अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध का असर यूपी के पॉटरी, चूड़ी से लेकर पेठा फैक्ट्रियों तक पड़ रहा। इन फैक्ट्रियों को गैस नहीं मिल रही। सबसे ज्यादा असर बुलंदशहर में एशिया के सबसे बड़े पॉटरी उद्योग पर पड़ा है। यहां 300-325 यूनिट में से 95 फीसदी पॉटरी यूनिट बंद हैं। 30 हजार से ज्यादा वर्कर्स बेरोजगार हो गए हैं। यही हाल फिरोजाबाद में बनने वाली चूड़ियों और आगरा की पेठा फैक्ट्रियों का है। गैस की सप्लाई नहीं मिलने से भटि्ठयां शांत हो गई हैं। 55 बड़ी फैक्ट्रियों में से 40 बंद हो चुकी हैं। अगर गैस की सप्लाई शुरू नहीं हुई तो आगरा में बनने वाली चांदी की पायल पर भी संकट आ सकता है। पढ़िए, कहां गैस सप्लाई नहीं होने से क्या असर पड़ रहा… खुर्जा का पॉटरी उद्योग: 4 मार्च तक PNG का रेट 49 रुपए, अब ढाई गुना बढ़ा
जापान और इंग्लैंड के बाद बुलंदशहर के खुर्जा में एशिया का सबसे बड़ा पॉटरी (मिट्टी से बर्तन बनाने) उद्योग है। यहां पॉटरी यूनिट्स की संख्या 300 से ज्यादा है। इन कंपनियों में 30 हजार से ज्यादा वर्कर काम करते हैं। खुर्जा पॉटरी उद्योग से हर महीने करीब 100 करोड़ रुपए का कारोबार देश-विदेश में होता है। खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के कारण यहां तेजी से हालात बदले हैं। गैस के दामों में अचानक बढ़ोतरी और किल्लत होने से पॉटरी उद्यमियों ने उत्पादन बंद कर दिया है। खुर्जा पॉटरी एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि राणा बताते हैं- एग्रीमेंट से अधिक PNG का कंजम्प्शन करने पर कंपनी की ओर से गैस के दामों में ढाई गुना इजाफा किया गया है। एग्रीमेंट के तहत जितनी गैस पॉटरी यूनिट में इस्तेमाल होती है, उसका रेट 49 रुपए प्रति किलो के हिसाब से देना होगा। इससे ज्यादा गैस इस्तेमाल करने पर 119.90 रुपए प्रति किलो की दर से भुगतान करना पड़ेगा। LPG के दामों में भी इजाफा किया गया है। LPG का दाम 61 रुपए प्रति किलो से बढ़ाकर 93 रुपए प्रति किलो कर दिया गया है। गैस सप्लायर कंपनियों ने खरीदारों को ई-मेल के जरिए दाम बढ़ने की आधिकारिक जानकारी दी है। दाम बढ़ने से उद्यमियों ने पॉटरी यूनिट्स बंद कर मिट्टी के बर्तनों का उत्पादन रोक दिया है। उद्यमियों का कहना है कि कंपनियां अपने हिसाब से कैलकुलेशन कर मनमाने ढंग से रेट तय कर रही हैं। पॉटरी उद्योग चलाने के लिए केवल PNG या कमर्शियल LPG का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी का तेल, डीजल या कोयले के इस्तेमाल पर NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की ओर से पूरी तरह प्रतिबंध है। यही वजह है कि नई परिस्थितियों में पॉटरी उत्पादन को घाटे का सौदा मानते हुए यूनिट्स बंद करना ही समझदारी माना जा रहा। पॉटरी उद्योग बंद होने से 30 हजार वर्कर्स घर बैठ गए हैं। उनकी रोजी-रोटी पर सवाल खड़ा हो गया है। एक पॉटरी फैक्ट्री में काम करने वाले देवरिया के रहने वाले अभिषेक कुमार ने कहा कि फैक्ट्री बंद हो गई है। कमाने आए थे, अगर यही हाल रहा तो घर लौटना पड़ेगा। अभिषेक ने बताया कि हजाराें मजदूरों के साथ ऐसा ही हुआ है। अगर फैक्ट्री नहीं चलेगी तो यहां रहकर क्या करेंगे? फिरोजाबाद का चूड़ी उद्योग: 30 से 40% उत्पादन कम किया फिरोजाबाद का विश्व प्रसिद्ध कांच और चूड़ी उद्योग गैस आपूर्ति में कमी और कीमतों में बढ़ोतरी से संकट में है। शहर के कई कारखानों में उत्पादन घट गया है। कई