6 मार्च को यूपीएससी का रिजल्ट आया। 7 ऐसे कैंडिडेट ने सिलेक्ट होने का दावा किया, जो हकीकत में सफल हुए नहीं थे। इनके घरों में विधायक से लेकर बड़े अधिकारी बधाई देने पहुंचे। इंटरव्यू देते हुए इन कैंडिडेट ने रात-रातभर पढ़ाई करने का दावा किया। लेकिन, 24 घंटे के अंदर सच्चाई सामने आ गई। चौंकाने वाला फैक्ट यह है कि इनमें 6 कैंडिडेट ने प्री एग्जाम भी पास नहीं किया था। दावा करने वालों में एक लड़की GST इंस्पेक्टर है, दूसरी RBI में जॉब कर रही है। ऐसा पहली बार है, जब इतने लोगों ने IAS बनने का फर्जी दावा किया। सवाल है कि इन लोगों ने ऐसा दावा क्यों किया? क्या इनके मन में ये था कि दावा करने से नौकरी मिल सकती है? गलत तरीके से दावा करने वालों पर क्या यूपीएससी कोई एक्शन लेता है? आज की संडे बिग स्टोरी में हम ऐसे ही सवालों के जवाब जानेंगे… पहले यूपी के कैंडिडेट के फर्जी दावे पढ़िए… शिखा ने कहा- मैं IAS बन गई, हकीकत में सिर्फ प्री पास किया
दावा. बुलंदशहर की रहने वाली शिखा ने दावा किया कि उन्हें यूपीएससी में 113वीं रैंक मिली है। शिखा के दादा एक इंटर कॉलेज में चपरासी हैं। वे कैमरे के आगे भावुक होकर रोने लगे। यही क्लिप वायरल हो गई। हैडिंग बनी- चपरासी की पोती ने यूपीएससी क्रैक किया…। शिखा इंटरव्यू में सक्सेस की कहानियां बताती रहीं। हकीकत कैसे सामने आई- दिल्ली की शिखा ने यूपीएससी को मेल किया कि बुलंदशहर की एक और शिखा IAS सिलेक्शन का दावा कर रही हैं। इसको स्पष्ट कर दीजिए। इसके बाद यूपीएससी ने बुलंदशहर की डीएम श्रुति से जांच करने को कहा। डीएम ने एसडीएम सदर दिनेश चंद्र से रिपोर्ट मांगी। जांच में पता चला कि बुलंदशहर की शिखा का पूरा नाम शिखा रानी है। ये मेंस परीक्षा पास नहीं कर पाई थीं। 113वीं रैंक पर जिस शिखा का सिलेक्शन हुआ, वो दिल्ली की हैं। रोहतक के सांपला में बतौर BDPO काम कर रही हैं। इसके बाद शिखा रानी ने माफी मांगी। कहा- मैंने सिर्फ नाम देखा, रोल नंबर नहीं। पिता प्रेमचंद ने कहा- बेटी रिजल्ट के बाद भावुक हो गई थी, इसलिए उसने नाम देखने के तुरंत बाद ही परिवार को बता दिया, यही उसकी गलती है। GST इंस्पेक्टर का झूठ- मैं IAS अधिकारी बन गई
दावा- गाजीपुर जिले की प्रियंका चौधरी ने रिजल्ट आने के बाद अपने पिता नीरा राम को फोन किया। कहा- पापा मेरा यूपीएससी क्लियर हो गया है। 79वीं रैंक मिली है। हो सकता है IAS मिल जाए। इस फोन के बाद नीरा राम भावुक हो गए। पूरे जखनियां के गौराखास गांव उत्साह से भर गया। प्रियंका इस वक्त प्रयागराज में GST इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। ये नौकरी भी उन्हें 3 महीने पहले ही मिली है। 15 दिसंबर, 2025 को उन्होंने जॉइन किया था। हकीकत कैसे सामने आई- 24 घंटे के अंदर पता चला कि प्रियंका चौधरी ने झूठ बोला है। असली प्रियंका चौधरी राजस्थान के बीकानेर की हैं। उनके पति मुकेश रेप्सवाल 2015 बैच के IAS अफसर हैं। इस वक्त हिमाचल के चंबा जिले में उपायुक्त के पद पर तैनात हैं। प्रियंका उन्हीं के साथ रहकर तैयारी कर रही थीं। उन्हें यह सफलता चौथे प्रयास में मिली। GST इंस्पेक्टर प्रियंका चौधरी ने कहा- मेरी ओर से ऐसा कोई दावा नहीं किया गया था। मेरे पिता भावुक हो गए थे, जिस वजह से गलतफहमी हुई। असल में प्रियंका चौधरी यूपीएससी की प्री परीक्षा भी पास नहीं कर सकी थीं। दिव्या की सक्सेज स्टोरी अखबारों में छपी
