28 लाख छात्रों को 3,350 करोड़ स्कॉलरशिप मिली:इनमें 13.52 लाख OBC बच्चे; योगी बोले- पहले आधी रकम सपाई डकार जाते थे

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा, सपा सरकार में एससी–एसटी बच्चों को छात्रवृत्ति नहीं दी गई। छात्रवृत्ति के पैसे को दूसरे कार्यों में डायवर्ट कर दिया गया। जिन्हें मिलती थी, उनका आधा पैसा सपा के लोग डकार जाते थे। 2017 में हमारी सरकार सत्ता में आई तो सपा के कार्यकाल वाली छात्रवृत्ति भी देनी पड़ी। आज सभी छात्रों को समय पर छात्रवृत्ति दी जा रही है। सीएम ने लखनऊ में इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर हॉल में कक्षा 9 व 10 के साथ-साथ दशमोत्तर स्तर के कुल 27,99,982 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति यानी स्कॉलरशिप दी। 3,350 करोड़ रुपए सीधे उनके खाते में ट्रांसफर की गई। 33,334 गरीब परिवारों के आश्रित सदस्यों को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत 100 करोड़ रुपए की मदद भी दी गई। सीएम योगी ने छात्रों को नसीहत दी- ये स्कॉलरशिप आपकी मंजिल नहीं है। परिश्रम आपकी मंजिल है। स्कॉलरशिप के पैसे का दुरुपयोग मत करना। आपको सपोर्ट करने और आगे बढ़ने के लिए एक प्लेटफार्म दिया गया है। सीएम योगी की 7 बड़ी बातें जानिए… नए अधिकारी बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाएं: अभ्युदय कोचिंग को हर जिले में वर्चुअल और फिजिकल चालू करना चाहिए। समाज कल्याण विभाग को और काम करने की जरूरत है, ताकि यूपीएससी, एनडीए, सीडीएस, आईआईटी आदि की तैयारी हो सके। जो हमारे नए अधिकारी चयन होकर आते हैं, उन्हें एक घंटे हर जिले में इस कोचिंग में पढ़ाना चाहिए। अब योजनाओं को भ्रष्टाचार नहीं हो सकता: तकनीकि का यही लाभ है कि सीधे हमने लाभार्थी के खाते में पैसा भेज दिया। इससे किसी तरह की दलाली नहीं हो सकती। 2017 से पहले भ्रष्टाचार का हाल ये था कि कुपोषित बच्चों के पुष्टाहार में भी भ्रष्टाचार किया। विकास की योजनाओं में भ्रष्टाचार, पारिवारिक लाभ की योजना में भ्रष्टाचार, छात्रवृत्ति में भ्रष्टाचार किया गया। सपा सरकार में पैसा डकार जाते थे लोग: मैं अभी सपा के अध्यक्ष का बयान सुन रहा था कि सरकार 1000 पेंशन क्यों दे रही है? जबकि उनके समय में 300 पेंशन मिलती थी। 6 महीने में एक साथ पैसा दिया जाता था, आधी रकम इनके लोग डकार लेते थे। विधवा महिलाओं की राशि भी आधी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती थी। आज कोई भ्रष्टाचार नहीं कर सकता। लोगों को मालूम है कि ऐसे लोगों की संपत्ति जब्त कर गरीबों में बांट दिया जाता है। सत्ता के समानांतर सरकार चलाते थे अपराधी: 43 हजार परिवारों को 100 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता दी गई है। पहले ये पैसा कहां जाता था। ये हर व्यक्ति जानता है। पहले सारी स्कीमों का पैसा समाजवादी के नाम पर परिवारवादी लोग हजम कर जाते थे। सत्ता के समानांतर अपराधी सरकार चलाते थे। दलित महापुरुषों के प्रति सपा ने सम्मान नहीं दिखाया: सपा को चार बार प्रदेश की सत्ता में आने का मौका मिला। एक भी दलित महापुरुष या संत के प्रति सम्मान का भाव नहीं रखा। असीम अरुण जिस जिले से विधायक चुने गए हैं। कन्नौज में बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के नाम को उन्होंने बदल दिया था। हमारी सरकार ने फिर से उसका नाम रखा। हमेशा बाबा साहब का अपमान किया: लखनऊ में भाषा विवि का नाम कांशीराम के नाम पर था, उसे भी बदल दिया था। क्योंकि उनको चिढ़ थी। आज वे लोग यही काम करके समाज को अपमानित करने का काम कर रहे हैं। संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करते हैं। पीएम के बारे में अपमानजनक, चुनाव, न्यायपालिका के बारे में टिप्पणी करते हैं। भारत के प्रतीकों पर उंगली पर उठाने का मतलब बाबा साहेब का अपमान है। भारत का वंचित गरीब ये स्वीकार नहीं कर सकता है। सत्ता में थे तो सिर्फ परिवार के भरण का ख्याल था: वे वंदेमातरम का अपमान करेंगे। समाज को बांटेंगे। जाति के नाम पर बांटेंगे। सत्ता में थे तो सिर्फ परिवार के भरण का ख्याल था। तुष्टीकरण के नाम पर राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करते थे। उनके चलते ही ये राज्य बीमारु राज्य बन गया था। युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा हो गया था। अब हमारा प्रदेश पहचान के संकट के लिए मोहताज नहीं है। बीमारी से मुक्त हो चुका है। अब भारत की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ का इंजन बन चुका है। कार्यक्रम से जुड़े अपडेट्स जानने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…