फतेहपुर में जिस चाय की दुकान पर छापोमारी की गई, उस चायवाले को सपा मुखिया अखिलेश यादव ने लखनऊ में पार्टी दफ्तर बुलाया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- चायवाले को परेशान कर रहे हैं। एक मुस्लिम समुदाय के नेता को आगे करके मारपीट कराई, ताकि केस बन सके। छापेमारी करवा रहे हैं। आरोप ये है कि एल्युमिनियम के बर्तन में चाय बन रही है। दुकान सील करने की बात कर रहे हैं। जो अजय सिंह बिष्ट का सबसे खास हो, मेरे साथ चले, देख ले, हमारे घर में भी एल्युमिनियम के बर्तन हैं। मेरा घर भी सील कर दें। जब इन्होंने शंकराचार्य को नहीं छोड़ा तो बाकी की बात ही छोड़ दी जाए। इस दौरान चाय बेचने वाले आर्यन ने कहा- जब से अध्यक्ष जी को चाय पिलाई है, उसके बाद से मेरे ऊपर अत्याचार किया जा रहा है। आए दिन प्रताड़ित किया जा रहा है। अखिलेश की प्रेस कॉन्फ्रेंस की बड़ी बातें 1. सरकार में बने रहने का कोई हक नहीं
अखिलेश ने कहा- आज बहुत ही शुभ दिन है। हम लखनऊ वाले हैं। इसीलिए कहा कि पहले आप। एक लंबी प्रेस कांफ्रेंस आपने सुनी है। टीवी प्रसारण भी सुना आपने। आज हम एतिहासिक जीत के मौके पर मिल रहे हैं, जब परिसीमन बिल पास नहीं हो पाया है। संसद में हार का मतलब होता है कि जनता का विश्वास खो चुकी है। सरकार में बने रहने का कोई हक नहीं है। भाजपा के लोग डर दिखाते हैं। समाज में विभाजन करते हैं। अपना उल्लू सीधा करते हैं। भाजपाई सत्ता पाने और बचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। भाजपाइयों का सीएमएफ फॉर्मूला (क्रिएट, मिस्टिरियल और फीयर) पिट चुका है। इनकी चाल अब नहीं चलेगी। भाजपा की हार शुरू हो चुकी है। महिलाएं ही भाजपा को हराएंगी। आज के नए विचार वाली नारी हराएगी। 2. आज की नारी इनके बहकावे में नहीं आएगी
उन्होंने कहा- पुराने सोच की महिलाओं को अपनी ओर करने की कोशिश कर रही है, लेकिन आज की नारी इनके बहकावे में नहीं आएगी। इनकी महिलाओं के बारे में सोच सामंती है। नारी को कमजोर रखो, इन्हें अधिकार न दो.. न सोच विचार का, न पहनावे का। जनता के बढ़ते विरोध से ध्यान हटाने के लिए लाए गए बिल की हार भाजपा की हार है। ये लोगों को ठगना चाहती थी। इस जीत का प्रतिनिधित्व देश का विपक्ष कर रहा है। 3. नारी के अधिकार का हरण करने के लिए आया था
अखिलेश ने कहा- परिसीमन के नाम पर ये रूप बदल कर नारी के अधिकार का हरण करने के लिए आया था। ये महिलाओं को अधिकार देने की नहीं, बल्कि उनकी शक्ति को कम करने की योजना थी। ये बिल नहीं था, भाजपा की दरार वादी राजनीति का काला दस्तावेज था। पिछड़ों की आबादी 66 प्रतिशत भी मान ली जाए तो 33 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी होनी चाहिए थी। लेकिन ये 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दे नहीं रहे थे, छीन रहे थे। दरअसल महिला आरक्षण बिल का आधार ही निराधार था। 4. ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बिल लाया गया
उन्होंने कहा- आज हर तरफ महिलाओं के शोषण की खबरें आ रही हैं। इससे ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बिल लाया जा रहा है। हमारी आपत्ति यही थी कि पहले जनगणना कराई जाए फिर आरक्षण दिया जाए। महिलाओं के साथ छलावा हम नहीं होने देंगे। यही महिला तुष्टीकरण है। प्रधानपति की तरह सांसद पति की अवधारणा भी चल पड़ती। संसद में जो सरकार हार जाती है वह बाहर जाती है। जनता को विश्वास हो गया है कि बुरे दिन जाने वाले हैं। 5. आरक्षण नहीं, नारी को नारा बनाना था
अखिलेश ने कहा- रात को जब हमें आपको पता चला कि बहुत बड़ा अनाउसमेंट होने जा रहा है तो मुझे लगा कि पीएम पद के लिए किसी महिला का नाम सामने आ सकता है। उन्हें आरक्षण नहीं, नारी को नारा बनाना था। उसके सहारे हमें आपको धोखा देना था। अभी जो प्रेस कांफ्रेंस हो रही है, उसके मुखिया का भी एक वीडियो मिला। इसमें तब क्या कह रहे हैं महिला आरक्षण बिल पर, जब वो सत्ता में नहीं थे। वो भी देखना चाहिए। आधी आबादी की बात हो रही है, तो उसमें सबको सम्मान मिलना चाहिए। 6. टीएमसी, डीएमके, कांग्रेस के लोग प्रचार न कर सके, इसलिए सदन बुलाया
