मंत्री एके शर्मा से ऊर्जा विभाग छिन सकता है:यूपी में स्मार्ट मीटर के गुस्से का असर मंत्रिमंडल विस्तार में दिखेगा; संघ ने दी थी चेतावनी

स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर यूपी सरकार ने ऐसे ही यू-टर्न नहीं लिया, बल्कि जनता के गुस्से ने ऐसा करने पर मजबूर कर दिया था। सरकार के खिलाफ माहौल बनने लगा था। संघ और भाजपा नेताओं ने सरकार को फीडबैक दिया कि जल्द ही प्रीपेड मीटर पर फैसला वापस नहीं गया, तो विधानसभा चुनाव में नुकसान हो सकता है। अब संघ और भाजपा के हाईलेवल सोर्स का दावा है कि जल्द होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का विभाग बदला जा सकता है। उनकी जगह किसी और को ऊर्जा विभाग की कमान दी जा सकती है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर गुस्से की 5 वजह 1. बिना सहमति पोस्टपेड मीटर प्रीपेड में बदले: यूपी में करीब 3.58 करोड़ घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं। फरवरी, 2026 तक इनमें से 87 लाख घरों में स्मार्ट मीटर लगे थे। इनमें से 82 लाख स्मार्ट पोस्टपेड मीटर थे। इन्हें विभाग ने प्रीपेड मीटर में बदल दिया। यह काम जनवरी के महीने से ही शुरू किया। इसके बाद मार्च-अप्रैल से बिजली विभाग ने बकाए पर बिजली कनेक्शन काटने शुरू कर दिए। 2. एक साथ 5 लाख घरों की बिजली काटी: असली परेशानी इसके बाद शुरू हुई। विभाग ने एक साथ 5 लाख से ज्यादा घरों की बिजली निगेटिव बैलेंस बताकर काट दी। रिचार्ज करवाने के बाद भी सप्लाई चालू नहीं हुई। लोगों ने हंगामा किया, तो विभाग ने सफाई दी कि तकनीकी दिक्कत से ऐसा हुआ। 3. स्मार्ट मीटर को लेकर आशंकाएं: कई ऐसे वीडियो वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि बिना बिजली कनेक्शन के भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर में खपत दर्ज हो रही है। एक आम धारणा बन गई कि ये मीटर तेज चलते हैं। विभाग इस धारणा को खत्म नहीं कर पाया। 4. शिकायत के लिए कोई सिस्टम नहीं: लोगों की शिकायत थी कि बिजली बिल औसत से कई गुना ज्यादा आ रहा था। विभाग के पास शिकायत की सुनवाई के लिए कोई सिस्टम ही नहीं था। हेल्पलाइन 1912 पर की गईं शिकायतें बिना समाधान किए ही बंद कर दी गईं। 5. सोलर प्लांट के नेटमीटर हटाए: सोलर प्लेट लगवाने वाले उपभोक्ताओं के यहां लगे नेट मीटर तक बदलकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगा दिए गए। फिर सोलर से बनने वाली बिजली को बिना घटाए अपना भारी-भरकम बिल भेज दिया गया। समझिए फैसला वापस लेने की भूमिका कैसे बनी जनता के विरोध-प्रदर्शन ने बढ़ाई चिंता
प्रीपेड मीटर को लेकर लोगों के गुस्से को भाजपा समझ नहीं पाई। सपा समेत अन्य विपक्षी दल इसे मुद्दा भी नहीं बना पाए। इस वजह से जनता खुद ही एकजुट होकर विरोध-प्रदर्शन करने को मजबूर हो गई। नतीजा यह हुआ कि लखनऊ से लेकर आगरा, फिरोजाबाद, वाराणसी, प्रयागराज, हापुड़, बरेली और मथुरा जैसे तमाम शहरों में विरोध बढ़ता गया। इस आंदोलन का कोई चेहरा नहीं था। मीडिल क्लास घरों की महिलाएं मीटर उखाड़कर बिजली विभाग के बाहर प्रदर्शन करने लगीं। इसके वीडियो तेजी से वायरल हुए। मामला बढ़ता देख सीएम योगी आदित्यनाथ को स्मार्ट मीटर की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनानी पड़ी। इसके बावजूद लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। ऐसा माना गया कि ये गुस्सा सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी की बड़ी वजह बन सकता था। चुनावी साल में सरकार के खिलाफ बनने लगा था नैरेटिव
