यूपी में सरकारी दवा और उपकरण सप्लाई में करीब ₹100 करोड़ के घोटाले की जांच शुरू हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने यूपी मेडिकल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPMSCL) से 7 साल के रिकॉर्ड मांगे हैं। यह मामला कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि दस्तावेज पर ‘अति आवश्यक’ लिखा गया है। सप्लाइज कॉर्पोरेशन ने रिकॉर्ड नहीं दिया, बल्कि प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) से इसके लिए अनुमति मांगी है। ED के अफसरों का आरोप है कि विभाग जानबूझकर जानकारी देने में देरी कर रहा है। जिससे घोटाले के सबूत मिटाए जा सकें। इस मामले में यूपी के 3 जिलों में एफआईआर हो चुकी हैं। इनमें मुख्य आरोपी कांग्रेस के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव को बनाया गया है। आरोप है कि पूर्व विधायक ने अपने परिवार, रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों (जैसे आरपी ग्रुप) के नाम पर फर्जी-बेनामी फर्म और निर्माण कंपनियां बनाईं। इनके जरिए बिना वैध टेंडर (फर्जी दस्तावेजों) के आधार पर करोड़ों रुपए के ठेके हासिल किए। सप्लाइज कॉर्पोरेशन ने भले ही अभी रिकॉर्ड नहीं दिए हैं, लेकिन ईडी के पास वो दस्तावेज हैं, जिन्हें आधार बनाकर एफआईआर लिखी गई थी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 5 पॉइंट में साल-दर-साल का ब्योरा मांगा जांच एजेंसी के सहायक निदेशक (लखनऊ जोन) एलके वर्मा ने बीती 13 जुलाई को स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण को चिट्ठी लिखी थी। इसमें श्रावस्ती और बलरामपुर में दर्ज FIR का हवाला देकर साल 2019-20 से 2025-26 तक की ये 5 जानकारियां मांगी हैं… 1. UPMSCL ने किन कंपनियों को दवा और उपकरण खरीद के लिए टेंडर दिए? 2. कंपनियों ने कितनी दवाएं और चिकित्सा उपकरण सप्लाई किए, उसकी धनराशि कितनी थी? 3. कंपनियों को कुल कितना भुगतान किया गया? 4. घटिया दवाओं और उपकरणों की सप्लाई डिटेल से जुड़ी राशि और ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई हुई? 5. हर टेंडर और सप्लाई के एवज में जमा कराई गई बैंक गारंटियों की डिटेल? इसके अलावा श्रावस्ती, बहराइच, गोंडा और बलरामपुर के सरकारी अस्पतालों का साल 2013-14 से अब तक जारी फंड, उसका उपयोग और मेडिकल रिइम्बर्समेंट ब्योरा भी मांगा है। इस पर महानिदेशक ने 16 जुलाई को UPMSCL के प्रबंध निदेशक को चिट्ठी लिखकर जवाब देने को कहा। लेकिन, UPMSCL ने जवाब देने से बजाय प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) से पूछा है कि ये खरीद और पेमेंट से जुड़े दस्तावेज दिए जाए या नहीं? भ्रष्टाचार रोकने के लिए बना था UPMSCL पहले सरकारी दवाओं और उपकरणों की खरीद जिला स्तर पर होती थी। इसमें काफी भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायत आती थी। इसे रोकने के लिए साल- 2018 में राज्य सरकार ने UPMSCL बनाया था। तब से ज्यादातर खरीद इसी निगम के माध्यम से होती है। केंद्र सरकार नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के जरिए राज्यों को ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पैसा भेजती है। इससे UPMSCL टेंडर निकालकर सामान खरीदता है और जिलों तक पहुंचाता है। मुकेश श्रीवास्तव की गिरफ्तारी के बाद हुई ED की एंट्री ED ने दवा और उपकरण से संबंधित जो दस्तावेज मांगे हैं, उसी मामले में पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव उर्फ ज्ञानेंद्र प्रताप श्रीवास्तव की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसके बाद ED ने केस की जांच शुरू की। उनके परिवार और रिश्तेदारों से जुड़ी करीब 9 कंपनियां बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती में दवा, उपकरण, फर्नीचर और रखरखाव के कामों से जुड़ी पाई गई थीं। कंपनियों को इन जिलों में 18 करोड़ रुपए से ज्यादा का काम मिला था। UP विजिलेंस की जांच में सामने आया- विजिलेंस की जांच में सामने आया कि सपोर्टिंग सुपरविजन योजना के तहत एक वाहन के संचालन के बदले तीन वाहनों को चलाने का फंड निकाला गया। इस अनियमितता में तत्कालीन सीएमओ डॉ. घनश्याम सिंह की भूमिका भी जांच में सामने आई। जांच में यह भी पाया गया कि कई मामलों में टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। छपाई का काम बिना निविदा के कराया गया। टेंडर होने के बावजूद तत्कालीन सीएमओ ने एमओआईसी को छूट देकर वित्तीय नियमों का उल्लंघन किया गया। मामले में आरोपी बनाए गए तत्कालीन सीएमओ डॉ. घनश्याम सिंह, डॉ. सत्यदेव, डॉ. प्रवीन कुमार और अवर अभियंता राम मनोरथ मौर्य रिटायर हो चुके हैं। विजिलेंस ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई है। सूत्रों का कहना है कि यह घोटाला भी 2011 में हुए 5 हजार करोड़ रुपए के NRHM घोटाले की तरह ही हुआ है। ————————– यह खबर भी पढ़ें… मुख्तार के रिश्तेदारों की संपत्ति हाईकोर्ट ने क्यों रिलीज की, क्या कमजोर है यूपी का गैंगस्टर एक्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क मुख्तार अंसारी के रिश्तेदारों की संपत्तियां रिलीज कर दीं। एक अन्य मामले के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट को ‘स्टिलबॉर्न’ (पैदा होते ही मर जाना) यानी ‘मरा हुआ कानून’ बताया। आखिर किस कानूनी पेंच की वजह से प्रॉपर्टी रिलीज कर दी गईं? गैंगस्टर एक्ट किस वजह से कमजोर है और सरकार इसमें क्या बदलाव कर सकती है, पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…