उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों पर भाजपा-सपा में कांटे की टक्कर है। वाराणसी सीट पर भाजपा के सामने सपा का गढ़ ढहाने की चुनौती है। वहीं, भाजपा से बागी हुए 2 नेताओं की उम्मीदवारी ने फैजाबाद-गोरखपुर सीट पर मुकाबला रोचक बना दिया है। इनमें से एक संजयन त्रिपाठी को सपा ने अपने घोषित उम्मीदवार का टिकट काटकर प्रत्याशी बनाया है। इसके बाद से टीम योगी गोरखपुर की सीट बचाने में जुटी है। लखनऊ, इलाहाबाद, आगरा समेत 6 सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों से नाराजगी है। इसलिए पार्टी की राह आसान नहीं है। चुनाव प्रचार के तरीकों में दोनों प्रमुख दलों की रणनीति बिल्कुल अलग नजर आई- सीएम का पावर शो, अखिलेश सभाओं से दूर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव की कमान अपने हाथों में लेते हुए प्रदेशभर में 5 बड़ी सभाएं कीं। उन्होंने लखनऊ में शिक्षक प्रत्याशी उमेश द्विवेदी और स्नातक प्रत्याशी इं. अवनीश सिंह के पक्ष में रैली की। इसके अलावा गाजियाबाद, गोरखपुर, बरेली, वाराणसी, बलिया और आगरा में सभाएं और रणनीतिक बैठकें करके कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया। उनके साथ भाजपा का पूरा कैडर नजर आया। दूसरी ओर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव जनसभाओं से दूर रहे। केवल अयोध्या के एक निजी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने फैजाबाद-गोरखपुर से सपा प्रत्याशी के लिए अपील की थी। इसके अलावा सपा के शीर्ष नेतृत्व या उनके परिवार का कोई सदस्य सीधे प्रचार में नहीं उतरा। सपा के उम्मीदवार अपने व्यक्तिगत प्रभाव, स्थानीय संगठन और क्षेत्रीय विधायकों/सांसदों के बल पर ही चुनाव मैदान में डटे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा विधान परिषद के चुनावों में कभी बहुत ज्यादा प्रचार करती नहीं दिखी है। हालांकि, बदलते समीकरणों के बीच अगर अखिलेश यादव खुद मैदान में उतरते तो सपा प्रत्याशियों की स्थिति और मजबूत हो सकती थी। अब सीटवार स्थिति समझते हैं… लखनऊ स्नातक खंड सीट इस चुनाव का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनी हुई है। यहां सबसे ज्यादा 3 लाख 13 हजार 531 स्नातक मतदाता हैं। भाजपा के निवर्तमान MLC इंजीनियर अवनीश सिंह और सपा की कांति सिंह के बीच कांटे की टक्कर है। 2020 में कांति सिंह सिर्फ 6,403 वोट से अवनीश से हारी थीं। हार के बावजूद कांति पिछले 6 साल से क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहीं। उन्होंने नए स्नातक मतदाता बनाने पर ध्यान दिया। उनके पति प्रतापगढ़ से सपा सांसद शिवपाल सिंह पटेल हैं। लखनऊ पब्लिक स्कूल चेन के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। इस सीट पर भाजपा को फीडबैक मिला है कि अवनीश को लेकर मतदाताओं में नाराजगी है। सीएम योगी, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने खुद यहां चुनाव प्रबंधन का जिम्मा संभाला है। लखनऊ शिक्षक खंड सीट पर 53 हजार 179 शिक्षक मतदाता हैं। यहां कुल 10 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। मुख्य मुकाबला भाजपा प्रत्याशी उमेश द्विवेदी और सपा के सुशील कुमार पटेल के बीच है। उमेश द्विवेदी 2014 और 2020 में इस सीट पर जीत चुके हैं, तीसरी बार मैदान में हैं। उत्तर प्रदेश के वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के बीच उमेश द्विवेदी का प्रभाव बहुत मजबूत है। इससे उनकी स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है। वहीं, सपा ने अपना पूरा कैडर सुशील कुमार पटेल के समर्थन में उतार दिया है। इसलिए