संभल में बुधवार सुबह शुभ मुहूर्त में 1195 होलिका दहन संपन्न हुए। जिले में कुल 1215 होलिका दहन होने थे, जिनमें से 19 होलिकाएं पिछले दो दिनों में जलाई जा चुकी हैं। एक होलिका (जैन मंदिर, संभल वाली) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की चौपाई शुरू होने से पहले करीब 10 बजे जलाई जाएगी। त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस और आरपीएफ-पीएसी के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात किए गए थे। सत्यव्रत पुलिस चौकी पर बने कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की जा रही थी। जनपद संभल के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बुधवार की भोर 04:30 बजे होलिका दहन किया गया। संभल कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला ठेर, कोट पूर्वी, दुर्गा कॉलोनी, बरेली सराय, हल्लू सराय, लाडम सराय, शहजादी सराय, तिवारी सराय और थाना रायसत्ती क्षेत्र के चमन सराय, तीमारदास सराय, हातिम सराय, साथ ही थाना हयातनगर क्षेत्र की सरायतरीन के विभिन्न स्थानों पर होलिका दहन विधि-विधान पूर्वक पूजन और परिक्रमा के साथ संपन्न हुआ। होलिका दहन के कार्यक्रमों में भाजपा पश्चिम के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंघल, भाजपा के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी डॉ. अरविंद गुप्ता, नगर हिंदू सभा के अध्यक्ष कमलकांत तिवारी, विजयकांत तिवारी, कुलदीप ऐरन, हितेश मिश्रा, कुशल मदान, दिलीप गुप्ता, पवन अग्रवाल, अमरराज अग्रवाल, संजीव अग्रवाल, प्रियांशु जैन, नवनीत कुमार, संजय कुमार, निशिकांत तिवारी, अर्चित गुप्ता, सभासद गगन वार्ष्णेय, राजेंद्र कुमार, प्रमोद सैनी, महावीर सिंह, पुष्पेंद्र यादव, प्रदीप मिश्रा, सौरभ गुप्ता मुखिया, सुधीर गर्ग, अभिषेक गुप्ता, नितिन गुप्ता, सुनील दिवाकर, अक्षित अग्रवाल, अनुराग गुप्ता, अनिकेत अग्रवाल, राजीव गुप्ता, पंडित चंदन मिश्रा सहित हजारों लोग विभिन्न स्थानों पर मौजूद रहे। अशोक कुमार गर्ग ने कहा कि माहौल बहुत अच्छा था और शुभ मुहूर्त में होलिका दहन हुआ। उन्होंने बताया कि सभी लोग एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर बधाई दे रहे हैं, जिसका संदेश है कि पूरा हिंदू समाज एकजुट होकर सभी त्योहार मनाता है। राजीव कुमार सक्सेना ने बताया कि ब्रह्म मुहूर्त के साथ होलिका दहन हुआ और लोगों ने गन्ने भूनकर यह पर्व मनाया। पंडित उमा प्रसाद मिश्रा ने कहा कि यह जो होली का उत्सव है, इसमें हिरण्यकश्यप का पुत्र था प्रहलाद, जो भगवान की भक्ति करता था। हिरण्यकश्यप ने उसको बहुत रोका, लेकिन प्रहलाद नहीं माना, तो उन्होंने कहा इसका कौन सा उपाय है कि इसको जलवा दूँ, हिरण्यकश्यप की एक बहन होलिका थी, उनके पास एक ऐसा वस्त्र था कि उसे ओढ़ लेने से वे आग में जलती नहीं थीं। तो होलिका ने प्रहलाद को अपनी गोद में बैठाकर अग्नि संस्कार किया। जब अग्नि संस्कार हुआ, तो वह वस्त्र प्रभु की इच्छा से एकाएक उड़ गया और उड़ने के बाद में प्रहलाद जो था, वह भगवान का भक्त था, इसलिए वह बाहर आ गया और होलिका जो थी, वह जल गई। इसी के उपलक्ष्य में जो है, पूरा भारतवर्ष होलिका उत्सव मनाने लगा है।