फर्रुखाबाद में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के असर को कम करने के लिए अब वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों पर काम करने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बुधवार देर शाम फतेहगढ़ कलेक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों और विशेषज्ञों की बैठक हुई। इसमें गंगा के बहाव, कटान और नदी के कमजोर किनारों की स्थिति पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने नदी की मौजूदा स्थिति का वैज्ञानिक अध्ययन कराने के साथ ड्रेजिंग और नदी के रास्ते को व्यवस्थित करने जैसे विकल्पों पर सुझाव दिए। बैठक में आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर राजीव सिन्हा ने गंगा के मौजूदा स्वरूप और बाढ़ के दौरान नदी के व्यवहार की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नदी के घुमाव, टापुओं और मुख्य धारा की स्थिति को समझे बिना बाढ़ और कटान की समस्या का स्थायी समाधान तैयार करना मुश्किल होगा। इसके लिए विस्तृत तकनीकी सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन कराने की जरूरत बताई गई। प्रोफेसर राजीव सिन्हा ने बैठक में गंगा नदी के प्रकार, उसके बहाव, कटान की प्रकृति और किनारों की कमजोरी के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि बाढ़ के समय नदी का व्यवहार सामान्य दिनों से अलग होता है। ऐसे में नदी की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए उसके घुमाव, टापुओं और मुख्य धारा का वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को सुझाव दिया कि तकनीकी सर्वे के जरिए यह पता लगाया जाए कि नदी किस स्थान पर अधिक कटान कर रही है और किन हिस्सों में बहाव प्रभावित हो रहा है। इस अध्ययन के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जा सकती है। ड्रेजिंग से नदी का रास्ता ठीक करने पर भी मंथन बैठक में गंगा में ड्रेजिंग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने नदी की धारा को व्यवस्थित करने और बहाव को बेहतर तरीके से चलाने के लिए ड्रेजिंग समेत कई तकनीकी विकल्प बताए। इसका उद्देश्य नदी के प्रभावित हिस्सों में पानी के बहाव को सुचारु करना और बाढ़ के प्रभाव को कम करना है। कानपुर से आई इंजीनियरों की टीम ने भी ड्रेजिंग और नदी के रास्ते को ठीक करने से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। टीम ने बताया कि नदी की स्थिति का अध्ययन करने के बाद ही यह तय किया जा सकेगा कि किन स्थानों पर किस तरह के तकनीकी उपाय कारगर होंगे। बाढ़-कटान का स्थायी हल तलाशने पर जोर प्रोफेसर राजीव सिन्हा ने कहा कि केवल तत्काल राहत के उपायों के बजाय नदी की संरचना और बहाव को समझकर दीर्घकालिक योजना बनाना जरूरी है। इसके लिए नदी के विभिन्न हिस्सों का तकनीकी सर्वे कराया जाना चाहिए। इससे बाढ़ के दौरान पानी के फैलाव और कटान वाले क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी। बैठक में अधिकारियों ने विशेषज्ञों के सुझावों पर आगे की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा की। नदी के बहाव को नियंत्रित और व्यवस्थित करने के लिए संभावित तकनीकी विकल्पों का परीक्षण करने पर सहमति बनी, ताकि भविष्य में बाढ़ और कटान से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
डीएम ने संबंधित विभागों को सर्वे कराने के दिए निर्देश जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने बैठक में मिले तकनीकी सुझावों पर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की। उन्होंने संबंधित विभागों को जरूरी तकनीकी अध्ययन और सर्वे कराने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि गंगा के बहाव, कटान और बाढ़ की समस्या का वैज्ञानिक तरीके से समाधान निकाला जाए और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अरुण कुमार सिंह, सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता केपी पाण्डेय समेत अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। अब तकनीकी अध्ययन और सर्वे के आधार पर गंगा के प्रभावित क्षेत्रों के लिए आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
डीएम ने संबंधित विभागों को सर्वे कराने के दिए निर्देश जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने बैठक में मिले तकनीकी सुझावों पर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की। उन्होंने संबंधित विभागों को जरूरी तकनीकी अध्ययन और सर्वे कराने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि गंगा के बहाव, कटान और बाढ़ की समस्या का वैज्ञानिक तरीके से समाधान निकाला जाए और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अरुण कुमार सिंह, सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता केपी पाण्डेय समेत अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। अब तकनीकी अध्ययन और सर्वे के आधार पर गंगा के प्रभावित क्षेत्रों के लिए आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।