बुलंदशहर में कान्हा के जन्मोत्सव की धूम:बाजारों में रौनक, मंदिरों में भव्य सजावट और श्रद्धालुओं में उत्साह

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि नजदीक आते ही बुलंदशहर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में डूब गया है। शहर के मुख्य बाजारों से लेकर मंदिरों तक ‘जय श्री कृष्णा’ और ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे गूंज रहे हैं। कान्हा जी के स्वागत के लिए श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह दिख रहा है। जन्माष्टमी के लिए बाजारों में लड्डू गोपाल के स्वागत की खूब रौनक है। भक्त अपने भगवान के लिए रेशमी पोशाक, रत्नों से जड़े मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, झूले, सिंहासन, नकली फूल और सजावटी सामान खरीद रहे हैं। इस साल कान्हा जी के नक्काशी वाले झूले और उनका सुंदर श्रृंगार लोगों को बहुत पसंद आ रहा है। पिछले सालों के मुकाबले इस बार बिक्री में काफी उछाल आया है। बाजार में 500 रुपये से लेकर 30 हजार रुपये तक की हाथ से बनी श्रृंगार पोशाकें मिल रही हैं, जो लोगों का खास आकर्षण हैं। बच्चों के लिए भी नए और सुंदर कपड़े खूब पसंद किए जा रहे हैं। झूलों की कीमत 500 रुपये से 10 हजार रुपये तक है। माखन-मिश्री और पंचामृत का प्रसाद बनाने की सामग्री खरीदने के लिए भी दुकानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी है। शहर के प्रमुख राधा-कृष्ण मंदिर को सुंदर और खास तरह से सजाया जा रहा है। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे खुशबूदार देशी-विदेशी फूलों, जगमगाती लाइटों और खास बिजली की सजावट से भव्य बनाया जा रहा है। इस बार कान्हा की बचपन की लीलाओं जैसे माखन चोरी, कालिया नाग दमन और गोवर्धन धारण पर आधारित जीवंत और चलती-फिरती झांकियां भक्तों को मोहित करेंगी। आधी रात 12 बजे शंख और घंटियों की आवाज के बीच कान्हा जी का पंचामृत से जन्माभिषेक किया जाएगा। इसके बाद 56 भोग चढ़ाकर महाआरती होगी। मंदिर के दरवाजे सुबह 5 बजे से भक्तों के लिए खुल जाएंगे। ये आधी रात को जन्मोत्सव के बाद भी खुले रहेंगे। इस खास मौके पर मंदिर में हजारों भक्तों के आने की उम्मीद है। भक्तों के आने-जाने के लिए रास्ते भी बनाए गए हैं।