सीएम योगी ने लखनऊ में रविवार को कहा- आज कोई किसी बेटी को छेड़ने का दुस्साहस नहीं कर सकता। अगर करेगा तो वह अंजाम जानता है। अगर नहीं जानता है तो मुझे लगता है कि वह अपने डेथ सेंटेंस (मृत्युदंड) पर खुद साइन कर रहा है। सीएम ने कहा- पहले भर्ती में पारदर्शिता की कमी थी। भाई-भतीजावाद का बोलबाला था। जब भर्ती में भेदभाव और गड़बड़ी हो तो युवाओं का भरोसा कैसे बनेगा। 2017 से पहले भर्ती का एग्जाम कोई देता था, लेकिन नियुक्ति किसी और की होती थी। इसलिए भर्ती आते ही युवाओं के मन में सवाल उठता था कि बिना सिफारिश या लेन-देन के नौकरी कैसे मिलेगी। लेकिन अब ऐसा नहीं है। सीएम ने कहा- आप गिनते जाइए, हमने साढ़े नौ लाख नौकरी दी है। अगले 6 महीने में एक लाख नौजवानों को जॉइनिंग लेटर देंगे। अब प्रदेश में दंगा नहीं होता है। हम कभी-कभी दंगे की मॉक ड्रिल कराते हैं, जिससे लोग भूल नहीं जाएं कि दंगा कैसे होता है और अभ्यास चलता रहे। सीएम ने रविवार को 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए। इनमें पुलिस उपनिरीक्षक (गोपनीय), पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) और पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) के अभ्यर्थी शामिल हैं। सीएम योगी की 5 बड़ी बातें- 1- अब कोई माफिया असलहा लहराते हुए खुलेआम नहीं घूम सकता सीएम ने कहा कि पुलिस में भर्ती की प्रक्रिया पारदर्शी हो तो व्यवस्था में बदलाव लाया जा सकता है। आज भी डीजीपी, गृह सचिव और मुख्य सचिव के पद वही हैं। प्रदेश, अधिकारी और मानवबल भी वही हैं। ऐसा नहीं है कि बाहर से अधिकारी लाकर व्यवस्था चलाई जा रही है। बदलाव सिर्फ लोगों के दृष्टिकोण में आया है। 2017 से पहले यूपी के लोगों को बाहर अपनी पहचान बताने में भी झिझक होती थी। प्रदेश में दंगे और लंबे समय तक कर्फ्यू की स्थिति रहती थी। बरेली, अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर समेत कई जगहों पर लंबे समय तक दंगे हुए। माफिया का दबदबा इतना था कि प्रशासन, पुलिस और न्यायिक अधिकारियों के लिए भी चुनौती बनी रहती थी। माफिया के काफिले के सामने न्यायिक अधिकारी का वाहन तक रोक दिया जाता था। आज क्या कोई माफिया असलहा लहराते हुए खुलेआम घूम सकता है या दंगा करने का दुस्साहस कर सकता है? पहले जिस व्यक्ति के पास क्षमता थी, वह बेटी को बाहर पढ़ाने भेज देता था। जिसके पास क्षमता नहीं थी, वह बेटी को घर पर बैठाने को मजबूर था, क्योंकि बाहर निकलेगी तो कोई शोहदा उसे छेड़ेगा। 2- पहले भाई-भतीजावाद के कारण भर्ती नहीं हो पाती थी योगी ने कहा- यूपी ने जो परसेप्शन बदला है, वह यूपी पुलिस ने बदला है। जिस पुलिस को 25 करोड़ लोगों ने विश्वास का प्रतीक बनाया है। लोग कहते हैं कि यूपी मॉडल को उतार देते हैं। यह बदलाव यूपी पुलिस में किए गए सुधारों से आया है। 2017 में पुलिस के आधे से ज्यादा पद खाली थे और भर्ती पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की रोक थी। 4 लाख पुलिसकर्मियों की जरूरत के मुकाबले सिर्फ 2 लाख पुलिसकर्मी थे। पहले भाई-भतीजावाद के कारण भर्ती नहीं हो पाती थी। भर्ती प्रक्रिया में पेपर लीक या अवैध धंधे में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई के लिए कानून बनाया गया है। ऐसे मामलों में आजीवन कारावास और संपत्ति जब्त करने का प्रावधान है।
