भाजपा के अपने इंटर्नल सर्वे में 52-67 सीटों का नुकसान:यूपी में एंटी इनकम्बेंसी से बचने के लिए 35% विधायकों के टिकट काटने का सुझाव

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की ओर से कराए गए आंतरिक सर्वे में पार्टी को बड़ा झटका लगा है। रिपोर्ट बताती है कि मौजूदा हालात में अगर चुनाव हुए, तो भाजपा को बहुमत के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है। सीधे तौर पर 52 से 67 सीटों का नुकसान हो सकता है। भाजपा को 190 से 205 सीटें मिल रही हैं। बहुमत के लिए 202 सीटें चाहिएं। 2022 चुनाव में भाजपा को 255 सीटें मिली थीं। उपचुनाव में भाजपा के खाते में 2 और सीटें जुड़ गई थीं। अभी भाजपा के कुल 257 विधायक हैं। एजेंसी ने इस नुकसान से बचने के लिए सुझाव भी दिए हैं। इसके लिए पार्टी को अपने मौजूदा 35% विधायकों के टिकट काटने होंगे। पूर्वांचल में विधायकों को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले नेशन विद नमो एजेंसी से सर्वे कराया। यह एक रजिस्टर्ड संस्था है। भाजपा के लिए पॉलिटिकल सर्वे कराती है। इसमें विशेषज्ञों और टीम में शामिल रिसर्चर्स ने मार्च से जुलाई के दूसरे सप्ताह के तक सभी विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचकर निर्धारित सैंपल लिए। लोगों से कुछ सवाल पूछे- सर्वे में 2 तरह की नाराजगी नजर आई सर्वे रिपोर्ट में लोगों की नाराजगी को 2 तरह से बांटा गया है। पहली कैटेगरी में सरकार यानी केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से नाराजगी को रखा गया है। दूसरी कैटेगरी में विधायकों के लिए गुस्से को रखा गया। सर्वे के दौरान जनता ने सरकार से जुड़ी जिन नीतियों और घटनाओं पर असंतोष जताया, वो इस तरह हैं- विधायकों से नाराजगी इन वजहों से सामने आई- सर्वे रिपोर्ट में टीम ने 2 तरह के सुझाव दिए सुझाव 1- 30 से 35% विधायकों के टिकट काटने चाहिए
सर्वे में भाजपा के 30% से 35% विधायकों के खिलाफ नाराजगी सामने आई। लोगों ने सर्वे करने पहुंची टीम से साफ कहा कि अगर लोकसभा की तरह विधानसभा चुनाव में भी पुराने चेहरों को दोबारा मौका दिया गया, तो हम दूसरे विकल्प तलाशेंगे। सर्वे में सुझाव दिया गया है कि इन नतीजों को पलटने के लिए भाजपा को अपने मौजूदा 257 विधायकों में 30 से 35% के टिकट काटने होंगे। इससे लोगों की सत्ता पक्ष के विधायकों के लिए नाराजगी कम होगी। भाजपा बहुमत के आंकड़े को पार कर सकती है। फिलहाल पार्टी 190 से 205 सीटों पर मजबूत है। लेकिन, उम्मीदवार के सही चयन, जातीय समीकरण साधने और चुनाव से ठीक पहले बनने वाले मुद्दों के आधार पर इस अनुमान में 10% का उतार-चढ़ाव हो सकता है। 2022 में भी बदले गए थे चेहरे 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने 2 एजेंसियों से सर्वे कराया था। उसी रिपोर्ट के आधार पर भाजपा ने 120 से ज्यादा विधायकों के टिकट काट दिए थे। 403 में से 165 सीटों पर नए उम्मीदवार उतारे थे। इसके बावजूद भाजपा की सीटें 2017 के मुकाबले 312 से घटकर 255 रह गई थीं। इससे भाजपा को 57 सीटों का नुकसान हुआ था। सुझाव 2- राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ने में फायदा सर्वे टीम का मानना है कि अगर चुनाव धर्म, राष्ट्रवाद और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा, तो भाजपा को फायदा होगा। लेकिन, अगर सपा 2024 लोकसभा चुनाव की तरह जातीय समीकरण और PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति को बड़ा मुद्दा बनाने में सफल रही, तो भाजपा को नुकसान हो सकता है। नई पीढ़ी में यादवों के लिए नाराजगी कम हुई सर्वे टीम में शामिल एक सदस्य ने बताया कि यादवों को सपा का पारंपरिक वोटर माना जाता रहा है। सपा शासन में कई मामलों में यादवों की सुनवाई जल्दी हो जाती थी। ऐसे में गैर-यादव लोगों में उनके लिए नाराजगी देखी जाती थी। लेकिन, पिछले 5 साल में यह नाराजगी कम हुई है। खासकर जेन-जी (नई पीढ़ी) यादव बनाम गैर-यादव वाले कॉन्सेप्ट को सही नहीं मान रही। योगी की टीम भी करा रही अलग सर्वे भाजपा संगठन का सर्वे पूरा हो चुका है। लेकिन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक अलग चुनावी सर्वे करवा रहे हैं। निजी एजेंसी गांव-गांव जाकर लोगों से सरकार, विधायकों और मुख्यमंत्री की छवि पर फीडबैक जुटा रही है। ————————– यह खबर भी पढे़ं – यूपी के 122 विधायक दलबदलू, 2027 तक क्या होगा? मंत्री-सांसद भी पीछे नहीं, भाजपा के 30% MLA दूसरे दलों से आए यूपी की सियासत में पार्टी बदलने का शोर फिर तेज हो गया है। 2027 के विधानसभा चुनाव के पहले कौन-सा नेता किस पार्टी में होगा, कहना बहुत मुश्किल है। यूं तो मौकापरस्ती देश के हर राज्य में है, लेकिन यूपी के पॉलिटिकल लीडर्स इसमें सबसे आगे हैं। कुछ नेता तो ऐसे हैं, जिन्होंने मौका पाकर हर पार्टी जॉइन की। पढ़िए पूरी खबर…