दावा- यूपीएससी में 182वीं रैंक पर भी फर्जीवाड़ा हुआ। बागपत जिले की दिव्या तंवर ने सिलेक्शन का दावा किया। परिवार में जश्न मनाया जाने लगा। दिव्या जिस वनस्थली पब्लिक स्कूल में पढ़ती थीं, उसके प्रिंसिपल रणवीर सिंह ने कहा कि दिव्या बचपन से ही मेहनती थीं। हम उनका सम्मान करेंगे। दिव्या के पिता रविंद्र कुमार CISF में हैं और दिल्ली में रहते हैं। अगले दिन दिव्या की सक्सेज स्टोरी अखबारों में भी छपीं। हकीकत कैसे सामने आई- 24 घंटे के अंदर खुलासा हुआ कि 182वीं रैंक पर हरियाणा के रोहतक जिले की दिव्या गहलावत का सिलेक्शन हुआ है। वह रोहतक के सेक्टर-3 में रहती हैं। इस वक्त वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रही हैं। इसके बाद बागपत की दिव्या अंडरग्राउंड हो गईं। न दिव्या ने और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य ने इस मामले पर बात की। इतना जरूर सामने आया कि दिव्या तंवर प्री परीक्षा भी पास नहीं कर पाई थीं। यूपी में IAS बने कैंडिडेट के नाम पर दूसरे स्टेट में हुए फर्जी दावे यूपी का यशवर्धन सिलेक्ट, दावा एमपी के यशवर्धन ने किया
दावा- लिस्ट में 212वीं रैंक पर यशवर्धन सिंह का नाम आया। सतना के नागौद इलाके में रहने वाले यशवर्धन ने दावा किया कि वे सफल हो गए। उनके पिता नरेंद्र सिंह परिहार और मां संगीता को बधाई देने के लिए लोग इकट्ठा हो गए। मीडिया में इंटरव्यू होने लगे। यशवर्धन ने कहा- इस सफलता से कुछ हद तक ही संतुष्ट हूं। यूपीएससी में आगे और बेहतर रैंक लेकर आऊंगा। हकीकत कैसे सामने आई- सतना के यशवर्धन का झूठ रिजल्ट के वक्त ही पकड़ गया। क्योंकि जिस यशवर्धन का सिलेक्शन हुआ था, वो ओबीसी वर्ग के थे। जबकि सतना के यशवर्धन जनरल कैटेगरी में आते हैं। हकीकत में उनका प्री भी क्वॉलिफाई नहीं हुआ था। यूपी के हमीरपुर जिले के राठ इलाके के यशवर्धन सिंह सिलेक्ट हुए थे। वे स्वामी ब्रह्मानंद महाविद्यालय के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र सिंह के बेटे हैं। इसके पहले उनकी 728वीं और 571वीं रैंक आ चुकी है। यशवर्धन ने लखनऊ के केजीएमयू से एमबीबीएस किया है। 4 बार सिविल सर्विस का इंटरव्यू तक पहुंच चुके हैं। रिजल्ट आते ही आकांक्षा सिंह ने कहा- मैं IAS बनी दावा- बिहार के भोजपुर जिले की आकांक्षा सिंह ने अपने सिलेक्शन की बात कही। उनके घर मिठाई बंटने लगी। लोग बधाई देने पहुंचने लगे। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी तक ने बधाई दे दी। आकांक्षा रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती हैं। हकीकत कैसे सामने आई- गाजीपुर की आकांक्षा ने अपने डॉक्यूमेंट सोशल मीडिया पर पोस्ट किए। कहा कि 301वीं रैंक मेरी है। मेरा रोल नंबर 0856794 है। बिहार की आकांक्षा ने भी कहा कि ये रोल नंबर उनका है। लेकिन, एडमिट कार्ड स्कैन करने पर उनका रोल नंबर 085659 आ रहा था। पीआईबी ने क्लियर किया कि गाजीपुर की आकांक्षा ही असली हैं। सामने आया कि बिहार की आकांक्षा ने प्री परीक्षा भी पास नहीं की थी। अब दूसरे स्टेट में हुए फर्जी दावों को समझते हैं… परीक्षा ही नहीं दी, कहा- IAS बन गया दावा- बिहार के शेखपुरा जिले के रंजीत कुमार यादव ने दावा किया कि मेरी 440वीं रैंक आई है। मैं IAS बन गया हूं। राजद के पूर्व विधायक विजय सम्राट समर्थकों के साथ पहुंचे। माला पहनाई, एक ब्रीफकेस दिया। महुली के थाना प्रभारी राम प्रवेश भारती ने भी मिठाई खिलाकर सम्मानित किया। रंजीत के कई वीडियो सामने आए, जिसमें वह बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है। बगल में खड़े बुजुर्ग भावुक होकर सुन रहे हैं। हकीकत कैसे सामने आई- 2 दिन बाद मामला खुला कि 440वीं रैंक पर कर्नाटक के रंजीथ कुमार का सिलेक्शन हुआ है। वे चिकवलापुरम जिले के हैं। दूसरी तरफ, बिहार के रंजीत को पुलिस ने फोन करके थाने बुलाया। रंजीत फोन ऑफ करके दिल्ली भाग गया। जिन लोगों ने बधाई वाले पोस्ट किए थे, उन्होंने हटा दिया। रंजीत के बारे में पता चला कि वह पहले भी 2-3 बार नौकरी पाने की बात कर चुका है। इस बार तो उसने प्री परीक्षा भी नहीं दी थी। वह दिल्ली में रहकर छोटा-मोटा काम करता है। दस्तावेज एडिट किए, ट्रक ड्राइवर की बेटी का IAS बनने का दावा दावा- फैरूज फातिमा ने सिविल सेवा परीक्षा में 708वां स्थान पाने का दावा किया। रोजा चल रहा था, इसलिए दिन के बजाय रात में जश्न मना। फैरूज सनरूफ वाली कार में खड़ी होकर लोगों का अभिवादन स्वीकार रही थी। हकीकत कैसे सामने आई- सिर्फ 24 घंटे के अंदर हकीकत सामने आ गई। पता चला कि असली फैरूज फातिमा केरल की हैं। उन्होंने जिस कोचिंग से पढ़ाई की, उसने पोस्टर जारी किया। 36 घंटे बाद यूपीएससी ने भी 708वीं रैंक पर केरल की फैरूज फातिमा का सिलेक्शन बता दिया। फैरूज के बारे में और पड़ताल की तो पता चला कि इन्होंने प्री परीक्षा भी पास नहीं की थी। एडमिट कार्ड के रोल नंबर को भी एडिट कर दिया। यूपीएससी ऑफिस के बाहर खड़े होकर जो फोटो खिंचती है, उसे भी एडिट करके बना लिया। फैरूज इस वक्त RBI में डिप्टी मैनेजर हैं। अब RBI जॉब में लगे उनके दस्तावेजों की जांच शुरू हो गई है। क्या इन कैंडिडेट ने भूलवश ऐसा किया? ये सवाल हमने कई IAS अफसरों से ही पूछे, पढ़िए वो क्या कहते हैं… मुरादाबाद के सीडीओ IAS दिव्यांशु पटेल कहते हैं- सिविल सेवा में हर साल ऐसे केस आते हैं। मुझे लगता है कि कैंडिडेट 3 वजहों से ऐसा करते हैं।
1. ऐसे कैंडिडेट परीक्षा पास करने के बाद मिलने वाले ग्लैमर से प्रभावित होते हैं।
