हाईकोर्ट बोला- संभल में सार्वजनिक जमीन पर नमाज नहीं होगी:कोई भी परंपरा नहीं तोड़ सकता, पहले डीएम-एसपी को फटकार लगाई थी

संभल में सार्वजनिक जमीन पर नमाज पढ़ने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी जमीन का उपयोग किसी एक पक्ष द्वारा नमाज अदा करने के लिए नहीं किया जा सकता। इस पर सबका समान अधिकार है। अगर कोई पक्ष परंपरा से हटकर कोई कार्य करता है, तो कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य सरकार को हस्तक्षेप करने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी पक्ष की धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार अन्य पक्षों की स्वतंत्रता पर निर्भर करता है। अब पूरा मामला विस्तार से… 6 अप्रैल, 2026 को हाईकोर्ट में एक याचिका डाली गई थी। संभल के इकौना गांव निवासी असीन ने 82.80 वर्गमीटर जमीन को अपना बताते हुए सार्वजनिक नमाज पढ़ने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने कहा था कि यह जमीन 16 जून, 2023 को उन्हें उपहार में मिली थी। असीन ने जमीन पर स्वामित्व का दावा करते हुए बैनामे को आधार बनाया था। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, अगर किसी व्यक्ति द्वारा गलत तरीके से सार्वजनिक जमीन का हस्तांतरण किया जाता है। वहां भीड़ इकट्ठा कर नमाज पढ़ने की अनुमति मांगी जाती है, तो ऐसा बैनामा अवैध माना जाएगा। क्योंकि, सार्वजनिक जमीन पर सभी का समान अधिकार होता है। कोर्ट ने कहा- उपहार के तौर पर स्वामित्व सिद्ध नहीं होता
कोर्ट ने कहा कि राजस्व के डॉक्यूमेंट में यह सार्वजनिक जमीन है। इसलिए उपहार के तौर पर स्वामित्व सिद्ध नहीं होता। अगर जमीन को निजी मान भी लिया जाए, तब भी याचिकाकर्ता नियमित सामूहिक नमाज शुरू करना चाहता है। जो कि पहले केवल ईद पर होती थी। यह सीमित निजी पूजा नहीं बल्कि एक तरह का विस्तार है, जो नियंत्रण के अधीन है। हाईकोर्ट ने संभल डीएम-एसपी को लगाई थी फटकार दरअसल, दो महीने पहले संभल की एक मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने के जिला प्रशासन के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को नमाज के समय सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने का आदेश दिया था। जस्टिस अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने कहा था अगर कोई व्यक्ति नमाज में बाधा डालता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने फैसला संभल के रहने वाले मुनाजिर खान की याचिका पर सुनाया था। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान संभल DM और SP को फटकार लगाई थी। कहा था- प्रशासन मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं कर सकता। अगर डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी केके विश्नोई को लगता है कि वे कानून व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर ट्रांसफर करवा लेना चाहिए। ——————————————-
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मिर्जापुर में बुधवार रात भीड़ ने पुलिस चौकी में घुसकर एक सिपाही को घसीट-घसीटकर पीटा। दरोगा की वर्दी फाड़ दी और मोबाइल छीन लिया। पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की और जमकर गाली-गलौज भी हुई। करीब डेढ़ घंटे तक पुलिस चौकी में हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। दरअसल, पैदल चल रहे युवक को एक ई-रिक्शा से हल्की चोट लग गई थी। इसके बाद युवक के साथ मौजूद 6 से अधिक लोगों ने बीच सड़क पर ई-रिक्शा चालक की पिटाई कर दी। पढ़ें पूरी खबर…