मुस्कान-साहिल को सजा-ए-मौत लिख जज ने पेन फेंका:लिखा- फांसी लगाकर तब तक लटकाओ, जब तक मौत न हो; महाभारत का श्लोक पढ़ा

दोषी (मुस्कान-साहिल) की गर्दन में फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक मौत न हो जाए। मेरठ जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने बुधवार शाम 4.22 बजे यह फैसला सुनाया। फैसला सुनते ही कोर्ट रूम में कुर्सी पर बैठी सौरभ की मां और भाई रोने लगे। सौरभ की मां ने हाथ जोड़ते हुए कोर्ट को शुक्रिया किया। वो साड़ी के पल्लू से अपने आंसू पोंछने लगीं। जिला जज ने महाभारत के श्लोक के हिंदी कथन को कोट करते हुए कहा- अधर्म करने वाले को सजा देना भी धर्म है। प्रजा जब सोती है, तो अदालत सजा देती है। जज ने जिस पेन से मुस्कान-साहिल के लिए मृत्युदंड लिखा, उस पेन को तुरंत डस्टबिन में फेंक दिया। पढ़िए सौरभ के 5 टुकड़े कर नीले ड्रम में पैक करने वाली पत्नी मुस्कान और प्रेमी साहिल को सजा सुनाए जाने के दिन कोर्ट रूम में कब क्या हुआ… सजा से 20 मिनट पहले मुस्कान गोद में बच्ची को लेकर कोर्ट रूम से जुड़ी शाम 4 बजे… मेरठ जिला जज का कोर्ट रूम ऐतिहासिक नीले ड्रम हत्याकांड के फैसले को सुनने के लिए खचाखच भरा था। सौरभ की मां रेनू देवी, बड़ा भाई राहुल उर्फ बबलू भी कुर्सी पर बैठे थे। साथ ही तमाम सीनियर-जूनियर वकील भी बैठे थे। शाम 4 बजे के बाद मुस्कान-साहिल को ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जेल से कोर्ट रूम में जोड़ा गया। मुस्कान नीली कुर्ती, काला दुपट्‌टा पहने थी। उसकी गोद में 10 महीने की बच्ची भी थी। साहिल सफेद टी-शर्ट में था। मुस्कान ने साहिल की तरफ देखा। उसकी आंखों में आंसू थे। साहिल ने भी आखिरी बार मुस्कान को देखा। एक-दूसरे को देखने के बाद दोनों ने नजरें नीचे कर लीं। मुस्कान बार-बार दुपट्‌टे से अपने आंसू पोंछ रही थी। जज को देखते ही मुस्कान जोर-जोर से रोने लगी जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा आकर कुर्सी पर बैठे। उन्होंने मुस्कान-साहिल को कंप्यूटर स्क्रीन पर देखा। जज को देखते ही मुस्कान जोर-जोर से रोने लगी। उसके रोने की आवाज पूरे कोर्ट रूम में सुनाई देने लगी। मुस्कान को देखकर नजरें नीचे किए साहिल भी सिसकने लगा। जज ने कहा- मुस्कान और साहिल शुक्ला तुम दोनों ने सौरभ राजपूत की हत्या की है। जिला जज के यह कहते ही खचाखच भरे कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया। सामने खड़े मुस्कान-साहिल के वकीलों की सांसें थम-सी गईं। आंखें भर आईं कि जज साहब अब आगे क्या सजा सुनाएंगे? जैसे ही जिला जज ने कहा कि तुम दोनों को सौरभ राजपूत की नृशंस हत्या में अदालत मृत्युदंड देती है। सुनते ही मुस्कान-साहिल दोनों तेजी से रोने लगे। जिला जज ने मुस्कान-साहिल को जुर्माने की सजा भी सुनाई। सुबह कोर्ट रूम में जुड़ी तो मुस्कान बोली- मेरी बेटी का ध्यान रखा जाए सुबह 10:30 बजे… मेरठ जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा कोर्ट रूम में आए, कुर्सी पर बैठे। पूरा कोर्ट रूम खाली था। केवल अभियोजन पक्ष के वकील डीजीसी केके चौबे, डिफेंस की वकील रेखा जैन और कुछ सीनियर वकील ही