2. ऐसे कैंडिडेट बहुत गंभीरता से तैयारी नहीं करते हैं, ये छोटे फायदे की कोशिश में होते हैं। 3. इन्हें लगता है कि यूपीएससी क्लियर होने का दावा करने की बात सिर्फ आसपास तक ही रहेगी। इसका फायदा शादी-विवाह और सामाजिक प्रतिष्ठा में कर पाएंगे। लेकिन जब यूपीएससी का रिजल्ट आता है, तब पूरे देश में चर्चा होती है। इसलिए इन लोगों का मामला खुल जाता है। पूर्व IAS राकेश वर्मा कहते हैं- ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। जो व्यक्ति प्रारंभिक परीक्षा नहीं पास कर सका है, वह रिजल्ट देखकर कैसे दावा कर सकता है कि उसका सिलेक्शन हुआ है। अगर दो एक जैसे नाम वाले अभ्यर्थी प्री-मेंस परीक्षा पास करके इंटरव्यू तक पहुंचे, तब वह रिजल्ट में अपना नाम देखकर थोड़े वक्त के लिए कंफ्यूज हो सकते हैं। लेकिन दोनों फैक्ट अलग-अलग होंगे। पहला- उनके रोल नंबर अलग होंगे।
दूसरा- उनकी कैटगरी भी अलग-अलग होगी। इस तरह से पहचान हो जाती है। यूपीएससी जैसी संस्था में एक ही रोल नंबर पर एक ही नाम के दो लोगों का सिलेक्शन कभी नहीं हुआ। पूर्व IAS राकेश वर्मा कहते हैं- इस तरह के फर्जीवाड़े पर पुलिस इंतजार करती है कि कोई शिकायत करे। जिसके नाम पर ये सब दावा हो रहा होता है, उसे इससे कोई मतलब नहीं होता। पुलिस अपने आप एक्शन लेकर कार्रवाई कर सकती है, लेकिन वह भी बचती है। मनोवैज्ञानिक क्या कहते हैं… कैंडिडेट अधूरेपन, हार के डर से ऐसा करते हैं
मेरठ की प्रोफेसर डॉ. अनिता मोरल कहती हैं- IAS होने के फर्जी दावे करने वाले कैंडिडेट 4 वजह से ऐसा करते हैं- IAS बनने के और फर्जी दावे भी जानिए —————————— यह खबर भी पढ़ें सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु दी, नई जिंदगी देने पहुंचे बाबा, बोले- मेरी जड़ी-बूटी ठीक कर देगी मैं राजस्थान से आया हूं। मेरी बनाई देसी दवा की पुड़िया से आपके बेटे को नई जिंदगी मिल सकती है। आप चाहें तो इसे एम्स के डॉक्टर से दिलवा दें। एक बाबा का ये दावा सुन गाजियाबाद के रहने वाले अशोक राणा भावुक हो गए। बोले- शब्दों में बयां नहीं कर सकता 13 साल से बेटे को जिंदा लाश की तरह देखना कितना दर्दनाक रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कुछ नहीं। पढ़िए पूरी खबर…
दावा. बुलंदशहर की रहने वाली शिखा ने दावा किया कि उन्हें यूपीएससी में 113वीं रैंक मिली है। शिखा के दादा एक इंटर कॉलेज में चपरासी हैं। वे कैमरे के आगे भावुक होकर रोने लगे। यही क्लिप वायरल हो गई। हैडिंग बनी- चपरासी की पोती ने यूपीएससी क्रैक किया…। शिखा इंटरव्यू में सक्सेस की कहानियां बताती रहीं। हकीकत कैसे सामने आई- दिल्ली की शिखा ने यूपीएससी को मेल किया कि बुलंदशहर की एक और शिखा IAS सिलेक्शन का दावा कर रही हैं। इसको स्पष्ट कर दीजिए। इसके बाद यूपीएससी ने बुलंदशहर की डीएम श्रुति से जांच करने को कहा। डीएम ने एसडीएम सदर दिनेश चंद्र से रिपोर्ट मांगी। जांच में पता चला कि बुलंदशहर की शिखा का पूरा नाम शिखा रानी है। ये मेंस परीक्षा पास नहीं कर पाई थीं। 113वीं रैंक पर जिस शिखा का सिलेक्शन हुआ, वो दिल्ली की हैं। रोहतक के सांपला में बतौर BDPO काम कर रही हैं। इसके बाद शिखा रानी ने माफी मांगी। कहा- मैंने सिर्फ नाम देखा, रोल नंबर नहीं। पिता प्रेमचंद ने कहा- बेटी रिजल्ट के बाद भावुक हो गई थी, इसलिए उसने नाम देखने के तुरंत बाद ही परिवार को बता दिया, यही उसकी गलती है। GST इंस्पेक्टर का झूठ- मैं IAS अधिकारी बन गई
