‘प्रोफेसर पद से रिटायर होने के बाद जब मैंने यूनिवर्सिटी का काम देखना शुरू किया, तब रातों-रात मेरे ऊपर 60-70 मुकदमे लगा दिए। मैं चोर भी हो गई और डकैत भी। अपराधियों के जो भी काम होते हैं, सब मुझसे जोड़ दिए गए।’ ये कहते हुए सपा नेता आजम खान की पत्नी तंजीम फातिमा भावुक हो गईं। उन्होंने कहा- रहा सवाल नक्शा पास नहीं होने का, तो DM-SSP के घरों के नक्शे भी पास नहीं होते हैं। फिर जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी बनने से पहले बनीं थी। इसलिए कोई नियम नहीं तोड़े गए। क्या आजम चुनाव लड़ेंगे? इस पर तंजीम कहती हैं- मैंने कभी आजम साहब को राजनीति छोड़ने की सलाह नहीं दी। मैं बता दूं कि राजनीति से ज्यादा बड़ी उपलब्धि उनके लिए जौहर यूनिवर्सिटी है। ‘दैनिक भास्कर’ से एक्सक्लूसिव बातचीत में तंजीम फातिमा ने उन सवालों का जवाब भी दिया, जिसमें कहा जाता है कि अखिलेश यादव आजम खान की मदद नहीं कर रहे। पढ़िए पूरी बातचीत… जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने का नोटिस मिला है, क्या कहेंगी? तंजीम फातिमा : RDA (रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी) 2005 में बना था। उस समय सींगनखेड़ा गांव, जहां यूनिवर्सिटी बनी है, RDA के दायरे में नहीं आता था। 2015 में नया नोटिफिकेशन जारी हुआ और सींगनखेड़ा को RDA के दायरे में शामिल किया गया। जब यूनिवर्सिटी बनी, उस समय RDA के दायरे में यह इलाका था ही नहीं, तो वहां का नक्शा अथॉरिटी से कैसे पास कराया जाता? कोर्ट का फैसला आपके खिलाफ आए, तो क्या मानेंगी कि कहां कमी रह गई? तंजीम फातिमा : ये सिर्फ राजनीतिक मुद्दा है। सींगनखेड़ा गांव में यूनिवर्सिटी के अलावा सैकड़ों लोग रहते हैं। किसी के घर का नक्शा पास नहीं है। रामपुर या दूसरे शहरों में देख लीजिए, यहां तक कि DM और SP के सरकारी आवासों के नक्शे भी नहीं हैं। अगर प्रशासन कार्रवाई करती है तो माना जाएगा कि यह सिर्फ एक शिक्षण संस्था को खत्म करने के लिए हुआ है। आपके परिवार पर दर्जनों केस दर्ज हुए, इसे किस नजरिए से देखती हैं? तंजीम फातिमा : यह पूरी तरह राजनीतिक दुश्मनी है। राजनीति में आने से पहले मैं डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर थी। रिटायरमेंट तक मेरी ईमानदारी पर कोई सवाल नहीं उठा। लेकिन, रिटायर होने के बाद यूनिवर्सिटी का काम संभाला तो मेरे खिलाफ 60-70 मुकदमे दर्ज हो गए। अचानक मैं चोर और डकैत हो गई। आरोप लगते हैं कि अखिलेश यादव ने आजम खान का पूरा साथ नहीं दिया? तंजीम फातिमा : नहीं, यह गलत है। अखिलेश यादव और पूरी सपा हमारे साथ खड़ी रही है। पार्टी ने हमें हर तरह से पूरा सहयोग दिया है। शिवपाल सिंह खुद जेल में आजम साहब से मिलने गए और प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। इस यूनिवर्सिटी को बनाने में मुलायम सिंह जी का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है। प्रशासन सुरक्षा के लिए यूनिवर्सिटी कैंपस में पुलिस कैंप जरूरी बताए, तो क्या करेंगी? तंजीम फातिमा : करीब दो-तीन साल पहले पुलिस बिना किसी परमिशन के कैंपस में घुस गई थी। न वाइस चांसलर से अनुमति ली और न किसी और से। पुलिस ने हमारे कमरों और रिकॉर्ड्स को उलट-पलट दिया और जो सामान चाहिए था, उसे ले गई। उस समय हम हाईकोर्ट गए थे। कोर्ट ने आदेश दिया था कि बिना अनुमति के पुलिस कैंपस