कोर्ट रूम में मौजूद थे। जेल से वीसी के जरिए ऑनलाइन मुस्कान-साहिल को कोर्ट से जोड़ा गया। मुस्कान हल्के नीले रंग की कुर्ती और काले दुपट्‌टे में थी। आंखें नीचे किए थी, साहिल ने सफेद टी-शर्ट पहनी थी। दोनों नजरें नीचे किए थे। धीरे से मुस्कान ने साहिल को एक झलक देखा और नजरें नीचे कर लीं। जज ने कहा- मुस्कान-साहिल तुम दोनों ने सौरभ राजपूत की हत्या की है। जज ने बारी-बारी से मुस्कान-साहिल से उनका नाम, उम्र, शिक्षा, पता और परिवार की जानकारी ली। दोनों ने अपने जवाब दिए। इसके बाद जज ने पहले मुस्कान से पूछा- तुम्हें अपनी सजा पर कुछ कहना है। मुस्कान सुबकते हुए बस यही बोली कि जेल में मेरे साथ जो बेटी है, उसका ध्यान रखा जाए। जज ने साहिल से पूछा- साहिल शुक्ला तुम्हें अपनी सजा पर कुछ कहना है? साहिल सिर झुकाए रहा, उसने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद जज ने कहा- ठीक हैं, हम आपको सजा बाद में सुनाएंगे। जज के इतना कहते ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से दोनों को हटा दिया गया। सरकारी वकील बोले- मृत्युदंड मिलना चाहिए दोपहर 11.30 बजे… जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा अपनी कुर्सी पर थे। कोर्ट रूम अभी भी काफी खाली था। केवल अभियोजन के वकील डीजीसी केके चौबे, मुस्कान-साहिल का केस लड़ रहीं सरकारी वकील रेखा जैन और सौरभ के परिवार की तरफ से किए गए वकील विजय बहादुर सिंह सामने खड़े थे। साथ ही कुछ सीनियर वकील थे। जिला जज की ओर से आदेश मिला कि बहस शुरू की जाए। सबसे पहले अभियोजन के वकील डीजीसी केके चौबे ने बहस शुरू की। उन्होंने कोर्ट के सामने 35 पन्नों की बहस को सुनाया। जिसमें उन्होंने कहा कि मुस्कान-साहिल ने उन्माद में आकर सोची-समझी साजिश के तहत होशहवास में प्रीप्लांड तरीके से सौरभ राजपूत की नृशंस हत्या की है। यह माफी के काबिल नहीं है। इसमें कम से कम मृत्युदंड की सजा अवश्य मिलनी चाहिए। क्योंकि इस केस के बाद पति, पत्नी के पवित्र रिश्ते की विश्वसनीयता का हनन हुआ है। इस केस के बाद समाज में एक के बाद एक ऐसे तमाम हत्याकांडों को अंजाम दिया गया। उन्होंने कोर्ट से मुस्कान-साहिल के लिए मृत्युदंड मांगा। मुस्कान-साहिल की वकील बोलीं- 2 छोटी बच्चियां हैं, सजा कम दें इसके बाद साहिल और मुस्कान की वकील रेखा जैन ने बहस शुरू करते हुए अपना पक्ष रखा। रेखा जैन ने कहा- मुस्कान-साहिल ने किसी नियोजित या प्लान तरीके से ये हत्याकांड नहीं किया। मुस्कान के साथ 2 छोटी बेटियां हैं। उनका पालन, पोषण करने वाला कोई नहीं है। मुस्कान के माता-पिता बुजुर्ग हैं, बीमार भी हैं। इसलिए इन बच्चियों के पालन का ख्याल रखा जाए। साहिल भी पढ़ने वाला छात्र है। उसका पूरा भविष्य आज अदालत के फैसले पर टिका है। उस युवा के भविष्य का सवाल है। मेरी गुजारिश है कि अदालत दोनों को कम सजा दे। सबूतों, गवाहों के आधार पर भी मुस्कान-साहिल को कम से कम सजा की पुष्टि ही होती है। सौरभ के वकील बोले- मौत की सजा मिले इसके बाद सौरभ के परिवार की तरफ से किए गए वकील विजय बहादुर सिंह ने अपनी बहस शुरू की। उन्होंने मुस्कान-साहिल केस के सारे 22 गवाहों के बयान और