‘सहमति से फिजिकल रिलेशन बनाना अपराध नहीं’:हाईकोर्ट ने शादी का झूठा वादा करने के मामले में धारा 69 की कार्यवाही रद्द

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आपसी सहमति से लंबे समय तक शारीरिक संबंध कायम रखने के बाद रिश्ता टूटने से उत्पन्न निराशा पर धोखे व छल से संबंध बनाने का आरोप लगाना दंडनीय अपराध नहीं माना जा सकता। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 केवल धोखे या छल से बनाए गए संबंधों को दंडित करती है, न कि आपसी सहमति से बने रिश्तों के टूटने से उत्पन्न निराशा को। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक चले सहमति आधारित संबंध को बाद में धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने झूठे वायदे से संबंध बनाने की धारा 69 के तहत दर्ज अपराध को रद्द कर दिया, किन्तु अन्य धाराओं में दर्ज प्राथमिकी की विवेचना जारी रखने का आदेश दिया है।और पुलिस रिपोर्ट पेश होने तक याचियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की खंडपीठ ने नीलेश राम चंदानी की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। शिकायतकर्ता ने नोएडा सेक्टर- 63 थाने में धारा 352, 351(2), 69 और दहेज निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया था। याची के अधिवक्ता ने बताया कि जोधपुर में एलएलएम के दौरान दोनों में नजदीकी आई और जून 2023 में सगाई भी हुई थी। नवंबर 2024 में शादी तय थी, जिसके लिए होटल बुकिंग, कार्ड छपाई और फोटोग्राफर तक तय किए जा चुके थे। लड़की पिछड़े वर्ग से थी। इस जानकारी के बाद भी याची परिवार शादी के लिए राजी था। लड़की के पिता नोएडा में बिजली विभाग में थे।किन्तु अचानक शादी टूट गई।तो लड़की ने एफआईआर दर्ज करा दी। आरोप लगाया कि शादी का झूठा वायदा कर संबंध बनाया है। कोर्ट ने कहा कि शादी का वास्तविक इरादा मौजूद था, इसलिए यह धोखाधड़ी का मामला नहीं बनता। हालांकि धमकी और मारपीट से जुड़े आरोपों की जांच जारी रहेगी।