वो तगड़ी फाइट दे रहे हैं। मुख्यमंत्री के प्रभाव वाली गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर 54 हजार 910 मतदाता हैं। इनमें सबसे बड़ा धड़ा ब्राह्मणों का है। यहां भाजपा ने ध्रुव कुमार त्रिपाठी पर, जबकि सपा ने भाजपा के बागी संजयन त्रिपाठी पर दांव खेला है। भाजपा के एक अन्य बागी अजय सिंह भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मजबूती से डटे हैं। अजय सिंह ने जिला प्रशासन पर आचार संहिता उल्लंघन के आरोप भी लगाए हैं। संजयन त्रिपाठी और अजय सिंह के ब्राह्मण वोटबैंक में सेंधमारी करने की स्थिति में भाजपा प्रत्याशी ध्रुव त्रिपाठी के लिए राह कठिन हो सकती है। इसी वजह से सीएम योगी की गोरखपुर टीम ने इस सीट पर पूरी ताकत झोंक दी है। आगरा शिक्षक खंड सीट पर 50 हजार 802 शिक्षक मतदाता 12 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। यहां सपा से आकाश अग्रवाल और भाजपा से हरिकिशोर तिवारी आमने-सामने हैं। आकाश अग्रवाल ने पिछला चुनाव निर्दलीय जीता था। शिक्षकों के बीच उनकी सीधी पकड़ है। इस बार सपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया है। दूसरी ओर, भाजपा प्रत्याशी हरिकिशोर तिवारी कर्मचारी राजनीति का बड़ा चेहरा हैं। वह कर्मचारियों के बीच लोकप्रिय हैं। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय (आगरा) और बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह (अलीगढ़) के गृह जिलों का दायरा आने से भाजपा के लिए यह सीट प्रतिष्ठा की बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की दोनों सीटों (शिक्षक और स्नातक) पर 2020 के चुनाव में सपा ने कब्जा जमाया था। इस बार भाजपा के सामने सपा से ये दोनों सीटें छीनने की चुनौती है। सपा ने MLC आशुतोष सिन्हा को फिर से उतारा है, जबकि भाजपा ने अपने पुराने चेहरे केदारनाथ सिंह पर ही दांव खेला है। 2020 में केदारनाथ सिंह मात्र 3,850 वोटों से आशुतोष सिन्हा से चुनाव हारे थे। मुख्यमंत्री योगी खुद दोनों सीटों के प्रबंधन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। 6 मंत्रियों और 30 से ज्यादा विधायकों को प्रचार में लगाया गया है। सपा ने अपने पुराने MLC लालबिहारी यादव पर दोबारा भरोसा जताया है। भाजपा ने उनके मुकाबले नए चेहरे डॉ. प्रमोद मिश्रा को उतारा है। 2020 में भाजपा ने यहां अपना आधिकारिक प्रत्याशी न उतारकर निर्दलीय चेतनारायण सिंह को समर्थन दिया था, जो तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार पार्टी ने अपना अधिकृत उम्मीदवार खड़ा किया है। इलाहाबाद-झांसी स्नातक क्षेत्र प्रयागराज, कौशांबी से लेकर बुंदेलखंड के फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, जालौन, झांसी और ललितपुर जिलों तक फैला है। यहां 13 उम्मीदवार मैदान में हैं और 2 लाख 64 हजार 233 वोटर हैं। सपा ने MLC मानसिंह यादव को फिर से टिकट दिया है। उन्होंने 2020 में भाजपा के दिग्गज यज्ञदत्त शर्मा को शिकस्त दी थी। भाजपा ने इस बार नए चेहरे अशोक सिंह राठौर को मैदान में उतारा है। यहां भाजपा ने अपने प्रदेश मंत्री अनिल यादव को चुनाव प्रभारी बनाकर घेराबंदी की है। बरेली-मुरादाबाद शिक्षक खंड में 47 हजार 701 शिक्षक मतदाता 17 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। भाजपा के हरि सिंह ढिल्लो का सीधा मुकाबला सपा के दानिश अख्तर से है। इस सीट पर लगभग 4000 मुस्लिम शिक्षक मतदाता हैं। