आग लगने पर तुरंत खुले, ऐसा हो ऑटोमैटिक लॉक:बिल्डिंग में फायर अलार्म-एग्जिट गेट जरूर चेक करें; लापरवाही पर यहां करें शिकायत

लखनऊ की एक बिल्डिंग में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई। जांच में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम न होना, इमरजेंसी एग्जिट की कमी और बिजली कटने से ऑटोमैटिक गेट न खुलने को हादसे का कारण बताया गया। ऐसे में इन दुर्घटनाओं से बचने के लिए लोगों का जागरूक होना भी जरूरी है। जब आप नया घर खरीदें जाएं, ऑफिस रेंट पर ले रहे हों, कोचिंग सेंटर या मॉल में जाएं, तो वहां की फायर सेफ्टी व्यवस्था जरूर देखें। आग लगने से बचने के लिए क्या कदम उठाएं? आग के बीच फंस जाएं तो क्या करें? पढ़िए इस रिपोर्ट में… आपके ऑफिस या बिल्डिंग में ये चीजें जरूर होनी चाहिएं यूपी फायर सर्विस एक्ट के मुताबिक, कोई भी कॉमर्शियल या आवासीय बिल्डिंग बनाने से पहले अग्निशमन विभाग से उसका नक्शा पास कराकर NOC लेनी जरूरी है। जिस फ्लोर पर AC, सर्वर या कंप्यूटर लैब जैसे ज्यादा बिजली लोड वाले उपकरण चलते हैं, वहां हर साल वायरिंग का ‘थर्मल स्कैनिंग’ टेस्ट होना चाहिए। इससे दीवारों के भीतर छिपी ओवरहीटिंग निकाल सकते हैं। लेकिन, तमाम मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि पूरे प्रदेश में ऐसी हजारों बिल्डिंग हैं, जिनके पास फायर डिपार्टमेंट की NOC नहीं है। इसलिए जरूरी है कि आप भी अपने संस्थान में ये 6 बातें खुद चेक करें- संस्थान के नोटिस बोर्ड या रिसेप्शन पर अग्निशमन विभाग का NOC लगा है या नहीं, यह देखना आपका अधिकार है। इसी तरह छत पर लगे स्मोक डिटेक्टर और पानी की बौछार करने वाले स्प्रिंकलर वर्किंग कंडीशन में होने चाहिए। कई जगह ये सिर्फ दिखावे के लिए टांग दिए जाते हैं। नियमों के मुताबिक, जिस हॉल में 50 से ज्यादा लोग एक साथ बैठते हों, वहां कम से कम दो एग्जिट गेट होने चाहिए। ध्यान रहे ये रास्ते कभी ताले या कबाड़ की वजह से ब्लॉक न हों। हर फ्लोर पर कार्बन डाइऑक्साइड के फायर सिलेंडर रखना भी जरूरी है। इनकी रीफिलिंग की डेट चेक करते रहें। दरवाजों के ऑटोमैटिक लॉक ऐसे हों, जो हादसों से बचाएं लखनऊ अग्निकांड के बाद ऑटोमैटिक और बायोमेट्रिक लॉक सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, आग लगने पर बिजली कटने, धुएं और ज्यादा गर्मी के कारण डिजिटल लॉक और सेंसर काम करना बंद कर सकते हैं। ऐसे में कॉमर्शियल बिल्डिंग में ऐसे फेल-सेफ लॉक लगाने चाहिए, जो बिजली जाते ही अपने आप खुल जाएं। इसके साथ फायर अलार्म से जुड़े ऑटो-अनलॉक सिस्टम, पैनिक बार और इमरजेंसी ब्रेक-ग्लास स्विच भी होना जरूरी है। नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) के मुताबिक, इमरजेंसी में किसी भी एग्जिट गेट को खोलने के लिए चाबी, कार्ड या फिंगरप्रिंट की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। जिससे लोग तुरंत बाहर निकल सकें। फायर सेफ्टी में लापरवाही पर यहां करें शिकायत अगर आपके ऑफिस में फायर सेफ्टी उपकरण काम नहीं कर रहे, तो संस्थान के एडमिन से इसकी शिकायत कर सकते हैं। इसी तरह स्कूल-कॉलेज में प्रिंसिपल या मैनेजर से शिकायत कर सकते हैं। वहीं अपार्टमेंट, मॉल या सरकारी बिल्डिंग में फायर सेफ्टी नियमों का पालन न हो रहा हो, तो नजदीकी फायर स्टेशन में इसकी शिकायत कर सकते हैं। वहां