चूड़ी कारखाने बंद होने की कगार पर हैं। इससे हजारों मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। उद्योगपतियों के अनुसार, फिरोजाबाद के कांच उद्योग को गेल गैस लिमिटेड से रोज करीब 15 लाख घनमीटर प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है। युद्ध शुरू होने के बाद 3 लाख घनमीटर की कटौती कर दी गई। इसके बाद बाकी कोटे में भी करीब 20 प्रतिशत तक की कमी कर दी गई। उत्तर प्रदेश ग्लास मैन्युफैक्चरर्स सिंडिकेट (UPGMS) के पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसमें उत्पादन घटाने का निर्णय लिया गया। कांच की बोतल बनाने वाले ऑटोमैटिक कारखानों और चूड़ी के टैंक फर्नेस कारखानों में 30 से 40 प्रतिशत तक उत्पादन कम कर दिया गया। वहीं, पॉट फर्नेस कारखानों के उद्यमियों ने उत्पादन पूरी तरह बंद करने का फैसला किया है। उद्यमियों का कहना है कि गैस महंगी होने के साथ कच्चा माल और केमिकल भी 15 से 20 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। इन परिस्थितियों में पुराने दामों पर चूड़ी बनाना संभव नहीं। चूड़ियों के दाम भी प्रति तोड़ा (60 चूड़ियों का एक बंडल) 5 से 10 रुपए तक बढ़ गए हैं। लेकिन, बढ़े हुए दामों पर बाजार में खरीदार कम मिल रहे। इंडस्ट्रियल स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी फिरोजाबाद के अध्यक्ष बिन्नी मित्तल का कहना है कि गैस कोटे में कटौती के बाद उद्योग संकट में है। कई उद्यमी गैस बिल आने का इंतजार कर रहे हैं। हालात स्पष्ट होने तक उत्पादन कम या बंद करने पर मजबूर हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए बड़ी संख्या में चूड़ी कारखानों को बंद रखने का निर्णय लिया जा रहा है। गेल गैस के अधिकारियों ने केवल ई-मेल भेजकर सूचना दी है कि गैस में कटौती की जा रही। अधिक प्रयोग करने पर पेनल्टी भी लगाई जाएगी। 5 लाख से ज्यादा मजदूर संकट में: मजदूर संगठनों ने भी चिंता जताई है। कांच एवं चूड़ी मजदूर सभा के महामंत्री रामदास मानव ने कहा कि होली के बाद फिर से कारखाने बंद होने की स्थिति बन गई है। अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो जिले के 5 से 7 लाख मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। उद्योग जगत का कहना है कि अगर गैस आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो शहर का कांच और चूड़ी उद्योग गंभीर संकट में आ सकता है। आगरा का पेठा उद्योग: 55 बड़ी फैक्ट्रियों में से 40 बंद आगरा में गैस की किल्लत के चलते पेठा कारोबार पर संकट आ गया है। कारोबारियों का कहना है कि गैस सिलेंडर न मिलने से भटि्ठयां नहीं जल पा रहीं। इससे उत्पादन प्रभावित हुआ है। पेठे के छोटे कारखाने बंदी की कगार पर आ गए हैं। शहीद भगत सिंह पेठा कुटीर उद्योग के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने बताया कि आगरा में पेठे के 55 बड़े कारखाने हैं। नूरी दरवाजे पर गैस आधारित करीब 40 कारखाने बंद हैं। हजारों कारीगर खाली बैठे हैं। अगर हालात नहीं सुधरे तो मंदी और भुखमरी के हालात बन सकते हैं। चांदी कारोबार: एक-दो दिन में सप्लाई नहीं तो बंद हो जाएगा काम आगरा सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष नितेश अग्रवाल ने बताया- यहां करीब 800 चांदी के गहने बनाने के कारखाने हैं। ज्यादातर पायल से जुड़ा काम होता है। गैस से ही चांदी की गलाई और झलाई होती है। अभी किसी तरह काम चल रहा है। लेकिन, अगर एक-दो दिन सिलेंडर नहीं मिला तो आधे से ज्यादा कारखानों में काम बंद हो जाएगा। मेरठ: 50 फैक्ट्रियां बंद, 8 हजार कारखाने प्रभावित गैस की किल्लत से मेरठ में प्लास्टिक, वायर, ग्लास और पेंट इंडस्ट्री मुख्य रूप से प्रभावित हो रही हैं। यहां 50 यूनिटों ने फिलहाल उत्पादन बंद कर दिया है। 