3- पुलिस के बैरक भी बदहाल थे, पुलिसकर्मी खपरैल के नीचे सोते थे सीएम ने कहा- पहले पुलिस के बैरक भी बदहाल थे। लखनऊ में वे खुद देखने गए तो पुलिसकर्मी खपरैल के नीचे सो रहे थे। तब लगा कि पुलिस व्यवस्था में बदलाव जरूरी है। इसके बाद हर जिले की पुलिस लाइन में बैरक की व्यवस्था की गई। यूपी के 56 जिलों में बड़े पुलिस बैरक बनाए गए हैं। दशकों से लंबित पुलिस लाइनों का निर्माण कराया गया है। पुलिस लाइन पुलिस की रीढ़ होती है। पहले पीएसी को भंग कर दिया गया था और उसकी 34 कंपनियां खत्म कर दी गई थीं। हमने उनका फिर से गठन किया। आज जब कहीं चुनाव होते हैं तो यूपी से 20 से 40 कंपनी पुलिस की मांग की जाती है। 4- जो लोग कुछ नहीं कर पाए, वे हमेशा बोलते रहेंगे योगी ने कहा- 2017 से पहले भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों के कारण युवाओं में निराशा और हताशा थी। उनका मानना था कि व्यवस्था बदली जा सकती है, लेकिन तब इच्छाशक्ति की कमी थी। पहले भर्ती की पारदर्शिता पर सवाल उठते थे, फिर चयन प्रक्रिया पर। पेपर लीक के मामले भी सामने आते थे। 2017 में सरकार ने तय किया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाएगी और सुधार किए जाएंगे। भर्ती आयोगों और बोर्ड की प्रक्रिया में बदलाव किया गया। ग्रुप-3 और ग्रुप-4 में इंटरव्यू की व्यवस्था खत्म की गई। जो लोग कुछ नहीं कर पाए, वे हमेशा बोलते रहेंगे। जिन्होंने अपनी अक्षमता के कारण यूपी को बीमारू बनाया था, उन्हें यूपी पुलिस पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। उनके निकम्मेपन को यूपी और देश देख चुका है। 5- 110 एकड़ पुलिस जमीन पर भी कब्जा हो गया था यूपी की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक साइबर सिक्योरिटी है। इसके लिए हर जिले में साइबर थाना स्थापित किया गया है। यूपी पुलिस ने वह कर दिखाया है, जो पहले असंभव लगता था। हर दिन हमारे सामने नई प्रतिस्पर्धा है। दुनिया लगातार बदल रही है और तकनीक तेजी से बदल रही है। तकनीक को समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यूपी बीमारू राज्य से उबरा है। यूपी में फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट बनाया गया है। पहले प्रदेश में सिर्फ दो फॉरेंसिक लैब थीं। फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट के लिए जमीन तलाशने के दौरान पता चला कि पुलिस की जमीन पर कब्जा है। जांच में सामने आया कि पुलिस की 110 एकड़ जमीन राजस्व रिकॉर्ड में किसी और के नाम दर्ज करा दी गई थी और वहां प्लॉटिंग की तैयारी थी। सरकार ने एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद संबंधित व्यक्ति ने सरेंडर कर जमीन वापस करने की बात कही। आज यूपी के सात शहरों में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू है। 2017 से पहले इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। पहले एक फाइल सालों तक घूमती रहती थी और कोई न कोई उस पर टिप्पणी लगा देता था। एक फाइल 1973 से चल रही थी। इसके बाद सात शहरों में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू किया गया। वित्त मंत्री खन्ना ने शायरी पढ़ी…योगी जी के जहन में ताकत है वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने शायरी भी पढ़ी- “योगी जी के जहन में ताकत है, जब ईमान की, क्यों न फिर यूपी बने पहचान हिंदुस्तान की।” उन्होंने कहा- 2017 से पहले यूपी में होने वाली भर्तियां विवाद और संदेह के घेरे में रहती थीं। गड़बड़ी और सिफारिशों की बातें सामने आती थीं। आज नए कर्मचारियों को संतुष्टि होनी चाहिए कि योग्यता के आधार पर उन्हें यह मौका मिला है। सरकारी नौकरी में अधिकार से पहले कर्तव्य आता है। कोई फरियादी आए तो उसके साथ संवेदनशीलता से व्यवहार करें। उन्होंने कहा कि पुलिस की नौकरी में अहंकार की कोई जगह नहीं है। पद का घमंड व्यक्ति को नीचे ले जाता है। इसलिए जिम्मेदारी के साथ काम करें। योगी सरकार के कार्यकाल में हुई भर्तियों पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। समय पर और जिम्मेदारी से काम करेंगे तो सम्मान मिलेगा, जबकि लापरवाही पर तिरस्कार और अपमान झेलना पड़ेगा। डीजीपी बोले- नियुक्ति पत्र सिर्फ नौकरी नहीं, जिम्मेदारी है