उन्होंने कहा- रंग जो होता है वह किसी न किसी धर्म से जुड़ा होता है। लाल रंग क्रांति के साथ-साथ हमारी देवियों का भी रंग है, दुल्हन का भी रंग लाल होता है। संसद का सत्र इसलिए बुलाया गया था कि टीएमसी, डीएमके, कांग्रेस के लोग प्रचार न कर सकें, जिससे उनकी जमानत न जब्त होने पाए। ——————————
अखिलेश ने कहा- आज बहुत ही शुभ दिन है। हम लखनऊ वाले हैं। इसीलिए कहा कि पहले आप। एक लंबी प्रेस कांफ्रेंस आपने सुनी है। टीवी प्रसारण भी सुना आपने। आज हम एतिहासिक जीत के मौके पर मिल रहे हैं, जब परिसीमन बिल पास नहीं हो पाया है। संसद में हार का मतलब होता है कि जनता का विश्वास खो चुकी है। सरकार में बने रहने का कोई हक नहीं है। भाजपा के लोग डर दिखाते हैं। समाज में विभाजन करते हैं। अपना उल्लू सीधा करते हैं। भाजपाई सत्ता पाने और बचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। भाजपाइयों का सीएमएफ फॉर्मूला (क्रिएट, मिस्टिरियल और फीयर) पिट चुका है। इनकी चाल अब नहीं चलेगी। भाजपा की हार शुरू हो चुकी है। महिलाएं ही भाजपा को हराएंगी। आज के नए विचार वाली नारी हराएगी। 2. आज की नारी इनके बहकावे में नहीं आएगी
उन्होंने कहा- पुराने सोच की महिलाओं को अपनी ओर करने की कोशिश कर रही है, लेकिन आज की नारी इनके बहकावे में नहीं आएगी। इनकी महिलाओं के बारे में सोच सामंती है। नारी को कमजोर रखो, इन्हें अधिकार न दो.. न सोच विचार का, न पहनावे का। जनता के बढ़ते विरोध से ध्यान हटाने के लिए लाए गए बिल की हार भाजपा की हार है। ये लोगों को ठगना चाहती थी। इस जीत का प्रतिनिधित्व देश का विपक्ष कर रहा है। 3. नारी के अधिकार का हरण करने के लिए आया था
अखिलेश ने कहा- परिसीमन के नाम पर ये रूप बदल कर नारी के अधिकार का हरण करने के लिए आया था। ये महिलाओं को अधिकार देने की नहीं, बल्कि उनकी शक्ति को कम करने की योजना थी। ये बिल नहीं था, भाजपा की दरार वादी राजनीति का काला दस्तावेज था। पिछड़ों की आबादी 66 प्रतिशत भी मान ली जाए तो 33 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी होनी चाहिए थी। लेकिन ये 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दे नहीं रहे थे, छीन रहे थे। दरअसल महिला आरक्षण बिल का आधार ही निराधार था। 4. ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बिल लाया गया
उन्होंने कहा- आज हर तरफ महिलाओं के शोषण की खबरें आ रही हैं। इससे ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बिल लाया जा रहा है। हमारी आपत्ति यही थी कि पहले जनगणना कराई जाए फिर आरक्षण दिया जाए। महिलाओं के साथ छलावा हम नहीं होने देंगे। यही महिला तुष्टीकरण है। प्रधानपति की तरह सांसद पति की अवधारणा भी चल पड़ती। संसद में जो सरकार हार जाती है वह बाहर जाती है। जनता को विश्वास हो गया है कि बुरे दिन जाने वाले हैं। 5. आरक्षण नहीं, नारी को नारा बनाना था
अखिलेश ने कहा- रात को जब हमें आपको पता चला कि बहुत बड़ा अनाउसमेंट होने जा रहा है तो मुझे लगा कि पीएम पद के लिए किसी महिला का नाम सामने आ सकता है। उन्हें आरक्षण नहीं, नारी को नारा बनाना था। उसके सहारे हमें आपको धोखा देना था। अभी जो प्रेस कांफ्रेंस हो रही है, उसके मुखिया का भी एक वीडियो मिला। इसमें तब क्या कह रहे हैं महिला आरक्षण बिल पर, जब वो सत्ता में नहीं थे। वो भी देखना चाहिए। आधी आबादी की बात हो रही है, तो उसमें सबको सम्मान मिलना चाहिए। 6. टीएमसी, डीएमके, कांग्रेस के लोग प्रचार न कर सके, इसलिए सदन बुलाया
उन्होंने कहा- रंग जो होता है वह किसी न किसी धर्म से जुड़ा होता है। लाल रंग क्रांति के साथ-साथ हमारी देवियों का भी रंग है, दुल्हन का भी रंग लाल होता है। संसद का सत्र इसलिए बुलाया गया था कि टीएमसी, डीएमके, कांग्रेस के लोग प्रचार न कर सकें, जिससे उनकी जमानत न जब्त होने पाए। ——————————