8 हजार से ज्यादा कारखाने गैस और तेल की किल्लत से जूझ रहे हैं। मोहकमपुर, परतापुर, उद्योगपुरम, विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया और ध्यानचंद नगर में केमिकल, प्लास्टिक, वायर और ग्लास की प्रमुख फैक्ट्रियां हैं। इन फैक्ट्रियों में काम प्रभावित हो रहा है। मेरठ IIA के वाइस चेयरमैन राजीव अग्रवाल का कहना है कि 50 यूनिटें पूरी तरह बंद हो गई हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में चिंताएं बढ़ रही हैं। कमर्शियल सिलेंडर की भी दिक्कत खड़ी हो चुकी है। कानपुर: पाइपलाइन से गैस सप्लाई वाली 150 फैक्ट्रियां बंद कानपुर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को-ऑपरेटिव एस्टेट लिमिटेड के चेयरमैन विजय कपूर का कहना है कि अगर जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो उद्योगों को अरबों रुपए का नुकसान हो सकता है। करीब एक लाख लोगों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने बताया कि गैस की कमी का बड़ा असर फैक्ट्रियों पर पड़ा है। अधिकतर फैक्ट्रियों में कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा करीब 150 बड़ी फैक्ट्रियां ऐसी हैं, जहां पाइपलाइन के जरिए गैस सप्लाई होती है। फिलहाल उन फैक्ट्रियों में गैस की सप्लाई बंद हो चुकी है, जिससे वे बंदी की कगार पर पहुंच गई हैं। ————————- ये खबर भी पढ़ें… मथुरा में बहू ने सास की गला दबाकर हत्या की, पति से बोली- अम्मी को अटैक पड़ा; ननद से लड़ाई हुई तो मुंह से सच निकला
मथुरा में बहू ने प्रेमी के साथ मिलकर सास की हत्या कर दी। फिर पति को फोन किया- अम्मी कुछ बोल नहीं रही हैं। लगता है साइलेंट हार्ट अटैक पड़ा है। मौत की खबर सुनते ही ससुर-पति नोएडा से पहुंचे। रिश्तेदार भी आए। पूरी खबर पढ़ें…
जापान और इंग्लैंड के बाद बुलंदशहर के खुर्जा में एशिया का सबसे बड़ा पॉटरी (मिट्टी से बर्तन बनाने) उद्योग है। यहां पॉटरी यूनिट्स की संख्या 300 से ज्यादा है। इन कंपनियों में 30 हजार से ज्यादा वर्कर काम करते हैं। खुर्जा पॉटरी उद्योग से हर महीने करीब 100 करोड़ रुपए का कारोबार देश-विदेश में होता है। खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के कारण यहां तेजी से हालात बदले हैं। गैस के दामों में अचानक बढ़ोतरी और किल्लत होने से पॉटरी उद्यमियों ने उत्पादन बंद कर दिया है। खुर्जा पॉटरी एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि राणा बताते हैं- एग्रीमेंट से अधिक PNG का कंजम्प्शन करने पर कंपनी की ओर से गैस के दामों में ढाई गुना इजाफा किया गया है। एग्रीमेंट के तहत जितनी गैस पॉटरी यूनिट में इस्तेमाल होती है, उसका रेट 49 रुपए प्रति किलो के हिसाब से देना होगा। इससे ज्यादा गैस इस्तेमाल करने पर 119.90 रुपए प्रति किलो की दर से भुगतान करना पड़ेगा। LPG के दामों में भी इजाफा किया गया है। LPG का दाम 61 रुपए प्रति किलो से बढ़ाकर 93 रुपए प्रति किलो कर दिया गया है। गैस सप्लायर कंपनियों ने खरीदारों को ई-मेल के जरिए दाम बढ़ने की आधिकारिक जानकारी दी है। दाम बढ़ने से