आज मंगलवार को कानपुर में गंगा मेला है, होली खेली जा रही है। रंगों में सराबोर सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने लोगों के साथ जमकर डांस किया। मेस्टन रोड में मुस्लिमों ने हिंदुओं का फूल बरसाकर स्वागत किया। माला भी पहनाई। ट्रैक्टर ट्रॉलियों और ऊंट पर सवार होकर हुरियारे निकले हैं। जमकर रंग-गुलाल बरस रहे हैं। हुरियारे नाचते-गाते और रंग खेलते छह घंटे में 7 किमी की दूरी तय करेंगे। इस बार भैंसा ठेला से रंग नहीं निकाला गया। कमेटी के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र बिश्नोई ने बताया- इस बार हम लोगों ने भैंसा ठेला ढूंढने का बहुत प्रयास किया। मुंह मांगी कीमत भी देने को तैयार थे, लेकिन भैंसा ठेला नहीं मिला। इसलिए इस बार ट्रैक्टर ट्रॉलियों से रंगों के ड्रम को निकाला जाएगा। साथ ही 6 ऊंट, 5 घोड़े, 8 ट्रैक्टर और कई लोडर गाड़ियां होंगी। पिचकारी से भी रंग बरस रहे हैं। यही रवायत पिछले 85 सालों से चली आ रही है। यह अकेली होली है, जो राष्ट्रगान के बाद शुरू हुई। रज्जन बाबू पार्क में जिलाधिकारी और पुलिस अफसर ने तिरंगा फहराकर होली की शुरुआत की। क्रांतिकारियों के शिलालेख पर फूल भी अर्पित किए। कानपुर की इस खास होली का इतिहास 1942 में ब्रिटिश शासन से जुड़ा है, जब कानपुर के 47 क्रांतिकारियों को जेल में बंद किया गया था। दिन में रंग खेलने के बाद शाम को मेला कमेटी की ओर से बाल मेला लगेगा। इसमें बच्चों के लिए झूले, फूड स्टॉल लगेंगे और आतिशबाजी भी होगी। तस्वीरें देखिए- इन रास्तों से निकल रहा रंगों का ठेला : रज्जन बाबू पार्क से रंगों का ठेला निकलेगा, जो शहर के प्रमुख बाजारों और मार्गों से होकर गुजरेगा। यह ठेला सूत बाजार, जनरलगंज, बजाज बाजार, मनीराम बगिया, गया प्रसाद लेन, मेस्टन रोड, चौक, टोपी बाजार, सर्राफा बाजार, कोतवाली चौराहा, संगम लाल मंदिर, कमला टावर, फीलखाना, बिरहाना रोड, नयागंज चौराहा, पूरन पान वाला, काहूकोठी, सतरंजी मोहाल, सिरकी मोहाल और लाठी मोहाल होते हुए वापस जनरलगंज से हटिया स्थित रज्जन बाबू पार्क पहुंचेगा, जहां कार्यक्रम का समापन होगा। गंगा मेला से जुड़ी अपडेट्स और इससे जुड़े इतिहास को पढ़ने के लिए नीचे एक-एक ब्लॉग से गुजर जाइए…