में दाखिल नहीं हो सकती। अगर हर यूनिवर्सिटी के कैंपस में पुलिस कैंप होता है, तो हमें कोई ऐतराज नहीं है। यूनिवर्सिटी बनाने में कई अड़चनें आईं, आम लोगों का कितना सहयोग मिला? तंजीम फातिमा : हां, ये परीक्षा इसलिए रही, क्योंकि कुछ लोगों ने लगातार परेशानियां खड़ी कीं। लेकिन यूनिवर्सिटी बनाने में आम लोगों का बहुत सहयोग मिला। रामपुर के बच्चों और स्टूडेंट्स ने यहां खुद काम किया। कड़ी धूप में सिर पर ईंट-पत्थर, सीमेंट और मिट्टी उठाकर यूनिवर्सिटी बनाने में मदद की। यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई से क्या बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है? तंजीम फातिमा : हां, पढ़ाई तो निश्चित तौर पर प्रभावित हो रही है। रामपुर में कई महंगे स्कूल हैं, जहां फीस बहुत ज्यादा है। लेकिन समाज के गरीब तबके के लोग इतनी फीस नहीं दे सकते। आजम साहब ने रामपुर की गरीबी, अशिक्षा और लोगों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए ही रामपुर पब्लिक स्कूल खोले थे। अभी एक आरपीएस स्कूल चल रहा है, जिसकी बिल्डिंग पर स्टे है और वहां कुछ बच्चे पढ़ रहे हैं। वहां की फीस और दूसरे स्कूलों की फीस की तुलना की जा सकती है। इससे पता चलेगा कि गरीब बच्चों के लिए ये स्कूल कितने मददगार थे। आजम खान की बड़ी उपलब्धि क्या है- राजनीति या जौहर यूनिवर्सिटी? तंजीम फातिमा : निश्चित तौर पर जौहर यूनिवर्सिटी उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। रामपुर शिक्षा के मामले में बहुत पिछड़ा जिला था। आजम साहब ने 10 बार विधायक और सांसद रहते हुए विकास के साथ शिक्षा को भी प्राथमिकता दी। उन्होंने गरीब और मजदूर परिवारों के अनाथ बच्चों के लिए रामपुर पब्लिक स्कूल खोले, जहां सिर्फ ₹20 महीने में CBSE की पढ़ाई होती थी। सरकार ने उन स्कूलों को खाली करवा दिया, जिससे अनाथ बच्चों को नुकसान हुआ। आजम खान आगे चुनाव लड़ेंगे या राजनीति से दूरी बना लेंगे? तंजीम फातिमा : आजम साहब चुनाव लड़ेंगे या नहीं, यह वक्त बताएगा। फिलहाल हमारी कोशिश उन्हें जेल से बाहर लाने की है। मैंने उन्हें राजनीति छोड़ने की सलाह कभी नहीं दी। हालांकि, 20-25 साल पहले की राजनीति ऐसी नहीं थी। तब ईद-बकरीद पर विरोधी दलों के नेता और अधिकारी एक-दूसरे के घर आते-जाते थे। अब राजनीति से वह दौर खत्म होता जा रहा है। यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों के ध्वस्तीकरण पर स्टे बरकरार जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों के गिराए जाने आदेश के खिलाफ 13 अगस्त को मुरादाबाद की कमिश्नर कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह की अदालत ने रामपुर डीएम के ध्वस्तीकरण आदेश पर 27 जुलाई को लगाई गई अंतरिम रोक को बरकरार रखा है। ————————- ये भी पढ़ें- बृजभूषण भावुक होकर बोले-रेपिस्ट कहा, अच्छा होता गोली मार देते:लालच देकर जिन बच्चों से केस कराया, उन्होंने ही पोल खोली ‘दैनिक भास्कर’ से एक्सक्लूसिव बातचीत में बृजभूषण सिंह ने भविष्य की सियासी रणनीति, महिला पहलवानों के आरोपों और कोर्ट में गवाही पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा- ऐसे आरोपों से लड़ना मुश्किल होता है, मैं टूट गया था। जिन बच्चों को लालच देकर केस के लिए तैयार किया। उन्होंने ही बाद में पोल खोल दी। पढ़िए बृजभूषण सिंह की पूरी बातचीत…