उद्यमियों ने पॉटरी यूनिट्स बंद कर मिट्टी के बर्तनों का उत्पादन रोक दिया है। उद्यमियों का कहना है कि कंपनियां अपने हिसाब से कैलकुलेशन कर मनमाने ढंग से रेट तय कर रही हैं। पॉटरी उद्योग चलाने के लिए केवल PNG या कमर्शियल LPG का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी का तेल, डीजल या कोयले के इस्तेमाल पर NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की ओर से पूरी तरह प्रतिबंध है। यही वजह है कि नई परिस्थितियों में पॉटरी उत्पादन को घाटे का सौदा मानते हुए यूनिट्स बंद करना ही समझदारी माना जा रहा। पॉटरी उद्योग बंद होने से 30 हजार वर्कर्स घर बैठ गए हैं। उनकी रोजी-रोटी पर सवाल खड़ा हो गया है। एक पॉटरी फैक्ट्री में काम करने वाले देवरिया के रहने वाले अभिषेक कुमार ने कहा कि फैक्ट्री बंद हो गई है। कमाने आए थे, अगर यही हाल रहा तो घर लौटना पड़ेगा। अभिषेक ने बताया कि हजाराें मजदूरों के साथ ऐसा ही हुआ है। अगर फैक्ट्री नहीं चलेगी तो यहां रहकर क्या करेंगे? फिरोजाबाद का चूड़ी उद्योग: 30 से 40% उत्पादन कम किया फिरोजाबाद का विश्व प्रसिद्ध कांच और चूड़ी उद्योग गैस आपूर्ति में कमी और कीमतों में बढ़ोतरी से संकट में है। शहर के कई कारखानों में उत्पादन घट गया है। कई चूड़ी कारखाने बंद होने की कगार पर हैं। इससे हजारों मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। उद्योगपतियों के अनुसार, फिरोजाबाद के कांच उद्योग को गेल गैस लिमिटेड से रोज करीब 15 लाख घनमीटर प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है। युद्ध शुरू होने के बाद 3 लाख घनमीटर की कटौती कर दी गई। इसके बाद बाकी कोटे में भी करीब 20 प्रतिशत तक की कमी कर दी गई। उत्तर प्रदेश ग्लास मैन्युफैक्चरर्स सिंडिकेट (UPGMS) के पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसमें उत्पादन घटाने का निर्णय लिया गया। कांच की बोतल बनाने वाले ऑटोमैटिक कारखानों और चूड़ी के टैंक फर्नेस कारखानों में 30 से 40 प्रतिशत तक उत्पादन कम कर दिया गया। वहीं, पॉट फर्नेस कारखानों के उद्यमियों ने उत्पादन पूरी तरह बंद करने का फैसला किया है। उद्यमियों का कहना है कि गैस महंगी होने के साथ कच्चा माल और केमिकल भी 15 से 20 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। इन परिस्थितियों में पुराने दामों पर चूड़ी बनाना संभव नहीं। चूड़ियों के दाम भी प्रति तोड़ा (60 चूड़ियों का एक बंडल) 5 से 10 रुपए तक बढ़ गए हैं। लेकिन, बढ़े हुए दामों पर बाजार में खरीदार कम मिल रहे। इंडस्ट्रियल स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी फिरोजाबाद के अध्यक्ष बिन्नी मित्तल का कहना है कि गैस कोटे में कटौती के बाद उद्योग संकट में है। कई उद्यमी गैस बिल आने का इंतजार कर रहे हैं। हालात स्पष्ट होने तक उत्पादन कम या बंद करने पर मजबूर हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए बड़ी संख्या में चूड़ी कारखानों को बंद रखने का निर्णय लिया जा रहा है। गेल गैस के अधिकारियों ने केवल ई-मेल भेजकर सूचना दी है कि गैस में कटौती की जा रही। अधिक प्रयोग करने पर पेनल्टी भी लगाई जाएगी। 