डीजीपी राजीव कृष्णा ने कहा कि पुलिस की फील्ड यूनिट की तरह मिनिस्टीरियल कर्मचारी भी पुलिस व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं। नियुक्ति पत्र सिर्फ नौकरी में प्रवेश का पत्र नहीं, बल्कि यूपी पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी है। 2017 से पहले 6 हजार सिपाहियों को प्रशिक्षण देने की क्षमता थी, जो अब बढ़कर 60,244 हो गई है। 2017 से अब तक अराजपत्रित श्रेणी में 2,56,258 सीधी भर्तियां और 1,54,572 पदोन्नतियां हुई हैं। 35 हजार सीधी भर्ती और 9 हजार से अधिक पदोन्नतियों की प्रक्रिया चल रही है। 2017 के बाद पुलिस स्थापना, लाइन, बैरक और मेस का भी विस्तार किया गया है। 74 थानों के आवासीय भवनों के साथ बड़ी संख्या में हॉस्टल बनाए गए हैं। उद्देश्य ऐसा माहौल देना है, जहां पुलिसकर्मियों को काम करने में आसानी हो। ——————— ये खबर भी पढ़ें- होमगार्ड परीक्षा में दौड़ते-दौड़ते युवक की मौत:बरेली में पत्नी बोली- B.Tech, B.Ed, TET पास थे, लेकिन सरकारी नौकरी चाहते थे पति B.Tech, B.Ed, CTET और UP-TET पास थे। कोचिंग चलाकर अच्छा पैसा कमा लेते थे, लेकिन मन सरकारी नौकरी करने का था। 17 सितंबर को बर्थडे मनाने के बाद मुरादाबाद में होमगार्ड भर्ती की दौड़ में शामिल होने गए थे। अगले दिन पता चला कि उनकी मौत हो गई। मुझे जरा भी अंदेशा होता कि उनकी मौत हो जाएगी, तो मैं उन्हें कभी जाने ही न देती। इतना कहते हुए बरेली की कोमल यादव रोने लगीं। पढ़ें पूरी खबर
3- पुलिस के बैरक भी बदहाल थे, पुलिसकर्मी खपरैल के नीचे सोते थे सीएम ने कहा- पहले पुलिस के बैरक भी बदहाल थे। लखनऊ में वे खुद देखने गए तो पुलिसकर्मी खपरैल के नीचे सो रहे थे। तब लगा कि पुलिस व्यवस्था में बदलाव जरूरी है। इसके बाद हर जिले की पुलिस लाइन में बैरक की व्यवस्था की गई। यूपी के 56 जिलों में बड़े पुलिस बैरक बनाए गए हैं। दशकों से लंबित पुलिस लाइनों का निर्माण कराया गया है। पुलिस लाइन पुलिस की रीढ़ होती है। पहले पीएसी को भंग कर दिया गया था और उसकी 34 कंपनियां खत्म कर दी गई थीं। हमने उनका फिर से गठन किया। आज जब कहीं चुनाव होते हैं तो यूपी से 20 से 40 कंपनी पुलिस की मांग की जाती है। 4- जो लोग कुछ नहीं कर पाए, वे हमेशा बोलते रहेंगे योगी ने कहा- 2017 से पहले भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों के कारण युवाओं में निराशा और हताशा थी। उनका मानना था कि व्यवस्था बदली जा सकती है, लेकिन तब इच्छाशक्ति की कमी थी। पहले भर्ती की पारदर्शिता पर सवाल उठते थे, फिर चयन प्रक्रिया पर। पेपर लीक के मामले भी सामने आते थे। 2017 में सरकार ने तय किया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाएगी और सुधार किए जाएंगे। भर्ती आयोगों और बोर्ड की प्रक्रिया में बदलाव किया गया। ग्रुप-3 और ग्रुप-4 में इंटरव्यू की व्यवस्था खत्म की गई। जो लोग कुछ नहीं कर पाए, वे हमेशा बोलते रहेंगे। जिन्होंने अपनी अक्षमता के कारण यूपी को बीमारू बनाया था, उन्हें यूपी पुलिस पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। उनके निकम्मेपन को यूपी और देश देख चुका है। 