नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली डॉ. रोहिणी घावरी स्विट्जरलैंड से शुक्रवार को भारत लौट आईं। दिल्ली एयरपोर्ट पर श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू, हिंदूवादी नेता दक्ष चौधरी और अक्कू पंडित जैसे तमाम लोगों ने स्वागत किया। रोहिणी घावरी ने चंद्रशेखर का नाम लिए बगैर कहा- बाबा साहेब अंबेडकर को मानने वाला व्यक्ति न्यायप्रिय होता है। शोषणकारी नहीं होता है। मेरे सम्मान की लड़ाई क्यों नहीं लड़ी? मेरे साथ अन्याय क्यों किया? क्यों, मैं इस समाज की बेटी नहीं हूं? मैं दलित समाज की बेटी नहीं हूं? रोहिणी ने कहा- अलग-अलग राज्यों में जाऊंगी। बैठकें करूंगी। डरकर घर बैठने वालों में से नहीं हूं। और न तेरी तरह सिक्योरिटी की भीख मांगूंगी, न बिकूंगी। मुझे अगर कुछ भी हुआ, तो इसका जिम्मेदार तू और तेरी भीम आर्मी होगी। रोहिणी ने स्विट्जरलैंड से निकलते वक्त अपनी एक फोटो X पर पोस्ट की थी। जिसमें लिखा- मुझे डॉक्टर की उपाधि से लेकर संयुक्त राष्ट्र में भाषण देने तक की पहचान देने वाले स्विट्जरलैंड को अलविदा। इस देश में बिताए ये 6 साल हमेशा याद आएंगे। 6 साल पहले 3 बैग लेकर गई थी, अब 2 बैग और ढेर सारी यादें लेकर वापस आ रही हूं।
घावरी बोलीं- हमें बेवजह के मुद्दों पर न लड़ना है, न झगड़ना रोहिणी घावरी ने कहा- मेरी विचारधारा राष्ट्रवादी और मानवतावादी है। ये दोनों विचारधाराएं मुझे अपने पूरे देश के लोगों से जोड़ती हैं। मैं मानती हूँ कि पूरा देश मेरा परिवार है। परिवार के लोगों की समस्याओं का समाधान बैठकर किया जाता है, न कि आपस में लड़कर। बाउंड्रीज सेट करके हम सिर्फ लड़ सकते हैं। राजनीतिक पार्टियां हमें लड़ा सकती हैं, लेकिन हमें अपना भाईचारा बनाए रखना है और ब्रदरहुड डेवलप करना है। हमारी नई पीढ़ी, यानी 1990 से लेकर 2026 तक की पीढ़ी, क्या चाहती है, हमें उसकी बात सुननी पड़ेगी। मिलेनियल्स और जेन-जी की अपनी उम्मीदें हैं। हमें अपने देश में एजुकेशन, एम्पावरमेंट और इक्वालिटी चाहिए। हमें बेवजह के मुद्दों पर न लड़ना है, न झगड़ना है। हमारे लिए सबसे जरूरी चीज क्या है, हमें उस पर ध्यान देना है। मैं अब भारत वापस आ गई हूं और अब यहीं रहूंगी। कोशिश करूंगी कि ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुड़ूं, उनकी समस्याओं को समझूं और मिलकर उनका समाधान निकालने की दिशा में काम करूं।
दक्ष चौधरी बोले- 36 बिरादरी से कहूंगा इकट्ठा होकर साथ दें 14 और 15 सितंबर को लखनऊ आएंगी रोहिणी रोहिणी ने दिल्ली, गुड़गांव, मेरठ, लखनऊ और इंदौर में जाने का प्रोग्राम जारी किया है। 13 सितंबर को मेरठ और 14-15 सितंबर को लखनऊ में रहेंगी। उन्होंने कहा- यह देश मेरा है। बेफिक्र होकर अलग-अलग राज्यों में जाऊंगी, अपने परिवारों से मिलूंगी और सामाजिक बैठकें करूंगी। रोक के बता दे। जहां मर्जी हो, वहीं अटैक करा देना। डरकर घर बैठने वालों में से नहीं हूं। और न तेरी तरह सिक्योरिटी की भीख मांगूंगी, न बिकूंगी। मुझे अगर कुछ भी हुआ, तो इसका जिम्मेदार तू और तेरी भीम आर्मी होगी।
जानिए कौन हैं रोहिणी घावरी, चंद्रशेखर से क्या है विवाद? डॉ. रोहिणी घावरी इंदौर की रहने वाली हैं। मध्य प्रदेश सरकार की फेलोशिप स्कीम के तहत उन्हें स्विट्जरलैंड में पढ़ाई का मौका मिला। वहीं से उन्होंने PhD की और ‘जनपॉवर’ नाम से NGO बनाया। स्विट्जरलैंड में पढ़ाई के दौरान ही रोहिणी की मुलाकात भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर से हुई। रोहिणी के मुताबिक, चंद्रशेखर ने अपने शादीशुदा होने की बात भी छिपाई और शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण किया। जब वे नगीना से सांसद बने तो उन्होंने दूरी बनानी शुरू कर दी। रोहिणी ने महिला आयोग में चंद्रशेखर के खिलाफ शिकायत भी दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी ओर, चंद्रशेखर और उनके समर्थकों की ओर से रोहिणी के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। रोहिणी पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर चंद्रशेखर के खिलाफ अभियान चला रही हैं। **************** यह खबर भी पढ़िए:- यूपी में कांग्रेस का टिकट चाहिए तो 20 लाख दिखाओ:2027 चुनाव में पार्टी फंड बंद; जीतने वाले को 40 लाख ‘इनाम’ 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपने प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने के लिए पार्टी फंड नहीं देगी। टिकट का दावेदार चुनाव लड़ने में आर्थिक रूप से कितना सक्षम है, अब यह भी देखा जाएगा। टिकट की दावेदारी करने वाले व्यक्ति को अपने खाते में करीब 20 लाख रुपए दिखाने होंगे। पार्टी का मानना है कि जो व्यक्ति अपने चुनाव अभियान की शुरुआत में खुद खर्च करने की स्थिति में नहीं होगा, उसके लिए मजबूती से चुनाव लड़ना भी मुश्किल हो सकता है। पढ़ें पूरी खबर…
