हटा दिया गया। अब जांच सचेंडी इंस्पेक्टर दीनानाथ को दी गई, उन्होंने ही आज कोर्ट में पीड़िता के बयान दर्ज कराए। लापरवाही – विवेचक पर दरोगा अमित कुमार को सपोर्ट करने के आरोप लगे। दरोगा को भागने के लिए पर्याप्त समय देने पर घिरी कानपुर पुलिस के तौर तरीकों पर दैनिक भास्कर ने वरिष्ठ अधिवक्ता करीम अहमद सिद्दीकी से बात की। पढ़िए, वो क्या सोचते हैं- सवाल : हल्की धाराओं में केस दर्ज करने पर क्या पुलिस के खिलाफ कार्रवाई होगी?
वकील : जी बिल्कुल। संविधान के मुताबिक 18 साल से कम उम्र की किशोरी के साथ रेप की घटना होने पर पॉक्सो एक्ट की धाराएं लगाने का प्रावधान है। अगर पुलिस ने ऐसा नहीं किया है, तो 2 तरह से सजा हो सकती है। सवाल : जांच अधिकारी के खिलाफ FIR भी हो सकती है क्या?
वकील : अगर थाना प्रभारी ने आरोपियों को बचाने के लिए रेप के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा नहीं लगाई, तो थाना प्रभारी के खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक जल्द से जल्द मजिस्ट्रेट के सामने रेप पीड़िता के बयान दर्ज होने चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया है, तो यह विवेचक की जांच सही नहीं मानी जा सकती है। सवाल : क्या केस में होने वाली लेटलतीफी का फायदा आरोपी को मिलता है?
वकील : इन सब मुद्दों का केस ट्रायल के दौरान आरोपी को काफी लाभ मिलता है। इसको ऐसे समझिए कि अगर कोई घटना होती है, घटना स्थल से थाने की दूरी 10 मिनट की है और एफआईआर 30 मिनट बाद दर्ज होती है, तो ट्रायल के दौरान यह कोर्ट में बताना पड़ता है आखिर वो 20 मिनट आप कहां थे? अगर पर्याप्त कारण नहीं पाए जाते तो इसका फायदा आरोपी पक्ष को मिलता है। सवाल : पुलिस की लापरवाही के लिए कानून क्या कहता है?
वकील : इन सब वजहों से रेप के मुकदमे में संदेह पैदा होता है, जिसका फायदा आरोपी को मिलने की संभावना रहती है। ये एक अपराध है, नए कानून बीएनएस की धारा 173 के तहत अगर किसी महिला के साथ घटना होती तो किसी महिला पुलिस अधिकारी को मौके पर जाकर एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान है, जरूरी नहीं कि महिला थाने पहुंचे। ट्रायल में अहम साबित होगी पीड़िता की शिकायत
वरिष्ठ अधिवक्ता कहते हैं- ट्रायल के दौरान यह सवाल कोर्ट में प्रमुखता से उठाए जाते हैं कि अगर घटना हुई थी, तो पीड़िता शिकायत करने तुरंत क्यों नहीं गई? क्यों देरी हुई। इसमें आरोपी पक्ष की ओर से कहा जाता है कि पूरा मुकदमा सोच समझ कर दर्ज कराया गया है। इस मामले में पीड़िता की शिकायत प्रमुख बनेगी। अगर पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोपियों का नाम दिया है और अज्ञात में मुकदमा दर्ज किया गया है, तो यह अपराध की श्रेणी में आएगा। अगर शिकायत बदलवाई गई है, तो यह साबित करेगा कि लोकसेवक की ओर से विधि के अनुसार काम नहीं किया गया है। 9 जनवरी, सुबह 11 बजे कोर्ट पहुंची पीड़िता
पीड़िता के भाई ने बताया- शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे सचेंडी थाने पहुंचा, जहां से सचेंडी इंस्पेक्टर दीनानाथ मिश्रा, तीन दरोगा और एक महिला कॉन्स्टेबल मुझे और मेरी बहन को लेकर सुबह करीब 11 बजे अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन की कोर्ट पहुंचे। दोपहर करीब 2 बजे पीड़िता को कलम बंद बयान के लिए बुलाया गया। जहां करीब 30 मिनट तक पीड़िता ने आपबीती बयां की। इसके बाद किशोरी के भाई ने बहन की सुपुर्दगी के लिए अप्लीकेशन दाखिल की। आरोपी दरोगा की तलाश में गोरखपुर गई पुलिस
करीब 2 घंटे तक चली कागजी कार्रवाई के बाद कोर्ट ने किशोरी की सुपुर्दगी के आदेश दिए। शाम करीब 6.30 पुलिस किशोरी और उसके भाई को लेकर सचेंडी थाने के लिए रवाना हुई, जहां उसके भाई से दस्तावेज मंगाए गए। इसके बाद रात करीब 8.30 बजे पीड़िता को उसके भाई के सुपुर्द कर दिया गया। सचेंडी इंस्पेक्टर दीनानाथ मिश्रा ने बताया कि शनिवार को पीड़िता के बयानों को देखा गया है। आरोपी दरोगा अमित कुमार मौर्या के मूल निवासी गोरखपुर स्थित महाराजगंज एक टीम को भेजा गया था, लेकिन वह नहीं मिला। आरोपी की तलाश में टीमें कई स्थानों पर दबिश दे रही हैं। ———————— ये पढ़ें –
कानपुर गैंगरेप में आरोपी दरोगा, इसलिए हल्की धाराएं लगाई: कोर्ट ने पूछा-पॉक्सो क्यों नहीं लगाया; पीड़िता कहती रही- मुझे घर जाना है कानपुर गैंगरेप केस में पुलिस की लापरवाही पर कोर्ट भी नाराज हुआ। 5 जनवरी की रात को गैंगरेप होने के बाद 8 जनवरी को पीड़िता को कोर्ट लाया गया। यहां पहले तो 3 घंटे तक पुलिस जांच अधिकारी नहीं पहुंचे। पीड़िता रूम के बाहर बैठी रही। जब जांच अधिकारी पेश हुए, तो जज ने पूछा- लड़की 14 साल की है, मगर आपने पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज ही नहीं किया है। पहले जाइए, पॉक्सो में FIR दर्ज करिए, तब पीड़िता के बयान दर्ज कराने आइएगा। कोर्ट की नाराजगी के बाद पीड़िता के बयान दर्ज नहीं हो सके। पुलिस पीड़िता को नोएडा नंबर की लाल रंग की कार में बैठाकर चली गई। पढ़िए पूरी खबर…