उत्तर प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने बृहस्पतिवार के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के 19 जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रदेश के 43 अन्य जिलों में येलो अलर्ट के साथ बारिश की चेतावनी दी गई है। क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि मानसूनी गतिविधियां तेज होने से अगले तीन दिनों तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छी बारिश होने की संभावना है। इसके बाद 10 से 13 जुलाई के बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी व्यापक वर्षा का दौर शुरू हो सकता है। कई जिलों में झमाझम बारिश, तापमान में गिरावट
बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में हुई वर्षा के कारण अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई। सबसे अधिक 144.4 मिमी बारिश चित्रकूट में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा बदायूं में 94 मिमी, सिद्धार्थनगर में 72.8 मिमी, मेरठ में 71.9 मिमी, मुजफ्फरनगर में 68 मिमी और बांदा में 64 मिमी वर्षा दर्ज की गई। मौसम की तस्वीरें देखिए- इन 19 जिलों में ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग ने सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, संभल, जालौन, हमीरपुर, महोबा और झांसी में भारी बारिश, आकाशीय बिजली और 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 43 जिलों में येलो अलर्ट
बांदा, फतेहपुर, सोनभद्र, चंदौली, वाराणसी, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, रायबरेली, अंबेडकर नगर, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं, ललितपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। लोगों के लिए सलाह
मौसम विभाग ने खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने, जलभराव वाले क्षेत्रों से बचने और आकाशीय बिजली के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। प्रशासन को भी संभावित जलभराव और आपदा की स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। वाराणसी के मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया- बंगाल की खाड़ी से बना बारिश का सिस्टम अब मध्य प्रदेश के आसपास पहुंच गया है। इसका असर यूपी में भी पड़ रहा है। इसलिए प्रदेश में मानसून ने जोर पकड़ लिया है। अगले 5 दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। यूपी में जून से सितंबर के बीच 8% बारिश कम हो सकती है सीनियर साइंटिस्ट अतुल सिंह बताते हैं- इस साल यूपी समेत पूरे देश में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। आमतौर पर यूपी में जून से सितंबर के बीच करीब 820 से 840 मिलीमीटर बारिश होती है। लेकिन, इस साल 8% कम यानी लगभग 754 से 773 मिलीमीटर तक ही पानी बरसेगा। यूपी में पिछले 10 साल में मानसून कब आया, ग्राफिक्स में देखिए पिछले साल 10 से 15% ज्यादा बरसा था मानसून
मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 2025 के मानसून सीजन (जून से सितंबर) के दौरान औसतन 870 से 900 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। यह सामान्य मानसूनी औसत से करीब 10 से 15 प्रतिशत अधिक रही। यूपी में मानसून में कम बारिश की संभावना की वजह जानिए मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने बताया कि इस साल प्रशांत महासागर में ला नीना जैसी स्थितियां खत्म होकर अल नीनो की ओर बढ़ने के संकेत हैं, जो कम वर्षा का कारण बनेगी। यानी इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कमजोर रहने के संकेत हैं। साथ ही इस साल जनवरी-मार्च में उत्तरी गोलार्ध में बनी कम बर्फ भी मानसून को प्रभावित कर सकती है। मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने की वजह भी जान लीजिए
बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में हुई वर्षा के कारण अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई। सबसे अधिक 144.4 मिमी बारिश चित्रकूट में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा बदायूं में 94 मिमी, सिद्धार्थनगर में 72.8 मिमी, मेरठ में 71.9 मिमी, मुजफ्फरनगर में 68 मिमी और बांदा में 64 मिमी वर्षा दर्ज की गई। मौसम की तस्वीरें देखिए- इन 19 जिलों में ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग ने सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, संभल, जालौन, हमीरपुर, महोबा और झांसी में भारी बारिश, आकाशीय बिजली और 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 43 जिलों में येलो अलर्ट
बांदा, फतेहपुर, सोनभद्र, चंदौली, वाराणसी, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, रायबरेली, अंबेडकर नगर, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं, ललितपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। लोगों के लिए सलाह
मौसम विभाग ने खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने, जलभराव वाले क्षेत्रों से बचने और आकाशीय बिजली के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। प्रशासन को भी संभावित जलभराव और आपदा की स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। वाराणसी के मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया- बंगाल की खाड़ी से बना बारिश का सिस्टम अब मध्य प्रदेश के आसपास पहुंच गया है। इसका असर यूपी में भी पड़ रहा है। इसलिए प्रदेश में मानसून ने जोर पकड़ लिया है। अगले 5 दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। यूपी में जून से सितंबर के बीच 8% बारिश कम हो सकती है सीनियर साइंटिस्ट अतुल सिंह बताते हैं- इस साल यूपी समेत पूरे देश में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। आमतौर पर यूपी में जून से सितंबर के बीच करीब 820 से 840 मिलीमीटर बारिश होती है। लेकिन, इस साल 8% कम यानी लगभग 754 से 773 मिलीमीटर तक ही पानी बरसेगा। यूपी में पिछले 10 साल में मानसून कब आया, ग्राफिक्स में देखिए पिछले साल 10 से 15% ज्यादा बरसा था मानसून
मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 2025 के मानसून सीजन (जून से सितंबर) के दौरान औसतन 870 से 900 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। यह सामान्य मानसूनी औसत से करीब 10 से 15 प्रतिशत अधिक रही। यूपी में मानसून में कम बारिश की संभावना की वजह जानिए मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने बताया कि इस साल प्रशांत महासागर में ला नीना जैसी स्थितियां खत्म होकर अल नीनो की ओर बढ़ने के संकेत हैं, जो कम वर्षा का कारण बनेगी। यानी इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कमजोर रहने के संकेत हैं। साथ ही इस साल जनवरी-मार्च में उत्तरी गोलार्ध में बनी कम बर्फ भी मानसून को प्रभावित कर सकती है। मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने की वजह भी जान लीजिए