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक सूत्र बताते हैं कि बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन के बावजूद सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेना चाहती थी। अफसरों ने सरकार में बैठे लोगों को समझा दिया था कि कुछ लोगों के बहकावे में आकर लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन, संघ और सरकार की समन्वय बैठक में संघ पदाधिकारियों ने दखल दिया। संघ ने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द इस मामले को हैंडल करना चाहिए। उधर, भाजपा संगठन के पास ऊर्जा मंत्री एके शर्मा को लेकर विधायकों और भाजपा नेताओं का लगातार निगेटिव फीडबैक पहुंच रहा था। आगरा, अलीगढ़, फिरोजाबाद जैसे जिलों के नेताओं ने साफ कर दिया था कि फैसला नहीं वापस लिया, तो चुनाव में यह मुद्दा भारी पड़ जाएगा। लोगों के विरोध-प्रदर्शन से एक्टिव होने लगा था विपक्ष पूरे यूपी में बढ़ते विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर से राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई थी। अखिलेश यादव ने स्मार्ट मीटर की तुलना EVM से कर दी थी। उन्होंने कहा था- ये बड़ा स्कैम है। जैसे EVM लोगों को समझ में नहीं आती, वैसे ही स्मार्ट मीटर भी लूट का एक जरिया है। अखिलेश ने यहां तक कह दिया था कि सपा सरकार बनने पर 300 यूनिट फ्री बिजली दी जाएगी। इसके बाद AAP के राज्यसभा सांसद और यूपी प्रभारी संजय सिंह ने कहा था- स्मार्ट मीटर अब ‘स्मार्ट चीटर’ बनकर जनता को लूट रहे हैं। इनकी रफ्तार मिल्खा सिंह से भी तेज हो गई है। 5 राज्यों के रिजल्ट के बाद अचानक बदला फैसला 4 मई को देश के 5 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश में चुनाव रिजल्ट आए। पश्चिम बंगाल में टीएमसी हार गई और भाजपा पहली बार सत्ता में आ गई। बदलते समीकरणों को देखते हुए ऊर्जा मंत्री एके शर्मा 4 मई को ही अचानक शक्ति भवन पहुंचे। अफसरों के साथ बैठक कर प्रीपेड सिस्टम खत्म करने की घोषणा कर दी। अब उपभोक्ताओं को फिर से हर महीने का बिल मिलेगा। बकाया बिल किस्तों में जमा करने की सुविधा भी दी गई है। ऊर्जा मंत्री ने कहा- उपभोक्ता देवो भव:। तकनीकी दिक्कतों और उपभोक्ताओं की शिकायतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। साथ ही निर्देश दिए कि किसी भी हालत में एक महीने के भीतर बिजली न काटी जाए। 3 साल में भी दुरुस्त नहीं हुईं स्मार्ट मीटर की खामियां भारत सरकार की कंपनी एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) ने 2023 में यूपी में 12 लाख स्मार्ट मीटर लगाए थे। तब भी इस पर काफी विवाद हुआ था। इसके बाद भारत सरकार ने एक हाईलेवल जांच कमेटी भेजी थी। कमेटी ने यूपी अलग-अलग हिस्सों में जाकर स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम, बिलिंग सिस्टम और उपभोक्ताओं का अनुभव जाना था। इसकी रिपोर्ट में स्मार्ट मीटर से जुड़ी कई गंभीर खामियां सामने आई थीं। ये 3 साल बाद भी ठीक नहीं हो पाई हैं। ————————— ये खबर भी पढ़ें… भाजपा ने शिक्षामित्र-अनुदेशकों से 17 लाख वोटरों को साधा, 43 विधानसभा सीटों पर बदल सकता है समीकरण बंगाल और असम में प्रचंड जीत के बाद अब भाजपा का पूरा फोकस यूपी पर है। 2027 के चुनाव से पहले भाजपाऔर सपा के बीच नैरेटिव बदलने और बनाए रखने की जंग तेज हो गई है। योगी सरकार की तरफ से शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का बढ़ा हुआ मानदेय देने के लिए ‘शिक्षामित्र सम्मान समारोह’ करना इसी रणनीति का हिस्सा है। पूरी खबर पढ़ें…