दावा- गाजीपुर जिले की प्रियंका चौधरी ने रिजल्ट आने के बाद अपने पिता नीरा राम को फोन किया। कहा- पापा मेरा यूपीएससी क्लियर हो गया है। 79वीं रैंक मिली है। हो सकता है IAS मिल जाए। इस फोन के बाद नीरा राम भावुक हो गए। पूरे जखनियां के गौराखास गांव उत्साह से भर गया। प्रियंका इस वक्त प्रयागराज में GST इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। ये नौकरी भी उन्हें 3 महीने पहले ही मिली है। 15 दिसंबर, 2025 को उन्होंने जॉइन किया था। हकीकत कैसे सामने आई- 24 घंटे के अंदर पता चला कि प्रियंका चौधरी ने झूठ बोला है। असली प्रियंका चौधरी राजस्थान के बीकानेर की हैं। उनके पति मुकेश रेप्सवाल 2015 बैच के IAS अफसर हैं। इस वक्त हिमाचल के चंबा जिले में उपायुक्त के पद पर तैनात हैं। प्रियंका उन्हीं के साथ रहकर तैयारी कर रही थीं। उन्हें यह सफलता चौथे प्रयास में मिली। GST इंस्पेक्टर प्रियंका चौधरी ने कहा- मेरी ओर से ऐसा कोई दावा नहीं किया गया था। मेरे पिता भावुक हो गए थे, जिस वजह से गलतफहमी हुई। असल में प्रियंका चौधरी यूपीएससी की प्री परीक्षा भी पास नहीं कर सकी थीं। दिव्या की सक्सेज स्टोरी अखबारों में छपी
दावा- यूपीएससी में 182वीं रैंक पर भी फर्जीवाड़ा हुआ। बागपत जिले की दिव्या तंवर ने सिलेक्शन का दावा किया। परिवार में जश्न मनाया जाने लगा। दिव्या जिस वनस्थली पब्लिक स्कूल में पढ़ती थीं, उसके प्रिंसिपल रणवीर सिंह ने कहा कि दिव्या बचपन से ही मेहनती थीं। हम उनका सम्मान करेंगे। दिव्या के पिता रविंद्र कुमार CISF में हैं और दिल्ली में रहते हैं। अगले दिन दिव्या की सक्सेज स्टोरी अखबारों में भी छपीं। हकीकत कैसे सामने आई- 24 घंटे के अंदर खुलासा हुआ कि 182वीं रैंक पर हरियाणा के रोहतक जिले की दिव्या गहलावत का सिलेक्शन हुआ है। वह रोहतक के सेक्टर-3 में रहती हैं। इस वक्त वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रही हैं। इसके बाद बागपत की दिव्या अंडरग्राउंड हो गईं। न दिव्या ने और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य ने इस मामले पर बात की। इतना जरूर सामने आया कि दिव्या तंवर प्री परीक्षा भी पास नहीं कर पाई थीं। यूपी में IAS बने कैंडिडेट के नाम पर दूसरे स्टेट में हुए फर्जी दावे यूपी का यशवर्धन सिलेक्ट, दावा एमपी के यशवर्धन ने किया
दावा- लिस्ट में 212वीं रैंक पर यशवर्धन सिंह का नाम आया। सतना के नागौद इलाके में रहने वाले यशवर्धन ने दावा किया कि वे सफल हो गए। उनके पिता नरेंद्र सिंह परिहार और मां संगीता को बधाई देने के लिए लोग इकट्ठा हो गए। मीडिया में इंटरव्यू होने लगे। यशवर्धन ने कहा- इस सफलता से कुछ हद तक ही संतुष्ट हूं। यूपीएससी में आगे और बेहतर रैंक लेकर आऊंगा। हकीकत कैसे सामने आई- सतना के यशवर्धन का झूठ रिजल्ट के वक्त ही पकड़ गया। क्योंकि जिस यशवर्धन का