घावरी बोलीं- हमें बेवजह के मुद्दों पर न लड़ना है, न झगड़ना रोहिणी घावरी ने कहा- मेरी विचारधारा राष्ट्रवादी और मानवतावादी है। ये दोनों विचारधाराएं मुझे अपने पूरे देश के लोगों से जोड़ती हैं। मैं मानती हूँ कि पूरा देश मेरा परिवार है। परिवार के लोगों की समस्याओं का समाधान बैठकर किया जाता है, न कि आपस में लड़कर। बाउंड्रीज सेट करके हम सिर्फ लड़ सकते हैं। राजनीतिक पार्टियां हमें लड़ा सकती हैं, लेकिन हमें अपना भाईचारा बनाए रखना है और ब्रदरहुड डेवलप करना है। हमारी नई पीढ़ी, यानी 1990 से लेकर 2026 तक की पीढ़ी, क्या चाहती है, हमें उसकी बात सुननी पड़ेगी। मिलेनियल्स और जेन-जी की अपनी उम्मीदें हैं। हमें अपने देश में एजुकेशन, एम्पावरमेंट और इक्वालिटी चाहिए। हमें बेवजह के मुद्दों पर न लड़ना है, न झगड़ना है। हमारे लिए सबसे जरूरी चीज क्या है, हमें उस पर ध्यान देना है। मैं अब भारत वापस आ गई हूं और अब यहीं रहूंगी। कोशिश करूंगी कि ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुड़ूं, उनकी समस्याओं को समझूं और मिलकर उनका समाधान निकालने की दिशा में काम करूं।
दक्ष चौधरी बोले- 36 बिरादरी से कहूंगा इकट्ठा होकर साथ दें 14 और 15 सितंबर को लखनऊ आएंगी रोहिणी रोहिणी ने दिल्ली, गुड़गांव, मेरठ, लखनऊ और इंदौर में जाने का प्रोग्राम जारी किया है। 13 सितंबर को मेरठ और 14-15 सितंबर को लखनऊ में रहेंगी। उन्होंने कहा- यह देश मेरा है। बेफिक्र होकर अलग-अलग राज्यों में जाऊंगी, अपने परिवारों से मिलूंगी और सामाजिक बैठकें करूंगी। रोक के बता दे। जहां मर्जी हो, वहीं अटैक करा देना। डरकर घर बैठने वालों में से नहीं हूं। और न तेरी तरह सिक्योरिटी की भीख मांगूंगी, न बिकूंगी। मुझे अगर कुछ भी हुआ, तो इसका जिम्मेदार तू और तेरी भीम आर्मी होगी।
जानिए कौन हैं रोहिणी घावरी, चंद्रशेखर से क्या है विवाद? डॉ. रोहिणी घावरी इंदौर की रहने वाली हैं। मध्य प्रदेश सरकार की फेलोशिप स्कीम के तहत उन्हें स्विट्जरलैंड में पढ़ाई का मौका मिला। वहीं से उन्होंने PhD की और ‘जनपॉवर’ नाम से NGO बनाया। स्विट्जरलैंड में पढ़ाई के दौरान ही रोहिणी की मुलाकात भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर से हुई। रोहिणी के मुताबिक, चंद्रशेखर ने अपने शादीशुदा होने की बात भी छिपाई और शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण किया। जब वे नगीना से सांसद बने तो उन्होंने दूरी बनानी शुरू कर दी। रोहिणी ने महिला आयोग में चंद्रशेखर के खिलाफ शिकायत भी दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी ओर, चंद्रशेखर और उनके समर्थकों की ओर से रोहिणी के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। रोहिणी पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर चंद्रशेखर के खिलाफ अभियान चला रही हैं। **************** यह खबर भी पढ़िए:- यूपी में कांग्रेस का टिकट चाहिए तो 20 लाख दिखाओ:2027 चुनाव में पार्टी फंड बंद; जीतने वाले को 40 लाख ‘इनाम’ 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपने प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने के लिए पार्टी फंड नहीं देगी। टिकट का दावेदार चुनाव लड़ने में आर्थिक रूप से कितना सक्षम है, अब यह भी देखा जाएगा। टिकट की दावेदारी करने वाले व्यक्ति को अपने खाते में करीब 20 लाख रुपए दिखाने होंगे। पार्टी का मानना है कि जो व्यक्ति अपने चुनाव अभियान की शुरुआत में खुद खर्च करने की स्थिति में नहीं होगा, उसके लिए मजबूती से चुनाव लड़ना भी मुश्किल हो सकता है। पढ़ें पूरी खबर…