तमाम सुबूतों की कड़ियों को जोड़ते हुए मजबूती से अपना पक्ष रखा। दोनों के लिए मृत्युदंड दिए जाने की दरख्वास्त अदालत के सामने रखी। तीनों वकीलों की बहस सुनने के बाद जिला जज ने लंच बाद सजा सुनाने का आदेश दिया और कुर्सी से उठ गए। सौरभ की मां ने रोते हुए कहा- न्याय बहुत शांति से मिला सजा का ऐलान होते ही सौरभ की मां रेनू देवी फूट-फूटकर रोने लगीं। रोते हुए कहा- मेरे बेटे की बेरहमी से हत्या करने वाली मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को जिस दिन फांसी पर लटकाया जाएगा, तब मुझे पूरा न्याय मिलेगा। कोर्ट ने हमें आज भी न्याय दिया है, लेकिन आधा है। जेल में बंद मुस्कान की छोटी बेटी राधा को लेकर मां रेनू ने कहा कि हमारा उससे कोई संपर्क नहीं है। हम उसे न तो अपनाना चाहते हैं और न ही अपने साथ रखना चाहते हैं। हमारे ऊपर DNA टेस्ट कराने का दबाव बनाया जाएगा, तब भी हमारा परिवार नहीं कराएगा। हमें सिर्फ न्याय चाहिए था। मां रेनू देवी ने कहा- हम माता रानी से यही दुआ मांग रहे थे कि जिन्होंने भी गलत काम किया है, उन्हें सजा मिलनी चाहिए। पहले दिन से ही हम कोर्ट से फांसी देने की अपील कर रहे थे। हमने यह भी कहा था कि अगर यहां फांसी नहीं दी जाती, तो हाईकोर्ट में अपील करेंगे। लेकिन, कोर्ट ने आज जो फैसला दिया, उससे हम संतुष्ट हैं। सौरभ के भाई बोले- जब दोनों फांसी पर लटकेंगे, तब सकून मिलेगा सौरभ के भाई राहुल ने मां रेनू देवी को संभाला। राहुल उर्फ बबलू ने दैनिक भास्कर से कहा- जिस दर्दनाक और बेरहम तरीके से मेरे भाई की हत्या की गई थी, उसके लिए फांसी से कम कोई सजा नहीं है। आज न्यायालय ने जो फैसला किया, वह मेरे भाई को न्याय दिलाने में बहुत अहम है। लेकिन, हमारी इच्छा उन दोनों को फांसी पर लटकते हुए देखना है। जेल में पल रही मुस्कान की बेटी के बारे में राहुल ने कहा- पहले हमने उसका डीएनए कराए जाने के बारे में सोचा था। लेकिन, बाद में साहिल और मुस्कान ने ही यह साफ कर दिया कि यह बच्ची उन्हीं की है। इसलिए हमें उस संबंध में भी अब कोई कार्रवाई नहीं करनी है। मुस्कान के मां-पिता ने कोर्ट को लिखकर दिया- बेटी से कोई मतलब नहीं कोर्ट में मुस्कान और साहिल के परिवार से कोई नहीं पहुंचा। मुस्कान के माता-पिता ने बुधवार सुबह एक पत्र लिखकर पुलिस के जरिए कोर्ट को दिया। इसमें उन्होंने लिखा कि मुस्कान को चाहे जो सजा हो, हमें इससे कोई मतलब नहीं है। हम कभी मुस्कान से नहीं मिलेंगे। हमें उसकी छोटी बेटी से भी कोई मतलब नहीं है। ————————- ये खबर भी पढ़िए- ‘मुस्कान की छोटी बच्ची को नहीं अपनाएंगे’: सौरभ की मां बोलीं- DNA टेस्ट भी नहीं कराएंगे, फांसी पर लटकते देख सकून मिलेगा मेरठ में पति सौरभ राजपूत की हत्या करने वाली मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई गई। सजा का ऐलान होते ही सौरभ की मां रेनू देवी फूट-फूटकर रोने लगीं। मां ने रोते हुए कहा- मेरे बेटे की बेरहमी से हत्या करने वाली मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को जिस दिन फांसी पर लटकाया जाएगा, तब मुझे पूरा न्याय मिलेगा। कोर्ट ने हमें आज भी न्याय दिया है, लेकिन आधा है। पढ़ें पूरी खबर…