5- 110 एकड़ पुलिस जमीन पर भी कब्जा हो गया था यूपी की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक साइबर सिक्योरिटी है। इसके लिए हर जिले में साइबर थाना स्थापित किया गया है। यूपी पुलिस ने वह कर दिखाया है, जो पहले असंभव लगता था। हर दिन हमारे सामने नई प्रतिस्पर्धा है। दुनिया लगातार बदल रही है और तकनीक तेजी से बदल रही है। तकनीक को समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यूपी बीमारू राज्य से उबरा है। यूपी में फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट बनाया गया है। पहले प्रदेश में सिर्फ दो फॉरेंसिक लैब थीं। फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट के लिए जमीन तलाशने के दौरान पता चला कि पुलिस की जमीन पर कब्जा है। जांच में सामने आया कि पुलिस की 110 एकड़ जमीन राजस्व रिकॉर्ड में किसी और के नाम दर्ज करा दी गई थी और वहां प्लॉटिंग की तैयारी थी। सरकार ने एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद संबंधित व्यक्ति ने सरेंडर कर जमीन वापस करने की बात कही। आज यूपी के सात शहरों में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू है। 2017 से पहले इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। पहले एक फाइल सालों तक घूमती रहती थी और कोई न कोई उस पर टिप्पणी लगा देता था। एक फाइल 1973 से चल रही थी। इसके बाद सात शहरों में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू किया गया। वित्त मंत्री खन्ना ने शायरी पढ़ी…योगी जी के जहन में ताकत है वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने शायरी भी पढ़ी- “योगी जी के जहन में ताकत है, जब ईमान की, क्यों न फिर यूपी बने पहचान हिंदुस्तान की।” उन्होंने कहा- 2017 से पहले यूपी में होने वाली भर्तियां विवाद और संदेह के घेरे में रहती थीं। गड़बड़ी और सिफारिशों की बातें सामने आती थीं। आज नए कर्मचारियों को संतुष्टि होनी चाहिए कि योग्यता के आधार पर उन्हें यह मौका मिला है। सरकारी नौकरी में अधिकार से पहले कर्तव्य आता है। कोई फरियादी आए तो उसके साथ संवेदनशीलता से व्यवहार करें। उन्होंने कहा कि पुलिस की नौकरी में अहंकार की कोई जगह नहीं है। पद का घमंड व्यक्ति को नीचे ले जाता है। इसलिए जिम्मेदारी के साथ काम करें। योगी सरकार के कार्यकाल में हुई भर्तियों पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। समय पर और जिम्मेदारी से काम करेंगे तो सम्मान मिलेगा, जबकि लापरवाही पर तिरस्कार और अपमान झेलना पड़ेगा। डीजीपी बोले- नियुक्ति पत्र सिर्फ नौकरी नहीं, जिम्मेदारी है
डीजीपी राजीव कृष्णा ने कहा कि पुलिस की फील्ड यूनिट की तरह मिनिस्टीरियल कर्मचारी भी पुलिस व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं। नियुक्ति पत्र सिर्फ नौकरी में प्रवेश का पत्र नहीं, बल्कि यूपी पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी है। 2017 से पहले 6 हजार सिपाहियों को प्रशिक्षण देने की क्षमता थी, जो अब बढ़कर 60,244 हो गई है। 2017 से अब तक अराजपत्रित श्रेणी में 2,56,258 सीधी भर्तियां और 1,54,572 पदोन्नतियां हुई हैं। 35 हजार सीधी भर्ती और 9 हजार से अधिक पदोन्नतियों की प्रक्रिया चल रही है। 2017 के बाद पुलिस स्थापना, लाइन, बैरक और मेस का भी विस्तार किया गया है। 74 थानों के आवासीय भवनों के साथ बड़ी संख्या में हॉस्टल बनाए गए हैं। उद्देश्य ऐसा माहौल देना है, जहां पुलिसकर्मियों को काम करने में आसानी हो। ——————— ये खबर भी पढ़ें- होमगार्ड परीक्षा में दौड़ते-दौड़ते युवक की मौत:बरेली में पत्नी बोली- B.Tech, B.Ed, TET पास थे, लेकिन सरकारी नौकरी चाहते थे पति B.Tech, B.Ed, CTET और UP-TET पास थे। कोचिंग चलाकर अच्छा पैसा कमा लेते थे, लेकिन मन सरकारी नौकरी करने का था। 17 सितंबर को बर्थडे मनाने के बाद मुरादाबाद में होमगार्ड भर्ती की दौड़ में शामिल होने गए थे। अगले दिन पता चला कि उनकी मौत हो गई। मुझे जरा भी अंदेशा होता कि उनकी मौत हो जाएगी, तो मैं उन्हें कभी जाने ही न देती। इतना कहते हुए बरेली की कोमल यादव रोने लगीं। पढ़ें पूरी खबर