रक्षाबंधन पर आई थीं बहनें, शव पर बांधनी पड़ी राखी:वाराणसी में बोलीं- भाई हर साल गिफ्ट देता था, अबकी ऐसा सरप्राइज मिला जो बर्दाश्त नहीं

रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए वाराणसी पहुंचीं 3 बहनों ने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें ऐसी विदाई देनी पड़ेगी। बहनें राखी खरीद चुकी थीं। लेकिन, सरकारी वाटर कूलर से करंट लगने से भाई की मौत हो गई। रक्षाबंधन से तीन दिन पहले बहनों ने भाई के शव पर तिलक लगाकर राखी बांधी और रो-रोकर अंतिम विदाई दी। दैनिक भास्कर ने भाई को खोने वाली बहनों का दर्द जाना। उन्होंने कहा- भाई हर साल कोई न कोई गिफ्ट देकर सरप्राइज करता था। अबकी ऐसा सरप्राइज दिया जो बर्दाश्त नहीं। हमलोग जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगे। घर में जिस त्योहार पर हंसी-खुशी होनी थी, वहां अब सिर्फ रोने की आवाजें हैं। मेरा भाई बॉडीबिल्डर रह चुका। गोल्ड मेडल जीत चुका था। अभी जिम चला रहा था। अब परिवार को कौन संभालेगा? विधायक नीलकंठ तिवारी ने लगवाया था वाटर कूलर मामला चेतगंज के काली महल का है। यहां के रहने वाले त्रिलोकी मोदनवाल उर्फ मंटू (50) की करंट से मौत हुई है। वह शहर के रामकटोरा पर ‘द फिटनेस किंग जिम’ चलाते थे। त्रिलोकी 4 भाई और 3 बहनों में तीसरे नंबर पर थे। तीनों बहनों की शादी हो चुकी है। भाइयों के परिवार में बंटवारा हो चुका है। त्रिलोकी के दो बेटे और दो बेटी हैं। बड़ी बेटी प्रतिभा की शादी हो चुकी है। घर में पत्नी राजकुमारी, 25 साल का LLB पास बेटा, 17 साल का छोटा बेटा और 15 साल की बेटी हैं। बड़े बेटे की नवंबर में शादी तय है। त्रिलोकी के भाई विनोद ने बताया कि मंगलवार को भारी बारिश की वजह से भैया ने जिम बंद रखा। सुबह घर पर ही थे। इसी बीच उठे और रोज की तरह तिराहे पर वाटर कूलर की मोटर चालू करने चले गए, ताकि उसमें पानी भर जाए और दिनभर आने-जाने वाले लोग ठंडा पानी पी सकें। इसी बीच करंट से उनकी मौत हो गई। शहर दक्षिणी विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी की विधायक निधि से ये वाटर कूलर लगवाया गया था। बहन बोली- हर साल भैया बोलते कि टीका सीधा लगाओ त्रिलोकी की छोटी बहन निवेदिता ने कहा- मैं रक्षाबंधन के लिए घर आई थी। भाई के लिए उनकी पसंद की राखी खरीद ली थी। मिठाई भी उनकी पसंद की मंगाती। भैया को राखी का बहुत शौक था। हर साल वह राखी बंधवाने को लेकर बहुत उत्साहित रहते थे। बहन ने रोते हुए कहा- भाई राखी और तिलक को लेकर भी हमसे मजाक करते थे। अगर तिलक टेढ़ा लग जाता तो कहते थे कि सीधा टीका लगाओ और राखी भी ठीक से बांधो। हम हर साल उनकी पसंद की मिठाई और राखी लेकर आते थे। इस बार भी हमने पहले से राखी खरीद ली थी। लेकिन, ये नहीं पता था कि इस तरह राखी बांधनी पड़ेगी। भाई ने इस बार धोखा दे दिया, ये बर्दाश्त नहीं त्रिलोकी की दूसरी बहन सोनी ने रोते हुए कहा- भाई हर रक्षाबंधन पर बहनों को कुछ न कुछ नया गिफ्ट देते थे। राखी उनके लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि बहनों के साथ खुशियां बांटने का दिन होता था। अगर कोई बहन राखी बांधने नहीं आती थी तो भाई उससे शिकायत करते थे। सोनी ने कहा कि इस बार भी उम्मीद थी कि हर साल की तरह भाई राखी बंधवाएंगे, तिलक लगवाएंगे और बहनों को कोई सरप्राइज देंगे। लेकिन, इस बार भाई ने धोखा दे दिया। सरप्राइज ऐसा निकला, जिसे परिवार बर्दाश्त नहीं कर पा रहा। ये गिफ्ट बहुत महंगा पड़ गया। बेटी बोली- पापा ने कहा था कि घर आऊंगा तो लड्डू बनाएंगे त्रिलोकी की छोटी बेटी सोनम ने कहा- मौसी को 25 दिन पहले बेटा हुआ, वह इस बार बेटे को लेकर मेरे पापा को राखी बांधने आई थीं। मौसी के लिए सोठौरा लड्‌डू का पूरा सामान लाकर रखा था। पापा बोलकर गए थे कि शाम को आकर लड्डू बनाएंगे, पर पापा नहीं आए। सोनम ने कहा कि मां की तबीयत अक्सर खराब रहती है, इसलिए पापा घर का भी ध्यान रखते थे। खाना बनाने से लेकर दूसरे कामों में मदद करते थे। अब उनके जाने के बाद घर कौन संभालेगा। बेटी बोली- नवंबर में बड़े भाई की शादी है, पापा क्यों छोड़ गए बेटी सोनम ने कहा- नवंबर में मेरे बड़े भाई की शादी तय है। पिता ने शादी की तैयारी भी शुरू कर दी थी। परिवार में शादी को लेकर बातचीत चल रही थी। बेटी ने रोते हुए कहा- पापा भाई की शादी कराए बिना ही छोड़कर चले गए। त्रिलोकी मिस्टर नॉर्थ इंडिया रह चुके थे भाई गौतम ने बताया कि त्रिलोकी ने बॉडीबिल्डिंग में कई उपलब्धियां हासिल की थीं। वह मिस्टर नॉर्थ इंडिया रह चुके थे और गोल्ड मेडल भी जीत चुके थे। उम्र बढ़ने के बाद उन्होंने प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना बंद कर दिया था। बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिताओं में जज के रूप में बुलाए जाते थे। खेल के क्षेत्र में इतनी उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद परिवार को अब सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं। नेताओं की ओर से आर्थिक मदद और चेक देने की बात कही गई, लेकिन परिवार सिर्फ चेक नहीं चाहता। उनकी मांग है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। ————————– ये खबर भी पढ़िए- काशी में घरों के दरवाजों पर जलाए जा रहे शव: 84 घाट डूबे, 5 हजार दुकानें बंद; 15 दिन में 3.75 करोड़ का नुकसान काशी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से 84 घाट डूब गए हैं। महाश्मशान मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट भी डूबे हैं। घाट किनारे 100 से ज्यादा मंदिर आधे से ज्यादा डूब चुके हैं। दैनिक भास्कर ने हालात की पड़ताल की, तो 2 बड़ी परेशानी सामने आईं। पढ़ें पूरी खबर…