सिलेक्शन हुआ था, वो ओबीसी वर्ग के थे। जबकि सतना के यशवर्धन जनरल कैटेगरी में आते हैं। हकीकत में उनका प्री भी क्वॉलिफाई नहीं हुआ था। यूपी के हमीरपुर जिले के राठ इलाके के यशवर्धन सिंह सिलेक्ट हुए थे। वे स्वामी ब्रह्मानंद महाविद्यालय के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र सिंह के बेटे हैं। इसके पहले उनकी 728वीं और 571वीं रैंक आ चुकी है। यशवर्धन ने लखनऊ के केजीएमयू से एमबीबीएस किया है। 4 बार सिविल सर्विस का इंटरव्यू तक पहुंच चुके हैं। रिजल्ट आते ही आकांक्षा सिंह ने कहा- मैं IAS बनी दावा- बिहार के भोजपुर जिले की आकांक्षा सिंह ने अपने सिलेक्शन की बात कही। उनके घर मिठाई बंटने लगी। लोग बधाई देने पहुंचने लगे। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी तक ने बधाई दे दी। आकांक्षा रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती हैं। हकीकत कैसे सामने आई- गाजीपुर की आकांक्षा ने अपने डॉक्यूमेंट सोशल मीडिया पर पोस्ट किए। कहा कि 301वीं रैंक मेरी है। मेरा रोल नंबर 0856794 है। बिहार की आकांक्षा ने भी कहा कि ये रोल नंबर उनका है। लेकिन, एडमिट कार्ड स्कैन करने पर उनका रोल नंबर 085659 आ रहा था। पीआईबी ने क्लियर किया कि गाजीपुर की आकांक्षा ही असली हैं। सामने आया कि बिहार की आकांक्षा ने प्री परीक्षा भी पास नहीं की थी। अब दूसरे स्टेट में हुए फर्जी दावों को समझते हैं… परीक्षा ही नहीं दी, कहा- IAS बन गया दावा- बिहार के शेखपुरा जिले के रंजीत कुमार यादव ने दावा किया कि मेरी 440वीं रैंक आई है। मैं IAS बन गया हूं। राजद के पूर्व विधायक विजय सम्राट समर्थकों के साथ पहुंचे। माला पहनाई, एक ब्रीफकेस दिया। महुली के थाना प्रभारी राम प्रवेश भारती ने भी मिठाई खिलाकर सम्मानित किया। रंजीत के कई वीडियो सामने आए, जिसमें वह बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है। बगल में खड़े बुजुर्ग भावुक होकर सुन रहे हैं। हकीकत कैसे सामने आई- 2 दिन बाद मामला खुला कि 440वीं रैंक पर कर्नाटक के रंजीथ कुमार का सिलेक्शन हुआ है। वे चिकवलापुरम जिले के हैं। दूसरी तरफ, बिहार के रंजीत को पुलिस ने फोन करके थाने बुलाया। रंजीत फोन ऑफ करके दिल्ली भाग गया। जिन लोगों ने बधाई वाले पोस्ट किए थे, उन्होंने हटा दिया। रंजीत के बारे में पता चला कि वह पहले भी 2-3 बार नौकरी पाने की बात कर चुका है। इस बार तो उसने प्री परीक्षा भी नहीं दी थी। वह दिल्ली में रहकर छोटा-मोटा काम करता है। दस्तावेज एडिट किए, ट्रक ड्राइवर की बेटी का IAS बनने का दावा दावा- फैरूज फातिमा ने सिविल सेवा परीक्षा में 708वां स्थान पाने का दावा किया। रोजा चल रहा था, इसलिए दिन के बजाय रात में जश्न मना। फैरूज सनरूफ वाली कार में खड़ी होकर लोगों का अभिवादन स्वीकार रही थी। हकीकत कैसे सामने आई- सिर्फ 24 घंटे के अंदर हकीकत सामने आ गई। पता चला कि असली फैरूज फातिमा केरल की हैं। उन्होंने जिस कोचिंग से पढ़ाई की, उसने पोस्टर जारी किया। 