बात न सुनी जाए, तो यूपी फायर सर्विस की वॉट्सएप हेल्पलाइन 7839861680 और ईमेल fshq@nic.in पर शिकायत दें। इसके अलावा सरकार के जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) और सीएम हेल्पलाइन 1076 का भी उपयोग किया जा सकता है। शिकायत में बिल्डिंग का पता, समस्या की डिटेल और फोटो-वीडियो जैसे सबूत जरूर शामिल करें, जिससेकार्रवाई जल्दी हो सके। आग लगने पर घबराएं नहीं, ये उपाय करें यूपी फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज नियमावली, 2024 के तहत इमरजेंसी कॉल्स के लिए सख्त SOP बनाई गई है। कंट्रोल रूम को खबर मिलते ही फायर बिग्रेड की गाड़ियां तुरंत स्टेशन से रवाना हो जाती हैं। लेकिन, जब तक रेस्क्यू टीम नहीं पहुंचती, तब तक फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए। आग से झुलसने पर ये गलती न करें अक्सर लोग घरेलू नुस्खों के चक्कर में झुलसी हुई त्वचा पर टूथपेस्ट, नीली स्याही, कच्चा आलू, घी, तेल या मक्खन लगा देते हैं। इससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। स्किन स्पेशलिस्ट डॉ. बीएल जांगिड़ के मुताबिक, आग से झुलसे मरीज के लिए शुरुआती 30 मिनट ‘गोल्डन ऑवर’ होते हैं। इस दौरान की गई छोटी-सी गलती भी दिव्यांगता या मौत का कारण बन सकती है। इसलिए कोशिश करें कि पीड़ित को तुरंत अस्पताल ले जाएं। बिजली के तार और PVC पाइप जलने से जहरीली गैस फैलती है लखनऊ अग्निकांड में लोगों की मौत जलने से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई थी। यह खुलासा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हुआ है। पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. मनीषा मेंदीरत्ता के मुताबिक, बिजली के तार, PVC पाइप, प्लास्टिक, फर्नीचर और सिंथेटिक कपड़े जलने पर जहरीली गैस निकलती है। इनमें हाइड्रोजन क्लोराइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य खतरनाक रसायन होते हैं। बंद कमरे में ये गैस तेजी से फैलती हैं और ऑक्सीजन कम होने लगती है। इससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, चक्कर और बेहोशी हो सकती है। 3 मिनट तक ऑक्सीजन न मिलने पर दिमाग काम करना बंद कर देता है। 5 मिनट तक ऑक्सीजन की कमी जानलेवा हो सकती है। खूबसूरत ही नहीं, फायर-सेफ भी होना चाहिए इंटीरियर ऑफिस, कोचिंग सेंटर, मॉल और अन्य कॉमर्शियल बिल्डिंगों का इंटीरियर खूबसूरत ही नहीं, सुरक्षित भी होना चाहिए। नेशनल बिल्डिंग कोड ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार, दीवारों और फॉल्स सीलिंग में फायर-रेटेड मटेरियल का इस्तेमाल करना चाहिए। पर्दे, कालीन और फर्नीचर ऐसे हों, जो जल्दी आग न पकड़ें। एसी डक्ट में फायर डैम्पर और धुआं बाहर निकालने की व्यवस्था भी होनी चाहिए। स्मोक डिटेक्टर, स्प्रिंकलर और एग्जिट साइन हमेशा साफ हों। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… लखनऊ अग्निकांड- कपल की शादी होने वाली थी, एनिमेशन आर्टिस्ट की भूखे पेट मौत, जान गंवाने वाले युवाओं की कहानी लखनऊ अग्निकांड में मरने वाले 15 युवाओं में अनामिका और नीलेश भी थे। दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे। इनकी शादी होने वाली थी। अनामिका पश्चिम बंगाल में न्यू अलीपुर और नीलेश लखनऊ के रहने वाले थे। दोनों हेड हॉपर एनिमेशन कंपनी में जॉब करते थे। पढ़िए पूरी खबर…