बसपा प्रमुख मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को 25 दिन बाद एक बार फिर से पार्टी में वापस ले लिया है। उन्हें राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया। आकाश की बसपा में तीसरी बार वापसी हुई है। इससे पहले मायावती ने आकाश को 10 सितंबर, 2026 को पार्टी से निकाल दिया था। तब मायावती ने कहा था- उन्हें अपने ससुर से ज्यादा लगाव है। वह डबल माइंड हो गए हैं। मायावती ने सोमवार (5 अक्टूबर) को ‘X’ पर लिखा- पार्टी के ज्यादातर लोगों का कहना था कि आकाश आनंद को उनकी पहले वाली जिम्मेदारियों के साथ पार्टी में दोबारा काम करने का मौका दिया जाए। दरअसल, 2 अक्टूबर को आकाश आनंद ने सोशल मीडिया ‘X’ पर एक भावुक पोस्ट लिखी थी। उन्होंने मायावती को अपना राजनीतिक गुरु, प्रेरणा और “बुआ मां” बताया था। कहा था कि बसपा ही उनका परिवार है। वे किसी अन्य दल में नहीं जाएंगे। उन्होंने अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के फैसले का भी समर्थन किया था। माना था कि “मिशन और पार्टी से बड़ा कोई रिश्ता नहीं हो सकता।” मायावती की पोस्ट रीपोस्ट न करने पर भी आकाश ने सफाई दी थी कि वे उस समय सोशल मीडिया से दूर थे। उन्होंने मायावती से किसी भी ठेस के लिए माफी मांगते हुए दोबारा सेवा का मौका मांगा था। पढ़िए, मायावती के पोस्ट की खास बातें मायावती ने आकाश को कब-कब जिम्मेदारी दी और कब हटाया? जानिए 10 दिसंबर, 2023 को यूपी-उत्तराखंड के नेताओं की बैठक बुलाई। इसमें मायावती ने अपने सबसे छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे आकाश को उत्तराधिकारी घोषित किया। 7 मई, 2024 को आकाश की गलतबयानी की वजह से मायावती ने उनसे सभी जिम्मेदारियां छीन ली। आकाश को उत्तराधिकारी पद के साथ ही नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटा दिया। मायावती ने कहा था कि आकाश अभी अपरिपक्व (इमेच्योर) हैं। 47 दिन बाद मायावती ने अपना फैसला पलट दिया। 23 जून 2024 को फिर से उत्तराधिकारी बनाया और नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन 2 मार्च 2025 को उनसे फिर सारी जिम्मेदारियां छीन लीं। मायावती ने 3 मार्च, 2025 को आकाश को पार्टी से बाहर कर दिया। कहा- आकाश को पश्चाताप करके अपनी परिपक्वता दिखानी थी। लेकिन वो अपने ससुर के प्रभाव में स्वार्थी, अहंकारी हो गए। मायावती ने 13 अप्रैल 2026 को आकाश को माफ कर दिया। कहा था- आकाश को उत्तराधिकारी नहीं बनाऊंगी। 3 महीने यानी 18 मई को आकाश को मायावती ने दोबारा से चीफ नेशनल को-ऑर्डिनेटर बनाया। कहा- आकाश को दूसरा मौका दिया जा रहा है। 29 अगस्त को पार्टी में राष्ट्रीय संयोजक का नया पद बनाकर आकाश को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी थी। 3 सितंबर को मायावती ने राष्ट्रीय संयोजक पद से आकाश को हटाया था। कहा- उन्हें अभी और अधिक मैच्योर होने की जरूरत है। 9 सितंबर को आकाश आनंद को दोबारा जिम्मेदारियां सौंपने के लिए आकाश के ससुर के राजनीतिक जीवन से संन्यास लेने की शर्त रखी। 10 सितंबर को मायावती ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। अब मायावती के हालिया फैसलों के बारे में पढ़िए 3 सितंबर: मायावती ने आकाश को पार्टी की बैठक में नहीं बुलाया। उन्हें पार्टी के नंबर-2 पद राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी से हटा दिया। कहा- आकाश अभी मैच्योर नहीं हैं। 6 सितंबर: मायावती ने भतीजे ईशान को 19 राज्यों में संगठन की समीक्षा की जिम्मेदारी दी। 9 सितंबर: मायावती ने आकाश को पार्टी में पद वापस देने के लिए उनके ससुर और पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने की शर्त रखी। इसके करीब 17 घंटे बाद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। इसके बाद भी बसपा सुप्रीमो ने आकाश को पार्टी में पद नहीं दिया, बल्कि पार्टी से ही बाहर कर दिया। कहा- आकाश को पार्टी से ज्यादा ससुर प्रिय हैं। 13 सितंबर: मायावती ने ऐलान किया कि आकाश ही नहीं, बल्कि ईशान को भी पार्टी में कोई पद नहीं दिया जाएगा। भतीजी दीपिका आनंद को पार्टी में आगे बढ़ाने के संकेत दिए थे। आकाश ने 2017 में राजनीति में की थी एंट्री ———— ये भास्कर एक्सक्लूसिव पढ़िए- अखिलेश जिस मुस्लिम नेता का टिकट काटेंगे, ओवैसी उसे लड़वाएंगे:सपा से गठबंधन नहीं हुआ तो 200 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सपा-कांग्रेस को गठबंधन के लिए 2 अक्टूबर तक का समय दिया था। डेडलाइन खत्म हो चुकी है। अब पार्टी अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। ओवैसी कम से कम 200 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं। इनमें 100 मुस्लिम बहुल सीटें होंगी। यहां पार्टी ऐसे मजबूत उम्मीदवार उतारना चाहती है, जिनके जीतने की संभावना ज्यादा हो। पढ़िए पूरी खबर…