5 लाख से ज्यादा मजदूर संकट में: मजदूर संगठनों ने भी चिंता जताई है। कांच एवं चूड़ी मजदूर सभा के महामंत्री रामदास मानव ने कहा कि होली के बाद फिर से कारखाने बंद होने की स्थिति बन गई है। अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो जिले के 5 से 7 लाख मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। उद्योग जगत का कहना है कि अगर गैस आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो शहर का कांच और चूड़ी उद्योग गंभीर संकट में आ सकता है। आगरा का पेठा उद्योग: 55 बड़ी फैक्ट्रियों में से 40 बंद आगरा में गैस की किल्लत के चलते पेठा कारोबार पर संकट आ गया है। कारोबारियों का कहना है कि गैस सिलेंडर न मिलने से भटि्ठयां नहीं जल पा रहीं। इससे उत्पादन प्रभावित हुआ है। पेठे के छोटे कारखाने बंदी की कगार पर आ गए हैं। शहीद भगत सिंह पेठा कुटीर उद्योग के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने बताया कि आगरा में पेठे के 55 बड़े कारखाने हैं। नूरी दरवाजे पर गैस आधारित करीब 40 कारखाने बंद हैं। हजारों कारीगर खाली बैठे हैं। अगर हालात नहीं सुधरे तो मंदी और भुखमरी के हालात बन सकते हैं। चांदी कारोबार: एक-दो दिन में सप्लाई नहीं तो बंद हो जाएगा काम आगरा सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष नितेश अग्रवाल ने बताया- यहां करीब 800 चांदी के गहने बनाने के कारखाने हैं। ज्यादातर पायल से जुड़ा काम होता है। गैस से ही चांदी की गलाई और झलाई होती है। अभी किसी तरह काम चल रहा है। लेकिन, अगर एक-दो दिन सिलेंडर नहीं मिला तो आधे से ज्यादा कारखानों में काम बंद हो जाएगा। मेरठ: 50 फैक्ट्रियां बंद, 8 हजार कारखाने प्रभावित गैस की किल्लत से मेरठ में प्लास्टिक, वायर, ग्लास और पेंट इंडस्ट्री मुख्य रूप से प्रभावित हो रही हैं। यहां 50 यूनिटों ने फिलहाल उत्पादन बंद कर दिया है। 8 हजार से ज्यादा कारखाने गैस और तेल की किल्लत से जूझ रहे हैं। मोहकमपुर, परतापुर, उद्योगपुरम, विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एरिया और ध्यानचंद नगर में केमिकल, प्लास्टिक, वायर और ग्लास की प्रमुख फैक्ट्रियां हैं। इन फैक्ट्रियों में काम प्रभावित हो रहा है। मेरठ IIA के वाइस चेयरमैन राजीव अग्रवाल का कहना है कि 50 यूनिटें पूरी तरह बंद हो गई हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में चिंताएं बढ़ रही हैं। कमर्शियल सिलेंडर की भी दिक्कत खड़ी हो चुकी है। कानपुर: पाइपलाइन से गैस सप्लाई वाली 150 फैक्ट्रियां बंद कानपुर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को-ऑपरेटिव एस्टेट लिमिटेड के चेयरमैन विजय कपूर का कहना है कि अगर जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो उद्योगों को अरबों रुपए का नुकसान हो सकता है। करीब एक लाख लोगों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने बताया कि गैस की कमी का बड़ा असर फैक्ट्रियों पर पड़ा है। अधिकतर फैक्ट्रियों में कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा करीब 150 बड़ी फैक्ट्रियां ऐसी हैं, जहां पाइपलाइन के जरिए गैस सप्लाई होती है। फिलहाल उन फैक्ट्रियों में गैस की सप्लाई बंद हो चुकी है, जिससे वे बंदी की कगार पर पहुंच गई हैं। ————————- ये खबर भी पढ़ें… मथुरा में बहू ने सास की गला दबाकर हत्या की, पति से बोली- अम्मी को अटैक पड़ा; ननद से लड़ाई हुई तो मुंह से सच निकला
मथुरा में बहू ने प्रेमी के साथ मिलकर सास की हत्या कर दी। फिर पति को फोन किया- अम्मी कुछ बोल नहीं रही हैं। लगता है साइलेंट हार्ट अटैक पड़ा है। मौत की खबर सुनते ही ससुर-पति नोएडा से पहुंचे। रिश्तेदार भी आए। पूरी खबर पढ़ें…