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने खुद यहां कमान संभाली है। मुख्यमंत्री योगी ने भी जनसभा की है। पार्टी यहां मतों के एकमुश्त ध्रुवीकरण के भरोसे अपनी जीत की उम्मीद लगाए है। मेरठ-सहारनपुर खंड की दोनों शिक्षक और स्नातक सीटों पर भाजपा और सपा के प्रत्याशियों के बीच टक्कर है। वैश्य और कैडर वोटबैंक व पिछले कार्यकाल के प्रभाव के चलते दोनों सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों का माहौल मजबूत माना जा रहा है। भाजपा ने दिनेश गोयल को प्रत्याशी बनाया है। वो वर्तमान MLC हैं। सपा ने प्रमेन्द्र सिंह भाटी पर दांव खेला है। वैश्य समुदाय से आने वाले दिनेश गोयल 2020 में MLC बने थे। भाजपा का शहरी, वैश्य व पारंपरिक वोटबैंक और गाजियाबाद, नोएडा व मेरठ के संगठनात्मक नेटवर्क पर मजबूत प्रभाव है। वहीं, सपा ने पिछड़े वर्ग से ग्रामीण और युवा स्नातकों को अपने पक्ष में करने की रणनीति बनाई है। हालांकि, वैश्य और शहरी स्नातकों में गहरी पैठ के कारण भाजपा का पलड़ा भारी माना जा रहा है। भाजपा ने MLC श्रीचंद शर्मा को दोबारा कैंडिडेट बनाया है। उनके सामने सपा प्रत्याशी नितिन कुमार तोमर हैं। श्रीचंद शर्मा ने 2020 में ओमप्रकाश शर्मा गुट का दशकों पुराना वर्चस्व तोड़कर जीत हासिल की थी। वित्तविहीन और माध्यमिक शिक्षकों पर उनकी सीधी पकड़ है। वहीं, सपा प्रत्याशी पुरानी पेंशन योजना और शिक्षकों के मानदेय को मुख्य मुद्दा बनाकर मैदान में है। लेकिन, अपने कार्यकाल के काम और शिक्षक संघों के कैडर के दम पर श्रीचंद शर्मा (भाजपा) बढ़त में दिख रहे हैं। कुल वोटर 14.28 लाख, 11.85 लाख सिर्फ स्नातक खंड के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 72 जिलों के 14.81 लाख पढ़े-लिखे वोटर यूपी में सियासी हवा का रुख बताने वाले हैं। शिक्षक खंड की 6 और स्नातक खंड की 5, कुल 11 सीटों पर आज वोटिंग हो रही है। चुनाव मैदान में 152 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। कुल 2697 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इस चुनाव में स्नातक और शिक्षक क्षेत्र के मतदाताओं की संख्या और प्रत्याशियों की स्थिति में बड़ा अंतर है- हवा का रुख- 72 जिलों से दिखेगा पढ़े-लिखे वर्ग के मिजाज किस तरफ है… राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि MLC चुनाव सीधे तौर पर यूपी की राजनीति की हवा तय करने वाले हैं। वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय कहते हैं- उत्तर प्रदेश के 75 में से 72 जिलों के मतदाता इस चुनाव प्रक्रिया से सीधे जुड़े हैं। सिर्फ कानपुर, कानपुर देहात और उन्नाव की सीटों पर बाद में चुनाव होने हैं। शिक्षक और स्नातक वर्ग का मतदाता जागरूक माना जाता है। यह स्थानीय मुद्दों, सरकारी नीतियों, रोजगार, शिक्षा और प्रशासनिक रवैये को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है। हालांकि, विधानसभा चुनाव के संदर्भ में कुल मतदाता का 1% हिस्सा ही इस चुनाव में भाग लेता है। लेकिन, नतीजे संकेत देंगे कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पढ़े-लिखे समाज का झुकाव किसकी तरफ रहने वाला है। वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय कहते हैं- भाजपा ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े लगातार सक्रिय रहे। ——————————– यह खबर भी पढ़ें… 13 हजार वोटर्स की धांधली पकड़ने वाला कांग्रेसी कौन, पहला क्लू साइबर कैफे से मिला, 3.48 लाख रिकॉर्ड खंगाले पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में 13 हजार 150 वोटरों के नाम बदलने का आरोप लगाकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि वोटर का EPIC नंबर, उम्र और लिंग वही है, लेकिन नाम और पिता का नाम बदल गया। सभी 13,150 मतदाता मुस्लिम हैं। पूरी खबर पढ़ें…