36 घंटे बाद यूपीएससी ने भी 708वीं रैंक पर केरल की फैरूज फातिमा का सिलेक्शन बता दिया। फैरूज के बारे में और पड़ताल की तो पता चला कि इन्होंने प्री परीक्षा भी पास नहीं की थी। एडमिट कार्ड के रोल नंबर को भी एडिट कर दिया। यूपीएससी ऑफिस के बाहर खड़े होकर जो फोटो खिंचती है, उसे भी एडिट करके बना लिया। फैरूज इस वक्त RBI में डिप्टी मैनेजर हैं। अब RBI जॉब में लगे उनके दस्तावेजों की जांच शुरू हो गई है। क्या इन कैंडिडेट ने भूलवश ऐसा किया? ये सवाल हमने कई IAS अफसरों से ही पूछे, पढ़िए वो क्या कहते हैं… मुरादाबाद के सीडीओ IAS दिव्यांशु पटेल कहते हैं- सिविल सेवा में हर साल ऐसे केस आते हैं। मुझे लगता है कि कैंडिडेट 3 वजहों से ऐसा करते हैं।
1. ऐसे कैंडिडेट परीक्षा पास करने के बाद मिलने वाले ग्लैमर से प्रभावित होते हैं।
2. ऐसे कैंडिडेट बहुत गंभीरता से तैयारी नहीं करते हैं, ये छोटे फायदे की कोशिश में होते हैं। 3. इन्हें लगता है कि यूपीएससी क्लियर होने का दावा करने की बात सिर्फ आसपास तक ही रहेगी। इसका फायदा शादी-विवाह और सामाजिक प्रतिष्ठा में कर पाएंगे। लेकिन जब यूपीएससी का रिजल्ट आता है, तब पूरे देश में चर्चा होती है। इसलिए इन लोगों का मामला खुल जाता है। पूर्व IAS राकेश वर्मा कहते हैं- ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। जो व्यक्ति प्रारंभिक परीक्षा नहीं पास कर सका है, वह रिजल्ट देखकर कैसे दावा कर सकता है कि उसका सिलेक्शन हुआ है। अगर दो एक जैसे नाम वाले अभ्यर्थी प्री-मेंस परीक्षा पास करके इंटरव्यू तक पहुंचे, तब वह रिजल्ट में अपना नाम देखकर थोड़े वक्त के लिए कंफ्यूज हो सकते हैं। लेकिन दोनों फैक्ट अलग-अलग होंगे। पहला- उनके रोल नंबर अलग होंगे।
दूसरा- उनकी कैटगरी भी अलग-अलग होगी। इस तरह से पहचान हो जाती है। यूपीएससी जैसी संस्था में एक ही रोल नंबर पर एक ही नाम के दो लोगों का सिलेक्शन कभी नहीं हुआ। पूर्व IAS राकेश वर्मा कहते हैं- इस तरह के फर्जीवाड़े पर पुलिस इंतजार करती है कि कोई शिकायत करे। जिसके नाम पर ये सब दावा हो रहा होता है, उसे इससे कोई मतलब नहीं होता। पुलिस अपने आप एक्शन लेकर कार्रवाई कर सकती है, लेकिन वह भी बचती है। मनोवैज्ञानिक क्या कहते हैं… कैंडिडेट अधूरेपन, हार के डर से ऐसा करते हैं
मेरठ की प्रोफेसर डॉ. अनिता मोरल कहती हैं- IAS होने के फर्जी दावे करने वाले कैंडिडेट 4 वजह से ऐसा करते हैं- IAS बनने के और फर्जी दावे भी जानिए —————————— यह खबर भी पढ़ें सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु दी, नई जिंदगी देने पहुंचे बाबा, बोले- मेरी जड़ी-बूटी ठीक कर देगी मैं राजस्थान से आया हूं। मेरी बनाई देसी दवा की पुड़िया से आपके बेटे को नई जिंदगी मिल सकती है। आप चाहें तो इसे एम्स के डॉक्टर से दिलवा दें। एक बाबा का ये दावा सुन गाजियाबाद के रहने वाले अशोक राणा भावुक हो गए। बोले- शब्दों में बयां नहीं कर सकता 13 साल से बेटे को जिंदा लाश की तरह देखना कितना दर्दनाक रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कुछ नहीं। पढ़िए पूरी खबर…