SGPGI के 30वें दीक्षांत समारोह की व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल को लेकर संस्थान के फैकल्टी फोरम ने असंतोष जताया है। फैकल्टी फोरम ने संस्थान के निदेशक डॉ.आरके धीमन को पत्र लिखकर दीक्षांत समारोह की गरिमा और पुरानी परंपराओं को बनाए रखने के लिए पांच अहम सुझाव दिए हैं। फोरम ने भविष्य के आयोजनों में अनुशासन और गरिमा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। फोरम का दावा है कि लेटर का मकसद किसी की आलोचना करना नहीं है, बल्कि संस्थान की साख को बचाना है। समारोह के बाद विद्यार्थियों को दी गई उपाधियां SGPGI फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष डॉ.मोहन गुर्जर और सचिव डॉ.विवेक सिंह सहित करीब 11 पदाधिकारियों और मेंबर्स की तरफ से जारी लेटर में कहा गया कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों, अभिभावकों और संस्थान के लिए गर्व का अवसर था, लेकिन कुछ व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत है। पत्र में कहा गया है कि समोराह में विद्यार्थियों को डिग्री मुख्य अतिथि के हाथों दी जानी चाहिए थी। जबकि मंगलवार को मुख्य कार्यक्रम खत्म होने के बाद निदेशक, डीन और रजिस्ट्रार ने विद्यार्थियों को उपाधियां दी। समारोह में विद्यार्थियों को प्राथमिकता मिले फैकल्टी फोरम ने पत्र में कहा है कि छुट्टियों की बजाय सत्र के दौरान दीक्षांत कराया जाए। करीब पांच घंटे तक चले समारोह में संस्थान के विद्यार्थियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी। स्कूली बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम डिग्री वितरण के बाद रखे जाएं। पहले की परंपरा के अनुसार शोभा यात्रा में शामिल फैकल्टी का परिचय भी विजिटर से कराया जाए। ऐसे शिक्षाविदों को मुख्य अतिथि बनाया जाए। जिनके विचार विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी हों। फोरम का कहना है कि उनका उद्देश्य आयोजन समिति की आलोचना करना नहीं है। ये सुझाव का मकसद भविष्य में दीक्षांत समारोह की गरिमा, परंपरा और संस्थान की प्रतिष्ठा और मजबूत हो सके। चीफ गेस्ट नहीं हुए थे शामिल SGPGI के 30वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को शामिल होना था। पर अचानक से लास्ट मोमेंट पर उनका दौरा कैंसिल हो गया था। ऐसे में बिना चीफ गेस्ट के राज्यपाल और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की मौजूदगी में दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ। दीक्षांत में चिकित्सा शिक्षा विभाग के राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह भी शामिल नहीं हुए थे।