लखनऊ के विद्या मंदिर गर्ल्स हाईस्कूल भवन को खाली कराने के पहले दिए गए आदेश पर एडीएम (नगर पूर्वी) न्यायालय ने रोक लगा दी है। अब पहले की तरह बेटियों की पढ़ाई चलती रहेगी। आदेश में स्कूल संचालन और पठन-पाठन की व्यस्था सुनिश्चित कराते हुए कोर्ट को अवगत कराने का भी आदेश दिया है। यह राहत जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दी गई है। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त और अनुदानित यह विद्यालय वर्ष 1936 से संचालित हो रहा है। वर्तमान में यहां 243 छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं। यदि भवन खाली कराने की कार्रवाई की जाती है तो इससे छात्राओं की शिक्षा प्रभावित हो सकती है। मामले में अगली सुनवाई 2 जुलाई को निर्धारित की गई है। पहले जारी हुआ था भवन खाली कराने का आदेश डीआईओएस ने अदालत को बताया कि पूर्व में किरायेदारी विवाद से जुड़े एक मामले में विद्यालय भवन खाली कराने का आदेश जारी किया गया था। अदालत ने आदेश पर लगाई रोक मामले की सुनवाई के बाद एडीएम (नगर पूर्वी) एवं किरायेदारी अधिकारी ने माना कि छात्राओं के हित और उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए अंतरिम राहत देना उचित है। अदालत ने 21 अप्रैल 2026 को पारित भवन खाली कराने के आदेश के क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। कब्जा दिलाया गया हो तो लौटाने के निर्देश अदालत ने यह भी कहा कि यदि विद्यालय का कब्जा पहले ही किसी अन्य पक्ष को दिया जा चुका है, तो विद्यालय प्रबंधन को तत्काल कब्जा वापस दिलाया जाए ताकि छात्राओं की पढ़ाई बाधित न हो। अगली सुनवाई 2 जुलाई को न्यायालय ने मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 2 जुलाई 2026 तय की है। पुलिस आयुक्त और हजरतगंज थाना प्रभारी को भी आदेश के अनुपालन के लिए निर्देश भेजे गए हैं। पहले फोर्स का शुल्क जमा कराओ, फिर स्कूल का ताला खुलेगा एडीएम के आदेश के बाद सोमवार की शाम करीब छह बजे विद्या मंदिर गर्ल्स हाई स्कूल की मैनेजर संतोष रस्तोगी ने पुलिस के आधिकारियों समेत नजदीकी चौकी इंचार्ज को सूचना देकर विद्यालय का ताला खुलवाने पहुंची। कुछ देर बाद पहुंचे चौकी इंचार्ज ने स्कूल का ताला खोलने से मना कर दिया। उन्होंने स्कूल मैनेजर से कहा कि पहले पुलिस फोर्स के लिए नियमानुसार निर्धारित शुल्क जमा करिए। उसके बाद आदेश होने पर ताला खोला जाएगा। वहां मौजूद उप्र. माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रादेशिक उपाध्यक्ष और प्रवक्ता डॉ. आर पी मिश्र ने इस पर विरोध जताया। उन्होंने कहा कि एडीएम के आदेश में स्कूल का ताला खुलवाने के लिये पुलिस को पैसा दिये जाने की बात नहीं लिखी है। स्कूल मैनेजर और शिक्षक नेता समेत अन्य ने की चौकी इंचार्ज के बीच कई बार वार्ता हुई, लेकिन पुलिस ने ताला नहीं खोला। ताला खोले जाने की जानकारी मिलते ही बच्चों के अभिभावक एवं आसपास के करीब 50 लोग जुट गए। सभी ने पुलिस के ताला न खोले जाने पर नाराजगी जताई। कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद 4 जून को अपर जिलाधिकारी महेंद्र पाल के आदेश पर पुलिस की मौजूदगी में विद्यालय परिसर को खाली कराया गया था। ग्रीष्मावकाश के दौरान हुई इस कार्रवाई में स्कूल के अभिलेख, फर्नीचर, कंप्यूटर, पंखे और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी परिसर से बाहर निकाल दी गई थी। इसके बाद से विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों में नाराजगी है। शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों ने किया प्रदर्शन शनिवार को विद्यालय के बाहर शिक्षकों, कर्मचारियों, अभिभावकों और छात्राओं ने प्रदर्शन कर स्कूल को कब्जे से मुक्त कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विद्यालय के भविष्य और छात्रों की पढ़ाई को लेकर डर का माहौल बन गया है। 1936 से संचालित है संस्थान विद्यालय की प्रबंधिका संतोष रस्तोगी ने बताया कि वर्ष 1936 से संचालित यह शिक्षण संस्थान हजारों छात्राओं को शिक्षा प्रदान कर चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय को बंद कराने की साजिश की जा रही है। उनके अनुसार वर्तमान में स्कूल में 243 छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिनमें अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं। विद्यालय बचाने की उठी मांग मामले को लेकर विधायक और पूर्व मंत्री रविदास मेहरोत्रा ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर विद्यालय को बचाने की मांग की है। वहीं, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) के महासचिव आशीष कुमार सिंह ने बताया कि सोमवार सुबह 10 बजे जिला विद्यालय निरीक्षक और अपर जिलाधिकारी के समक्ष सभी दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे। बच्चों के भविष्य से नहीं होगा खिलवाड़ जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रबंध समिति को सभी दस्तावेजों के साथ बुलाया गया है और मामले का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय है और इसे बंद नहीं होने दिया जाएगा।